43 साल पुरानी है संसदीय व्यवस्था में महिला आरक्षण की लड़ाई – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Fri, 22 Sep 2017 06:17:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg 43 साल पुरानी है संसदीय व्यवस्था में महिला आरक्षण की लड़ाई – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 43 साल पुरानी है संसदीय व्यवस्था में महिला आरक्षण की लड़ाई https://livehalchal.com/43-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5/80862 Fri, 22 Sep 2017 06:17:04 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=80862 महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्टी लिखी है. इससे एक बार देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. महिला आरक्षण बिल 2010 में राज्यसभा से पास होने के बाद भी लोकसभा में पेश नहीं हो सका है. इसी वजह …]]>

महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्टी लिखी है. इससे एक बार देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. महिला आरक्षण बिल 2010 में राज्यसभा से पास होने के बाद भी लोकसभा में पेश नहीं हो सका है. इसी वजह से अभी तक ये बिल अधर में लटका हुआ है. सोनिया गांधी की चिट्टी के बाद माना जा रहा है कि मोदी सरकार इसी शीतकालीन सत्र में महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में ला सकती है. दरअसल महिलाओं के राजनीति में हिस्सेदारी को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं.

महिला आरक्षण बिल का इतिहास

वर्ष 1974- संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भारत में महिलाओं की स्थिति के आकलन संबंधी समिति की रिपोर्ट में पहली बार उठाया गया था. राजनीतिक इकाइयों में महिलाओं की कम संख्या का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया.

1993- संविधान में 73वें और 74वें संशोधन के तहत पंचायतों तथा नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं.

12 सितंबर 1996 – महिला आरक्षण विधेयक को पहली बार एचडी देवगौड़ा सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में पेश किया. इसके बाद ही देवगौड़ा सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा को भंग कर दिया गया.  

विधेयक को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया. इस समिति ने नौ दिसंबर 1996 को लोकसभा को अपनी रिपोर्ट पेश की.  

26 जून 1998- अटल बिहारी वाजयेपी के नेतृत्व वाली NDA की सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया, लेकिन पास नहीं हो सका.

इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली NDA सरकार अल्पमत में आ जाने से गिर गई और 12वीं लोकसभा भंग हो गई.

22 नवम्बर 1999- दोबारा सत्ता में लौटी NDA सरकार ने 13वीं लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को एक बार फिर पेश किया, लेकिन इस बार भी सरकार इस पर सभी को सहमत नहीं कर सकी.

वर्ष 2002 और 2003 में भी बीजेपी नेतृत्व वाली NDA सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, लेकिन कांग्रेस और वामदलों के समर्थन के आश्वासन के बावजूद सरकार इस विधेयक को पारित नहीं करा सकी.

मई 2004- कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के इरादे का ऐलान किया.

6 मई 2008-  महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पेश हुआ और उसे कानून एवं न्याय से संबंधित स्थायी समिति के पास भेजा गया.  

17 दिसंबर 2009- स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की और समाजवादी पार्टी, जेडीयू तथा आरजेडी के विरोध के बीच महिला आरक्षण विधेयक को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा गया.

22 फरवरी 2010- तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद में अपने अभिभाषण में कहा था कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

25 फरवरी 2010- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण विधेयक का अनुमोदन दिया.

08 मार्च 2010- महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा के पटल पर रखा गया, लेकिन सदन में हंगामे और एसपी और राजद द्वारा UPA से समर्थन वापस लेने की धमकी की वजह से उस पर मतदान नहीं हो सका.

09 मार्च 2010- कांग्रेस ने बीजेपी, जेडीयू और वामपंथी दलों के सहारे राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक भारी बहुमत से पारित कराया.  

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