गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी समेत इन 4 दिनों में बन रहे हैं बेहद शुभ संयोग

हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में मुंडन भी पवित्र संस्कारों में से एक है। इस संस्कार को चौल मुंडन, जदुला, चूरा कर्म या चौल कर्म संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। 16 पवित्र संस्कारों में मुंडन संस्कार का आठवां स्थान है और यह बच्चे के सिर को पहली बार मुंडवाने के लिए किया जाता है।

जून में मलमास होने के कारण कई लोग मुंडन के मुहूर्त को लेकर कन्फ्यूज हैं, आइए जानते हैं मुंडन की सही तारीख एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा से।

हिंदू धर्म में मुंडन संस्कार का महत्व
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, हिंदू सनातन संस्कृति में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें मुंडन संस्कार (चूड़ाकर्म) अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, गर्भ के बालों को हटाने से बच्चे का जुड़ाव पिछले जन्म के कर्मों से मुक्त होता है और उसका बौद्धिक, मानसिक तथा शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। चूंकि यह संस्कार सीधे बच्चे के स्वास्थ्य और बुद्धि से जुड़ा है, इसलिए इसे सही और शुभ मुहूर्त में करना अनिवार्य माना गया है।

इस वर्ष जून के महीने में ग्रहों की विशेष स्थिति और पावन तिथियों के कारण मुंडन संस्कार के लिए चार बेहद शुभ और श्रेष्ठ मुहूर्त बन रहे हैं, जो इस प्रकार हैं:

17 जून (पहला मुहूर्त)
जून महीने का पहला उत्तम मुहूर्त 17 जून को बन रहा है। इस दिन बुद्धि के दाता बुध, पुनर्वसु नक्षत्र में रहेंगे, जो मुंडन जैसे मांगलिक कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, इस दिन धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र ‘रंभा तीज’ का व्रत है और आकाश मंडल में गज योग का निर्माण हो रहा है। इस शुभ योग में बच्चे का मुंडन कराने से उसकी बुद्धि कुशाग्र होती है और उसे दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।

22 जून (दूसरा मुहूर्त)
दूसरा सुंदर मुहूर्त 22 जून को आ रहा है। इस दिन मन के कारक चंद्रमा अपने स्वयं के नक्षत्र यानी ‘हस्त नक्षत्र’ में गोचर करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में हस्त नक्षत्र को एक अत्यंत शुभ, सौम्य और शीघ्र फल देने वाला नक्षत्र माना गया है। चूड़ाकर्म संस्कार के लिए चंद्रमा की बलवान स्थिति और हस्त नक्षत्र का यह संयोग बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और शांत स्वभाव के लिए सर्वश्रेष्ठ फलदायी सिद्ध होगा।

24 जून (तीसरा मुहूर्त)
तीसरा महामुहूर्त 24 जून को पड़ रहा है। इस दिन पावन ‘गंगा दशहरा’ का महापर्व है, जो अपने आप में ही एक स्वतः सिद्ध और अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बुध और चित्रा नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है। गंगा दशहरा के पावन दिन मां गंगा के आशीर्वाद से बच्चे के सभी पूर्व जन्म के दोष समाप्त होते हैं और चित्रा नक्षत्र उसके जीवन में तेज और आकर्षण लेकर आता है।

25 जून (चौथा मुहूर्त)
चौथा और अंतिम विशेष मुहूर्त 25 जून को है। इस दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति का दिन है और चंद्रमा तुला राशि में गोचर कर रहे होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस दिन सनातन धर्म की सबसे बड़ी एकादशी, यानी ‘निर्जला एकादशी’ का महाव्रत है। गुरुवार, तुला का चंद्रमा और एकादशी तिथि का यह त्रिवेणी संगम बच्चे के जीवन में सौभाग्य, आरोग्यता और ऐश्वर्य की वृद्धि करने वाला है।

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