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	<title>हाई बीपी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>हाई बीपी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हाई बीपी और शुगर वालों के लिए ‘कीटो’ क्यों है सबसे बेस्ट? वैज्ञानिकों ने बताई वजह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 05:40:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[हाई बीपी]]></category>
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					<description><![CDATA[क्या आप भी हाई ब्लड शुगर से परेशान हैं और खुद को फिट रखने के लिए खूब एक्सरसाइज करते हैं? अगर हां, तो आपके लिए एक बेहद काम की जानकारी है। आमतौर पर माना जाता है कि कसरत के साथ कम फैट वाला खाना खाना चाहिए, लेकिन एक नई रिसर्च कुछ और ही कहती है। &#8230;]]></description>
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<p>क्या आप भी हाई ब्लड शुगर से परेशान हैं और खुद को फिट रखने के लिए खूब एक्सरसाइज करते हैं? अगर हां, तो आपके लिए एक बेहद काम की जानकारी है। आमतौर पर माना जाता है कि कसरत के साथ कम फैट वाला खाना खाना चाहिए, लेकिन एक नई रिसर्च कुछ और ही कहती है। अगर आप हाई ब्लड शुगर के मरीज हैं, तो व्यायाम का पूरा लाभ उठाने के लिए कम के बजाय ज्यादा फैट वाला आहार लेना आपके लिए कहीं अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>



<p><strong>एक्सरसाइज के फायदे छीन सकता है ‘हाइपरग्लाइसेमिया’<br></strong>हम सभी जानते हैं कि नियमित रूप से की गई शारीरिक गतिविधि हमारे वजन को नियंत्रित करती है, दिल को मजबूत बनाती है और मांसपेशियों का निर्माण करती है। व्यायाम करने से हमारे शरीर की ऑक्सीजन सोखने और उसका उपयोग करने की क्षमता में सुधार होता है, जो लंबे और स्वस्थ जीवन का एक बहुत बड़ा संकेत है।</p>



<p>हालांकि, समस्या यह है कि जिन लोगों को हाई ब्लड शुगर (जिसे हाइपरग्लाइसेमिया भी कहा जाता है) की शिकायत होती है, उन्हें अक्सर कसरत के ये सारे फायदे नहीं मिल पाते। खासकर व्यायाम के दौरान उनके शरीर की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बेहतर नहीं हो पाती। इसके अलावा, हाई ब्लड शुगर का सीधा संबंध दिल और किडनी की बीमारियों के बढ़ते खतरे से है, और यह शारीरिक गतिविधि के प्रति शरीर की मेटाबॉलिक प्रतिक्रिया को भी बाधित कर देता है।</p>



<p><strong>हाई बीपी वालों के लिए ‘कीटो डाइट’ बनी गेम-चेंजर<br></strong>इसी परेशानी का एक शानदार समाधान नए अध्ययन में सामने आया है। ‘साइंस डेली’ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्जीनिया टेक में व्यायाम चिकित्सा विज्ञानी सारा लेस्सार्ड के नेतृत्व में एक अहम शोध किया गया है, जिसके नतीजे ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इस अध्ययन से पता चला है कि अगर आहार में सही बदलाव किया जाए, तो कसरत से मिलने वाले फायदों को वापस पाया जा सकता है।</p>



<p>वैज्ञानिकों ने यह शोध चूहों पर किया। हाई ब्लड शुगर वाले चूहों को कीटो डाइट दी गई। इस डाइट की खासियत यह होती है कि इसमें फैट की मात्रा अधिक होती है और कार्बोहाइड्रेट बहुत ही कम होता है। नतीजे बहुत ही सकारात्मक रहे, मात्र एक सप्ताह के अंदर ही चूहों का ब्लड शुगर स्तर बिल्कुल सामान्य हो गया। इतना ही नहीं, कसरत के प्रति उनकी मांसपेशियों की प्रतिक्रिया में भी बहुत शानदार सुधार देखने को मिला।</p>
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		<title>रोज-रोज गोलियां खाने का झंझट होगा खत्म&#8230; साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन से कंट्रोल रहेगा हाई बीपी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 05:03:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[हाई बीपी]]></category>
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					<description><![CDATA[दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या है, जिससे 2024 में 1.4 अरब लोग प्रभावित हैं। अब शोधकर्ताओं ने एक नया इंजेक्शन, जिलेबेसिरन, विकसित किया है जो रोजाना दवा लेने की बजाय साल में सिर्फ दो बार लेने से बीपी को कंट्रोल कर सकता है। बता दें, यह इंजेक्शन हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी &#8230;]]></description>
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<p>दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या है, जिससे 2024 में 1.4 अरब लोग प्रभावित हैं। अब शोधकर्ताओं ने एक नया इंजेक्शन, जिलेबेसिरन, विकसित किया है जो रोजाना दवा लेने की बजाय साल में सिर्फ दो बार लेने से बीपी को कंट्रोल कर सकता है। बता दें, यह इंजेक्शन हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा कम करने में मददगार हो सकता है और विशेषज्ञ इसे भविष्य के लिए एक प्रभावी उपाय मान रहे हैं।</p>



