हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व बताया गया है। इस व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत पितृ दोष शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए भी रखा जाता है। हिंदू द्रिक पंचांग के आधार पर जुलाई 2026 में दो प्रदोष व्रत आएंगे और दोनों ही रविवार के दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में इन्हें रवि प्रदोष कहा जाएगा। चलिए इन दोनों व्रतों की सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त आपको बाताते हैं।
आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026
इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 12 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसे में शिव और सूर्य का संयोग बहुत ही शुभ माना गाया है। इस दिन भक्त व्रत रखकर इन दोनों का ही आशीर्वाद पा सकते हैं। साथ ही इस संयोग से जीवन में मान-सम्मान बढ़ता है और दीर्घ आयु मिलती है।
आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत एंव पूजा का मुहूर्त
12 जुलाई 2026 को प्रात: 2 बजकर 4 मिनट पर त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा और रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम 7 बजकर 22 मिनेट से लेकर रात्रि 9 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 26 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। आषाढ़ में पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से, सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक शास्त्रों के आधार पर यह वो समय होता है, जब भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत एंव पूजा का मुहूर्त
26 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी और 27 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर तिथि समाप्त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा 26 जुलाई को शाम 7 बजकर 16 मिनट से लेकर रात्रि 9 बजे से लेकर 21 मिनट तक की जा सकती है।
आषाढ़ माह में पड़ने वाले रवि प्रदोष का महत्व
आषाढ़ माह में पड़ने वाले रिव प्रदोष का व्रत रखने से भक्त निरोग रहता है और समाज में उसका यश भी बढ़ता है। साथ ही भगवान शिव और सूर्य देव की विशेष कृपा भी प्रप्ता होती है।
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