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	<title>GDP &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सरकार ने जारी किए GDP के आंकड़े, FY26 में 7.7% की दर से भागी अर्थव्यवस्था</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 12:30:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[GDP]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="335" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/8uyijhk.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/8uyijhk.jpg 731w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/8uyijhk-300x163.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन यानी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी का डेटा जारी किया। वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की रफ्तार से भागी है। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रोथ रेट 7.1% की थी। सरकार ने फरवरी में अनुमान लगाया था &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="335" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/8uyijhk.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/8uyijhk.jpg 731w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/8uyijhk-300x163.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन यानी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी का डेटा जारी किया। वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की रफ्तार से भागी है। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रोथ रेट 7.1% की थी। सरकार ने फरवरी में अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2026 में भारत के अर्थव्यवस्था की रफ्तार 7.6% रह सकती है।</p>



<p>वहीं, जनवरी-मार्च में भारत की अर्थव्यवस्था पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह ग्रोथ 8% (संशोधित) रही थी।</p>



<p><strong>GDP के आंकड़े कैसे रहे<br></strong>नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस के मुताबिक, मार्च में खत्म हुए पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था 7.7% बढ़ी है, जबकि फरवरी में इसका अनुमान 7.6% लगाया गया था।</p>



<p>वित्त वर्ष 2025-26 में रियल GDP (या स्थिर कीमतों पर GDP) के 323.12 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए GDP का पहला संशोधित अनुमान (FRE) 299.89 लाख करोड़ रुपये था।</p>



<p>नॉमिनल GDP (या मौजूदा कीमतों पर GDP) के 2025-26 में 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 318.07 लाख करोड़ रुपये था; इससे 8.9% की विकास दर का पता चलता है।</p>



<p>वित्त वर्ष 2025-26 में रियल GVA के 294.91 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 273.36 लाख करोड़ रुपये था; इससे 7.9% की विकास दर दर्ज की गई है, जबकि 2024-25 में विकास दर 7.3% थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नॉमिनल GVA के 314.87 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 288.54 लाख करोड़ रुपये था; इससे 9.1% की विकास दर का पता चलता है।</p>



<p>वित्त वर्ष 2025-26 में रियल और नॉमिनल GVA में क्रमशः 7.9% और 9.1% की वृद्धि का अनुमान है।</p>



<p>सेकेंडरी और टर्शियरी सेक्टर ने स्थिर कीमतों पर क्रमशः 8.8% और 9.3% की वृद्धि दर्ज करके अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को बेहतर बनाया है।</p>



<p>प्राइमरी सेक्टर में 3.2% की वृद्धि दर देखी गई है, जो मुख्य रूप से कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्रों के प्रदर्शन से प्रेरित है।</p>



<p>यह संशोधित नेशनल अकाउंट डेटा के तहत दूसरा आंकड़ा है, जिसमें बेस ईयर को अपडेट किया गया है और डेटा के सोर्स का दायरा बढ़ाया गया है।</p>



<p><strong>इन सेक्टर में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई<br></strong>वित्त वर्ष 2025-26 में &#8216;मैन्युफैक्चरिंग&#8217;, &#8216;ट्रेड, रिपेयर, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग व स्टोरेज से जुड़ी सर्विस&#8217; और &#8216;फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विस&#8217; सेक्टर ने कॉन्स्टेंट और करंट, दोनों कीमतों पर दोहरे अंकों (डबल-डिजिट) में ग्रोथ हासिल की है।</p>



<p>खर्च के नजरिए से देखें तो, वित्त वर्ष 2025-26 में &#8216;प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर&#8217; (PFCE) और &#8216;ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन&#8217; (GFCF), दोनों में 7.5% से ज्यादा की ग्रोथ रेट देखी गई है।</p>



<p><strong>नई सीरीज के तहत जारी किए गए GDP के आंकड़े<br></strong>इस बार जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों की गणना बेस ईयर 2011-12 के बजाय 2022-23 के आधार पर की गई है। बेस ईयर को समय-समय पर बदला जाता है। सरकार अब इसी नई सीरीजी के आधार पर आगे के डेटा जारी करेगी। जीडीपी की नई सीरीज के तहत आर्थिक अनुमानों को ज्यादा से ज्यादा सटीक बनाने के लिए जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं को भी इसमें जोड़ा गया है।</p>



<p>2022-23 के बेस ईयर (आधार वर्ष) के आधार पर तिमाही GDP के अनुमान मुख्य रूप से इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के &#8216;क्वार्टरली नेशनल अकाउंट्स मैनुअल, 2017&#8217; में बताई गई गाइडलाइंस और स्टैंडर्ड्स का पालन करते हैं।</p>



<p>2022-23 के बेस ईयर वाली तिमाही GDP अनुमानों की नई सीरीज में बदली हुई कार्यप्रणाली (मेथडोलॉजी), डेटा के स्रोतों और डिफ्लेशन स्ट्रैटेजी की जानकारी फरवरी 2026 में जारी प्रेस नोट में दी गई है। इस डेटा को तैयार करने में इस्तेमाल की गई कार्यप्रणाली और डेटा के स्रोतों की पूरी जानकारी &#8216;सोर्सेस एंड मेथड्स&#8217; (Sources and Methods) नाम के प्रकाशन में दी जाएगी, जिसे अगस्त 2026 तक जारी किया जाना है।</p>



