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	<title>isro &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>ISRO से 100 से ज्यादा इस्तीफों के बाद सरकार ने उठाया कदम</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 06:02:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/709.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/709.jpg 702w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/709-300x170.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भारत का अंतरिक्ष विभाग (DoS) इस समय बड़ी उथल-पुथल मची हुई है।&#160;इसरो के कई सीनियर साइंटिस्ट और टेक्निकल एक्सपर्ट इस्तीफा दे रहे हैं और प्राइवेट स्पेस कंपनियों की तरफ जा रहे हैं। एक के बाद एक पिछले एक साल में करीब 100 120 वैज्ञानिकों ने इस्तीफे दिए हैं। इसरो से वैज्ञानिकों के इस तरह के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/709.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/709.jpg 702w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/07/709-300x170.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भारत का अंतरिक्ष विभाग (DoS) इस समय बड़ी उथल-पुथल मची हुई है।&nbsp;इसरो के कई सीनियर साइंटिस्ट और टेक्निकल एक्सपर्ट इस्तीफा दे रहे हैं और प्राइवेट स्पेस कंपनियों की तरफ जा रहे हैं। एक के बाद एक पिछले एक साल में करीब 100 120 वैज्ञानिकों ने इस्तीफे दिए हैं।</p>



<p>इसरो से वैज्ञानिकों के इस तरह के इस्तीफे को रोकने के लिए भारत सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। अंतरिक्ष विभाग ने एक नया निर्देश जारी किया है। जिसके तहत अब ऐसे किसी भी मामले को केंद्र स्तर पर सीधे मंजूरी नहीं मिलेगी, बल्कि अंतिम मंजूरी के लिए हेडक्वार्टर भेजा जाएगा।</p>



<p>दरअसल, हाल ही में इस्तीफा देने वालों में गगनयान और चंद्रयान-3 जैसी बड़ी परियोजनाओं के कई प्रोजेक्ट डायरेक्टर और मैनेजर्स भी शामिल हैं। इसको लेकर सरकार का मानना है कि इस तरह अचानक काम छोड़ने से राष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स पर बुरा असर पड़ रहा है।</p>



<p>जिसके चलते सरकार ने वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। हालांकि, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि इससे परियोजनाओं को अचानक होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा</p>



<h2 class="wp-block-heading">ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफे पर रोक</h2>



<p>वैज्ञानिकों के इस्तीफे रोकने के लिए 14 जुलाई को एक नया अंदरूनी फरमान जारी किया है। इंटरनल मेमोरेंडम में कहा गया है कि हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट्स से जुड़े &#8216;ग्रुप A&#8217; के साइंटिफिक और टेक्निकल स्टाफ के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या इस्तीफे के अनुरोधों को अब रूटीन के तौर पर आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>



<p>विभाग ने चेतावनी दी है कि हाल के दिनों में नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों की संख्या में आई तेजी के कारण राष्ट्रीय महत्व की बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ा है।</p>



<p>इसको लेकर सरकार ने निर्देशकों (डायरेक्टर्स) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जब तक संबंधित स्पेस मिशन पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाते, तब तक वे अपनी तरफ से ऐसे किसी भी अनुरोध को मंजूरी न दें। वह इस्तीफे या वीआरएस के हर मामले को अपनी उचित सिफारिशों के साथ अंतिम निर्णय के लिए सीधे मुख्यालय को फॉरवर्ड करें।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कितने वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी?</h2>



<p>भारतीय अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने यह नहीं बताया है कि कितने वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी है, लेकिन कई सूत्रों का कहना है कि पिछले एक साल में 100-120 लोगों ने नौकरी छोड़ी है। इस्तीफा देने वालों में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ, UR राव सैटेलाइट सेंटर के SpaDeX प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट मैनेजर (सिमुलेशन) आदित्य रल्लापल्ली शामिल हैं।</p>



<p>हालांकि, नौकरी छोड़ने वालों की संख्या ISRO के 14,600 से ज्यादा कर्मचारियों की कुल संख्या का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन इससे इसके कुछ सबसे अहम सेंटर्स पर असर पड़ा है। 1,339 कर्मचारियों वाले UR राव सैटेलाइट सेंटर में 80 लोगों ने नौकरी छोड़ी है, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर के अंत तक ISRO के सबसे बड़े सेंटर (4,577 कर्मचारियों वाले) विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से कम से कम 20 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्यों इसरो छोड़ रहे साइंटिस्ट?</h2>



