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	<title>हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा को प्रसन्न</title>
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		<pubDate>Thu, 22 Aug 2024 08:03:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="321" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-230-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-230.jpg 743w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-230-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी ( Heramba Sankashti Chaturthi 2024) का दिन बेहद कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। साथ ही सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। वहीं इस दिन गणेश कवच का पाठ भी परम लाभकारी माना गया गया है जिसे करने से जीवन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="321" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-230-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-230.jpg 743w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-230-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी ( Heramba Sankashti Chaturthi 2024) का दिन बेहद कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। साथ ही सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। वहीं इस दिन गणेश कवच का पाठ भी परम लाभकारी माना गया गया है जिसे करने से जीवन की सभी मुश्किलें दूर होती हैं।</p>



<p>हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत बेहद पुण्यदायी माना जाता है। यह दिन बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि के देवता भगवान गणेश की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन बप्पा की पूजा-अर्चना और व्रत करने से जीवन के सभी विघ्नों का नाश होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस माह यह व्रत ( Heramba Sankashti Chaturthi 2024) 22 अगस्त यानी आज मनाया जा रहा है।</p>



<p>ऐसा कहा जाता है कि इस तिथि पर भगवान गणेश के कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से धन से जुड़ी सभी समस्याएं समाप्त होती हैं।</p>



<p><strong>।।गणेश कवचम्।।</strong></p>



<p>ध्यायेत् सिंहगतं विनायकममुं दिग्बाहुमाद्ये युगे</p>



<p>त्रेतायां तु मयूरवाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम्।</p>



<p>द्वापरे तु गजाननं युगभुजं रक्ताङ्गरागं विभुं,</p>



<p>तुर्ये तु द्विभुजं सितांगरुचिरं सर्वार्थदं सर्वदा ॥</p>



<p>विनायकः शिखां पातु परमात्मा परात्परः।</p>



<p>अतिसुन्दरकायस्तु मस्तकं महोत्कटः॥</p>



<p>ललाटं कश्यपः पातु भ्रूयुगं तु महोदरः।</p>



<p>नयने फालचन्द्रस्तु गजास्यस्त्वोष्ठपल्लवौ॥</p>



<p>जिह्वां पातु गणक्रीडश्चिबुकं गिरिजासुतः।</p>



<p>वाचं विनायकः पातु दन्तान् रक्षतु दुर्मुखः ॥</p>



<p>श्रवणौ पाशपाणिस्तु नासिकां चिन्तितार्थदः।</p>



<p>गणेशस्तु मुखं कण्ठं पातु देवो गणञ्जयः॥</p>



<p>स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः।</p>



<p>हृदयं गणनाथस्तु हेरंबो जठरं महान् ॥</p>



<p>धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः।</p>



<p>लिंगं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥</p>



<p>गणक्रीडो जानुजंघे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान्।</p>



<p>एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु॥</p>



<p>क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः।</p>



<p>अंगुलींश्च नखान् पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः॥</p>



<p>सर्वांगानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु।</p>



<p>अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु॥</p>



<p>आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु।</p>



<p>प्राच्यां रक्षतु बुद्धीशः आग्नेयां सिद्धिदायकः॥</p>



<p>दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैरृत्यां तु गणेश्वरः ।</p>



