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	<title>स्किन कैंसर &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>स्किन कैंसर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>स्किन कैंसर का पता लगाने में डॉक्टरों का नया हथियार बनेगा AI</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 05:08:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्किन कैंसर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/k.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/k.jpg 717w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/k-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />एक नए अध्ययन में बुधवार को यह बात सामने आई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उन लोगों में शुरुआती खतरे के पैटर्न की पहचान कर सकता है, जिन्हें मेलानोमा होने का ज्यादा खतरा है। एआई माडल प्रारंभिक चरण के मेलेनोमा और अन्य त्वचा कैंसर का पता लगाने में ज्यादा सटीकता दिखा सकते हैं। यह अध्ययन स्वीडन की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/k.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/k.jpg 717w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/k-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>एक नए अध्ययन में बुधवार को यह बात सामने आई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उन लोगों में शुरुआती खतरे के पैटर्न की पहचान कर सकता है, जिन्हें मेलानोमा होने का ज्यादा खतरा है। एआई माडल प्रारंभिक चरण के मेलेनोमा और अन्य त्वचा कैंसर का पता लगाने में ज्यादा सटीकता दिखा सकते हैं।</p>



<p>यह अध्ययन स्वीडन की वयस्क जनसंख्या के लिए नियमित रूप से एकत्रित रजिस्ट्री डाटा पर आधारित था । विश्लेषण किए गए डाटा में उम्र, लिंग, निदान, दवाओं का उपयोग और सामाजिक-आर्थिक स्थिति शामिल थी। इस अध्ययन में शामिल 6,036,186 व्यक्तियों में से 38,582 (0.64 प्रतिशत) लोगों को अध्ययन के पांच वर्षों के दौरान मेलेनोमा विकसित हो गया।</p>



<p>एआई न केवल संदिग्ध घावों की पहचान करता है, बल्कि यह रोगी के मेटाडेटा (उम्र, लिंग) और डर्मोस्कोपिक छवियों के संयोजन का उपयोग करके उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान कर सकता है, जिससे पांच साल में कैंसर होने का अनुमान लगाया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भविष्य में रजिस्ट्री डाटा को अधिक रणनीतिक उपयोग&nbsp;&nbsp;</h2>



<p>गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी की साहलग्रेन्स्का एकेडमी के डाक्टोरल छात्र मार्टिन गिलस्टेड्ट ने कहा कि &#8221; अध्ययन दिखाता है कि स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में पहले से उपलब्ध डाटा का उपयोग मेलेनोमा के उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए किया जा सकता है । हमारे परिणाम स्पष्ट संकेत देते हैं कि भविष्य में रजिस्ट्री डाटा को अधिक रणनीतिक रूप से उपयोग किया जा सकता है। गिलस्टेड सैलग्रेंस्का विश्वविद्यालय अस्पताल के त्वचाविज्ञान और वेनेरोलाजी विभाग में एक सांख्यिकीविद् हैं।</p>



<p>जब शोधकर्ताओं ने अलग-अलग एआई माडल्स की तुलना की, तो अंतर स्पष्ट हो गया। सबसे उन्नत माडल ने उन व्यक्तियों को लगभग 73 प्रतिशत मामलों में पहचानने में सक्षम था, जिन्होंने बाद में मेलेनोमा विकसित किया, जबकि उन लोगों की पहचान नहीं हो पाईं जिन्हें यह बीमारी नहीं हुई इसकी तुलना में जब केवल उम्र और लिंग का इस्तेमाल किया गया था, तब यह आंकड़ा लगभग 64 प्रतिशत था।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पांच साल में मेलानोमा होने का जोखिम लगभग 33 प्रतिशत&nbsp;</h2>



<p>जांच-पड़ताल, दवाओं और सामाजिक-जनसांख्यिकीय डाटा के मेल से ऐसे छोटे ज्यादा जोखिम वाले समूहों की पहचान करना मुमकिन हो पाया, जिनके लिए पांच साल में मेलानोमा होने का जोखिम लगभग 33 प्रतिशत था।</p>



