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	<title>22 जनवरी को यूपी के किसान संगठन सरकार के साथ बातचीत करने जाएंगे &#8211; Live Halchal</title>
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		<pubDate>Thu, 21 Jan 2021 09:16:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिंघु, टिकरी, गाजीपुर बॉर्डर पर 26 जनवरी के समारोह को लेकर तैयारियां हो गई हैं। किसान संगठन तिरंगे झंडे के साथ ट्रैक्टर मार्च करने की रणनीति को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से ट्रैक्टर दिल्ली के निकल पड़े हैं। लुधियाना, अमृतसर, मोंगा, होशियारपुर, गुरुदासपुर से जुड़े कुछ किसान परिवारों &#8230;]]></description>
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<p>सिंघु, टिकरी, गाजीपुर बॉर्डर पर 26 जनवरी के समारोह को लेकर तैयारियां हो गई हैं। किसान संगठन तिरंगे झंडे के साथ ट्रैक्टर मार्च करने की रणनीति को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से ट्रैक्टर दिल्ली के निकल पड़े हैं। लुधियाना, अमृतसर, मोंगा, होशियारपुर, गुरुदासपुर से जुड़े कुछ किसान परिवारों ने बड़ी संख्या में तिरंगा झंडा दिल्ली बॉर्डर तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/image-196.png" alt="" class="wp-image-413465" width="664" height="433"/></figure>



<p>इस बीच उत्तर प्रदेश के एक बड़े किसान संगठन के नेता मीडिया से बातचीत में कहा कि 22 जनवरी को केन्द्र सरकार एमएसपी पर खरीद की गारंटी दे और जब तक सहमति न बन जाए, तब तक तीनों कानूनों को निलंबित रखने का भरोसा दे तो बात बन सकती है।</p>



<p>सूत्र का कहना है कि यह उनका निजी विचार है। वह इस विचार को किसान नेताओं के सामने चर्चा के दौरान रखेंगे। हालांकि अभी वह यह दावा नहीं कर सकते कि राष्ट्रीय स्तर पर किसान नेता इसे मंजूरी देंगे या नहीं। किसान नेता का कहना है कि 22 जनवरी को किसान संगठन सरकार के साथ बातचीत करने जाएंगे। अगली वार्ता भी होगी। किसान बातचीत से पीछे हटने वाले नहीं हैं, लेकिन बातचीत का ठोस समाधान निकलना चाहिए। दिखावे की बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।</p>



<p>कई बार किसान हितों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की नाक में दम कर चुके नेता का कहना है कि उन्हें यह बीच का रास्ता समझ में आ रहा है। सरकार को चाहिए कि वह इसके साथ किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के प्रति सहानुभूति दिखाए और उन्हें मुआवजा देने की घोषणा करे। सूत्र का कहना है कि पूरा मामला केवल सरकार के अड़िय़ल रुख के कारण बिगड़ता चला गया।</p>



<p>कुछ किसान नेताओं ने आपसी बातचीत में इस तरह के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। उनका कहना था कि सरकार को भी अपनी जिद छोड़ऩी पड़ेगी और किसान संगठन भी किसान हित को देखकर इस पर विचार कर सकते हैं।</p>



<p>किसान मामलों के जानकार चौधरी पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार एमएसपी पर खरीद की गारंटी दे, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर सही तरीके से अमल करने भरोसा दिलाए तथा आम सहमति बनने तक तीनों कानूनों को निलंबित रखने का प्रस्ताव दे तो किसानों के हित में बुरा नहीं है। चौधरी कहते हैं कि केन्द्र सरकार को यह घोषणा पहले ही कर देनी चाहिए थी।</p>
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