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	<title>होलाष्टक &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>होलाष्टक &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>आज से शुरू होलाष्टक, जानें होली से पहले ये 8 दिन क्यों माने जाते हैं अशुभ</title>
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		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 04:53:50 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="326" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205326.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205326.png 718w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205326-300x158.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205326-310x165.png 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>फाल्गुन शुक्ल पक्ष की सप्तमी 24 फरवरी 2026, मंगलवार को सुबह 7:01 बजे तक रहेगी। इसके बाद जैसे ही फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, उसी क्षण से होलाष्टक की शुरुआत मानी जाएगी। परंपरा के अनुसार होलाष्टक से लेकर होलिका दहन तक किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं, और कई विद्वान इनके पीछे मौसमी व सामाजिक कारण भी मानते हैं। आइए जानते हैं कि होली से पहले आने वाले ये 8 दिन अशुभ क्यों माने जाते हैं।</p>



<p><strong>होलाष्टक क्या है?</strong></p>



<p>धर्मशास्त्रों में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक के आठ दिनों को ‘होलाष्टक’ कहा गया है। ज्योतिष ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इन आठ दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए। ‘होलाष्टक’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है, ‘होला’ अर्थात होली और ‘अष्टक’ यानी आठ। इस तरह होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में नई वस्तु खरीदना या कोई बड़ा शुभ कार्य शुरू करना टाल देना चाहिए।</p>



<p><strong>होलाष्टक की उत्पत्ति से जुड़ी मान्यता</strong></p>



<p>पौराणिक कथाओं के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत एक विशेष घटना से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया था, उसी समय से इन आठ दिनों को विशेष माना जाने लगा। इन दिनों को संयम, साधना और आत्मचिंतन का समय माना जाता है। यही कारण है कि सोलह संस्कारों में से अधिकांश संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते। यदि कोई आवश्यक कार्य करना भी पड़े, तो पहले शांति पाठ या विशेष पूजन का विधान बताया गया है।</p>



<p>एक अन्य कथा के अनुसार, इन्हीं आठ दिनों में असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए अत्याचार किए थे। लेकिन अपार कष्टों के बाद भी प्रह्लाद अपनी भक्ति में अडिग रहे। आखिर में उनकी रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन मनाया जाता है।</p>



<p>भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने होली से पहले आठ दिनों तक गोपियों के साथ रंगोत्सव मनाया था। दुलहंडी के दिन रंगों से भीगे वस्त्र अग्नि को अर्पित किए गए, जिसके बाद यह परंपरा उत्सव के रूप में स्थापित हो गई। इस प्रकार होलाष्टक केवल वर्जनाओं का समय नहीं है, बल्कि यह भक्ति, तैयारी और आत्मसंयम का भी काल है, जो हमें होली के उल्लासपूर्ण पर्व के लिए मानसिक और सामाजिक रूप से तैयार करता है।</p>



<p><strong>होलाष्टक का महत्व</strong></p>



<p>होलाष्टक को होली पर्व की औपचारिक शुरुआत भी माना जाता है। जैसे ही यह काल आरंभ होता है, वैसे ही गांव-शहरों में होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यह समय केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के बदलाव के कारण भी खास माना जाता है। इस अवधि में मौसम बदलने लगता है, सर्दी धीरे-धीरे विदा लेती है और गर्मी का प्रभाव दिखाई देने लगता है। बदलते मौसम में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां जरूरी होती हैं, इसलिए भी बड़े आयोजनों से बचने की परंपरा रही है।</p>
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		<title>आज से शुरू होलाष्टक, मासिक दुर्गाष्टमी पर क्या हैं शुभ-अशुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 04:51:12 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[होलाष्टक]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="290" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205056.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205056.png 766w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205056-300x141.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज यानी 24 फरवरी को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस तिथि का समापन प्रातः 07 बजकर 01 मिनट पर होगा और फिर अष्टमी तिथि की शुरुआत होगी। इस तिथि पर मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। इस दौरान शुभ और मांगलिक करना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="290" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205056.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205056.png 766w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-205056-300x141.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज यानी 24 फरवरी को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस तिथि का समापन प्रातः 07 बजकर 01 मिनट पर होगा और फिर अष्टमी तिथि की शुरुआत होगी। इस तिथि पर मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है।</p>



<p>इस दौरान शुभ और मांगलिक करना वर्जित है। होलाष्टक का समापन होलिका दहन के साथ होता है।</p>



