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	<title>सोशल मीडिया &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>सोशल मीडिया &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>क्या ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया? मद्रास HC ने केंद्र को दी सलाह</title>
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		<pubDate>Fri, 26 Dec 2025 04:53:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की संभावना तलाशे। अदालत ने अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता पर चिंता जताई और जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया, ताकि बच्चों को &#8230;]]></description>
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<p>मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की संभावना तलाशे। अदालत ने अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता पर चिंता जताई और जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया, ताकि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाया जा सके।</p>



<p>ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन गया है, जिसने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दी है। वहीं, अब भारत में भी इसको लागू करने की चर्चा चल रही है।</p>



<p>दरअसल,मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर कानून लाने की संभावना तलाशे, जिसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए।</p>



<p>बता दें कि मदुरै जिले के एस विजयकुमार ने 2018 में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की गई थी कि अश्लील सामग्री आसानी से उपलब्ध है और छोटे बच्चों के लिए सुलभ है। उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और तमिलनाडु बाल अधिकार संरक्षण आयोग से अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से लोगों में जागरूकता पैदा करने का निर्देश देने की मांग की थी।</p>



<p>उनका तर्क था कि कि इंटरनेट पर अश्लील सामग्री और चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मटेरियल आसानी से उपलब्ध है और यह नाबालिग बच्चों तक पहुंच रहा है, इससे बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास खतरे में पड़ रहा है।</p>



<p><strong>नियंत्रण जरूरी है..</strong>.</p>



<p>इस पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा, &#8216;हम समझते हैं कि ऑनलाइन चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मटेरियल CSAM वाली वेबसाइट्स और URL लगातार अपडेट होती रहती हैं और सक्रिय रहती हैं। हालांकि, इसके साथ-साथ यूजर एंड पर भी नियंत्रण जरूरी है। यह नियंत्रण केवल पैरेंट कंट्रोल ऐप या सुविधा से ही संभव है. इसके लिए अंतिम उपयोगकर्ताओं को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खतरे और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना अनिवार्य है।&#8217;</p>



<p>मद्रास हाई कोर्ट ने सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा पारित उस कानून के समान कानून बनाने की संभावना तलाश सकती है, जिसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।</p>



<p>हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत के तौर पर निर्देश दिया कि जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, तब तक संबंधित अधिकारी जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं।</p>
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		<title>सोशल मीडिया से जनसंपर्क होगा मजबूत – बंशीधर तिवारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 06:26:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत को वर्ष @ 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी संवाद, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, जिम्मेदार मीडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे अहम आधार बताया गया। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन “2047 तक भारत को किस तरह विकसित किया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारत को वर्ष @ 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी संवाद, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, जिम्मेदार मीडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे अहम आधार बताया गया। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन “2047 तक भारत को किस तरह विकसित किया जा सकता है” विषय पर आयोजित विचार-विमर्श में प्रशासन, मीडिया, शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब नीतियों के साथ-साथ उनका प्रभावी संप्रेषण भी सुनिश्चित किया जाएगा।</p>



<p><strong>पहले सत्र में स्वास्थ्य, विज्ञान और सूचना पर फोकस PRSI Conference</strong></p>



<p>दूसरे दिन के पहले सत्र में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव मुख्यमंत्री, महानिदेशक सूचना एवं उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी तथा यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने अपने विचार रखे। अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने कहा कि सुशासन की सफलता प्रभावी, पारदर्शी और संवेदनशील संचार पर निर्भर करती है। सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनकी सही और समय पर जानकारी जनता तक पहुंचे। उन्होंने डिजिटल सूचना प्रणाली और सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर उन्होंने उत्तराखंड के 25 वर्ष के विकास की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ा है। अकेले चारधाम में इस साल 50 लाख से भी अधिक श्रद्धालु आए हैं।</p>



