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		<title> 18वें BRICS समिट में भारतीय कूटनीति का डंका</title>
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		<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 06:48:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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<p>दुनिया जब पश्चिम एशिया के घमासान, चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुके रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की लगातार बदलती टैरिफ नीतियों से पैदा हुई अनिश्चितता से जूझ रही है, तब नई दिल्ली ने कूटनीति की एक अलग राह दिखाई है।&nbsp;<br><br>वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और ब्रिक्स के भीतर मौजूद मतभेदों के बीच भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों को ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026’ पर सर्वसम्मति के लिए साथ लाना साधारण उपलब्धि नहीं है।</p>



<p>भारत ने यह दिखाया कि जब दुनिया में संवाद के बजाय टकराव बढ़ रहा हो, तब भी धैर्य, संतुलन और निरंतर बातचीत के जरिये साझा सहमति की जमीन तैयार की जा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">BRICS समिट में भारत का डंका</h2>



<p>दो दिवसीय सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। भारतीय कूटनीति का यही संतुलन वर्ष 2023 में जी-20 के आयोजन के दौरान भी दिखाई दिया था, जब गंभीर वैश्विक विभाजन के बावजूद नई दिल्ली घोषणा पर सहमति बनी थी।</p>



<p>ब्रिक्स में भी भारत ने उसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए अलग-अलग हितों और मतभेदों के बीच संवाद का सिलसिला बनाए रखा।<br>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय टीम को आतिथ्य तथा सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।</p>



<p>चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत अन्य नेताओं ने भी भारत के नेतृत्व में सम्मेलन के सुचारू और परिणाममूलक आयोजन की सराहना की। चीन के समाचार पत्रों में भी भारत की भूमिका और आयोजन की तारीफ हुई।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ईरान-यूएई के मतभेदों के बीच सहमति की राह</h2>



<p><strong>यह सफलता महज औपचारिक सहमति नहीं थी। मई में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर भाषा पर इतना गहरा मतभेद था कि संयुक्त वक्तव्य तक नहीं निकल सका था। सम्मेलन से पहले और उसके दौरान भारत ने दोनों पक्षों के बीच लगातार पुल का काम किया।</strong><br><br>एक ओर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों के नेतृत्व से संपर्क बनाए रखा, वहीं दूसरी ओर वार्ता करने वाले अधिकारियों, शेरपाओं और मसौदा तैयार करने वाली टीमों के बीच रातभर बातचीत चलती रही। कई रातों तक वार्ताओं का दौर चला। आखिरकार घोषणा पत्र में ऐसी भाषा पर सहमति बनी, जो सभी पक्षों को स्वीकार्य थी।<br><br>इसमें पश्चिम एशिया में तनाव पर गहरी चिंता, अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान तथा संवाद और कूटनीति के जरिये स्थायी शांति का आह्वान किया गया।</p>



<p>जिन देशों को भाषा को लेकर ज्यादा आपत्ति थी, उनके बीच सहमति बनाने के लिए यह रास्ता निकाला गया कि घोषणा पत्र में किसी भी देश का नाम नहीं लिया जाएगा।</p>



<p>ईरान का खास तौर पर ख्याल रखा गया। राष्ट्रपति पेजेश्कियान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद के बीच सीधे संवाद का अवसर दिया गया, जिससे सहमति की राह काफी आसान हुई।</p>



<h2 class="wp-block-heading">वैश्विक व्यवस्था से लेकर स्थानीय मुद्रा तक</h2>



<p>नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थानों में सुधार और भारत तथा ब्राजील की सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका का समर्थन किया। एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों और जबरदस्ती के उपायों का विरोध तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति बनी।</p>



<p>गाजा में मानवीय सहायता, संघर्ष विराम और दो-देशीय समाधान का उल्लेख किया गया। नागरिक परमाणु सुविधाओं पर हमलों और परमाणु जोखिम बढ़ने पर चिंता जताई गई।<br><br>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक शासन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, महत्वपूर्ण खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला और विकास सहयोग जैसे भारत द्वारा आगे बढ़ाए गए एजेंडे को भी घोषणा पत्र में जगह मिली।</p>



<p>भारत ने अपने हितों से जुड़े मुद्दों को भी साफ तौर पर आगे बढ़ाया। आतंकवाद के सभी रूपों, खासकर पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा का उल्लेख एक बार फिर ब्रिक्स की घोषणा में किया गया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ग्लोबल साउथ को लेकर मोदी का स्पष्ट संदेश</h2>



<p>चीन की 2027 की अध्यक्षता और अगले शिखर सम्मेलन का समर्थन करके समूह ने निरंतरता का भी संदेश दिया। इस तरह दस्तावेज केवल विवादों को टालने वाला दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल साउथ के हितों को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा।<br><br>पीएम मोदी ने सम्मेलन के दोनों सत्रों में ग्लोबल साउथ के हितों को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने कहा कि विकासशील देश वैश्विक संकटों की अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पिछली कतार में बैठे हैं।</p>