<p>गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में डर्मेटोलाजी और वेनेरोलाजी के एसोसिएट प्रोफेसर सैम पोलेसी ने कहा कि हमारे विश्लेषण बताते हैं कि छोटे ज्यादा जोखिम वाले समूहों की चुनिंदा स्क्रीनिंग से ज्यादा सटीक निगरानी और स्वास्थ्य संसाधनों का ज्यादा असरदार इस्तेमाल, दोनों हो सकते हैं। इसमें आबादी के डाटा को &#8216;प्रिसिजन मेडिसिन&#8217; में शामिल करना और क्लिनिकल जांचों को और बेहतर बनाना शामिल होगा।&#8221;</p>



<p>इस तरीके को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में लागू करने से पहले और अधिक शोध और नीतिगत निर्णयों की आवश्यकता है। हालांकि, परिणामों से यह पता चलता है कि बड़ी मात्रा में रजिस्ट्री डाटा पर प्रशिक्षित एआई माडल, मेलानोमा के लिए अधिक व्यक्तिगत जोखिम आकलन और भविष्य की स्क्रीनिंग रणनीतियों के लिए सहायता का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं। एआई उपकरणों का उपयोग त्वचा विशेषज्ञ द्वारा किए जाने वाले निदान के सहायक के रूप में किया जाना चाहिए, न कि उसके विकल्प के रूप में।</p>
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		<title>स्किन कैंसर को रोकने में मददगार हो सकते हैं विटामिन सप्लीमेंट्स</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 04:49:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्किन कैंसर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="426" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1.jpg 687w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />दुनिया में तेजी से बढ़ते Skin Cancer के मामलों के बीच वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है। हालिया शोध में पता चला है कि रोजाना लिया जाने वाला एक सामान्य विटामिन सप्लीमेंट, स्किन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। जी हां, यह कोई महंगी दवा नहीं, बल्कि विटामिन बी3 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="426" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1.jpg 687w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ass-1-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दुनिया में तेजी से बढ़ते Skin Cancer के मामलों के बीच वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है। हालिया शोध में पता चला है कि रोजाना लिया जाने वाला एक सामान्य विटामिन सप्लीमेंट, स्किन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। जी हां, यह कोई महंगी दवा नहीं, बल्कि विटामिन बी3 का एक रूप है जिसे निकोटिनामाइड कहा जाता है।</p>



<p><strong>कैसे काम करता है यह विटामिन?<br></strong>निकोटिनामाइड शरीर की प्राकृतिक मरम्मत प्रणाली को मजबूत करता है। जब त्वचा पर सूरज की पराबैंगनी (UV) किरणों से नुकसान होता है, तो यह विटामिन उन कोशिकाओं को ठीक करने में मदद करता है जो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, यह प्रतिरक्षा तंत्र को भी सक्रिय रखता है ताकि वह असामान्य कोशिकाओं को पहचानकर समय रहते उन्हें हटा सके।</p>



<p><strong>अध्ययन में क्या पाया गया?<br></strong>यह शोध अमेरिका के 33,000 से अधिक पूर्व सैनिकों पर किया गया। इनमें से लगभग 12,000 प्रतिभागियों ने रोजाना दो बार 500 मिलीग्राम निकोटिनामाइड लेना शुरू किया, जबकि बाकी लोगों ने नहीं लिया। छह महीने से अधिक समय तक चले इस अध्ययन में परिणाम काफी प्रभावशाली रहे। निकोटिनामाइड लेने वालों में नए त्वचा कैंसर के मामलों का खतरा 14 प्रतिशत तक कम देखा गया। वहीं जिन लोगों ने हाल ही में पहली बार त्वचा कैंसर झेला था, उनमें इसे नियमित रूप से लेने पर अन्य कैंसर विकसित होने की संभावना 54 प्रतिशत तक घट गई।</p>



