कजरी तीज, जिसे कजली तीज या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है, सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और संतान की खुशहाली की कामना करती हैं निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में चंद्रदेव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है।
कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों देते हैं?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा के अनुसार, शास्त्रों में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। चंद्रदेव शीतलता, सौंदर्य और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं। इसलिए कजरी तीज के दिन चंद्रमा की पूजा करने से मन को शांति और सकारात्मकत ऊर्जा प्राप्त होती है।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय नीमड़ी माता की पूजा करने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
दांपत्य जीवन में आती है मधुरता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कजरी तीज पर चंद्रदेव को जल अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है। चंद्रमा मन और भावनाओं के कारक माने जाते हैं, इसलिए उनकी पूजा पति-पत्नी के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने वाली मानी जाती है।
मान्यता है कि चंद्रदेव की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन से जुड़े तनाव कम होते हैं। इसी वजह से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि
कजरी तीज के दिन रात में चंद्रमा के दर्शन होने के बाद एक लोटे में स्वच्छ जल लें। इसमें थोड़ा कच्चा दूध, रोली, अक्षत और दूर्वा मिलाई जा सकती है। इसके बाद चंद्रमा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
अर्घ्य देते समय चंद्रदेव का ध्यान करें और अपनी मनोकामना कहें। इसके बाद चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें और पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन तथा परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करें।
अत: अलग-अलग जगह पर इस पर्व को लेकर अलग रिवाज होते हैं। यदि आप भी चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, तो ऊपर बताई गई विधि को ध्यान में रखें।
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