<p>उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विकासशील देशों को केवल आदेश मानने वालों की भूमिका से आगे बढ़कर नियम बनाने वालों की भूमिका में आना चाहिए।वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को इतनी मजबूती से उठाने का यह प्रयास भारतीय कूटनीति की प्रमुख पहलों में गिना जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत के लिए ब्रिक्स सम्मेलन का हासिल कूटनीतिक क्षमता</h2>



<p>गंभीर मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य देशों को एक साझा घोषणा पत्र पर सहमत कर भारत ने अपनी संवाद और सहमति बनाने की क्षमता दिखाई।<br><br><strong>ईरान-यूएई संवाद:</strong>&nbsp;पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दे पर ईरान और यूएई के बीच संवाद का रास्ता बनाने में भारत ने पुल की भूमिका निभाई।<br><br><strong>आतंकवाद:</strong>&nbsp;आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा के साथ पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि। ग्लोबल साउथ: विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भूमिका देने का भारत का एजेंडा प्रमुखता से सामने आया।<br><br><strong>संयुक्त राष्ट्र:</strong>&nbsp;यूएन में सुधार और सुरक्षा परिषद में भारत तथा ब्राजील की बड़ी भूमिका के समर्थन को घोषणा पत्र में जगह मिली।<br><br><strong>दुर्लभ खनिज:</strong>&nbsp;इसे एजेंडे में शामिल कर भारत ने अपनी आर्थिक और औद्योगिक जरूरतों से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता दी।<br><br><strong>लोकल करेंसी:</strong>&nbsp;स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति भारत की दीर्घकालिक आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।<br><br><strong>चीन संवाद:</strong>&nbsp;चीन की 2027 की अध्यक्षता और अगले शिखर सम्मेलन के समर्थन ने मतभेदों के बावजूद संवाद और समूह की निरंतरता को बनाए रखने का संकेत दिया।</p>
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		<title>BRICS मेहमानों को परोसा जाएगा &#8216;भारत का स्वाद&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 07:26:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/7868yuhj.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/7868yuhj.png 804w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/7868yuhj-300x166.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/7868yuhj-768x425.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, यूएई सहित अन्य साझेदार देशों के नेताओं का स्वागत करेंगे। सम्मेलन भारत मंडपम में होगा, लेकिन दिल्ली के लक्जरी होटल, जहां प्रतिनिधिमंडल ठहरेंगे, खास तैयारियों में जुटे हैं। ताज &#8230;]]></description>
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<p>भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, यूएई सहित अन्य साझेदार देशों के नेताओं का स्वागत करेंगे। सम्मेलन भारत मंडपम में होगा, लेकिन दिल्ली के लक्जरी होटल, जहां प्रतिनिधिमंडल ठहरेंगे, खास तैयारियों में जुटे हैं।</p>



<p>ताज महल, द लीला पैलेस और द ललित समेत शहर के प्रमुख होटलों ने ब्रिक्स प्रतिनिधियों के लिए खास मेन्यू तैयार किया है, जो भारतीय मेहमाननवाजी और विविध क्षेत्रीय स्वादों को दर्शाता है।</p>



<p><strong>ताज महल, नई दिल्ली<br></strong>ताज महल ‘ट्रेडिशन टू टेबल’ थीम के साथ प्रतिनिधियों का स्वागत करेगा। यह मेन्यू शेफ्स द्वारा अपनी माताओं से सीखी गई रेसिपीज पर आधारित है। इसमें भारत के छह क्षेत्रों के पारंपरिक स्नैक्स शामिल हैं।</p>



<p>कश्मीर के स्पाइस्ड वॉलनट्स<br>पुरानी दिल्ली का मैदा काजू<br>महाराष्ट्र की भाकरवड़ी<br>राजस्थान की मिनी कचौरी<br>बंगाल का कुचो निमकी<br>तमिलनाडु का मुरुक्कु</p>



<p>डॉ. अनमोल अहूजा, एरिया डायरेक्टर-ऑपरेशंस एंड जनरल मैनेजर, ताज महल ने कहा कि यह भारतीय पाक विरासत की विविधता और ताज अनुभव की गर्माहट को दर्शाता है।</p>



<p><strong>द लीला पैलेस, नई दिल्ली<br></strong>यहां खास तौर पर हाथ से बनाई गई खाद्य कमल तैयार की गई है। कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है और ब्रिक्स इंडिया 2026 की पहचान से जुड़ा है। इसे गुलाब, केसर और इलायची के साथ स्वदेशी फलों के साथ तैयार किया गया है।</p>



<p>इसके अलावा औजस्य बाय द लीला मिलेट कुकीज, हाथ से बने ग्रेनोला बार्स और वेलनेस इन्फ्यूजन भी शामिल हैं। एग्जीक्यूटिव शेफ करण ठाकुर ने बताया कि ये क्रिएशन भारतीय सामग्री की समृद्धि को आधुनिक तरीके से पेश करते हैं।</p>



