उत्तर कोरिया ने AI-गाइडेड मिसाइलों का किया परीक्षण

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए आधुनिक युद्ध तकनीक से लैस मिसाइलों और रॉकेटों का बड़ा परीक्षण किया है। सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की निगरानी में टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों, लंबी दूरी के आर्टिलरी रॉकेटों और AI-गाइडेड सटीक क्रूज मिसाइलों का संयुक्त परीक्षण किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया लगातार अपने टैक्टिकल और पारंपरिक हथियारों के जखीरे को आधुनिक बना रहा है। साथ ही उसने दक्षिण कोरिया के साथ सीमा के पास इन हथियारों को तैनात करने का भी संकल्प लिया है। उत्तर कोरिया पहले से ही लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु हथियारों की क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा हुआ है।

AI-गाइडेड टैक्टिकल क्रूज मिसाइलों का सफल परीक्षण

KCNA ने बताया कि इस परीक्षण के दौरान टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों पर लगे विशेष मिशन वॉरहेड की क्षमता, लंबी दूरी के मल्टीपल-लॉन्च आर्टिलरी रॉकेटों की विश्वसनीयता और AI-गाइडेड टैक्टिकल क्रूज मिसाइलों की सटीकता का मूल्यांकन किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि किम जोंग उन ने परीक्षण के बाद दावा किया कि हथियारों और स्वचालित लॉन्च प्रणालियों को सफलतापूर्वक अपग्रेड किया गया है ताकि वे आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों के अनुरूप काम कर सकें और युद्ध के दौरान उनकी उपयोगिता बढ़ाई जा सके।

किम ने विशेष रूप से उन AI-गाइडेड क्रूज मिसाइलों का जिक्र किया जिन्हें दक्षिण कोरिया के साथ सीमा के पास आर्टिलरी इकाइयों में तैनात किया जाएगा। उत्तर कोरिया का दावा है कि ये मिसाइलें सटीक नेविगेशन और AI आधारित नियंत्रण प्रणाली से लैस हैं और 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को सटीक तरीके से निशाना बना सकती हैं।

क्रूज मिसाइलें 100 किमी दूर तक साध सकती हैं निशाना

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल, उत्तर कोरिया के साथ स्थित विसैन्यीकृत क्षेत्र (Demilitarized Zone) से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में आती है। उत्तर कोरिया पहले ही दक्षिण को अपना प्राथमिक शत्रु घोषित कर चुका है और दोनों देशों के फिर से एकीकरण की नीति को खारिज कर चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहली बार है जब उत्तर कोरिया ने सार्वजनिक रूप से मिसाइल प्रणाली में AI तकनीक के इस्तेमाल का खुलकर उल्लेख किया है।

विश्लेषकों के मुताबिक यह तकनीक वास्तविक समय के डेटा का उपयोग करके लक्ष्य की पहचान करती है, उसका डिजिटल मानचित्र तैयार करती है और फिर मिसाइल को लक्ष्य पर लॉक कर देती है।

रूस को बैलिस्टिक मिसाइलें देने का दावा 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया 2023 के अंत से रूस को बैलिस्टिक मिसाइलें और आर्टिलरी रॉकेटों की आपूर्ति कर रहा है। इन हथियारों का इस्तेमाल रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में किया जा रहा है।

माना जा रहा है कि युद्ध के मैदान में इन हथियारों के इस्तेमाल से प्योंगयांग को अपने शस्त्रागार को और आधुनिक बनाने के लिए अहम अनुभव और तकनीकी जानकारी मिल रही है।

इस बीच दक्षिण कोरिया की सेना ने मंगलवार को बताया कि उसने उत्तर कोरिया की ओर से कई प्रोजेक्टाइल लॉन्च होते देखे, जिनमें एक बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

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