<p>तिथि: शुक्ल सप्तमी<br>मास: फाल्गुन<br>दिन: मंगलवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल सप्तमी – प्रातः 07 बजकर 01 मिनट तक, फिर अष्टमी<br>योग: इन्द्र – प्रातः 07 बजकर 24 मिनट तक, फिर वैधृति<br>करण: वणिज – प्रातः 07 बजकर01 मिनट तक<br>करण: विष्टि – सायं 05 बजकर 56 मिनट तक<br>करण: बव – प्रातः 04 बजकर 51 मिनट (25 फरवरी) तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 51 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 18 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: प्रातः 10 बजकर 58 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: रात्रि 01 बजकर 40 मिनट (25 फरवरी)</p>



<p><strong>सूर्य और चंद्रमा की राशियां<br></strong>सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं<br>चन्द्र देव: वृषभ राशि में स्थित हैं</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक<br>अमृत काल: दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से दोपहर 02 बजकर 22 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: सायं 03 बजकर 26 मिनट से सायं 04 बजकर 52 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से दोपहर 02 मिनट तक<br>यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 43 मिनट से प्रातः 11 बजकर 09 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव कृत्तिका नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।<br>स्थान: 26°40’ मेष राशि से 10°00’ वृषभ राशि तक<br>कृत्तिका नक्षत्र: सायं 03 बजकर 07 मिनट तक<br>नक्षत्र स्वामी: सूर्यदेव<br>राशि स्वामी: मंगलदेव और शुक्रदेव<br>देवता: अग्निदेव<br>प्रतीक: भाला या अस्त्र<br>सामान्य विशेषताएं: तेज बुद्धि, स्वाभिमानी, धार्मिक, परंपरावादी, क्रोधी, लड़ाकू, निडर, ऊर्जावान, महत्वाकांक्षी, प्रसिद्ध, विलासी, सामाजिक रूप से प्रभावशाली, कभी-कभी कठोर और चालाक।</p>
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		<title>होलाष्टक हुआ शुरू, भूलकर भी न करें ये काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 04:40:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[होलाष्टक]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-203923.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-203923.png 756w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-203923-300x165.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />होलाष्टक का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन मांगलिक कामों के लिए यह समय बहुत अशुभ माना जाता है। साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत आज यानी 24 फरवरी से हो रही है। वहीं, इसका समापन 03 मार्च को होगा। इस अवधि को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं, आइए उनके बारे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-203923.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-203923.png 756w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-23-203923-300x165.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>होलाष्टक का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन मांगलिक कामों के लिए यह समय बहुत अशुभ माना जाता है। साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत आज यानी 24 फरवरी से हो रही है। वहीं, इसका समापन 03 मार्च को होगा। इस अवधि को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं, आइए उनके बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>होलाष्टक में क्या न करें?<br></strong>होलाष्टक के दौरान मांगलिक काम जैसे कि शादी, सगाई, मुंडन और नामकरण जैसे कामों से बचना चाहिए।<br>इस दौरान नया घर खरीदना, भूमि पूजन, गृह प्रवेश व नई गाड़ी लेने से बचना चाहिए।<br>इस दौरान नया बिजनेस शुरू करने से भी बचना चाहिए।<br>इस दौरान तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए।</p>



<p><strong>होलाष्टक में क्या करें?<br></strong>होलाष्टक के दौरान अपनी क्षमता अनुसार गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करें।<br>भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें।<br>इस दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।</p>



<p><strong>होलाष्टक से जुड़ी बातें<br></strong>ज्योतिषीय महत्व – इन 8 दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु उग्र अवस्था में होते हैं। इसलिए इस दौरान बड़े कामों को टालने की सलाह दी जाती है।<br>धार्मिक मान्यता – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों में भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप द्वारा बहुत यातनाएं दी गई थीं। प्रहलाद को दिए गए कष्टों के कारण इस समय को शुभ कामों के लिए वर्जित माना गया है।<br>आध्यात्मिक वजह – भले ही इसे मांगलिक कामों के लिए अशुभ माना गया है, लेकिन यह समय पूजा-पाठ, मंत्र साधना और दान-पुण्य के लिए बहुत फलदायी माना गया है।</p>
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		<title>होलाष्टक के अशुभ प्रभाव को वरदान में बदल देंगे ये गुप्त मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 05:46:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="331" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615.png 747w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615-300x161.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615-310x165.png 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />होली से ठीक आठ दिन पहले के समय को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन आठ दिनों में नौ ग्रह उग्र हो जाते हैं, जिसके कारण शुभ कामों पर रोक लग जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलाष्टक का यह समय पूजा-पाठ के लिए बहुत फलदायी माना जाता है? पौराणिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="331" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615.png 747w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615-300x161.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-214615-310x165.png 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>होली से ठीक आठ दिन पहले के समय को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन आठ दिनों में नौ ग्रह उग्र हो जाते हैं, जिसके कारण शुभ कामों पर रोक लग जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलाष्टक का यह समय पूजा-पाठ के लिए बहुत फलदायी माना जाता है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक वही दिन हैं, जब भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बहुत यातनाएं दी थीं।</p>