<p><strong>द ललित, नई दिल्ली<br></strong>द ललित ने क्षेत्रीय भारतीय व्यंजनों पर आधारित खास मेन्यू तैयार किया है। इसमें गलौटी कबाब, तंदूरी ब्रेड्स और मिलेट-आधारित व्यंजन शामिल हैं। साथ ही कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले डिश भी हैं जैसे….</p>



<p>मिसो पेस्ट के साथ ब्रेस्ड एगप्लांट<br>सिमर्ड चाइनीज कैबेज<br>किडनी बीन स्वीट जापानी स्टाइल विद एम्बर सॉस</p>



<p>जनरल मैनेजर विशाल शर्मा ने कहा कि ये मेन्यू भारतीय मेहमाननवाजी की गर्माहट और गरिमा को दर्शाता है।ये होटल ब्रिक्स प्रतिनिधियों को भारत का स्वाद देते हुए उनकी विविध प्राथमिकताओं का भी ध्यान रख रहे हैं।</p>
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		<title>BRICS समिट में शामिल होने भारत आएंगे शी चिनफिंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 10:55:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="383" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5.jpg 988w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5-300x186.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5-768x477.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शनिवार को ब्रिक्स समिट के लिए भारत आएंगे। सात साल में यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। इस बात की पुष्टि चीन के विदेश मंत्रालय ने कर दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, &#8220;भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="383" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5.jpg 988w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5-300x186.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/6-5-768x477.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शनिवार को ब्रिक्स समिट के लिए भारत आएंगे। सात साल में यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। इस बात की पुष्टि चीन के विदेश मंत्रालय ने कर दी है।</p>



<p>चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, &#8220;भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।&#8221; इससे पहल न्यूज एजेंसी एएफपी से बात करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चिनफिंग की यात्रा को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।</p>
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		<title>BRICS: पाकिस्तान ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए किया आवेदन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Nov 2023 09:42:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS]]></category>
		<category><![CDATA[पाकिस्तान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="606" height="335" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/फ्ग्झ्यफ्ग्ज्ग.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/फ्ग्झ्यफ्ग्ज्ग.jpg 606w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/फ्ग्झ्यफ्ग्ज्ग-300x166.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 606px) 100vw, 606px" />रूसी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि 2024 में ब्रिक्स संगठन की सदस्यता हासिल करने के लिए उसने रूस से मदद मिलने की उम्मीद जताई है। विकासशील देशों के संगठन ब्रिक्स की लगातार बढ़ती लोकप्रियता के बीच अब पाकिस्तान ने इसमें शामिल होने के लिए आवेदन कर दिया है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="606" height="335" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/फ्ग्झ्यफ्ग्ज्ग.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/फ्ग्झ्यफ्ग्ज्ग.jpg 606w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/फ्ग्झ्यफ्ग्ज्ग-300x166.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 606px) 100vw, 606px" />
<p>रूसी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि 2024 में ब्रिक्स संगठन की सदस्यता हासिल करने के लिए उसने रूस से मदद मिलने की उम्मीद जताई है।</p>



<p>विकासशील देशों के संगठन ब्रिक्स की लगातार बढ़ती लोकप्रियता के बीच अब पाकिस्तान ने इसमें शामिल होने के लिए आवेदन कर दिया है। रूस की तास न्यूज एंजेंसी ने इसकी जानकारी दी है। रूस में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद खालिद जमाली ने आवेदन भरने के साथ ही ब्रिक्स में सदस्यता दिलाने के लिए रूस से मदद मांगी है।</p>



<p>रूसी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि 2024 में ब्रिक्स संगठन की सदस्यता हासिल करने के लिए उसने रूस से मदद मिलने की उम्मीद जताई है।</p>



<p>इसी साल बढ़ी है ब्रिक्स में सदस्यों की संख्या<br>गौरतलब है कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के मूल ढांचे वाले ब्रिक्स गठबंधन ने इसी साल अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 11 करने की घोषणा की। नए सदस्यों में अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को समूह के नए सदस्यों के रूप में शामिल करने का फैसला किया था।</p>



<p>पाकिस्तान ने नहीं दी थी ब्रिक्स के विस्तार को तवज्जो<br>हालांकि, पाकिस्तान ने ब्रिक्स के विस्तार की खबर को तवज्जो नहीं देने की कोशिश करते हुए कहा था कि उसने इसमें शामिल होने के लिए अभी तक औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। पाकिस्तान की विदेश कार्यालय ने कहा था कि हम ताजा घटनाक्रमों की समीक्षा करेंगे और ब्रिक्स के साथ अपने भविष्य के संबंधों के बारे में दृढ़ संकल्प करेंगे। हम अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को बढ़ावा देने और समावेशी बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने प्रयास जारी रखेंगे।</p>
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