डेटा सेंटर्स पर ट्रंप का बड़ा दांव, लेकिन अमेरिका में बढ़ रहा विरोध

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते दौर के सबसे विवादित पहलुओं में से एक का समर्थन किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो समुदाय डेटा सेंटर्स को नहीं अपनाएंगे, वे पिछड़े और गरीब रह जाएंगे। इस बयान से उनके अपने MAGA समर्थकों का समर्थन खोने का जोखिम भी हो सकता है।

पूरे देश में बहुत ज्यादा संसाधनों की खपत करने वाले सर्वर फार्म्स (डेटा सेंटर्स) का विरोध बढ़ रहा है। इसकी गूंज अब भारत में भी सुनाई दे रही है। ऐसे में ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने तर्क दिया कि डेटा सेंटर्स को अपनाने का मतलब है नौकरियां, कम टैक्स और खुशहाली।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने पोस्ट किया, “पूरे अमेरिका में कम्युनिटीज को डेटा सेंटर इसलिए नहीं चाहिए, अगर वे पिछड़ी और गरीब बनी रहना चाहती हैं। अगर वे सफल और अमीर बनना चाहती हैं, कम टैक्स और हर जगह नौकरियां चाहती हैं तो डेटा सेंटर को आने दें।”

उन्होंने आगे कहा, “अच्छी बात यह है कि कई दूसरी जगहें हैं जो इन्हें चाहती हैं। अगर हम सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को ही खत्म कर देंगे तो इसके लिए सिर्फ हम खुद ही जिम्मेदार होंगे। डेटा सेंटर के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन से चीन सबसे ज्यादा खुश होगा।”

अमेरिका कर रहा विरोधाभास का सामना

ट्रंप का दखल ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका एक अजीब विरोधाभास का सामना कर रहा है। देश एआई के लिए जरूरी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और चीन से आगे निकलने की होड़ में लगा है, जबकि उसी इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ लोगों का विरोध एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनता जा रहा है।

यह लड़ाई अब जोनिंग से जुड़ा कोई छोटा-मोटा विवाद नहीं रह गया है बल्कि यह इस बारे में है कि एआई का खर्च कौन उठाएगा, इसके फायदे किसे मिलेंगे और इसके पर्यावरण और समाज पर पड़ने वाले असर की कीमत कौन चुकाएगा।

अमेरिका में अभी सैकड़ों डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, अगले दशक में 3,000 से ज्यादा सेंटर काम करने लगेंगे। फ्रंटियर एआई मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है, जिससे डेटा सेंटर पारंपरिक ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर के बजाय ज्यादा बिजली की खपत करने वाले इंडस्ट्रियल प्लांट जैसे बन जाते हैं।

रोके गए कई प्रोजेक्ट्स

जहां इंडस्ट्री का मानना है कि डेटा सेंटर एआई इकॉनमी की रीढ़ हैं, वहीं विरोध करने वालों का सवाल है कि क्या इन्हें बनाने के लिए नागरिकों को पानी, बिजली, जमीन और टैक्स से मिलने वाले रेवेन्यू जैसी सीमित चीजें देनी चाहिए। अब पूरे देश में डेटा सेंटरों का विरोध बढ़ रहा है।

डेटा सेंटर वॉच के अनुसार, सिर्फ 2026 की पहली तिमाही में ही लगभग 130 अरब डॉलर की लागत वाले कम से कम 75 प्रोजेक्ट्स या तो रोक दिए गए या उनमें देरी हुई। अगस्त में यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया एनेनबर्ग के एक सर्वे में पाया गया कि 61 प्रतिशत अमेरिकी अपने इलाकों में नए डेटा सेंटरों के खिलाफ थे, जबकि चार महीने पहले यह आंकड़ा 49 प्रतिशत था।

भारत में भी हो रहा विरोध

भारत में भी ऐसा ही विरोध देखने को मिल रहा है। ठाणे और विशाखापत्तनम में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। विशाखापत्तनम में गूगल ने अडानी ग्रुप के साथ मिलकर 15 अरब डॉलर का एआई डेटा-सेंटर हब बनाने की योजना बनाई है।

शिकायतें काफी हद तक एक जैसी हैं- बिजली के ज्यादा बिल, पानी की खपत, शोर, हवा का प्रदूषण, डीजल बैकअप जनरेटर, खेती की जमीन का नुकसान, टैक्स में छूट, ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव और स्थानीय नियंत्रण की कमी का डर।

अमेरिका में कहां हो रहा विरोध

अमेरिका में सबसे ज्यादा विरोध वर्जीनिया में हो रहा है। ये वॉशिंगटन डीसी के पास है और इसे अमेरिका का पारंपरिक डेटा सेंटर एली (डेटा सेंटरों का गढ़) माना जाता है। स्थानीय स्तर पर हो रहा यह विरोध राजनीतिक दलों की सीमाओं से परे है। राजनीतिक रूप से अलग-अलग विचारधारा रखने वाले निवासी गोपनीयता, टैक्स में छूट, पर्यावरण पर असर और स्थानीय नियंत्रण खोने जैसी बातों पर आपत्ति जता रहे हैं।

UPenn के सर्वे से पता चलता है कि यह विरोध दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लोगों की तरफ से है। डेमोक्रेट्स में 69 प्रतिशत, निर्दलीय लोगों में 53 प्रतिशत और रिपब्लिकन में 54 प्रतिशत लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसलिए, ट्रंप के दखल ने उन्हें उनके अपने ही राजनीतिक समर्थकों के कुछ हिस्सों के साथ मतभेद की स्थिति में ला खड़ा किया है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com