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	<title>80 हजार रुपये लीटर बिक रहा दूध &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>इस देश की महंगाई से लोगों में आयी कंगाली, 80 हजार रुपये लीटर बिक रहा दूध</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Feb 2018 11:01:17 +0000</pubDate>
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<p><img decoding="async" class="aligncenter  wp-image-118225" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/17_02_2018-venezuela_to_colombia.jpg" alt="इस देश की महंगाई से लोगों में आयी कंगाली, 80 हजार रुपये लीटर बिक रहा दूधइस देश की महंगाई से लोगों में आयी कंगाली, 80 हजार रुपये लीटर बिक रहा दूध" width="716" height="595" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/17_02_2018-venezuela_to_colombia.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/02/17_02_2018-venezuela_to_colombia-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 716px) 100vw, 716px" /></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">रातों-रात पैदा नहीं हुआ संकट</span></strong></p>
<div class="relativeNews"> <strong>वेनेजुएला का यह संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ है बल्कि लगभग दो वर्षों से इसी तरह के हालातों में वहां के लोग जीने को मजबूर हैं। आलम यह है कि वहां की करेंसी में आई गिरावट की वजह से एक लीटर दूध 80 हजार से अधिक रुपये में बिक चुका है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वहां पर एक ब्रेड की कीमत भी हजारों में हो चुकी है। वहीं 3 लाख रुपयों में महज एक किलो मीट ही आ पाएगा। यदि ये कहा जाए कि इस देश में बोरे में भरकर नोट ले जाने पर आप शायद एक समय का खाना ही खा पाओगे तो गलत नहीं होगा। दूसरी ओर वेनेजुएला की सरकार फिलहाल इस आर्थिक संकट को खत्&#x200d;म करने में नाकाम दिखाई दे रही है।</strong></div>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">चरमराई अर्थव्&#x200d;यवस्&#x200d;था और खिलाफ हुए पड़ोसी</span></strong></p>
<p><strong>वेनेजुएला में आए इस संकट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है। इसके अलावा सरकार की गलत नीतियां भी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्&#x200d;मेदार हैं। सरकार की नीतियों की वजह से और वहां फैली भुखमरी के चलते हर रोज वहां की सड़कों नागरिक प्रदर्शन कर रहे हैं। आलम यह है कि वेनेजुएला के पड़ोसी देश मेक्सिको, ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, स्पेन समेत यूरोपीयन यूनियन भी अब उसके पूरी तरह से खिलाफ हो चुके हैं। इतना ही नहीं पेरू जैसे देश भी अब वेनेजुएला की सरकार को तानाशाह बताने से नहीं चूक रहे हैं। दरअसल पेरू की राजधानी लीमा में अप्रेल में एक सम्&#x200d;मेलन होने वाला है इसमें वेनेजुएला के राष्&#x200d;ट्रपति को न बुलाने और उनका स्&#x200d;वागत न करने पर कई देशों ने सहमति भी जता दी है। ऐसा तब हुआ है जब वेनेजुएला के राष्&#x200d;ट्रपति निकोलस माडुरो की तरफ से इस सम्&#x200d;मेलन में जाने पर सहमति दी गई है। लिहाजा ये कहा जा सकता है कि वेनेजुएला इस संकट के बीच अकेला खड़ा है।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">अमेरिका से तनातनी</span></strong></p>
<p><strong>हालांकि रूस इस मुद्दे पर वेनेजुएला के साथ खड़ा होता जरूर दिखाई दे रहा है। वहीं अमेरिका वहां आए आर्थिक संकट को लेकर वेनेजुएला की सरकार और राष्&#x200d;ट्रपति को खरी-खोटी सुना चुका है। राष्&#x200d;ट्रपति ट्रंप के एक बयान के बाद वेनेजुएला के राष्&#x200d;ट्रपति की तरफ से यहां तक कहा जा चुका है कि उनके ऊपर इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि ट्रंप उनको लेकर क्&#x200d;या कहते हैं और सोचते हैं, बल्कि इससे फर्क पड़ता है कि उनकी अपनी जनता उनके बारे में क्&#x200d;या कहती है।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">भारत के लिए वेनेजुएला</span></strong></p>
