क्या है यूरेनियम डस्ट, जिसे अमेरिका ईरान से हटाना चाहता है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपना यूरेनियम डस्ट यानि परमाणु अवशेष अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। आइये जानते हैं क्या है यूरेनियम डस्ट, इसे कब सौंफ्ना पड़ता है और इसे कैसे रखा जाता है।

क्या है यूरेनियम डस्ट

यूरेनियम डस्ट आमतौर पर 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को कहते हैं। प्राकृतिक यूरेनियम को ट्रीट करके इसे तैयार किया जाता है। प्राकृतिक यूरेनियम में करीब 99 प्रतिशत यू-238 और करीब 0.7 प्रतिशत यू-235 होता है। जब इसे संवर्धित किया जाता है तो इसमें यू-235 की मात्रा बढ़ाई जाती है। आइएई के अनुसार, यूरेनियम परमाणु ईंधन का मुख्य स्रोत है। ये रेडियोधर्मी तत्व है इसलिए इसे ईरान द्वारा सौंपने की बात हो रही है। इस यूरेनियम को किसी तीसरे देश को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देना होता है।

ईरान के पास हैं 400 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम

जून में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने से पहले माना जाता था कि ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम है। करीब 200 किलोग्राम 20 प्रतिशत विखंडनीय पदार्थ था, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत हथियार-ग्रेड यूरेनियम में परिवर्तित किया जा सकता है। वहीं ईरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन का उस का उद्देश्य बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा है, न कि परमाणु हथियार।

हमले में नष्ट नहीं हुआ यूरेनियम

ऐसा माना जाता है कि ईरान के यूरेनियम भंडार का अधिकांश हिस्सा एक पहाड़ी के मलबे के नीचे दबा हुआ है। इसे अमेरिकी हमले में नष्ट कर दिया गया था, जिसके बारे में दावा किया गया था कि इसने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रासी के अनुसार, ईरान की परमाणु साम्ग्री मुख्य रूप से उन तीन स्थलों में दो पर रखी है, जिन पर अमेरिका ने हमला किया था। इस्फहान में परमाणु परिसर में एक भूमिगत सुरंग और नतांज में एक स्टोर में। दावा किया गया है कि ईरानियों के पास यूरेनियम संवर्धन के लिए सेंट्रीफ्यूज हैं और एक नया भूमिगत संवर्धन स्थल स्थापित करने की क्षमता भी है।

ऐसे रखा जाता है संवर्धित यूरेनियम

इस संवर्धित यूरेनियम को सामान्य तौर पर धातु, आक्साइड पाउडर, या यूएफ 6 गैस जैसे रूपों में रखा जाता है। संवर्धन के बाद इसे अक्सर ठोस आक्साइड या सील किए गए कंटेनरों में सुरक्षित रखा जाता है। इसे सीलबंद परिसर में आइएईए जैसी संस्था की निगरानी में रखा जाता है। इसमें विकिरण का खतरा काफी अधिक होता है, इसलिए इसे साधारण धातु या पाउडर की तरह नहीं रखा जा सकता।

पहले भी दूसरे देशों को यूरेनियम सौंप चुका है ईरान

ईरान ने अपने परमाणु समझौतों की शर्तों को पूरा करने के लिए कई बार अपने यूरेनियम भंडार, जिसमें यूरेनियम डस्ट या येलोकेक और संवर्धित यूरेनियम शामिल हैं, उन्हें रूस और ओमान जैसे देशों को सौंपा है।

पाबंदी की वजह से दूसरे देशों को सौंपना पड़ा था यूरेनियम

2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान पर यह पाबंदी थी कि वह एक निश्चित सीमा से अधिक संवर्धित यूरेनियम अपने पास नहीं रख सकता। इस सीमा को बनाए रखने के लिए ईरान ने अपना कई टन कम संवर्धित यूरेनियम रूस को भेजा था। इसके बदले में रूस ने ईरान को प्राकृतिक यूरेनियम दिया, जिसका उपयोग ईरान अपने असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए कर सकता था।

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