<p>बता दें कि भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर इस समय बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों की डिमांड बढ़ गई है। प्राइवेट कंपनियां मुह मांगा पैसा दे रही हैं। यही वजह है कि इसरो के टैलेंटेड साइंटिस्ट प्राइवेट सेक्टर की तरफ भाग रहे हैं।</p>
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		<title>ISRO की बड़ी कामयाबी: चंद्रयान-2 ने पहली बार देखा चांद पर कैसे पड़ता है सूरज का असर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 08:14:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[isro]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रयान-2]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/re-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/re.png 716w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/re-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />इसरो ने चंद्रयान-2 के माध्यम से सूर्य के कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के चंद्रमा पर प्रभाव का पहली बार निरीक्षण किया। CHACE-2 उपकरण ने पाया कि सीएमई के कारण चंद्रमा के एक्सोस्फीयर के दबाव में वृद्धि हुई। न्यूट्रल एटम की संख्या भी बढ़ गई, जिससे सैद्धांतिक मॉडल की पुष्टि हुई। यह खोज भविष्य में चंद्रमा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/re-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/re.png 716w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/re-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>इसरो ने चंद्रयान-2 के माध्यम से सूर्य के कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के चंद्रमा पर प्रभाव का पहली बार निरीक्षण किया। CHACE-2 उपकरण ने पाया कि सीएमई के कारण चंद्रमा के एक्सोस्फीयर के दबाव में वृद्धि हुई। न्यूट्रल एटम की संख्या भी बढ़ गई, जिससे सैद्धांतिक मॉडल की पुष्टि हुई। यह खोज भविष्य में चंद्रमा पर मानव आवास के लिए महत्वपूर्ण है।</p>



<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसरो ने बताया कि उसके चंद्रयान-2 लूनर ऑर्बिटर ने सूरज के कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के चांद पर असर का पहली बार ऑब्जर्वेशन किया है।</p>



<p>यह खोज ऑर्बिटर पर लगे साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स में से एक, चंद्रा के एटमॉस्फेरिक कंपोजिशन एक्सप्लोरर-2 (CHACE-2) का इस्तेमाल करके की गई। ऑब्जर्वेशन्स से पता चला कि जब सीएमई ने चांद की सतह पर असर डाला तो चांद के दिन वाले एक्सोस्फीयर या उसके बहुत पतले एटमॉस्फियर के कुल दबाव में काफी बढ़ोतरी हुई।</p>



<p><strong>CHACE-2 ने इसे पहली बार देखा</strong></p>



<p>इसरो के मुताबिक, इस घटना के दौरान न्यूट्रल एटम और मॉलिक्यूल की कुल संख्या (नंबर डेंसिटी) एक ऑर्डर ऑफ मैग्नीट्यूड से ज्यादा बढ़ गई। इससे लंबे समय से चले आ रहे थ्योरेटिकल मॉडल्स की पुष्टि हुई, लेकिन इसे पहले कभी सीधे तौर पर नहीं देखा गया था। स्पेस एजेंसी ने अपने बयान में कहा, “यह बढ़ोतरी पहले के थ्योरेटिकल मॉडल्स जैसी ही है, जिन्होंने ऐसे असर का अनुमान लगाया था, लेकिन चंद्रयान-2 पर मौजूद CHACE-2 ने इसे पहली बार देखा है।”</p>



<p><strong>क्या होता है कोरोनल मास इजेक्शन?</strong></p>



<p>सूर्य हमारा सबसे नजदीकी तारा है। ये आग का गोला है जो लाखों डिग्री सेल्सियस गर्म है और पृथ्वी के आकार से लाखों गुना बड़ा है। सूर्य के सतह पर हर समय हजारों-लाखों विस्फोट होते रहते हैं। इन विस्फोटों की वजह वहां मौजूद चार्ज प्लाज्मा, प्रचंड तापमान और मैग्नेटिक फील्ड है। इसकी वजह से भयानक तूफान उठता है और अंतरिक्ष में बहुत सा चार्ज प्लाज्मा फैल जाता है। इसे ही कोरोनल मास इजेक्शन कहते हैं।</p>