<p>हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में दुनियाभर में 30-79 साल की उम्र के 140 करोड़ लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या थी । ये आंकड़ा इस आयु वाले कुल लोगों का करीब 33% है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों में भी हाइपरटेंशन की दिक्कत बढ़ती जा रही है, जो कम उम्र में ही उन्हें कई प्रकार की क्रानिक बीमारियों का शिकार बनाने वाली हो सकती है।</p>



<p>हाइपरटेंशन के शिकार मरीजों को डाक्टर नियमित रूप से दवा लेते रहने की सलाह देते हैं, ताकि उन्हें ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की दिक्कतों से बचाया जा सके।</p>



<p>मरीजों को जीवनभर ये दवाएं लेनी पड़ सकती हैं। शोधकर्ताओं ने बीपी की दवाओं का विकल्प तलाश लिया है। शोधकर्ताओं ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि जल्द ही रोजाना बिना दवा लिए भी आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रख पाएंगे। इसके लिए विकल्प के तौर पर एक इंजेक्शन की चर्चा है, जिसे गोलियों की जगह साल में सिर्फ दो बार लेने से आप बीपी को कंट्रोल में रख पाएंगे। जिलेबेसिरन नाम के इस इंजेक्शन को विशेषज्ञ भविष्य के लिए असरदार उपाय के तौर पर देख रहे हैं।</p>



<p><strong>हाइपरटेंशन और कई गंभीर समस्याओं का कम होगा खतरा<br></strong>द लैंसेट जर्नल में इस इंजेक्शन से बीपी को मरीजों को होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से हाइपरटेंशन को मैनेज करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दशकों से मौजूद दवाओं के बावजूद हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या दुनियाभर में बढ़ती ही जा रही है। माना जा रहा है कि जिलेबेसिरन इंजेक्शन लंबे समय तक हाइपरटेंशन को कंट्रोल में रखने में मददगार हो सकता है । इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के साथ किडनी &#8211; आंख की समस्याओं के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।</p>



<p><strong>कैसे काम करेगा यह इंजेक्शन?<br></strong>फिलहाल ये अपने लेट- स्टेज ग्लोबल ट्रायल में हैं। साल में दो बार लगने वाले इस इंजेक्शन से हाई बीपी को कंट्रोल किया जा सकता है। रोश और एल्नीलम फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित जिलेबेसिरन इंजेक्शन को साल में दो बार लगवाने की जरूरत होगी। इसमें लिवर में एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को कम करने के लिए स्माल इंटरफेरिंग आरएनए (एआइआरएनए) टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया गया है। एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को धीमा कर यह इंजेक्शनछह महीने तक ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकता है।</p>



