चैत्र नवरात्र का सातवां दिन आज, जरूर करें इस कथा का पाठ

चैत्र नवरात्र का सातवां दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित है। मां का स्वरूप बहुत उग्र है लेकिन उनका हृदय उतना ही निर्मल है। इस साल 4 अप्रैल यानी चैत्र नवरात्र के सातवें दिन (Chaitra Navratri 2025 Day 7) मां कालरात्रि की आराधना की जाएगी। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक माता की खास कृपा पाना चाहते हैं उनकी विधिवत पूजा करें।

चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन है, जो मां दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित है। मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मां कालरात्रि का स्वरूप बेहद उग्र है। ऐसी मान्यता है कि देवी की पूजा करने और व्रत कथा का पाठ करने से सभी प्रकार के भय और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। ऐसे में इस दिन (Chaitra Navratri 2025 Day 7) देवी की सच्चे भाव से आराधना करें, तो चलिए यहां पढ़ते हैं।

चैत्र नवरात्र सातवें दिन की व्रत कथा (Chaitra Navratri 2025 Day 7 Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुर शुंभ और निशुंभ ने चंड-मुंड और रक्तबीज की मदद से देवताओं को हरा दिया था और तीनों लोकों पर शासन करने लगे थे। इसके बाद इंद्र और अन्य देवताओं ने देवी दुर्गा से प्रार्थना की और तब मां ने उन्हें मारने के लिए देवी चामुंडा का रूप धारण किया, जिसके बाद माता काली ने चंड, मुंड और रक्तबीज का वध किया और फिर से संपूर्ण जगत में शांति की स्थापना की।

मां काली देवी दुर्गा का उग्र स्वरूप हैं। वे नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने के लिए जानी जाती है। साथ ही वे अपने भक्तों के जीवन के समस्त अंधकार को दूर करती हैं।

व्रत कथा पाठ के लाभ (Katha Path Benefits)
मां कालरात्र की कथा सुनने व पढ़ने का न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इससे हमारे जीवन की आने वाली चुनौतियों का अंत होता है। ऐसे में चैत्र नवरात्र के इस महत्वपूर्ण दिन में मां कालरात्रि की कथा का पाठ अवश्य करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।

मां काली पूजा मंत्र (Chaitra Navratri 2025 Day 7 Puja Mantra)
ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा।।
ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं।।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा।।

मां काली का प्रिय भोग (Chaitra Navratri 2025 Day 7 Bhog)
मां काली को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें बहुत पसंद हैं। इसके अलावा उन्हें आप उड़द की दाल और चावल का भोग भी अर्पित कर सकते हैं। कहा जाता है कि मां को उनका प्रिय भोग लगाने से वे साधक को मनचाहा वरदान देती हैं। इसके साथ ही उनकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं।

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