अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में कुलभूषण जाधव मामले में भारत को बड़ी जीत मिली है. इंटरनेशनल कोर्ट ने अपने फैसले में कुलभूषण की फांसी पर रोक लगा दी है, और पाकिस्तान के हर झूठ का पर्दाफाश किया है. भारत की इस जीत के बाद हर कोई वकील हरीश साल्वे की तारीफों में कसीदे पढ़ रहा है. लेकिन यह पहली बार नहीं है कि इंटरनेशनल कोर्ट में भारत को जीत मिली हो. इससे पहले भी भारत जीत दर्ज चुका है.

1999 में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी की दलीलों के सामने इंटरनेशनल कोर्ट में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी. सोराबजी ने कोर्ट में यह साबित कर दिया था कि पाकिस्तान की ओर से दाखिल किया गया मामला कोर्ट के दायरे में ही नहीं आता है. उस समय पाकिस्तान ने इंटरनेशनल कोर्ट में याचिका दायर की थी.
दरअसल, पाकिस्तान 21 सितंबर 1999 को भारत के खिलाफ अपनी याचिका लेकर इंटरनेशनल कोर्ट पहुंचा था. पाक ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी नेवी के टोही विमान को भारत ने मार गिराया है. कारगिल की जंग खत्म होने के कुछ दिन बाद ही 10 अगस्त 1999 को भारतीय वायुसेना ने कच्छ के रण में एक पाकिस्तानी विमान ब्रेके ऐटलैंटिक को मार गिराया था. भारत ने अपने जवाब में साफ तौर पर कहा था कि विमान ने भारतीय वायुक्षेत्र में अनाधिकृत ढंग से प्रवेश किया और बार-बार चेतावनी देने के बावजूद वापस नहीं गया.
याचिका दायर होने के बाद 21 जून 2000 को ICJ ने अपना फैसला सुनाया था. जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की याचिका खारिज की थी. याचिका खारिज करने के पीछे कोर्ट ने दलील दी कि यह मामला दोनों देशों के दि्वपक्षीय रिश्तों के अंतर्गत आता है और इस मामले को दोनों देशों को आपस में ही निपटाना चाहिए. उस समय भारत के पक्ष में कोर्ट ने 14-2 के अंतर से फैसला सुनाया था, कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने विवाद शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की हिदायत भी दी थी.
आपको बता दें कि हरीश साल्वे और सोराबजी में एक खास कनेक्शन है. साल्वे ने अपने करियर की शुरुआत सोराबजी के जूनियर के तौर पर ही की थी. अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार में दोनों ही भारत के शीर्ष लॉ ऑफिसर थे. उस समय सोराबजी जहां अटॉर्नी जनरल थे, वहीं साल्वे सॉलिसिटर जनरल के पद पर थे.
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