उत्तराखंड विद्युत विनियामक आयोग (यूईआरसी) में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों के निर्धारण को लेकर जनसुनवाई हुई। करीब ढाई घंटे चली बैठक में किसानों, उद्योग संगठनों, लघु उद्यमियों और उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी का विरोध किया।
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने पक्ष रखते हुए बताया कि पिछले सालों के घाटे की भरपाई के लिए अपेक्षित टैरिफ वृद्धि जरूरी है, लेकिन जनता के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। अब यूइसारसी सभी हितधारकों व ऊर्जा निगमों की जरूरत का ध्यान रखते हुए टैरिफ निर्धारण करेगा।
बिजली खरीद पर सर्वाधिक 9067.16 करोड़ खर्च होंगे : यूपीसीएल ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 में कुल एग्रीगेट राजस्व आवश्यकता 14,585.04 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि मौजूदा दरों से 12,548.05 करोड़ रुपये की ही आय अनुमानित है। यूपीसीएल ने बताया कि राज्य में बिजली खरीद पर सबसे बड़ा खर्च 9067.16 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। आपरेशन एवं मेंटेनेंस पर 1,221.50 करोड़ और स्मार्ट मीटरिंग पर 327.72 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कंपनी ने वितरण हानि 12.25 प्रतिशत रहने का लक्ष्य रखा है।
बीपीएल कनेक्शन पर होगी अधिकतम पांच प्रतिशत वृद्धि : ऊर्जा निगम के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी के बीच राहत देने का प्रयास भी किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार बीपीएल और लाइफलाइन उपभोक्ताओं पर अधिकतम पांच प्रतिशत ऊर्जा शुल्क बढ़ाने की बात की गई है, जबकि उनके फिक्स्ड चार्ज में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। निजी ट्यूबवेल उपभोक्ताओं और ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए बढ़ोतरी पांच प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रस्ताव किया गया है।
कम खपत वाले समय में सस्ती मिलेगी बिजली : जनसुनवाई में ऊर्जा निगम ने कहा, प्रस्ताव में एलटी औद्योगिक उपभोक्ताओं के डिमांड चार्ज में कोई वृद्धि नहीं की गई है। उद्योगों के लिए टाइम आफ डे टैरिफ व्यवस्था जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे आफ पीक समय में उद्योगों को कम दरों पर बिजली मिल सकेगी। इससे उद्योग अपने उत्पादन समय में बदलाव कर कुछ राहत पा सकेंगे। इसके अलावा प्रीपेड मीटरिंग योजना जारी रहेगी और सभी श्रेणियों को ग्रीन पावर टैरिफ का विकल्प मिलेगा। कृषि को छोड़कर अन्य श्रेणियों में स्मार्ट मीटर के आधार पर समयानुसार दरें लागू करने की तैयारी है, जिससे उपभोक्ता कम खपत वाले समय में सस्ती बिजली का लाभ ले सकेंगे। कुल मिलाकर बढ़ोतरी के प्रस्ताव के साथ कुछ वर्गों को सीमित राहत और विकल्प देने की कोशिश भी की गई है।
किसानों ने कहा- सिंचाई सस्ती हो
भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने कहा कि बिजली दरों में वृद्धि से सिंचाई महंगी होगी और उत्पादन लागत बढ़ेगी। उन्होंने कृषि श्रेणी को राहत देने की मांग की।
उद्यमियों ने किया क्रास सब्सिडी का किया विरोध
उद्यमी पंकज गुप्ता, राजीव अग्रवाल व अन्य ने कहा कि औद्योगिक उपभोक्ताओं पर अधिक भार डालकर अन्य श्रेणियों को राहत देना उचित नहीं है। उनका कहना था कि इससे निवेश और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। राहुल ने कहा कि एमएसएमइ सेक्टर को बिजली दरों में राहत दी जाए। होटल व फूड सेक्टर से जुड़े उद्यमियों ने कहा कि यह सीजनल काम हैं, इनके लिए अलग टैरिफ लागू किया जाए।
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