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	<title>हाईकोर्ट &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>हाईकोर्ट &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>PSPCL की संपत्तियों की बिक्री पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार, जानें क्या है पूरा मामला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 08:00:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-27-235941.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-27-235941.png 763w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-27-235941-300x174.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />&#160;पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की संपत्तियों के हस्तांतरण और संभावित बिक्री पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लगाई गई अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि 13 मार्च को अगली सुनवाई तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि पीएसपीसीएल पर 2500 करोड़ रुपए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-27-235941.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-27-235941.png 763w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-27-235941-300x174.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>&nbsp;पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की संपत्तियों के हस्तांतरण और संभावित बिक्री पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लगाई गई अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि 13 मार्च को अगली सुनवाई तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि पीएसपीसीएल पर 2500 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय बोझ का दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा।</p>



<p>मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष राज्य सरकार ने रोक हटाने की मांग करते हुए दलील दी कि संपत्तियों की बिक्री नहीं, बल्कि विकास के उद्देश्य से उनका हस्तांतरण किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि यह फैसला लगभग 30 साल पुरानी नीति के तहत लिया गया है, जिसे कभी चुनौती नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पीएसपीसीएल घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में है और राज्य सरकार आवासीय एवं व्यावसायिक विकास के माध्यम से राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहती है। हालांकि याचिकाकर्ता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल के लगभग 2582.24 करोड़ रुपए बकाया हैं, जिसके कारण कंपनी वित्तीय दबाव में आकर अपनी अचल संपत्तियां हस्तांतरित करने के लिए मजबूर हो रही है।</p>



<p><strong>वित्तीय बोझ होने का दावा सही मिला तो जनहित के दायरे में आएगा मामला</strong><br>बेंच ने प्रारंभिक आपत्तियों पर फिलहाल राहत देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं का यह दावा सही है कि कंपनी भारी वित्तीय बोझ के कारण संपत्ति हस्तांतरण के लिए मजबूर हो रही है, तो यह मुद्दा निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका स्वीकार करने का प्रश्न खुला रहेगा और राज्य सरकार अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत बहस कर सकती है। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह पैरा-वाइज जवाब और रोक हटाने संबंधी आवेदन आवश्यक दस्तावेजों एवं हलफनामे सहित दाखिल करे।</p>
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		<title>करेवा विवाह सामाजिक समरसता का माध्यम: हाईकोर्ट ने कहा-इसे पुनर्विवाह मानकर परिवार पेंशन रोकना गलत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 08:10:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855.png 873w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855-300x166.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855-768x425.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत मान्य करेवा विवाह जिसमें विधवा अपने दिवंगत पति के भाई से विवाह करती है, इसका सामाजिक उद्देश्य है। यह परंपरा नाबालिग बच्चों को संरक्षण, विधवा की गरिमा की रक्षा और वृद्ध माता-पिता की देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने परिवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855.png 873w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855-300x166.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-26-000855-768x425.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत मान्य करेवा विवाह जिसमें विधवा अपने दिवंगत पति के भाई से विवाह करती है, इसका सामाजिक उद्देश्य है। यह परंपरा नाबालिग बच्चों को संरक्षण, विधवा की गरिमा की रक्षा और वृद्ध माता-पिता की देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करती है।</p>



<p>पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने परिवार पेंशन के सामाजिक उद्देश्य को पुनः रेखांकित करते हुए आदेश दिया है कि मृत कर्मचारी की विधवा द्वारा देवर से किया गया ‘करेवा विवाह’ पुनर्विवाह की श्रेणी में नहीं है बल्कि यह सामाजिक समरसता का माध्यम है।</p>



<p>कोर्ट ने कहा कि ऐसे विवाह के आधार पर विधवा को परिवार पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता और राज्य को नसीहत दी कि वह आदर्श नियोक्ता की तरह व्यवहार करे।</p>



<p>जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने दो संबंधित रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत विधवा की परिवार पेंशन बंद कर दी गई थी और बाद में वसूली के आदेश भी जारी किए गए थे। अदालत ने पेंशन तत्काल बहाल करने के निर्देश दिया है।</p>



<p>अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत मान्य करेवा विवाह जिसमें विधवा अपने दिवंगत पति के भाई से विवाह करती है, इसका सामाजिक उद्देश्य है। यह परंपरा नाबालिग बच्चों को संरक्षण, विधवा की गरिमा की रक्षा और वृद्ध माता-पिता की देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे विवाह से मृतक कर्मचारी के परिवार से विधवा और उसके बच्चों का संबंध समाप्त नहीं होता। परिवार की संरचना और आर्थिक जिम्मेदारियों में कोई विखंडन नहीं होता, क्योंकि बच्चे उसी संरक्षक व्यवस्था में रहते हैं और बुजुर्ग माता-पिता भी उसी घर में निवास करते हैं।</p>