<p>अंत में भगवान नरसिंह ने प्रकट होकर प्रहलाद की रक्षा की और सभी बुराइयों का अंत किया। इसीलिए, होलाष्टक के दौरान भगवान नरसिंह की पूजा और उनके 108 नामों का जाप करना संकटों से मुक्ति पाने का सबसे अचूक उपाय है, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>।।भगवान नरसिंह के 108 नाम।।<br></strong>ॐ नरसिंहाय नमः<br>ॐ नराय नमः<br>ॐ नारस्रष्ट्रे नमः<br>ॐ नारायणाय नमः<br>ॐ नवाय नमः<br>ॐ नवेतराय नमः<br>ॐ नरपतये नमः<br>ॐ नरात्मने नमः<br>ॐ नरचोदनाय नमः<br>ॐ नखभिन्नस्वर्णशय्याय नमः<br>ॐ नखदंष्ट्राविभीषणाय नमः<br>ॐ नादभीतदिशानागाय नमः<br>ॐ नन्तव्याय नमः<br>ॐ नखरायुधाय नमः<br>ॐ नादनिर्भिन्नपाद्माण्डाय नमः<br>ॐ नयनाग्निहुतासुराय नमः<br>ॐ नटत्केसरसञ्जातवातविक्षिप्तवारिदाय नमः<br>ॐ नलिनीशसहस्राभाय नमः<br>ॐ नतब्रह्मादिदेवताय नमः<br>ॐ नभोविश्वम्भराभ्यन्तर्व्यापिदुर्वीक्ष्यविग्रहाय नमः<br>ॐ निश्श्वासवातसंरम्भ घूर्णमानपयोनिधये नमः<br>ॐ निर्द्रयाङ्घ्रियुगन्यासदलितक्ष्माहिमस्तकाय नमः<br>ॐ निजसंरम्भसन्त्रप्तब्रह्मरुद्रादिदेवताय नमः<br>ॐ निर्दम्भभक्तिमद्रक्षोडिम्भनीतशमोदयाय नमः<br>ॐ नाकपालादिविनुताय नमः<br>ॐ नाकिलोककृतप्रियाय नमः<br>ॐ नाकिशत्रूदरान्त्रादिमालाभूषितकन्धराय नमः<br>ॐ नाकेशासिकृतत्रासदंष्ट्राभाधूततामसाय नमः<br>ॐ नाकमर्त्यातलापूर्णनादनिश्शेषितद्विपाय नमः<br>ॐ नामविद्राविताशेषभूतरक्षःपिशाचकाय नमः<br>ॐ नामनिश्श्रेणिकारूढ निजलोकनिजप्रजाय नमः<br>ॐ नालीकनाभाय नमः<br>ॐ नागारिमध्याय नमः<br>ॐ नागाधिराड्भुजाय नमः<br>ॐ नगेन्द्रधीराय नमः<br>ॐ नेत्रान्तस्ख्सलदग्निकणच्छटाय नमः<br>ॐ नारीदुरापदाय नमः<br>ॐ नानालोकभीकरविग्रहाय नमः<br>ॐ निस्तारितात्मीय सन्धाय नमः<br>ॐ निजैकज्ञेय वैभवाय नमः<br>ॐ निर्व्याजभक्तप्रह्लाद परिपालन तत्पराय नमः<br>ॐ निर्वाणदायिने नमः<br>ॐ निर्व्याजभक्तैकप्राप्यतत्पदाय नमः<br>ॐ निर्ह्रादमयनिर्घातदलितासुरराड्बलाय नमः<br>ॐ निजप्रतापमार्ताण्डखद्योतीकृतभास्कराय नमः<br>ॐ निरीक्षणक्षतज्योतिर्ग्रहतारोडुमण्डलाय नमः<br>ॐ निष्प्रपञ्चबृहद्भानुज्वालारुणनिरीक्षणाय नमः<br>ॐ नखाग्रलग्नारिवक्ष्ससृतरक्तारुणाम्बराय नमः<br>ॐ निश्शेषरौद्रनीरन्ध्राय नमः<br>ॐ नक्षत्राच्छादितक्षमाय नमः<br>ॐ निर्णिद्र रक्तोत्पलाय नमः<br>ॐ निरमित्राय नमः<br>ॐ निराहवाय नमः<br>ॐ निराकुलीकृतसुराय नमः<br>ॐ निर्णिमेयाय नमः<br>ॐ निरीश्वराय नमः<br>ॐ निरुद्धदशदिग्भागाय नमः<br>ॐ निरस्ताखिलकल्मषाय नमः<br>ॐ निगमाद्रि गुहामध्यनिर्णिद्राद्भुत केसरिणे नमः<br>ॐ निजानन्दाब्धिनिर्मग्नाय नमः<br>ॐ निराकाशाय नमः<br>ॐ निरामयाय नमः<br>ॐ निरहङ्कारविबुधचित्तकानन गोचराय नमः<br>ॐ नित्याय नमः<br>ॐ निष्कारणाय नमः<br>ॐ नेत्रे नमः<br>ॐ निरवद्यगुणोदधये नमः<br>ॐ निदानाय नमः<br>ॐ निस्तमश्शक्तये नमः<br>ॐ नित्यतृप्ताय नमः<br>ॐ निराश्रयाय नमः<br>ॐ निष्प्रपञ्चाय नमः<br>ॐ निरालोकाय नमः<br>ॐ निखिलप्रतिभासकाय नमः<br>ॐ निरूढज्ञानिसचिवाय नमः<br>ॐ निजावनकृताकृतये नमः<br>ॐ निखिलायुधनिर्घातभुजानीकशताद्भुताय नमः<br>ॐ निशितासिज्ज्वलज्जिह्वाय नमः<br>ॐ निबद्धभृकुटीमुखाय नमः<br>ॐ नगेन्द्रकन्दरव्यात्त वक्त्राय नमः<br>ॐ नम्रेतरश्रुतये नमः<br>ॐ निशाकरकराङ्कूर गौरसारतनूरुहाय नमः<br>ॐ नाथहीनजनत्राणाय नमः<br>ॐ नारदादिसमीडिताय नमः<br>ॐ नारान्तराय नमः<br>ॐ नारचित्तये नमः<br>ॐ नाराज्ञेयाय नमः<br>ॐ नरोत्तमाय नमः<br>ॐ नरात्मने नमः<br>ॐ नरलोकांशाय नमः<br>ॐ नरनारायणाय नमः<br>ॐ नभसे नमः<br>ॐ नतलोकपरित्राणनिष्णाताय नमः<br>ॐ नयकोविदाय नमः<br>ॐ निगमागमशाखाग्र प्रवालचरणाम्बुजाय नमः<br>ॐ नित्यसिद्धाय नमः<br>ॐ नित्यजयिने नमः<br>ॐ नित्यपूज्याय नमः<br>ॐ निजप्रभाय नमः<br>ॐ निष्कृष्टवेदतात्पर्यभूमये नमः<br>ॐ निर्णीततत्त्वकाय नमः<br>ॐ नित्यानपायिलक्ष्मीकाय नमः<br>ॐ निश्श्रेयसमयाकृतये नमः<br>ॐ निगमश्रीमहामालाय नमः<br>ॐ निर्दग्धत्रिपुरप्रियाय नमः<br>ॐ निर्मुक्तशेषाहियशसे नमः<br>ॐ निर्द्वन्दाय नमः<br>ॐ निष्कलाय नमः</p>
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		<title>होलाष्टक के दौरान ऐसे करें श्री हरि की पूजा, घर में होगा मां लक्ष्मी का वास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 07:23:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[होलाष्टक]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-30-232244.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-30-232244.png 752w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-30-232244-300x151.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू पंचांग के अनुसार, होली से आठ दिन पहले का समय होलाष्टक कहलाता है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि को मांगलिक कामों से बचना चाहिए, लेकिन यह समय आध्यात्मिक कामों जैसे पूजा-पाठ के लिए बहुत फलदायी माना गया है। देवी-देवताओं को &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, होली से आठ दिन पहले का समय होलाष्टक कहलाता है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि को मांगलिक कामों से बचना चाहिए, लेकिन यह समय आध्यात्मिक कामों जैसे पूजा-पाठ के लिए बहुत फलदायी माना गया है। देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यह समय ‘वरदान’ से कम नहीं है। ऐसी मान्यता है कि अगर इन आठ दिनों में विधि-विधान से भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा की जाए, तो न केवल कष्टों से छुटकारा मिलता है, बल्कि घर में मां लक्ष्मी का स्थाई रूप से वास भी होता है।</p>



