कानपुर किडनी कांड: ‘डॉक्टर’ बना कर्मचारी करता था खेल, नौ नर्सिंग होम में 50 से अधिक ट्रांसप्लांट

कानपुर शहर के नौ नर्सिंग होम में पिछले दो साल में 50 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने आहूजा हॉस्पिटल में खेल का राजफाश किया, जबकि नौ नर्सिंगहोम की जांच शुरू की गई है। इन नर्सिंगहोम में आठ कानपुर और एक लखनऊ का नामी निजी अस्पताल शामिल है। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के डोनर, दलाल और सर्जन की तलाश में रवाना हो गई हैं।

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक आहूजा अस्पताल का कर्मचारी शिवम अग्रवाल कई नर्सिंगहोम से जुड़ा था। वह खुद को डॉक्टर बताता था। उसकी कल्याणपुर के नर्सिंगहोम, मेडिकल स्टोर और सर्जिकल स्टोर में अच्छी खासी पकड़ थी। उसी का फायदा उठाकर उसने दिल्ली, नोएडा और मेरठ के किडनी ट्रांसप्लांट के खेल से जुड़े दलालों व डॉक्टरों से संपर्क कर लिया।

रविवार देर रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया
अब तक मिली जानकारी के अनुसार वह ही मरीजों और डोनरों को लेकर आता था। यह कार्य इतने गुप्त तरीके से होता था कि किसी को भी भनक नहीं लग पाती थी। सोमवार को पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो उसने आहूजा अस्पताल में सात किडनी ट्रांसप्लांट की बात कबूली। आहूजा हॉस्पिटल में भी रविवार देर रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। उससे पूछताछ में पता चला कि शहर में कुछ अन्य दलाल शामिल हैं, जो कि दूसरे नर्सिंगहोम में ट्रांसप्लांट कराते हैं।

रावतपुर, किदवईनगर, बर्रा के नर्सिंगहोम की जांच
सूत्रों के मुताबिक रावतपुर, किदवईनगर, बर्रा, नौबस्ता, सिविल लाइंस, काकादेव क्षेत्र के बड़े नर्सिंगहोम पुलिस के रडार पर हैं। एक नर्सिंगहोम लखनऊ का भी बताया जा रहा है जहां अनधिकृत ट्रांसप्लांट किया गया है। इन बड़े नर्सिंगहोम के साथ ही आसपास के छोटे नर्सिंगहोम के नाम भी सामने आ रहे हैं। पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को कुछ नाम पता चल गए हैं लेकिन कार्रवाई से पूर्व उनके खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई से पूर्व नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए के पदाधिकारियों से भी बातचीत की जा रही है।

आईएमए उपाध्यक्ष, उसके पति व तीन अस्पताल संचालकों समेत छह गिरफ्तार
अवैध रूप से किडनी की खरीद फरोख्त कर ट्रांसप्लांट करने वाले रैकेट में शामिल आईएमए कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति डॉ. सुरजीत एवं तीन अस्पताल के संचालक, दलाल समेत छह लोग को पुलिस ने गिरफ्तार कर मंगलवार को जेल भेज दिया। पुलिस ने 15 आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धारा में रिपोर्ट दर्ज की है। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में मेडलाइफ हॉस्पिटल के संचालक राजेश कुशवाहा, प्रिया हॉस्पिटल के संचालक नरेंद्र सिंह, आरोही हॉस्पिटल संचालक राम प्रकाश कुशवाहा और दलाल शिवम अग्रवाल शामिल हैं।

किडनी देने वाला युवक बिहार का रहने वाला आयुष है
गिरोह के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़ रहे हैं। किडनी रैकेट का खुलासा करते हुए मंगलवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि रावतपुर थाने के दरोगा को किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिली थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने आरोपी डॉक्टर दंपती के केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, कल्याणपुर आवास विकास-एक नंबर स्थित प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, पनकी-कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल में छापा मारा। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि किडनी देने वाला युवक मूलरूप से बिहार का रहने वाला आयुष है। किडनी लेने वाली मरीज मेरठ की पारुल तोमर हैं। किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आहूजा हॉस्पिटल में हुई थी।

टेलीग्राम के जरिये रहते थे संपर्क में, एक करोड़ तक में बेचते थे किडनी
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ट्रांसप्लांट करने वाले डॉ. रोहित, मरीज पारुल से संपर्क करने वाले नोएडा के अफजाल, वैभव और अनुराग की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि अफजाल और अन्य आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में हैं। आरोपी जरूरतमंदों को पैसों का लालच देकर पांच से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदते थे। उसे अमीर परिवार के मरीजों को 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेच देते थे। दिल्ली एनसीआर के कुछ डॉक्टर भी गिरोह में शामिल है। उनकी गिरफ्तारी लिए पुलिस टीमें रवाना हो गई हैं।

10 लाख में किडनी खरीदी, 90 लाख में बेची
दलाल शिवम अग्रवाल ने दस लाख रुपयों में बिहार निवासी एमबीए छात्र आयुष को किडनी बेचने का ऑफर दिया था। सौदा तय होने के बाद आयुष की किडनी आहुजा हॉस्पिटल में निकाली गई। गिरोह ने इसी अस्पताल में भर्ती महिला पारुल के परिजन को 90 लाख रुपये में किडनी बेची थी। बताया जा रहा है कि आयुष को शिवम ने 9.5 लाख रुपये ही दिए थे। शेष रकम मांगने पर शिवम टालमटोल करने लगा। इस पर आयुष ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस जांच के बाद पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।

महिला मरीज की जान खतरे में
अनधिकृत तरीके से किडनी प्रत्यारोपण की रोगी पारुल तोमर (43) की जान खतरे में है। उसे हैलेट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पोस्ट ऑपरेटिव आइसोलेशन कक्ष में रखा गया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने रोगी की स्थिति को देखते हुए एसजीपीजीआई रेफर करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण के रोगी के इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। वहीं, रोगी का क्या इलाज चला। क्या दवाएं दी गईं।

एसजीपीजीआई शिफ्ट कराने के लिए सीएमओ को लिखा पत्र
इस संबंध में भी कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रत्यारोपित किडनी पेशाब नहीं बना पा रही है। ब्लड प्रेशर हाई है और बढ़-घट रहा है। संक्रमण बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों को यह भी आशंका है कि प्रत्यारोपण के बाद किडनी रिजेक्शन भी हो सकता है जो किडनी प्रत्यारोपित की गई है वह काम नहीं कर रही है। रोगी को किडनी देने वाले आयुष चौधरी (24) को हैलेट के यूरो सर्जन डॉ. अनिल जे. वैद्य के अंडर में भर्ती किया गया है। आयुष की स्थिति ठीक बताई जा रही है।

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