सनातन धर्म में चरणामृत को भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। इसका अर्थ है कि भगवान के चरणों का अमृत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चरणामृत का सेवन करने से साधक को सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही प्रभु की कृपा बनी रहती है।
अक्सर लोग चरणामृत लेते समय कई तरह की गलतियां कर देते हैं, जिसकी वजह से उन्हें अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और प्रभु नाराज हो सकते हैं। इसलिए कहा जाता है कि चरणामृत को लेने से पहले इससे जुड़े नियम के बारे में जान लें। क्या आपको पता है चरणामृत लेने का सही तरीका क्या है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
क्या है चरणामृत लेने का सही तरीका?
चरणामृत को लेते समय कई बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चरणामृत को हमेशा दाएं हाथ से लेना शुभ माना जाता है। एक बात का ध्यान रखें कि चरणामृत भूलकर भी नहीं नहीं गिरना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि चरणामृत जमीन पर गिरने से प्रभु का अपमान होता है।
चरणामृत के बाद क्या करें?
कई लोग चरणामृत को ग्रहण करने के बाद अपने सिर पर हाथ फेरे लेते हैं। शास्त्रों में इस काम को करने की मनाही है। जूठे हाथ सिर पर लगाने से नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए चरणामृत को ग्रहण करने के बाद अपने सिर पर हाथ फेरने से बचना चाहिए।
दाएं हाथ से क्यों लेना चाहिए चरणामृत?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुभ और मांगलिक काम को करने के लिए दाएं हाथ को शुभ माना जाता है। पूजा-पाठ को भी दाएं हाथ से ही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस हाथ से शुभ काम को करने से कोई बाधा नहीं आती है।
धार्मिक मान्यता है कि दाएं हाथ की हथेली में देवी-देवताओं का वास होता है। इसी वजह से चरणामृत या फिर प्रसद को दाएं हाथ से लेना शुभ माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बाएं हाथ से चरणामृत लेना अशुभ माना जाता है।
चरणामृत पीने के धार्मिक लाभ
चरणामृत को ग्रहण करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और मन में अच्छे विचार आते हैं। साथ ही देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
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