<p><strong>क्यों खास है यह मौका?</strong></p>



<p>दरअसल, ऑब्जर्वेशन का मौका बहुत ही कम मिलता है, जो पिछले साल 10 मई को उस वक्त शुरू हुआ था जब सूरज से चांद की ओर सीएमई की एक श्रंखला फेंकी गई थी। इस शक्तिशाली सोलर एक्टिविटी की वजह से चांद की सतह पर मौजूद एटम टूटकर चांद के एक्सोस्फीयर में चले गए और इससे कुछ समय के लिए उसकी डेंसिटी और प्रेशर बढ़ गया।</p>



<p>इसरो ने कहा कि यह सीधा ऑब्जर्वेशन इस बारे में कीमती जानकारी देता है कि सोलर एक्टिविटी चांद के एनवायरनमेंट पर कैसे असर डालती है, यह जानकारी इंसानों के लिए भविष्य में चांद पर रहने की जगहें और साइंटिफिक बेस बनाने की योजना बनाने में बहुत जरूरी साबित हो सकती है।</p>



<p>इसरो ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी बहुत ज्यादा सोलर घटनाएं चांद के एनवायरनमेंट को कुछ समय के लिए बदल सकती हैं, जिससे चांद पर लंबे समय के बेस बनाने में मुश्किलें आ सकती हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>ISRO का स्पैडेक्स मिशन लॉन्च, अंतरिक्ष में फिर इतिहास रचेगा भारत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Dec 2024 11:30:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[isro]]></category>
		<category><![CDATA[स्पैडेक्स मिशन लॉन्च]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="366" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/tyui-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/tyui.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/tyui-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />इसरो ने अपना महात्वाकांक्षी स्पैडेक्स मिशन लॉन्च कर दिया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार रात 10 बजे इसे लॉन्च कर दिया। इस मिशन के साथ भारत फिर कमाल करने की तैयारी में है। इसरो ने इस साल की शुरुआत अंतरिक्ष में एक्सरे किरणों का अध्ययन करने वाले मिशन एक्सपोसेट की लॉन्चिंग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="366" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/tyui-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/tyui.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/tyui-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>इसरो ने अपना महात्वाकांक्षी स्पैडेक्स मिशन लॉन्च कर दिया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार रात 10 बजे इसे लॉन्च कर दिया। इस मिशन के साथ भारत फिर कमाल करने की तैयारी में है। इसरो ने इस साल की शुरुआत अंतरिक्ष में एक्सरे किरणों का अध्ययन करने वाले मिशन एक्सपोसेट की लॉन्चिंग के साथ की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद अपने पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य’ में कामयाबी हासिल की।</p>



<p>अब वर्ष का अंत भी भारत ऐसे मिशन की लॉन्चिंग के साथ कर रहा है, जो अंतरिक्ष में देश के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को अपने बलबूते हासिल करने के लिए बेहद जरूरी है। इन लक्ष्यों में चंद्रमा से नमूने लाना, और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) का निर्माण शामिल है।</p>



<p><strong>इस मामले में बनेगा दुनिया का चौथा देश<br></strong>स्पैडेक्स मिशन के साथ ही भारत डाकिंग और अनडाकिंग क्षमता प्रदर्शित करने का चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया में सिर्फ तीन देश- अमेरिका, रूस और चीन अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष में डाक करने में सक्षम हैं। बता दें कि अंतरिक्षयान से दूसरे अंतरिक्षयान के जुड़ने को डाकिंग और अंतरिक्ष में जुड़े दो अंतरिक्ष यानों के अलग होने को अनडाकिंग कहते हैं।</p>



<p>मिशन के तहत श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार रात 10 बजे पीएसएलवी-सी60 रॉकेट ने दो छोटे अंतरिक्षयानों के साथ उड़ान भरी। हालांकि पहले लांचिंग रात 9.58 बजे निर्धारित थी। लांचिंग को दो मिनट के लिए क्यों टाला गया यह जानकारी नहीं दी गई है। इससे पहले इसरो ने सोमवार को अपडेट में कहा था, ‘प्रक्षेपण का दिन आ गया है। रात ठीक 10 बजे स्पैडेक्स पीएसएलवी-सी60 प्रक्षेपण के लिए तैयार है। रविवार रात नौ बजे शुरू हुई 25 घंटे की उल्टी गिनती जारी है।’</p>