<p><strong>क्यों जरूरी है यह अध्ययन?<br></strong>सूरज की किरणों से बचाव और सनस्क्रीन का उपयोग लंबे समय से त्वचा कैंसर से सुरक्षा के मुख्य उपाय रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद, दुनिया भर में स्किन कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासतौर पर उन लोगों में जो अधिक धूप में रहते हैं, जिनकी त्वचा गोरी है या जिनकी उम्र ज्यादा है। ऐसे में यह सस्ता और आसानी से मिलने वाला विटामिन, रोकथाम के लिए एक नया और सरल रास्ता साबित हो सकता है।</p>



<p><strong>क्या यह सभी के लिए फायदेमंद है?<br></strong>विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह नतीजे शुरुआती हैं, और हर व्यक्ति को इस सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। फिर भी यह खोज यह दिखाती है कि एक साधारण पोषक तत्व भी हमारे शरीर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।</p>



<p>कभी-कभी बड़ी समस्याओं का हल बहुत साधारण चीजों में छिपा होता है। निकोटिनामाइड यानी विटामिन बी3 का यह रूप, भविष्य में स्किन कैंसर से बचाव की दिशा में एक बड़ी उम्मीद बन सकता है। अगर आने वाले समय में और शोध इस बात की पुष्टि करते हैं, तो यह छोटी-सी गोली लाखों जिंदगियां बचा सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>स्किन कैंसर का कारण, तेज़ धूप बन सकती हैं, जाने कैसे&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 May 2019 06:59:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[कारण]]></category>
		<category><![CDATA[धूप]]></category>
		<category><![CDATA[स्किन कैंसर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="280" height="180" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/images-37.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />धूप के तेवर आप समझ ही गए हैं कि किस कदर से आपको नुकसान पहुंचा सकती है. धुप में मौजूद विटामिन डी जहां सेहत के लिए बहुत जरूरी है वहीं गर्मियों की दोपहर की तीखी धूप त्&#x200d;वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. स्किन के लिए ये धुप कितनी खतरनाक है, वहीं विशेषज्ञों की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="280" height="180" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/images-37.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>धूप के तेवर आप समझ ही गए हैं कि किस कदर से आपको नुकसान पहुंचा सकती है. धुप में मौजूद विटामिन डी जहां सेहत के लिए बहुत जरूरी है वहीं गर्मियों की दोपहर की तीखी धूप त्&#x200d;वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. स्किन के लिए ये धुप कितनी खतरनाक है, वहीं विशेषज्ञों की मानें तो सीधे धूप के संपर्क में ज्&#x200d;यादा देर रहने से त्&#x200d;वचा कैंसर का खतरा भी हो सकता है. पर घबराएं नहीं इससे बचने के लिए कुछ उपाय हैं, जिन्&#x200d;हें आपको गर्मियों में अपनाना चाहिए.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-232696 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/images-37.jpg" alt="" width="627" height="403" /></p>
<p><strong>बचें अल्ट्रावॉयलेट किरणों से- </strong> <strong>त्वचा का कैंसर, कैंसर के सभी प्रकारों में सबसे आम है. सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों का त्वचा पर प्रभाव, त्वचा के कैंसर का एक प्रमुख कारण है. त्वचा कैंसर से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. त्वचा का कैंसर केवल त्वचा तक ही सीमित नहीं होता. ऑक्युलर स्किन कैंसर नामक बीमारी आंखों से ही शुरु होती है. यह कैंसर का एक प्रकार है, इससे बचने के लिए आपको सूर्य की किरणों से अपनी आंखों को सुरक्ष&#x200d;ित रखना जरूरी है.</strong></p>