<p>अदालत ने कहा कि सेवा नियमों में पुनर्विवाह पर अयोग्यता का प्रावधान इस धारणा पर आधारित है कि विधवा की जिम्मेदारी अब नया परिवार उठाएगा। लेकिन ‘करेवा विवाह’ की स्थिति में यह धारणा लागू नहीं होती। नियमों की यांत्रिक और कठोर व्याख्या करना सामाजिक वास्तविकताओं की अनदेखी करना होगा। इससे परिवार पेंशन जैसे कल्याणकारी प्रावधानों की मूल भावना ही समाप्त हो जाएगी।</p>



<p>अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को केवल इस आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता कि उसने पुनर्विवाह किया, जबकि उसके दूसरे विवाह से मृतक पति के अन्य आश्रितों को कोई नुकसान या अनुचित लाभ नहीं हुआ। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार पेंशन केवल विधवा का अधिकार नहीं, बल्कि मृत कर्मचारी के सभी निकट आश्रितों का सामूहिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार भी इसमें शामिल है। कई परिवारों के लिए सेवानिवृत्ति लाभ और पेंशन ही आजीविका का एकमात्र साधन होते हैं।</p>



<p><strong>20 साल बाद 12.66 लाख की वसूली पर रोक</strong><br>संबंधित याचिका में वर्ष 1996 से 2019 तक कथित रूप से अधिक भुगतान होने के आधार पर 12,66,082 रुपये की वसूली शुरू की गई थी। अदालत ने पाया कि न तो याचिकाकर्ता और न ही उसकी बेटी द्वारा कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी दी गई थी। अदालत ने कहा कि जब अतिरिक्त भुगतान का पता दो दशक से अधिक समय बाद चला, तो इतनी देरी से वसूली की मांग करना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित प्राधिकारी याचिकाकर्ताओं की परिवार पेंशन तत्काल बहाल करें।</p>
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		<title> जाम से निपटने को हाईकोर्ट में पुलिस का प्रस्ताव, स्कूलों के गेट पर लगें मार्शल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 06:36:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-223512.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-223512.png 746w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-223512-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में राजधानी लखनऊ के 1500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय जाम की गंभीर समस्या दूर करने के लिए कम से कम 10 प्रशिक्षित मार्शलों की तैनाती का प्रस्ताव पेश किया गया। कोर्ट में पेश हुए डीसीपी ट्रैफिक ने अदालत को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-223512.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-223512.png 746w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-223512-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में राजधानी लखनऊ के 1500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय जाम की गंभीर समस्या दूर करने के लिए कम से कम 10 प्रशिक्षित मार्शलों की तैनाती का प्रस्ताव पेश किया गया। कोर्ट में पेश हुए डीसीपी ट्रैफिक ने अदालत को बताया कि इसके लिए वह इन मार्शलों को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार हैं, जो स्कूलों के अंदर और बाहर यातायात की व्यवस्था संभालेंगे।</p>



<p>कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह इस मामले पर गौर करके यातायात की समस्या दूर करने के लिए विभिन्न विकास एजेंसियों से जानकारी लेकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा पेश करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को नियत की है।</p>



<p><strong>छात्राओं को परेशान किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की<br></strong>न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक के निवासियों की ओर से वर्ष 2020 में दाखिल की गई जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्कूलों की वजह से लगने वाले जाम की समस्या से निजात के संबंध में पूर्व में कई आदेश दिए हैं। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने बालिका स्कूलों की छात्राओं को परेशान किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की थी।</p>



<p>बीती 17 जनवरी को मामले की सुनवाई के समय एडीजी ट्रैफिक ए. सतीश गणेश और डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित कोर्ट में पेश हुए और मार्शलों की तैनाती का प्रस्ताव दिया। यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों को अंदर-बाहर यातायात व्यवस्था नियंत्रित करने की जिम्मेदारी देने के लिए दिशा-निर्देश बनाए जा सकते हैं।</p>