<p>प्रतीच्यां विघ्नहर्ताव्याद्वायव्यां गजकर्णकः॥</p>



<p>कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः ।</p>



<p>दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत्॥</p>



<p>राक्षसासुरवेतालग्रहभूतपिशाचतः ।</p>



<p>पाशाङ्कुशधरः पातु रजस्सत्वतमःस्मृतिम् ॥</p>



<p>ज्ञानं धर्मं च लक्ष्मीं च लज्जां कीर्तिं तथा कुलम्।</p>



<p>वपुर्धनं च धान्यं च गृहदारान् सुतान् सखीन् ॥</p>



<p>सर्वायुधधरः पौत्रान् मयूरेशोऽवतात्सदा ।</p>



<p>कपिलोऽजाविकं पातु गजाश्वान् विकटोऽवतु॥</p>



<p>भूर्जपत्रे लिखित्वेदं यः कण्ठे धारयेत् सुधीः।</p>



<p>न भयं जायते तस्य यक्षरक्षपिशाचतः ॥</p>



<p>त्रिसन्ध्यं जपते यस्तु वज्रसारतनुर्भवेत्।</p>



<p>यात्राकाले पठेद्यस्तु निर्विघ्नेन फलं लभेत् ॥</p>



<p>युद्धकाले पठेद्यस्तु विजयं चाप्नुयाद्द्रुतम् ।</p>



<p>मारणोच्चाटनाकर्षस्तंभमोहनकर्मणि ॥</p>



<p>सप्तवारं जपेदेतद्दिनानामेकविंशतिम्।</p>



<p>तत्तत्फलमवाप्नोति साध्यको नात्रसंशयः ॥</p>



<p>एकविंशतिवारं च पठेत्तावद्दिनानि यः ।</p>



<p>कारागृहगतं सद्यो राज्ञावध्यश्च मोचयेत् ॥</p>



<p>राजदर्शनवेलायां पठेदेतत् त्रिवारतः।</p>



<p>स राजानं वशं नीत्वा प्रकृतीश्च सभां जयेत् ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title> हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी पर करें गणेश जी के 108 नामों का जाप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Aug 2024 11:38:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="314" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-143113-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-143113.png 655w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-143113-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, बप्पा की कृपा से साधक के सभी कार्य निर्वघ्न रूप से पूरे होते हैं। ऐसे में आप भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी के 108 नामों का जाप कर सकते हैं। इससे आपको जीवन में अच्छे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="314" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-143113-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-143113.png 655w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-143113-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, बप्पा की कृपा से साधक के सभी कार्य निर्वघ्न रूप से पूरे होते हैं। ऐसे में आप भाद्रपद की संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी के 108 नामों का जाप कर सकते हैं। इससे आपको जीवन में अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।</p>



<p><strong>संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त<br></strong>भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का प्रारम्भ 22 अगस्त 2024 को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है। वहीं यह तिथि 23 अगस्त 2024 को सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में भाद्रपद माह की हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत गुरुवार 22 अगस्त को किया जाएगा।</p>