<p><strong>दोपहर की धूप है ज्&#x200d;यादा खतरनाक-  दोपहर के समय सूर्य ये निकलने वाली यूवी किरणें सबसे ज्यादा हानिकारक और प्रभावशाली होती हैं. इस समय अगर घर से बाहर निकल रहे हैं, तो अपनी त्वचा को खास तौर से बचाकर निकलें.</strong></p>
<p><strong>सांवला रंग है फायदेमंद-  सांवला या गेहुंआ रंग लिए हुए लोग त्वचा के कैंसर के शिकार कम होते हैं. लेकिन अत्यधिक गोरी त्वचा पर कैंसर का खतरा अधिक होता है. अगर आपका रंग अत्यधिक गोरा है, तो आपको अपनी त्वचा का विशेष ध्यान रखना होगा.</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्किन कैंसर का कारण &#8211; तेज़ धुप बन सकती हैं ,अपनाएं टिप्स बाहर निकलते समय&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Apr 2019 06:24:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[तेज़]]></category>
		<category><![CDATA[धुप]]></category>
		<category><![CDATA[स्किन कैंसर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="293" height="172" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/images-47.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />धूप के तेवर आप समझ ही गए हैं कि किस कदर से आपको नुकसान पहुंचा सकती है. धुप में मौजूद विटामिन डी जहां सेहत के लिए बहुत जरूरी है वहीं गर्मियों की दोपहर की तीखी धूप त्&#x200d;वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. जी हाँ, स्किन के लिए ये धुप कितनी खतरनाक है इसके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="293" height="172" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/images-47.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>धूप के तेवर आप समझ ही गए हैं कि किस कदर से आपको नुकसान पहुंचा सकती है. धुप में मौजूद विटामिन डी जहां सेहत के लिए बहुत जरूरी है वहीं गर्मियों की दोपहर की तीखी धूप त्&#x200d;वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. जी हाँ, स्किन के लिए ये धुप कितनी खतरनाक है इसके बारे में हम बताने जा रहे हैं. वहीं विशेषज्ञों की मानें तो सीधे धूप के संपर्क में ज्&#x200d;यादा देर रहने से त्&#x200d;वचा कैंसर का खतरा भी हो सकता है. पर घबराएं नहीं इससे बचने के लिए कुछ उपाय हैं, जिन्&#x200d;हें आपको गर्मियों में अपनाना चाहिए. जानें उन उपायों को.</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-226119 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/04/images-47.jpg" alt="" width="523" height="306" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>बचें अल्ट्रावॉयलेट किरणों  से </strong><br />
<strong>त्वचा का कैंसर, कैंसर के सभी प्रकारों में सबसे आम है. सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों का त्वचा पर प्रभाव, त्वचा के कैंसर का एक प्रमुख कारण है. त्वचा कैंसर से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. बता दें, त्वचा का कैंसर केवल त्वचा तक ही सीमित नहीं होता. ऑक्युलर स्किन कैंसर नामक बीमारी आंखों से ही शुरु होती है. यह कैंसर का एक प्रकार है, इससे बचने के लिए आपको सूर्य की किरणों से अपनी आंखों को सुरक्ष&#x200d;ित रखना जरूरी है. </strong></p>
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<p><strong>दोपहर की धूप है ज्&#x200d;यादा खतरनाक </strong><br />
<strong>दोपहर के समय सूर्य ये निकलने वाली यूवी किरणें सबसे ज्यादा हानिकारक और प्रभावशाली होती हैं. इस समय अगर घर से बाहर निकल रहे हैं, तो अपनी त्वचा को खास तौर से बचाकर निकलें.</strong></p>
<p><strong>सांवला रंग है फायदेमंद </strong><br />
<strong>सांवला या गेहुंआ रंग लिए हुए लोग त्वचा के कैंसर के शिकार कम होते हैं. लेकिन अत्यधिक गोरी त्वचा पर कैंसर का खतरा अधिक होता है. अगर आपका रंग अत्यधिक गोरा है, तो आपको अपनी त्वचा का विशेष ध्यान रखना होगा.</strong></p>
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