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	<title>2017 में चीन ने शुरुआत की थी डोकलाम विवाद &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>2017 में चीन ने शुरुआत की थी डोकलाम विवाद, गलवन की प्रकार हटना पड़ा था पीछे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jul 2020 06:24:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />लद्दाख स्थित गलवन वैली में चीन की तरफ से शुरू किया गया सीमा विवाद फिलहाल ठंडा पड़ गया है। चीन के विदेश मंत्री और भारत के राष्&#x200d;ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सैन्&#x200d;य अधिकारियों के बीच तीन दौर की हुई बातचीत के बाद चीन की सेना फिलहाल दो किमी पीछे हट गई है। उन्&#x200d;होंने भारतीय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>लद्दाख स्थित गलवन वैली में चीन की तरफ से शुरू किया गया सीमा विवाद फिलहाल ठंडा पड़ गया है। चीन के विदेश मंत्री और भारत के राष्&#x200d;ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सैन्&#x200d;य अधिकारियों के बीच तीन दौर की हुई बातचीत के बाद चीन की सेना फिलहाल दो किमी पीछे हट गई है। उन्&#x200d;होंने भारतीय सीमा में लगाए गए तंबू और बनाए गए स्&#x200d;ट्रक्&#x200d;चर को भी हटा लिया है। बहरहाल, ये विवाद सीमा पर हुई झड़प के 23 दिन बाद शांत हो गया है। हालांकि इसके बाद भी चीन की नीति और नीयत पर सवालिया निशान लगा हुआ है। ऐसा इसलिए है क्&#x200d;योंकि तीन वर्ष पहले भी उसने इसी तरह का विवाद डोकलाम या डोकाला में खड़ा किया था। उस वक्&#x200d;त दोनों देशों की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने डटी रही थीं। इसके बाद कहीं जाकर ये विवाद सुलझाया जा सका था। इसको इत्&#x200d;तफाक नहीं कहा जा सकता है कि चीन ने डोकलाम की शुरुआत भी 16 जून को ही की थी। ये विवाद 28 अगस्त को खत्&#x200d;म हुआ था। वहीं गलवन में भी चीन ने विवाद की शुरुआत 15-16 जून की रात को की थी।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-349198 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/07/erfedrfderf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि भारत व भूटान के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर संधि की गई थी, जिसके तहत विदेशी हमले की सूरत में दोनों एक दूसरे का सहयोग करने की बात कही गई है। भूटान और भारत के बीच 1949 से ही परस्पर विश्वास और स्थायी दोस्ती का करीबी संबंध है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि वर्ष 2007 में भारत और भूटान द्वारा हस्ताक्षर किए गये मैत्री संधि के अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि भूटान और भारत के बीच घनिष्ठ दोस्ती और सहयोग के संबंधों को ध्यान में रखते हुए, भूटान की साम्राज्य की सरकार और भारत गणराज्य की सरकार निकट सहयोग करेगी अपने राष्ट्रीय हितों से संबंधित मुद्दों पर एक दूसरे के साथ रहेंगे। आपको बता दें कि भारत-चीन सीमा जम्मू-कश्मीर में 1,597, हिमाचल प्रदेश में 200, उत्तराखंड में 345, सिक्किम में 220 और अरुणाचल प्रदेश में 1,126 किलोमीटर तक फैली है।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>क्&#x200d;या था डोकलाम विवाद</strong></p>
<p>डोकलाम विवाद की शुरुआत 16 जून, 2017 को उस वक्&#x200d;त हुई थी जब भारतीय सैनिकों ने चीन की पीएलए के सैनिकों को इस इलाके में सड़क निर्माण करने से रोका था।</p>
<p>वे इस इलाके में बुलडोजर के जरिए सड़क निर्माण की कोशिश कर रहे थे। चीन जिस क्षेत्र में सड़क निर्माण कर रहा था, वह भूटान का इलाका है। गौरतलब है कि डोकलाम विवाद का मुख्य कारण उसकी एक मजबूत रणनीतिक स्थिति भी है। दरअसल, यह एक ट्राई-जंक्शन है, जहां भारत, चीन और भूटान कि सीमा मिलती है। इस क्षेत्र को लेकर चीन और भूटान के बीच काफी समय से विवाद रहा है। वहीं भारत के लिए ये पूरा इलाका इसलिए भी खास है क्&#x200d;योंकि यदि यहां पर भारतीय सीमा के करीब चीन आ जाता है तो वो भविष्&#x200d;य में भारती के पूर्वी इलाके के लिए बड़ी समस्&#x200d;या बन सकता था।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>डोकलाम की रणनीतिक स्थिति</strong></p>