<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ?<br></strong>विशेषज्ञ कहते हैं कि शुरुआती ट्रायल्स से पता चलता है कि ये इंजेक्शन असरदार हो सकता है, लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन जिंदगी भर चलने वाली बीमारी है और ये थेरेपी अभी क्लिनिकल जांच के तहत हैं । स्टैंडर्ड इलाज यानी रोजाना ली जाने वाली दवाओं की जगह लेने के लिए ये कितनी प्रभावी है, फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, पिछले दो दशकों में बच्चों और किशोरों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले लगभग दोगुना हो गए है। इसके कारण दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।</p>
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		<title>हमारी ये आदत हाई बीपी को जानलेवा बना देती है,जानें- लक्ष्ण व बचाव..</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%be/225750</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Apr 2019 09:40:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[जानलेवा]]></category>
		<category><![CDATA[हमारी ये आदत]]></category>
		<category><![CDATA[हाई बीपी]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप भी हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं, तो काम का ज्यादा दबाव लेने से बचें। ताजा शोध के मुताबिक, काम के दबाव और अनियमित नींद के कारण हाई बीपी से मौत का खतरा तीन गुना तक बढ़ सकता है। यह खतरा इतने चुपचाप और धीरे-धीरे आगे बढ़ता है कि इसे Silent Killer भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अगर आप भी हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं, तो काम का ज्यादा दबाव लेने से बचें। ताजा शोध के मुताबिक, काम के दबाव और अनियमित नींद के कारण हाई बीपी से मौत का खतरा तीन गुना तक बढ़ सकता है। यह खतरा इतने चुपचाप और धीरे-धीरे आगे बढ़ता है कि इसे Silent Killer भी कहा जा सकता है।</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-225754 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/6020032019120843.jpg" alt="" width="500" height="341" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/6020032019120843.jpg 500w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/6020032019120843-300x205.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/6020032019120843-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जर्मनी स्थित टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख के प्रोफेसर कार्ल हिंज लाडविग ने कहा, ‘नींद अपनी ऊर्जा को पुन: संजोने का तरीका है। अगर काम का दबाव हो, तो अच्छी नींद उसके दुष्प्रभाव को कम करती है। दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं पाता। काम के दबाव में लोग नींद भी पर्याप्त नहीं लेते। यह दबाव और नींद की कमी मिलकर हाई बीपी को ज्यादा जानलेवा बना देते हैं।’ शोध के दौरान 25 से 65 साल की उम्र के 2 हजार ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें दिल से जुड़ी कोई बीमारी या डायबिटीज की परेशानी नहीं थी। इस दौरान बिना दबाव के अच्छी नींद लेने वालों और दबाव व कम नींद लेने वालों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।</strong></p>
<p><strong>हाई ब्लड प्रेशर क्&#x200d;या है?</strong><br />
<strong>आपको पता होगा कि हमारे शरीर में मौजूद रक्त नसों में लगातार दौड़ता रहता है और इसी रक्त के माध्यम से शरीर के सभी अंगों तक ऊर्जा और पोषण के लिए जरूरी ऑक्सीजन, ग्लूकोज, विटामिन्स, मिनरल्स आदि पहुंचते हैं। ब्लड प्रेशर उस दबाव को कहते हैं, जो रक्त प्रवाह की वजह से नसों की दीवारों पर पड़ता है। आमतौर पर ये ब्लड प्रेशर इस बात पर निर्भर करता है कि हृदय कितनी गति से रक्त को पंप कर रहा है और रक्त को नसों में प्रवाहित होने में कितने अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल गाइडलाइन्स के अनुसार 130/80 mmHg से ज्यादा रक्त का दबाव हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आता है।</strong></p>
<p><strong>हाई ब्लड प्रेशर का कारण</strong><br />
<strong>हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप दो तरह का होता है&#8230;</strong></p>