<p>सालाना और तिमाही नेशनल अकाउंट्स के अनुमानों में 2022-23 के बेस ईयर वाली संशोधित IIP और WPI/PPI सीरीज को शामिल किया जाएगा। ये अपडेटेड अनुमान वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए तिमाही GDP अनुमानों की अगली प्रेस रिलीज़ के समय जारी किए जाएंगे, जो 31 अगस्त 2026 को होनी है।</p>
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		<title>भारत की सीधे 4% घटने वाली है GDP? मूडीज की मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:58:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[GDP]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="288" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/uyiou.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/uyiou.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/uyiou-300x140.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मूडीज एनालिटिक्स (Moody&#8217;s Analytics) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र में भारत को सबसे बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। मूडीज का अनुमान है कि इस संघर्ष के कारण भारत के आर्थिक उत्पादन में इसके बेसलाइन अनुमान से लगभग 4 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="288" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/uyiou.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/uyiou.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/uyiou-300x140.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मूडीज एनालिटिक्स (Moody&#8217;s Analytics) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र में भारत को सबसे बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। मूडीज का अनुमान है कि इस संघर्ष के कारण भारत के आर्थिक उत्पादन में इसके बेसलाइन अनुमान से लगभग 4 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।</p>



<p>इस रिपोर्ट में भारत को चीन और दक्षिण कोरिया के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में रखा गया है, जिन पर भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">तेल और गैस आयात पर निर्भरता से बढ़ा खतरा</h2>



<p>भारत के लिए यह जोखिम मुख्य रूप से खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात पर उसकी भारी निर्भरता के कारण है। जैसे-जैसे मध्य पूर्व के देश इस संघर्ष में उलझ रहे हैं, ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा असर पड़ेगा?</h2>



<p>महंगाई (Inflation) में वृद्धि होगी।<br>व्यापार घाटा (Trade Deficit) और अधिक चौड़ा हो जाएगा।<br>खपत (Consumption) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।</p>



<p>मूडीज एनालिटिक्स ने अपने नवीनतम एशिया-प्रशांत आउटलुक में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है, &#8220;संघर्ष में फंसे खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात पर निर्भरता को देखते हुए भारत और चीन को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">सीमित रणनीतिक भंडार एक बड़ी चुनौती कैसे है?</h2>



<p>विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं (जिनके पास बड़े रणनीतिक भंडार हैं) की तुलना में भारत के पास &#8216;एनर्जी बफर&#8217; अपेक्षाकृत सीमित है, जिससे यह संकट और गहरा हो जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि ईंधन सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण जैसे सरकारी कदम शुरुआत में कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन ऊर्जा लागत में लगातार वृद्धि से अंततः आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ जाएंगी।</p>



<p>लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष और तेल की कीमतों में भारी उछाल से पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकास को नुकसान पहुंच सकता है। इस क्षेत्र की विकास दर 2025 के 4.3 फीसदी से घटकर 2026 में 4 फीसदी तक धीमी होने का अनुमान है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का ताज रहेगा बरकरार</h2>



<p>इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, एक राहत की खबर यह है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मूडीज का अनुमान है कि 2025 में भारत की विकास दर 7.8 फीसदी से थोड़ी कम होकर 2026 में 7.5 फीसदी रहेगी। 2027 में इसके और धीमा होकर 6.5 फीसदी के आसपास रहने की संभावना है।</p>



<p>महंगाई (Inflation) के भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास ही रहने की उम्मीद है। हालांकि, अगर कमोडिटी की कीमतें बढ़ती रहीं, तो यह लक्ष्य भी खतरे में पड़ सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कच्चे तेल में भारी उछाल और रुपये में कितनी गिरावट?</h2>



<p>मौजूदा हालात को देखते हुए अर्थशास्त्रियों ने पहले ही आगामी वर्ष के लिए विकास दर के अनुमानों में कटौती शुरू कर दी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें 27 फरवरी की तुलना में लगभग 60 फीसदी की भारी बढ़त के साथ खुलीं। वहीं, दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>जानिए वे तीन कारण जिनकी वजह से इस साल 6.5% से अधिक रहेगी GDP ग्रोथ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 11:11:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[GDP]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="307" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/khl-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/khl.png 749w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/khl-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भारत की अर्थव्यवस्था पर नया आउटलुक जारी किया है। इसमें उसने अनुमान लगाया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP विकास दर 6.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी। इसने ग्रास वैल्यू एडेड यानी GVA ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="307" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/khl-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/khl.png 749w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/khl-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भारत की अर्थव्यवस्था पर नया आउटलुक जारी किया है। इसमें उसने अनुमान लगाया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP विकास दर 6.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी। इसने ग्रास वैल्यू एडेड यानी GVA ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इसी महीने जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। वैश्विक बैंकिंग समूह एचएसबीसी ने एक दिन पहले कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई थी।</p>



