<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>UN मानवाधिकार चीफ &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/un-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%ab/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Tue, 04 Mar 2025 10:45:14 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>UN मानवाधिकार चीफ &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>UN मानवाधिकार चीफ के बयान पर भारत ने जताई आपत्ति</title>
		<link>https://livehalchal.com/un-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%ab-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/605063</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Mar 2025 10:44:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[UN मानवाधिकार चीफ]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=605063</guid>

					<description><![CDATA[<img width="589" height="366" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/ufguy-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/ufguy.jpg 589w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/ufguy-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 589px) 100vw, 589px" />&#160;भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क द्वारा वैश्विक अपडेट में कश्मीर और मणिपुर का उल्लेख किए जाने पर, इनकी टिप्पणियों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। इस अपडेट पर चिंता जताते हुए कहा है कि इसमें परिस्थितियों को मनमाने ढंग से चुना गया है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="589" height="366" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/ufguy-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/ufguy.jpg 589w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/ufguy-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 589px) 100vw, 589px" />
<p>&nbsp;भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क द्वारा वैश्विक अपडेट में कश्मीर और मणिपुर का उल्लेख किए जाने पर, इनकी टिप्पणियों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। इस अपडेट पर चिंता जताते हुए कहा है कि इसमें परिस्थितियों को मनमाने ढंग से चुना गया है।</p>



<p>जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची ने सोमवार को कहा, ‘जैसा कि भारत का नाम (अपडेट में) लिया गया है, मैं इस बात को पुरजोर ढंग से कहता हूं कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक स्वस्थ, जीवंत और बहुलवादी समाज बना हुआ है। अपडेट में की गई निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियां जमीनी हकीकत से बिल्कुल जुदा हैं।’</p>



<h3 class="wp-block-heading">बागची ने व्यक्त की प्रतिक्रिया</h3>



<p>बागची ने कहा, ‘भारतीयों ने हमारे बारे में ऐसी गलत चिंताओं को बार-बार गलत साबित किया है। हम भारत एवं हमारी विविधता तथा खुलेपन की सभ्यता को बेहतर तरीके से समझने की सलाह देते हैं, जो हमारे मजबूत और अक्सर शोरगुल वाले नागरिकों को परिभाषित करती है।’</p>



<p>बागची ने कहा कि तुर्क ने वैश्विक अपडेट में गलती से जिसे कश्मीर कहा है, वो जम्मू-कश्मीर है और यह इस अंतर को सबसे ज्यादा दर्शाता है। विडंबना यह है कि जिस वर्ष यहां शांति और समावेशी प्रगति में सुधार हुआ, फिर चाहे प्रांतीय चुनाव में भारी मतदान हो, बढ़ता पर्यटन या तेज विकास, उस साल ही ऐसा हुआ।’</p>



<p>भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया तुर्क द्वारा मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में वैश्विक अपडेट में इसका नाम लिए जाने पर आई है। तुर्क ने इसमें लिखा, ‘मैं मणिपुर हिंसा और विस्थापन को रोकने के लिए संवाद, शांति बनाने वाले और मानवाधिकार पर आधारित कोशिशों को तेज करने की मांग करता हूं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ सख्त कानूनों के प्रयोग और उत्पीड़न से चिंतित हूं, जिसके चलते मनमानी हिरासत और कश्मीर सहित अन्य नागरिक स्थान में कमी आई है।’</p>



<p><strong>चीन में प्रतिबंधों पर जताई चिंता<br></strong>एएनआई के अनुसार, तुर्क ने चीन में बढ़ते प्रतिबंधों पर चिंता जताते हुए कहा, ‘चीन भले ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार प्रणाली से जुड़ा हो, लेकिन मैं गंभीर चिंताओं को दोहराता हूं। मुझे उम्मीद है इन मुद्दों पर मजबूत प्रगति होगी। मैं उन वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक पत्रकारों के लिए आवाज उठाता रहूंगा, जिन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है।</p>



<p>एपी के अनुसार, तुर्क ने अमेरिका में हो रहे मानवाधिकारों की दिशा में मौलिक बदलाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने ट्रंप प्रशासन का नाम नहीं लिया, जिसने जनवरी में इस परिषद से अमेरिका को हटाने की घोषणा की थी, लेकिन कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे मौलिक बदलाव चिंतिंत करते हैं। लोग भड़काऊ भाषणों से भ्रमित हो रहे हैं, धोखा खा रहे हैं और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। इससे लोगों में डर और बेचैनी फैल रही है।</p>



<p><strong>बांग्लादेश का भी किया जिक्र<br></strong>उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने बीते वर्ष हिंसा का अनुभव किया क्योंकि तत्कालीन सरकार ने मानवाधिकार की मशाल लेकर चलने वाले छात्र आंदोलन को क्रूरतापूर्ण ढंग से दबा दिया था।</p>



<p>इस संबंध में बीते माह जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद वहां हिंदुओं, अहमदिया मुसलमानों और स्वदेशी समुदायों के कुछ लोगों का मानवाधिकार हनन किया गया था। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच हिंसा में करीब 1,400 लोग मारे गए होंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
