दिल्ली के भूजल में यूरेनियम का स्तर सुरक्षित मानक से अधिक

दिल्ली में लिए गए 103 भूजल नमूनों में से करीब 12.63 प्रतिशत में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर (30 पीपीबी) से अधिक पाई गई। यह स्तर पीने के पानी के लिए खतरनाक माना जाता है।

देशभर में भूजल की जांच करने वाले केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की यह रिपोर्ट चिंताजनक है। रिपोर्ट 2024 में देश भर से इकट्ठा किए गए करीब 15,000 सैंपलों पर आधारित है। विशेषज्ञों ने इसे साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी बताया है।

सीजीडब्ल्यूबी के अनुसार, दिल्ली के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, रोहिणी, भलस्वा झील और नांगली राजपुरा समेत कई इलाकों में पानी के सैंपल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) मानक से ऊपर पाए गए। कुछ जगहों पर यूरेनियम का स्तर 59 पीपीबी तक पहुंच गया जो सुरक्षित सीमा से करीब दोगुना है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह दिल्ली निवासियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए नियमित मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। दिल्ली हर दिन करीब 125 मिलियन गैलन भूजल पीने और घरेलू उपयोग के लिए निकालती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का अधिकांश भूजल सुरक्षित है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यूरेनियम लगातार बढ़ रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत के पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से प्रदूषण के हॉटस्पॉट हैं।

इसकी वजह भू-वैज्ञानिक कारण, भूमिगत पानी की कमी और एक्विफर की संरचना बताई जा रही है। भूजल में नाइट्रेट और फ्लोराइड का स्तर भी कई जगह बढ़ा हुआ पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

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