<p><strong>प्राइमरी हाइपरटेंशन &#8211; प्राइमरी हाइपरटेंशन ज्यादातर युवाओं को होता है और इसका कोई खास कारण नहीं होता है बल्कि लगातार अनियमित जीवनशैली की वजह से ये धीरे-धीरे समय के साथ हो जाता है। इस तरह के ब्लड प्रेशर का कारण बहुत आम होता है जैसै: मोटापा नींद की कमी अत्यधिक गुस्सा करना मांसाहारी भोजन का अधिक सेवन तनाव तैलीय पदार्थों और अस्वस्थ खान-पान।</strong></p>
<p><strong>सेकेंडरी हाइपरटेंशन &#8211; सेकेंडरी हाइपरटेंशन वो है जो शरीर में किसी रोग के कारण या किसी स्थिति के कारण हो जाता है। आमतौर पर सेकेंडरी हाइपरटेंशन के निम्न कारण होते हैं। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया किडनी का कोई रोग एड्रीनल ग्लैंड ट्यूमर थायरॉइड की समस्या अनुवांशिक कारणों से नसों में कोई खराबी गर्भनिरोधक दवाओं का अधिक सेवन, सर्दी-जुकाम और दर्द की दवाओं का अधिक सेवन शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि का नशा करने से।</strong></p>
<p><strong>हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण</strong><br />
<strong>उच्&#x200d;च रक्&#x200d;तचाप के प्रारंभिक लक्षण में रोगी के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहने लगता है। कई बार इस तरह की परेशानी को वह नजरअंदाज कर देता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्&#x200d;या बन जाती है। आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर के ये लक्षण होते हैं।</strong></p>
<ul>
<li><strong>तनाव होना सिर में दर्द सांसों का तेज चलना और कई बार सांस लेने में तकलीफ होना सीने में दर्द की समस्या आंखों से दिखने में परिवर्तन होना जैसे धुंधला दिखना पेशाब के साथ खून निकलना सिर चकराना थकान और सुस्ती लगना नाक से खून निकलना नींद न आना दिल की धड़कन बढ़ जाना।</strong></li>
<li><strong>कई बार कुछ लोगों में उच्&#x200d;च रक्&#x200d;तचाप से संबंधित कोई भी लक्षण नजर नहीं आता। उन्&#x200d;हें इस बारे में चेकअप के बाद ही जानकारी होती है।</strong></li>
<li><strong>हाई ब्&#x200d;लड प्रेशर के लक्षण दिखाई न देना किडनी और हार्ट के लिए घातक हो सकता है इसलिए अगर आपको लगातार थकान या आलस जैसी सामान्य समस्या भी है, तो अपना ब्लड प्रेशर जरूर जांच करवाएं।</strong></li>
</ul>
<p><strong>हाइपरटेंशन का दिल पर प्रभाव</strong><br />
<strong>यह हृदय को रक्&#x200d;त पहुंचाने वाली धमनियों को सख्&#x200d;त अथवा मोटा कर सकता है। जिससे उनकी चौड़ाई कम हो जाती है। परिणामस्&#x200d;वरूप हृदय को पर्याप्&#x200d;त मात्रा में रक्&#x200d;त नहीं मिल पाता और एन्&#x200d;जिनिया, हार्ट डिजीज और कोरोनेरी हार्ट डिजीज होने का अंदेशा काफी बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक हो सकता है। वास्&#x200d;तव में जिस व्&#x200d;यक्ति को एक्&#x200d;यूट हार्ट अटैक आया हो, उन्&#x200d;हें पहले से हाइपरटेंश होता है, जो चोरी से अचानक सामने आता है और फिर उसका इलाज किया जाता है। हाइपरटेंशन से दिल की मांसपेशियां असामान्&#x200d;य रूप से मोटी हो जाती हैं, जिसे बायें निलय अतिवृद्धि कहा जाता है। जो भविष्&#x200d;य में कार्डियोवस्&#x200d;कुलर डिजीज के कारण मौत होने का बड़ा कारक होता है।</strong></p>
<p><strong>नमक लें कम</strong><br />
<strong>डॉक्टर के अनुसार ब्लड प्रेशर के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है, अधिक मात्रा में नमक का सेवन, जिससे कि हृदय की समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप समय रहते अपने खान-पान पर ध्यान देंगे तो आगे जाकर आपको किसी प्रकार की समस्या नहीं आयेगी।</strong></p>
<p><strong>सीढ़ियों का प्रयोग करें</strong><br />
<strong>प्रतिदिन व्यायाम करना हृदय सवास्थ्&#x200d;य के लिए अच्छा होता है। ऑफिस में लिफ्ट का प्रयोग करने के बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करें।</strong></p>
<p><strong>कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नियंत्रण</strong><br />
<strong>ऐसे आहार लें जिनसे शरीर में कालेस्ट्राल का स्तर नियंत्रित रहे क्योंकि कोलेस्ट्राल का स्तर हृदय स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य को प्रभावित करता है। सेब और संतरे जैसे फल, प्याज़, ब्रोकोली जैसी सब्जि़यों और मछली का सेवन करें।</strong></p>
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