<p>गौरतलब है कि ये इलाका चीन के इलाके से काफी ऊंचाई पर स्थित है। यहां से समूचे इलाके पर नजर रखी जा सकती है। चीन यदि यहां पर अपनी सड़क बनाने की योजना में कामयाब हो जाता तो वो भारत के लिए ज्&#x200d;यादा बड़ा खतरा बन सकता था। लेकिन भारतीय रणनीति ने उसकी इस मंशा को विफल करते हुए उसके बुलडोजर समेत दूसरे साजो-सामान भी जब्&#x200d;त कर लिए थे। इसके बाद चीन लगातार यही दावा करता रहा कि ये इलाका उसकी सीमा में आता है। इसके साथ ही चीन ने इस इलाके में अपने जवानों की तैनाती को पहले की अपेक्षा कई गुणा बढ़ा दिया था। जवाब में भारत ने भी सीमा पर न सिर्फ अपने जवानों की तैनाती बढ़ाई बल्कि वहां पर तोपखाने की भी तैनाती कर दी थी। भारतीय वायुसेना को भी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के दिशा-निर्देश दिए गए थे। पूर्व से लेकर उत्&#x200d;तर तक चीन से लगती सीमा पर भारतीय सेना पूरी तरह से चौकस और हाई अलर्ट पर थी। भारत की समस्&#x200d;या सिर्फ डोकलाम को लेकर ही नहीं थी बल्कि इसलिए भी थी क्&#x200d;योंकि चीन की यहां पर मौजूदगी का अर्थ सिक्किम के लिए खतरे की घंटी थी। सिक्किम को लेकर चीन बार-बार ये दावा करता आया है कि ये उसका भू-भाग है।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>भारत की दबाव की रणनीति</strong></p>
<p>भारत की मजबूत रणनीतिक स्थिति और चला गया कूटनीतिक दांव यहां पर काम आया। डोकलाम विवाद के बाद पूरी दुनिया ने जहां पर चीन का विरोध कर उसको विस्&#x200d;तारवादी नीतियों का परिचायक बताया वहीं भारत का खुला समर्थन भी किया। इस दौरान वार्ता को सुलझाने के लिए पर्दे के पीछे भी लगातार बातचीत जारी रही। उस वक्&#x200d;त इस बातचीत के दो प्रमुख चेहरों में से एक मौजूदा विदेश मंत्री जयशंकर जो उस वक्&#x200d;त विदेश सचिव थे और दूसरे एनएसए अजीत डोभाल रहे थे। इसके अलावा सीमा पर हर तरह की चौकसी के लिए जिम्&#x200d;मेदार तत्&#x200d;कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी इसमें एक अहम भूमिका में थे।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>दोनों सेनाओं के पीछे हटने का फैसला</strong></p>
<p>इस दौरान दबाव बढ़ाने के लिए भारत ने ब्रिक्&#x200d;स सम्&#x200d;मेलन का बहिष्&#x200d;कार किया, जिससे अंतरराष्&#x200d;ट्रीय मंच पर चीन की काफी किरकिरी भी हुई। लिहाजा चीन के लिए इस विवाद को सुलझाना बड़ी चुनौती बन गई थी। वहीं इसको लेकर जापान और अमेरिका ने भी भारत का साथ दिया था। 9 अगस्त, 2017 को चीन ने एक बार फिर दावा किया कि उसके कुछ सैनिक और कुछ चीजें ही विवादित इलाके में हैं। चीन के बयानों को दरकिनार करते हुए भारत ने दावा किया था कि वहां पर चीन के करीब 300 से 400 जवान मौजूद हैं। ब्रिक्&#x200d;स सम्&#x200d;मेलन से पहले इस विवाद को सुलझाने की कवायद तेज हो गई। कई दौर की वार्ता के बाद 28 अगस्&#x200d;त 2017 को चीन के साथ भारत ने भी अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाने का फैसला किया।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>क्&#x200d;या था गलवन विवाद</strong></p>
<p>आपको बता दें कि 15-16 जून की रात को भारतीय सेना के जवानों पर चीन के जवानों ने लोहे की रॉड में लगे कटीले तारों से हमला कर दिया था। ये हमला उस वक्&#x200d;त किया गया था जब भारतीय सेना के कुछ जवान अपने कमांडिंग अधिकारी के साथ वहां मौजूद चीनी जवानों को अपनी सीमा में वापस जाने और भारतीय इलाका खाली करने को कह रहे थे। इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के कर्नल समेत 20 जवान शहीद हो गए थे। तब से लेकर 7 जून तक सीमा पर काफी तनाव था। इस तनाव और चीन से खतरे के मद्देनजर भारत ने सीमा पर तोपखाने के अलावा लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की भी तैनाती कर दी थी।</p>
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