<p><strong>बेहद महत्वपूर्ण है यह मिशन<br></strong>यह भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए महत्वपूर्ण तकनीक।<br>अंतरिक्ष में डाकिंग के लिए यह किफायती प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन।<br>चंद्रमा पर इंसान को भेजने, चांद से नमूने लाने के लिए आवश्यक।<br>भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और संचालन में भी होंगे आत्मनिर्भर।<br>किसी मिशन के लिए एक से अधिक रॉकेट लांच करने पर भी होगी इस तकनीक की जरूरत।</p>



<p><strong>किस तरह हासिल करेंगे सफलता<br></strong>दो अंतरिक्षयान एसडीएक्स01 (चेजर) और अंतरिक्षयान एसडीएक्स02 (टारगेट) को ऐसी कक्षा में रखा जाएगा, जो उन्हें एक दूसरे से पांच किमी दूर रखेगी। बाद में इसरो मुख्यालय के विज्ञानी उन्हें तीन मीटर तक करीब लाने की कोशिश करेंगे, जिसके बाद उन्हें पृथ्वी से लगभग 470 किमी की ऊंचाई पर जोड़ा जाएगा। डाकिग की यह प्रक्रिया सोमवार को निर्धारित अंतरिक्षयानों के प्रक्षेपण के लगभग 10-14 दिन बाद जनवरी में होने की उम्मीद है।</p>



<p><strong>दोनों अंतरिक्षयानों में होंगे पेलोड<br></strong>एसडीएक्स 01 में हाई रिजॉल्यूशन कैमरा लगा है, जबकि एसडीएक्स 02 में दो पेलोड मिनिएचर मल्टीस्पेक्ट्रल पेलोड और रेडिएशन मॉनिटर पेलोड लगे हैं। ये पेलोड हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें, प्राकृतिक संसाधन निगरानी में मदद करेंगे। अंतरिक्षयान दो वर्षों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे।</p>



<p><strong>‘सफलता की एक और कविता’ रचने की भी होगी काशिश<br></strong>इस मिशन के साथ ही विज्ञानी पीओईएम-4 यानी पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल-4 के तहत प्रयोग भी करेंगे। भारत तीन बार इस तरह का प्रयोग पहले भी कर चुका है। इन प्रयोगों के लिए पीएसएलवी-सी60 अपने साथ 24 पेलोड लेकर जा रहा है। इनमें 14 विभिन्न इसरो प्रयोगशालाओं से और 10 प्राइवेट विश्वविद्यालयों और स्टार्ट अप से संबंधित हैं।</p>



<p>अंतरिक्ष वातावरण में पालक के विकास का अध्ययन करने की योजना है। डेब्रिस कैप्चर रोबोटिक मैनिपुलेटर, अंतरिक्ष वातावरण में मलबे को कैप्चर करने की क्षमता प्रदर्शन करेगा। पहले इसरो ने पीएसएलवी सी-58 रॉकेट का इस्तेमाल कर पोएम-3 और पीएसएलवी-सी55 मिशन में पीओईएम-2 का उपयोग करके इसी तरह का सफल प्रयोग किया था।</p>



<p><strong>अंतरिक्ष कचरे की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी<br></strong>इसरो के पीओईएम मिशन से अंतरिक्ष कचरे की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी। दरअसल पीओईएम इसरो का प्रायोगिक मिशन है, इसके तहत कक्षीय प्लेटफॉर्म के रूप में पीएस4 चरण का उपयोग करके कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोग किया जाता है। पीएसएलवी चार चरणों वाला रॉकेट है। इसके पहले तीन चरण प्रयोग होने के बाद समुद्र में गिर जाते हैं और अंतिम चरण उपग्रह को कक्षा में प्रक्षेपित करने के बाद अंतरिक्ष में कचरे/कबाड़ बन जाता है। पीओईएम के तहत रॉकेट के इसी चौथे चरण का इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोग करने में किया जाएगा।</p>