<p><strong>महंगाई और राजकोषीय घाटे का अनुमान</strong><br>महंगाई के बारे में इक्रा का अनुमान है कि खुदरा महंगाई पूरे वित्त वर्ष के दौरान औसतन 4.2% से ऊपर रहेगी। थोक महंगाई 2.7 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी ने राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। चालू खाते का घाटा -1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इस साल के बजट में भी राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।</p>



<p><strong>विकास दर अच्छी रहने के तीन कारण</strong><br>इक्रा के अनुसार रबी की अच्छी फसल और जलाशयों में सामान्य से अधिक जलस्तर होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र की मांग मजबूत बनी रहेगी। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय बजट में आयकर में बड़ी राहत दी गई है, ब्याज दरें कम होने से कर्ज पर ईएमआई घटी है, इसके अलावा खाद्य महंगाई भी कम है। इन सब का मिला-जुला असर यह होगा कि लोगों की डिस्पोजेबल आय बढ़ जाएगी।</p>



<p><strong>वस्तु निर्यात में कमजोरी अभी बनी रहेगी</strong><br>घरेलू मांग में तो वृद्धि का अनुमान है लेकिन वैश्विक स्तर पर उम्मीदें वैसी नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मर्केंडाइज निर्यात में जो कमजोरी दिख रही है वह निकट भविष्य में जारी रहेगी। सर्विसेज का निर्यात मर्केंडाइज निर्यात की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ेगा।</p>



<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च इस वर्ष 10.1 प्रतिशत अधिक रहेगा। इससे निवेश गतिविधियों को गति मिलेगी। हालांकि ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता और निर्यात मांग में ज्यादा वृद्धि नहीं होने का असर निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च पर दिख सकता है।</p>



<p><strong>शेयर बाजार पर एचएसबीसी की राय</strong><br>HSBC ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय शेयर और बांड बाजार का भी आकलन किया है। बैंक ने कहा है कि निवेशकों को इस वर्ष बाजारों में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। एचएसबीसी के मुख्य निवेश अधिकारी जेम्स चियो ने निवेशकों को सलाह दी कि वे ऐसा पोर्टफोलियो विकसित करें, जो राजनीतिक और बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति मजबूत हों। बैंक ने निवेशकों के लिए 2025 की तीसरी तिमाही में चार प्राथमिकताएं तय की हैं। इसमें विविध इक्विटी निवेश, एआइ अपनाने के अवसर, मुद्रा जोखिमों में कमी और एशिया के घरेलू विकास का लाभ उठाना शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पिछले दस सालों में दोगुनी हुई भारत की GDP</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 11:45:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[GDP]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/jgi-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/jgi.jpg 670w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/jgi-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पिछले दस वर्षों में दोगुना हो गया है। वर्तमान मूल्यों पर देश का सकल घरेलू उत्पाद 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर था और इसके 2025 के अंत तक 4.27 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने की उम्मीद है, जो मात्र दस वर्षों में 100 प्रतिशत की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/jgi-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/jgi.jpg 670w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/jgi-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पिछले दस वर्षों में दोगुना हो गया है। वर्तमान मूल्यों पर देश का सकल घरेलू उत्पाद 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर था और इसके 2025 के अंत तक 4.27 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने की उम्मीद है, जो मात्र दस वर्षों में 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।</p>



<p>आइएमएफ ने यह भी बताया कि चालू कैलेंडर वर्ष में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी और यह अर्थव्यवस्था के मजबूत और स्थिर विस्तार का संकेत देती है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि से तात्पर्य मुद्रास्फीति के समायोजन के बाद देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में वृद्धि से है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">देश में मुद्रास्फीति 4.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद</h3>



<p>आइएमएफ ने यह भी कहा है कि मुद्रास्फीति आर्थिक स्थितियों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी ने कहा कि देश में मुद्रास्फीति 4.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इस तरह मुद्रास्फीति दर अब आरबीआइ के चार से छह प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में है।</p>



<p>आइएमएफ के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी (कुल आर्थिक उत्पादन के आधार पर एक नागरिक की औसत आय को मापता) 11,940 डॉलर है। यह पिछले कुछ वर्षों में व्यक्तिगत समृद्धि और जीवनस्तर में सुधार को दर्शाता है।</p>



<p>हालांकि, डेटा यह भी बताता है कि भारत का सामान्य सरकारी सकल ऋण वर्तमान में जीडीपी का 82.6 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि देश के आर्थिक उत्पादन की तुलना में सरकार की कुल उधारी काफी अधिक है।</p>



<p>उच्च ऋण राजकोषीय नीतियों के प्रबंधन में चुनौतियां पैदा कर सकता है, लेकिन भारत ने इसके बावजूद अपनी आर्थिक गति को बनाए रखा है और सरकार लगातार राजकोषीय लक्ष्यों को प्राप्त कर रही है।</p>
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