<p><strong>कोर्ट ने पूछा<br></strong>नए स्कूलों के निर्माण की स्वीकृति देते वक्त क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है? विकास एजेंसियां मंजूरी देते समय यातायात के पहलू पर ध्यान दे रहीं हैं या नहीं? इसकी जानकारी भी अगली सुनवाई में पेश की जाए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>हाईकोर्ट ने कहा: छोटे प्रतिष्ठानों को संचालन के पैमाने पर प्रदूषण की छूट नहीं दी जा सकती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 06:10:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="427" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018-300x207.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018-110x75.png 110w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />दिल्ली हाईकोर्ट ने मिठाई की दुकान के मालिक की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, जिसमें उन्होंने बिना किसी उपचार के फर्श और बर्तनों/कंटेनरों की सफाई से उत्पन्न अपशिष्ट जल (एफ्लुएंट) को सार्वजनिक सीवर में छोड़ दिया था। अदालत ने कहा कि छोटे प्रतिष्ठानों को केवल उनके आकार या संचालन के पैमाने के आधार पर इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="427" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018-300x207.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-05-221018-110x75.png 110w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दिल्ली हाईकोर्ट ने मिठाई की दुकान के मालिक की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, जिसमें उन्होंने बिना किसी उपचार के फर्श और बर्तनों/कंटेनरों की सफाई से उत्पन्न अपशिष्ट जल (एफ्लुएंट) को सार्वजनिक सीवर में छोड़ दिया था। अदालत ने कहा कि छोटे प्रतिष्ठानों को केवल उनके आकार या संचालन के पैमाने के आधार पर इस अपराध से मुक्त नहीं किया जा सकता।</p>



<p>न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि जल निकायों को प्रदूषित करने के गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले परिणाम होते हैं। छोटे ढाबे, रेस्तरां और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां मिलकर बिना उपचारित एफ्लुएंट को सार्वजनिक सीवर और नालों में छोड़कर नदियों को काफी हद तक प्रदूषित करती हैं।</p>



<p>अदालत ने कहा कि पर्यावरणीय मानदंडों का पालन सभी की साझा जिम्मेदारी है। छोटे पैमाने के कारोबारियों को भी प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे, क्योंकि सामूहिक रूप से उनका योगदान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।</p>



<p>यह मामला चांदनी चौक स्थित एक मिठाई और नमकीन निर्माण इकाई से जुड़ा है, जहां दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कोई उपचार सुविधा नहीं थी और अपशिष्ट सीधे सार्वजनिक सीवर में डाला जा रहा था। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में मालिक राज कुमार गुप्ता को दोषी ठहराया था और सजा सुनाई थी।</p>
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		<title>हरियाणा के मंत्री गौरव गौतम को झटका: हाईकोर्ट ने की अर्जी रद्द</title>
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		<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 06:19:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="564" height="323" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/drfs-3-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/drfs-3.jpg 564w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/drfs-3-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 564px) 100vw, 564px" />चुनाव याचिका में पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने आरोप लगाया है कि अक्तूबर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान पलवल-84 विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक आधार पर वोट मांगे तथा चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए सांप्रदायिक अपीलें और धार्मिक आयोजनों का उपयोग किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील हरियाणा के &#8230;]]></description>
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<p>चुनाव याचिका में पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने आरोप लगाया है कि अक्तूबर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान पलवल-84 विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक आधार पर वोट मांगे तथा चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए सांप्रदायिक अपीलें और धार्मिक आयोजनों का उपयोग किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सालिसिटर जनरल मोहन जैन ने अदालत को बताया कि चुनाव याचिका के साथ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य संलग्न हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि मंत्री गौरव गौतम ने वास्तव में धर्म के नाम पर वोट मांगे।</p>



<p>गौरव गौतम की ओर से दाखिल आवेदन में यह तर्क दिया गया कि चुनाव याचिका में न तो कोई ठोस तथ्य हैं और न ही वह कानून के अनुरूप कोई एक्शन बनता है। याचिका में लगाए गए आरोप केवल सामान्य और अस्पष्ट हैं इसलिए उन्हें खारिज किया जाए परंतु अदालत ने इन सभी तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि याचिका में धार्मिक आयोजनों, इंटरनेट मीडिया से जुड़े वीडियो, स्थान, तिथि और परिस्थिति सहित मटेरियल फैक्ट्स का उल्लेख किया गया है।</p>



<p>अदालत ने कहा कि यह अदालत का काम होगा कि इन वीडियो व दस्तावेजों की प्रामाणिकता और साक्ष्य मूल्य का आकलन नियमित सुनवाई के दौरान किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि केवल शब्दों के इस्तेमाल जैसे सनातन या हिंदुत्व के अर्थ का भी मूल्यांकन गवाहियों और परिस्थितियों के आधार पर ट्रायल के दौरान किया जाएगा इसलिए याचिका को प्रारंभिक आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।</p>



<p>गौरतलब है कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में गौतम गौतम ने 1,09,118 वोटों से जीत दर्ज की थी जबकि करण सिंह दलाल को 75,513 वोट मिले थे। अब इस मामले की नियमित सुनवाई होगी और चुनाव याचिका को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। दलाल ने आरोप लगाया है कि गौतम ने चुनाव प्रचार के दौरान धर्म और सांप्रदायिक भावनाओं का सहारा लिया जिससे उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।</p>
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