<p><strong>एस सोमनाथ ने डॉकिंग को लेकर क्या जानकारी दी?<br></strong>इसरो चीफ एस सोमनाथ ने इस मिशन पर जानकारी देते हुए कहा,”हमारे लिए, यह सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किसी भी प्रक्षेपण यान का 99वां प्रक्षेपण है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। हम अगले साल की शुरुआत में सैटेलाइट की 100वीं लॉन्च करने जा रहे हैं।’ इस 99वें प्रक्षेपण में PSLV-C60 ने 220 किलोग्राम वजन वाले 2 SpaDeX उपग्रहों को 475 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। SpaDeX के कल से कई ऑपरेशन होंगे, इसकी गति को रोक दिया जाएगा और संभवतः 7 जनवरी को डॉकिंग की स्थिति में पहुंच जाएगा। आने वाले दिनों में डॉकिंग सिस्टम के बड़े और अधिक जटिल संस्करणों के प्रदर्शन सहित स्पाडेक्स की और भी किस्में होंगी।”</p>
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		<title>ISRO ने रचा कीर्तिमान, 3D प्रिंटेट लिक्विड रॉकेट इंजन का किया सफल परीक्षण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 May 2024 09:46:47 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[3D प्रिंटेट लिक्विड रॉकेट इंजन का किया सफल परीक्षण]]></category>
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		<category><![CDATA[ISRO ने रचा कीर्तिमान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="483" height="390" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-3.jpg 483w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-3-300x242.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 483px) 100vw, 483px" />इसरो ने लिक्विड राकेट इंजन का सफल परीक्षण कर कीतिर्मान रचा है। इस इंजन को अत्याधुनिक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है जिसे आम बोलचाल में 3 डी प्रिंटिंग के रूप में भी जाना जाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने शुक्रवार को बताया कि नया इंजन 97 प्रतिशत कच्चे माल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="483" height="390" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-3.jpg 483w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-3-300x242.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 483px) 100vw, 483px" />
<p>इसरो ने लिक्विड राकेट इंजन का सफल परीक्षण कर कीतिर्मान रचा है। इस इंजन को अत्याधुनिक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है जिसे आम बोलचाल में 3 डी प्रिंटिंग के रूप में भी जाना जाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने शुक्रवार को बताया कि नया इंजन 97 प्रतिशत कच्चे माल की बचत करता है और उत्पादन समय को 60 प्रतिशत तक कम कर देता है।</p>



<p>इसरो ने लिक्विड राकेट इंजन का सफल परीक्षण कर कीतिर्मान रचा है। इस इंजन को अत्याधुनिक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है, जिसे आम बोलचाल में 3 डी प्रिंटिंग के रूप में भी जाना जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">97 प्रतिशत कच्चे माल की बचत करता है नया इंजनः ISRO</h2>



<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को बताया कि नया इंजन 97 प्रतिशत कच्चे माल की बचत करता है और उत्पादन समय को 60 प्रतिशत तक कम कर देता है। इसे इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) द्वारा विकसित किया गया है। एलपीएससी ने इंजन को फिर से डिजाइन किया, जिससे यह एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (डीएफएएम) के डिजाइन के अनुकूल हो गया।</p>



<p><strong>पीएसएलवी के ऊपरी चरण का है यह इंजन</strong></p>



<p>इसरो प्रोपल्शन कांप्लैक्स, महेंद्रगिरि में नौ मई को 665 सेकंड की अवधि के लिए एएम तकनीक के माध्यम से निर्मित लिक्विड राकेट इंजन के सफल हाट परीक्षण किया गया। यह इंजन पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) के ऊपरी चरण का पीएस4 इंजन है। पीएसएलवी चार चरणों वाला राकेट होता है।</p>



<p>पीएसएलवी के चौथे चरण के लिए पारंपरिक पीएस4 इंजन का उपयोग किया जा जाता है। इस इंजन को बनाने के लिए अपनाई गई लेजर पाउडर बेड फ्यूजन तकनीक ने पा‌र्ट्स की संख्या 14 से घटाकर एक कर दिया है, और 19 वेल्ड जोड़ों को समाप्त कर दिया है, जिससे प्रति इंजन कच्चे माल के उपयोग पर काफी बचत हुई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारतीय उद्योग में किया गया इंजन का निर्माण</h2>



<p>पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया के लिए 565 किलोग्राम फोर्जिंग और शीट की तुलना में इस इंजन में केवल 13.7 किलोग्राम मेटल पाउडर का इस्तेमाल हुआ। कुल उत्पादन समय में 60 प्रतिशत की कमी आई। इंजन का निर्माण भारतीय उद्योग (मैसर्स विप्रो 3डी) में किया गया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एलवीएम3 निर्माण के लिए साझेदार तलाश रहा एनएसआइएल</h2>