<p>ऐसे में इस दिन नारायण का ध्यान करते हुए उनके सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें पीले फूल, मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद विष्णु चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें।</p>



<p><strong>।।श्री विष्णु चालीसा।।<br>।।दोहा।</strong></p>



<p>विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।</p>



<p>कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।</p>



<p><strong>।।चौपाई।।</strong></p>



<p>नमो विष्णु भगवान खरारी।</p>



<p>कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥</p>



<p>प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।</p>



<p>त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥</p>



<p>सुन्दर रूप मनोहर सूरत।</p>



<p>सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥</p>



<p>तन पर पीतांबर अति सोहत।</p>



<p>बैजन्ती माला मन मोहत॥</p>



<p>शंख चक्र कर गदा बिराजे।</p>



<p>देखत दैत्य असुर दल भाजे॥</p>



<p>सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।</p>



<p>काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥</p>



<p>संतभक्त सज्जन मनरंजन।</p>



<p>दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥</p>



<p>सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।</p>



<p>दोष मिटाय करत जन सज्जन॥</p>



<p>पाप काट भव सिंधु उतारण।</p>



<p>कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥</p>



<p>करत अनेक रूप प्रभु धारण।</p>



<p>केवल आप भक्ति के कारण॥</p>



<p>धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।</p>



<p>तब तुम रूप राम का धारा॥</p>



<p>भार उतार असुर दल मारा।</p>



<p>रावण आदिक को संहारा॥</p>



<p>आप वराह रूप बनाया।</p>



<p>हरण्याक्ष को मार गिराया॥</p>



<p>धर मत्स्य तन सिंधु बनाया।</p>



<p>चौदह रतनन को निकलाया॥</p>



<p>अमिलख असुरन द्वंद मचाया।</p>



<p>रूप मोहनी आप दिखाया॥</p>



<p>देवन को अमृत पान कराया।</p>



<p>असुरन को छवि से बहलाया॥</p>



<p>कूर्म रूप धर सिंधु मझाया।</p>



<p>मंद्राचल गिरि तुरत उठाया॥</p>



<p>शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।</p>



<p>भस्मासुर को रूप दिखाया॥</p>



<p>वेदन को जब असुर डुबाया।</p>



<p>कर प्रबंध उन्हें ढूंढवाया॥</p>



<p>मोहित बनकर खलहि नचाया।</p>



<p>उसही कर से भस्म कराया॥</p>



<p>असुर जलंधर अति बलदाई।</p>



<p>शंकर से उन कीन्ह लडाई॥</p>



<p>हार पार शिव सकल बनाई।</p>



<p>कीन सती से छल खल जाई॥</p>



<p>सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।</p>



<p>बतलाई सब विपत कहानी॥</p>



<p>तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।</p>



<p>वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥</p>



<p>देखत तीन दनुज शैतानी।</p>



<p>वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥</p>



<p>हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।</p>



<p>हना असुर उर शिव शैतानी॥</p>



<p>तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे।</p>



<p>हिरणाकुश आदिक खल मारे॥</p>



<p>गणिका और अजामिल तारे।</p>



<p>बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥</p>



<p>हरहु सकल संताप हमारे।</p>



<p>कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥</p>



<p>देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे।</p>



<p>दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥</p>



<p>चहत आपका सेवक दर्शन।</p>



<p>करहु दया अपनी मधुसूदन॥</p>



<p>जानूं नहीं योग्य जप पूजन।</p>



<p>होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥</p>



<p>शीलदया सन्तोष सुलक्षण।</p>



<p>विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥</p>



<p>करहुं आपका किस विधि पूजन।</p>



<p>कुमति विलोक होत दुख भीषण॥</p>



<p>करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण।</p>



<p>कौन भांति मैं करहु समर्पण॥</p>



<p>सुर मुनि करत सदा सेवकाई।</p>



<p>हर्षित रहत परम गति पाई॥</p>



<p>दीन दुखिन पर सदा सहाई।</p>



<p>निज जन जान लेव अपनाई॥</p>



<p>पाप दोष संताप नशाओ।</p>



<p>भव-बंधन से मुक्त कराओ॥</p>



<p>सुख संपत्ति दे सुख उपजाओ।</p>



<p>निज चरनन का दास बनाओ॥</p>



<p>निगम सदा ये विनय सुनावै।</p>



<p>पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥</p>
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