पुलिस चौकी के शौचालय को तोड़कर मुख्य लीकेज को ठीक करने का दावा करने वाले नगर निगम के अफसर अभी भी भागीरथपुरा बस्ती को साफ पानी नहीं दे पाए हैं। दरअसल बस्ती की ज्यादातर लाइनें बरसों पुरानी होने के कारण जर्जर हो चुकी हैं और उनमें गंदे पानी का रिसाव होता है। पूरी बस्ती की 20 किलोमीटर नर्मदा लाइन बदलने का काम दो माह में होगा। फिलहाल मुख्य मार्ग पर लाइन बिछाई गई है, लेकिन टेस्टिंग के दौरान वह भी कुछ जगहों से फूट गई। बस्ती के एक हिस्से में दो-तीन दिनों में सप्लाई हो जाएगी।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खुद स्वीकार कर चुके हैं कि बस्ती में नई लाइन बिछाने के प्रस्ताव मंजूरी के लिए नगर निगम भेजे जा चुके थे, लेकिन काम शुरू करने में देरी हुई। नतीजा यह हुआ कि बस्ती में डायरिया और हैजा फैला और 19 लोगों की मौत हो गई। दूषित पानी से हुई मौतों की चर्चा देशभर में हुई।
टैंकरों से हो रही सप्लाई नर्मदा लाइन से नगर निगम कई बार सैंपल ले चुका है। दूषित पानी सप्लाई होने के कारण अफसर रहवासियों को टैंकरों का पानी इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं। 60 से ज्यादा टैंकर बस्ती में पानी बांट रहे हैं। जिन गलियों में टैंकर नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें जलसंकट झेलना पड़ रहा है। बस्ती में 110 सार्वजनिक बोरिंग हैं, लेकिन उनका पानी भी शुद्ध नहीं है। बस्ती के समीप ही नाला है।
नाले में फैक्टरियों का पानी भी आता है। इस कारण भूजल स्तर भी प्रदूषित हो चुका है। अफसरों का कहना है कि पूरी बस्ती की लाइन बदलने में दो से तीन माह का समय लगेगा। इस कारण बस्ती में कई मार्गों पर खुदाई का काम चल रहा है। आपको बता दें कि भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी पीने से 19 लोगों की मौत हो चुकी है और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं। डायरिया और हैजे की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है।
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