<p>इसरो की कमर्शियल विंग न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने शुक्रवार को सार्वजनिक-निजी भागीदारी या पीपीपी मोड में हेवी लिफ्ट रॉकेट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम3) विकसित करने के लिए उद्योग जगत के भागीदारों को आमंत्रित किया। भारी उपग्रहों को लांच करने की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एनएसआइएल प्रति वर्ष दो राकेटों की मौजूदा क्षमता के मुकाबले हर साल चार-छह एलवीएम 3 श्रेणी के राकेट का उत्पादन करना चाहता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">14 साल की अवधि के लिए होगा PPP</h2>



<p>एनएसआइएल ने बयान में कहा कि एनएसआइएल ने संभावित बोलीदाताओं से रिक्वेस्ट फार क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) जारी किया है। एनएसआइएल ने कहा कि वह 10 से 15 वर्षों की अवधि में बड़ी संख्या में एलवीएम3 का उत्पादन करने के लिए पीपीपी ढांचे के माध्यम से भारतीय उद्योग के साथ साझेदारी के विकल्प तलाश रहा है। पीपीपी 14 साल की अवधि के लिए होगा।</p>



<p>प्रस्तावित अवधि के दौरान लगभग 60 से 65 राकेट के निर्माण का अनुमान है। एलवीएम3 के पास सात सफल प्रक्षेपणों का ट्रैक रिकार्ड है। इस राकेट ने श्रीहरिकोटा से दो मिशनों में वनवेब के 72 उपग्रहों को स्थापित करके वैश्विक कमर्शियल लॉन्चिंग लचग बाजार में शुरुआत की थी।</p>
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		<title>ISRO: &#8216;अंतरिक्ष को और अधिक सुलभ बनाएंगी प्राइवेट कंपनियां&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Apr 2024 08:31:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[isro]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-2-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-2-20.jpg 676w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-2-20-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />इसरो के अध्यक्ष ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से अंतरिक्ष प्रेमियों के साथ संवाद किया। यह संवाद एक घंटे तक चला। सोमनाथ ने वादा किया कि वह मई में फिर संवाद करेंगे। यह आयोजन युवा पीढ़ी से जुड़ने का प्रयास है। इस दौरान सोमनाथ ने कहा कि प्राइवेट कंपनियां अंतरिक्ष को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-2-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-2-20.jpg 676w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-2-20-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>इसरो के अध्यक्ष ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से अंतरिक्ष प्रेमियों के साथ संवाद किया। यह संवाद एक घंटे तक चला। सोमनाथ ने वादा किया कि वह मई में फिर संवाद करेंगे। यह आयोजन युवा पीढ़ी से जुड़ने का प्रयास है। इस दौरान सोमनाथ ने कहा कि प्राइवेट कंपनियां अंतरिक्ष को और अधिक सुलभ बनाएंगी और इस क्षेत्र में अनुसंधान को गति देने में मदद करेंगी।</p>



<p>इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से अंतरिक्ष प्रेमियों के साथ संवाद किया। यह संवाद एक घंटे तक चला। सोमनाथ ने वादा किया कि वह मई में फिर संवाद करेंगे। यह आयोजन युवा पीढ़ी से जुड़ने का प्रयास है। इस दौरान सोमनाथ ने कहा कि प्राइवेट कंपनियां अंतरिक्ष को और अधिक सुलभ बनाएंगी और इस क्षेत्र में अनुसंधान को गति देने में मदद करेंगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ये कंपनियां पहले ही राकेटों का परीक्षण कर चुकी हैं</h2>



<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख सोमनाथ ने शनिवार को कहा, भारत में पहले से ही दो कंपनियां-स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कासमास अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रही हैं। हम भारत को इस तरह आगे बढ़ते हुए देखकर उत्साहित हैं। ये कंपनियां पहले ही रॉकेटों का परीक्षण कर चुकी हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">नमूने एकत्र करना और उन्हें पृथ्वी पर लाना है</h2>



<p>चंद्रयान -4 से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए सोमनाथ ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत का 2040 में चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य है। चंद्रयान-4 इस उद्देश्य की दिशा में पहला कदम होगा। मिशन का लक्ष्य चंद्रमा पर यान भेजना, नमूने एकत्र करना और उन्हें पृथ्वी पर लाना है।</p>
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