<p><strong>बहरहाल, आपको यहां पर यह भी बता दें कि वेनेजुएला की अर्थव्&#x200d;यवस्&#x200d;था पूरी तरह से तेल पर टिकी हुई है। वेनेजुएला में सऊदी अरब से ज्&#x200d;यादा बड़ा तेल का भंडार मौजूद है। लेकिन यहां के तेल की किस्म थोड़ी अलग है जिसे भारी पेट्रोलियम कहा जाता है। भारी पेट्रोलियम को रिफाइन करना खर्चीला होता है। यही वजह है कि दूसरे देशों की तुलना में वेनेजुएला के कच्चे तेल की कीमत कम है। भारत समेत दुनिया भर की कंपनियां यहां तेल की खुदाई में शामिल हैं। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और विदेशी कंपनियों पर कसे शिकंजे के बाद यहां से कई कंपनियों ने बाहर का रुख कर लिया है। यही वजह है कि जहां हर रोज 30 लाख बैरल तेल रोजाना निकलता था वहां अब ढाई लाख बैरल भी नहीं निकल पा रहा है। आपको बता दें कि अमेरिका के बाद केवल भारत ही है जो यहां से नगद तेल खरीदता है। जहां तक भारत की बात है तो दवा उद्योग के लिए वेनेजुएला महत्वपूर्ण बाजार है।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">वेनेजुएला पर चीन का कर्ज</span></strong></p>
<p><strong>इसके अलावा यदि बात करें चीन की वेनेजुएला पर उसका करीब 65 अरब डॉलर का कर्ज है। चीन को तेल बेचकर वेनेजुएला को कोई फायदा नहीं होने वाला है। क्&#x200d;योंकि इससे केवल उसका कर्ज ही उतर पाएगा लेकिन उसके खजाने में पैसा नहीं आएगा। वेनेजुएला के संकट पर फिलहाल चीन पूरी तरह से चुप्&#x200d;पी साधे खड़ा है। लेकिन यदि चीन की मौजूदा रणनीति की तरफ जरा नजर डालें तो ये कहा जा सकता है कि यह स्थिति उसके हित में है। ऐसा इसलिए है कि क्&#x200d;योंकि मौजूदा दौर में चीन ने आर्थिक और रणनीतिक औपनिवेश बनाने की जो चाल शुरू की है उसका आधार कहीं न कहीं कर्ज और निवेश ही है।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">ये है महंगाई का आलम</span></strong></p>
<p><strong>आपको बता दें कि वेनेजुएला में महंगाई का हाल बहुत बुरा हो चुका है। पिछले वर्ष मार्च के बाद वेनेजुएला में मुद्रास्फीति दर 220 प्रतिशत को भी पार कर गई थी। देश का सबसे बड़े नोट, 100 बोलिवार की कीमत साल के अंत तक आते आते 0.04 डॉलर से भी कम रह गई थी। वोनिवार की ताजा स्थिति 0.14 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। वहीं यदि भारत से इसकी तुलना की जाए तो यह 9.32 रुपये है। यहां पर भुखमरी का आलम ये है कि यहां पर लोगों को घंटों दुकानों के सामने अपनी बारी का इंतजार करने में गुजारने पड़ रह हैं।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">ढह गया तेल से आय का किला</span></strong></p>
<p><strong>यहां पर यह जानना भी जरूरी है कि लैटिन अमेरिकी देशों में तेल की कीमत गिरने का सबसे ज्यादा नुकसान वेनेजुएला को उठाना पड़ा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि वेनेजुएला की 95 प्रतिशत आय तेल और गैस से होती है। 2013 और 2014 में देश ने जहां लगभग प्रति बैरल 100 डॉलर या उससे पहले 140 डॉलर प्रति बैरल तेल बेचा था, वहीं मादुरो के समय ये कीमतें 25 डॉलर प्रति बैरल रह गई। वेनेजुएला तीन साल पहले 75 बिलियन डॉलर का तेल निर्यात किया करता था। 2016 में यह महज 27 बिलियन डॉलर रह गया। 2014 में तेल की कीमतों में आई 50 फीसदी तक की कमी से तेल पर निर्भर देश की हालत चरमरा गई थी। 2013 में तेल से 80 अरब डॉलर आय हुई थी वहीं 2016 में केवल 20 अरब डॉलर की ही कमाई वेनेजुएला को हुई थी।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff9900;">विरोध में विपक्ष</span></strong></p>
<p><strong>अब जरा यहां की राजनीति की भी बात कर लेते हैं। आपको बता दें कि 2015 के चुनाव में राष्&#x200d;ट्रपति मादुरो की पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हो सका था और वह विपक्षी पार्टी से भी पीछे छूट गई थी। इस स्थिति से बचने के लिए मादुरो ने आनन-फानन में 15 जनवरी 2016 को देश में आर्थिक आपात की घोषणा की थी। देश की सुप्रीम कोर्ट ने भी राष्ट्रपति के इस फैसले को हरी झंडी तक दिखा दी थी लेकिन इसको लेकर विपक्ष एकजुट हो गया और राष्&#x200d;ट्रपति से इस्&#x200d;तीफे की मांग, एमयूडी इसके विरोध में उठ खड़ा हुआ।</strong></p>
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