50 साल से ज्यादा उम्र के अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करेगी नितीश सरकार – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Thu, 28 Jan 2021 10:59:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg 50 साल से ज्यादा उम्र के अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करेगी नितीश सरकार – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 50 साल से ज्यादा उम्र के अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करेगी नितीश सरकार https://livehalchal.com/50-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7/415368 Thu, 28 Jan 2021 10:58:59 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=415368 बिहार सरकार ने सरकारी विभागों में 50 साल से ज्यादा उम्र वाले अक्षम कर्मचारियों को निकालने के अपने फैसले पर काम करना शुरू कर दिया है। सरकार ने पिछले साल जुलाई में ये फैसला लिया था लेकिन अब इस फैसले पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। 

राज्य सरकार ने इस कार्य के लिए दो अलग-अलग कमेटियों को गठित किया है। पहली कमेटी में तीन लोग और दूसरी कमेटी में चार लोग शामिल होंगे। गृह विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी समूह क वाले अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा करेगी।

इस समिति में गृह विभाग के सचिव और एक आईपीएस रैंक के विशेष सचिव के अलावा विभागीय मुख्य निगरानी पदाधिकारी को शामिल किया गया है। इसके अलावा समूह ख, ग और अवर्गीकृत कर्मचारियों के लिए दूसरी समिति गठित की गई है। इसके अध्यक्ष गृह विभाग के सचिव होंगे।

गृह विभाग के सचिव की टीम में उनके अलावा दो अन्य लोग भी शामिल होंगे, जिसमें उपसचिव शामिल हैं। हर साल दो बार इस कमेटी की ओर से समीक्षा की जाएगी। समिति की अनुशंसा पर इस साल जून से जबरन सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 

बिहार सरकार की ओर से 50 साल के ऊपर अक्षम कर्मचारियों को हटाने के फैसले में और भी घटक शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, कर्मचारियों की कार्यदक्षता के अलावा सत्यनिष्ठा और आचार-व्यवहार को भी शामिल किया गया है। जून के बाद दिसंबर में दोनों कमेटियां एक बार फिर समीक्षा करेंगी। इसका मतलब यह हुआ कि छह-छह महीने में समीक्षा होगी। जब जुलाई में बिहार सरकार ने इसका फैसला लिया था तो कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर सरकार की काफी आलोचना की थी।

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