<p><strong>गणेश जी के 108 नाम</strong></p>



<p>गजानन: ॐ गजाननाय नमः।<br>गणाध्यक्ष: ॐ गणाध्यक्षाय नमः।<br>विघ्नराज: ॐ विघ्नराजाय नमः।<br>विनायक: ॐ विनायकाय नमः।<br>द्वैमातुर: ॐ द्वैमातुराय नमः।<br>द्विमुख: ॐ द्विमुखाय नमः।<br>प्रमुख: ॐ प्रमुखाय नमः।<br>सुमुख: ॐ सुमुखाय नमः।<br>कृति: ॐ कृतिने नमः।<br>सुप्रदीप: ॐ सुप्रदीपाय नमः।<br>सुखनिधी: ॐ सुखनिधये नमः।<br>सुराध्यक्ष: ॐ सुराध्यक्षाय नमः।<br>सुरारिघ्न: ॐ सुरारिघ्नाय नमः।<br>महागणपति: ॐ महागणपतये नमः।<br>मान्या: ॐ मान्याय नमः।<br>महाकाल: ॐ महाकालाय नमः।<br>महाबला: ॐ महाबलाय नमः।<br>हेरम्ब: ॐ हेरम्बाय नमः।<br>लम्बजठर: ॐ लम्बजठरायै नमः।<br>ह्रस्वग्रीव: ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः।<br>महोदरा: ॐ महोदराय नमः।<br>मदोत्कट: ॐ मदोत्कटाय नमः।<br>महावीर: ॐ महावीराय नमः।<br>मन्त्रिणे: ॐ मन्त्रिणे नमः।<br>मङ्गल स्वरा: ॐ मङ्गल स्वराय नमः।<br>प्रमधा: ॐ प्रमधाय नमः।<br>प्रथम: ॐ प्रथमाय नमः।<br>प्रज्ञा: ॐ प्राज्ञाय नमः।<br>विघ्नकर्ता: ॐ विघ्नकर्त्रे नमः।<br>विघ्नहर्ता: ॐ विघ्नहर्त्रे नमः।<br>विश्वनेत्र: ॐ विश्वनेत्रे नमः।<br>विराट्पति: ॐ विराट्पतये नमः।<br>श्रीपति: ॐ श्रीपतये नमः।<br>वाक्पति: ॐ वाक्पतये नमः।<br>शृङ्गारिण: ॐ शृङ्गारिणे नमः।<br>अश्रितवत्सल: ॐ अश्रितवत्सलाय नमः।<br>शिवप्रिय: ॐ शिवप्रियाय नमः।<br>शीघ्रकारिण: ॐ शीघ्रकारिणे नमः।<br>शाश्वत: ॐ शाश्वताय नमः।<br>बल: ॐ बल नमः।<br>बलोत्थिताय: ॐ बलोत्थिताय नमः।<br>भवात्मजाय: ॐ भवात्मजाय नमः।<br>पुराण पुरुष: ॐ पुराण पुरुषाय नमः।<br>पूष्णे: ॐ पूष्णे नमः।<br>पुष्करोत्षिप्त वारिणे: ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः।<br>अग्रगण्याय: ॐ अग्रगण्याय नमः।<br>अग्रपूज्याय: ॐ अग्रपूज्याय नमः।<br>अग्रगामिने: ॐ अग्रगामिने नमः।<br>मन्त्रकृते: ॐ मन्त्रकृते नमः।<br>चामीकरप्रभाय: ॐ चामीकरप्रभाय नमः।<br>सर्वाय: ॐ सर्वाय नमः।<br>सर्वोपास्याय: ॐ सर्वोपास्याय नमः।<br>सर्व कर्त्रे: ॐ सर्व कर्त्रे नमः।<br>सर्वनेत्रे: ॐ सर्वनेत्रे नमः।<br>सर्वसिद्धिप्रदाय: ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।<br>सिद्धये: ॐ सिद्धये नमः।<br>पञ्चहस्ताय: ॐ पञ्चहस्ताय नमः।<br>पार्वतीनन्दनाय: ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः।<br>प्रभवे: ॐ प्रभवे नमः।<br>कुमारगुरवे: ॐ कुमारगुरवे नमः।<br>अक्षोभ्याय: ॐ अक्षोभ्याय नमः।<br>कुञ्जरासुर भञ्जनाय: ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः।<br>प्रमोदाय: ॐ प्रमोदाय नमः।<br>मोदकप्रियाय: ॐ मोदकप्रियाय नमः।<br>कान्तिमते: ॐ कान्तिमते नमः।<br>धृतिमते: ॐ धृतिमते नमः।<br>कामिने: ॐ कामिने नमः।<br>कपित्थपनसप्रियाय: ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः।<br>ब्रह्मचारिणे: ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।<br>ब्रह्मरूपिणे: ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः।<br>ब्रह्मविद्यादि दानभुवे: ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः।<br>जिष्णवे: ॐ जिष्णवे नमः।<br>विष्णुप्रियाय: ॐ विष्णुप्रियाय नमः।<br>भक्त जीविताय: ॐ भक्त जीविताय नमः।<br>जितमन्मधाय: ॐ जितमन्मधाय नमः।<br>ऐश्वर्यकारणाय: ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः।<br>ज्यायसे: ॐ ज्यायसे नमः।<br>यक्षकिन्नेर सेविताय: ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।<br>गङ्गा सुताय: ॐ गङ्गा सुताय नमः।<br>गणाधीशाय: ॐ गणाधीशाय नमः।<br>गम्भीर निनदाय: ॐ गम्भीर निनदाय नमः।<br>वटवे: ॐ वटवे नमः।<br>अभीष्टवरदाय: ॐ अभीष्टवरदाय नमः।<br>ज्योतिषे: ॐ ज्योतिषे नमः।<br>भक्तनिधये: ॐ भक्तनिधये नमः।<br>भावगम्याय: ॐ भावगम्याय नमः।<br>मङ्गलप्रदाय: ॐ मङ्गलप्रदाय नमः।<br>अव्यक्ताय: ॐ अव्यक्ताय नमः।<br>अप्राकृत पराक्रमाय: ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः।<br>सत्यधर्मिणे: ॐ सत्यधर्मिणे नमः।<br>सखये: ॐ सखये नमः।<br>सरसाम्बुनिधये: ॐ सरसाम्बुनिधये नमः।<br>महेशाय: ॐ महेशाय नमः।<br>दिव्याङ्गाय: ॐ दिव्याङ्गाय नमः।<br>मणिकिङ्किणी मेखालाय: ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः।<br>समस्त देवता मूर्तये: ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः।<br>सहिष्णवे: ॐ सहिष्णवे नमः।<br>सततोत्थिताय: ॐ सततोत्थिताय नमः।<br>विघातकारिणे: ॐ विघातकारिणे नमः।<br>विश्वग्दृशे: ॐ विश्वग्दृशे नमः।<br>विश्वरक्षाकृते: ॐ विश्वरक्षाकृते नमः।<br>कल्याणगुरवे: ॐ कल्याणगुरवे नमः।<br>उन्मत्तवेषाय: ॐ उन्मत्तवेषाय नमः।<br>अपराजिते: ॐ अपराजिते नमः।<br>समस्त जगदाधाराय: ॐ समस्त जगदाधाराय नमः।<br>सर्वैश्वर्यप्रदाय: ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः।<br>आक्रान्त चिद चित्प्रभवे: ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः।<br>श्री विघ्नेश्वराय: ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः।</p>
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