<p>चारधाम के अलावा आदि कैलास, जागेश्वर धाम और &nbsp;कैंची धाम के साथ ही मानस मंदिरमाला को भी विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर साल लगभग सात-आठ करोड़ पर्यटक पहुंच रहे हैं। अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में अब पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार की 35 नीतियां तैयार की गयी हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।</p>



<p>यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान विकसित भारत की आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विज्ञान संचार के माध्यम से शोध को समाज से जोड़ा जाना चाहिए। यह नवाचार को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।सत्र के मॉडरेटर संजीव कंडवाल ने कहा कि मीडिया, शासन और समाज के बीच संवाद की कड़ी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जिम्मेदार, तथ्यपरक और संतुलित पत्रकारिता से ही लोकतंत्र मजबूत होता है और जनविश्वास कायम रहता है।</p>



<p><strong>दूसरे सत्र में मीडिया, शिक्षा और लोकतंत्र पर संवाद</strong></p>



<p>सम्मेलन के दूसरे सत्र में लोक सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नितिन उपाध्याय, सीआईएमएस कालेज के चेयरमैन ललित जोशी, एनडीटीवी नई दिल्ली के सीनियर एडिटर डा. हिमांशु शेखर, न्यूज 18 के एडिटर अनुपम त्रिवेदी तथा आईआईएमसी नई दिल्ली की प्रोफेसर &nbsp;डॉ. सुरभि दहिया ने सहभागिता की।इस सत्र में डॉ. नितिन उपाध्याय ने कहा कि सूचना का प्रभावी प्रसार शासन की सफलता की कुंजी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी योजनाओं और नीतियों को तेजी और पारदर्शिता के साथ आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संचार प्रणाली को समय के अनुरूप लगातार अपडेट करना आवश्यक है।</p>
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		<title>सोशल मीडिया से कमाई का जरिया बाधित होने से तो उग्र नहीं हुए युवा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 06:27:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल सरकार ने चार दिन पहले जब नियम-कायदों का पालन न करने वाले कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया तो इतनी उग्र प्रतिक्रिया की कल्पना भी नहीं की होगी। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि युवा आखिर इस कदर हिंसा पर उतारू क्यों हुए, कहीं सोशल मीडिया से कमाई का जरिया बाधित होना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>नेपाल सरकार ने चार दिन पहले जब नियम-कायदों का पालन न करने वाले कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया तो इतनी उग्र प्रतिक्रिया की कल्पना भी नहीं की होगी। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि युवा आखिर इस कदर हिंसा पर उतारू क्यों हुए, कहीं सोशल मीडिया से कमाई का जरिया बाधित होना इसकी वजह तो नहीं है। पूरा मामला समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नेपाल सरकार से पाबंदी क्यों लगाई, इसने कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर क्या असर डाला। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब…</p>



<p><strong>सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का फैसला क्यों किया</strong><br>नेपाली सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फेसबुक समेत तमाम प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य था। वैश्विक प्लेटफॉर्म बार-बार नोटिस देने के बावजूद ऐसा नहीं कर रहे थे, इसलिए सरकार ने प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। हालांकि, आलोचकों ने संचार, आजीविका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इसके गंभीर प्रभावों के बारे में पहले ही चेताया था।</p>



<p>नवंबर, 2023 के अब तक सरकार ने पांच सार्वजनिक नोटिस जारी किए। संबंधित कंपनियों को पत्र भी लिखे। पर, मेटा और अन्य कंपनियों ने बार-बार समयसीमा बढ़ाने की अनदेखी की। सरकार ने आखिरकार 28 अगस्त को सभी प्लेटफॉर्म से सात दिन में पंजीकरण कराने को कहा और यह समयसीमा समाप्त होने पर पाबंदी लगा दी।</p>



<p><strong>किन प्लेटफॉर्म पर लगी रोक, और कौन उपलब्ध रहे?</strong><br>…फेसबुक, मैसेंजर, इंस्टाग्राम, एक्स, लिंक्डइन, रेडिट, थ्रेड्स, यूट्यूब, स्नैपचैट, पिंटरेस्ट, सिग्नल, क्लबहाउस और रंबल जैसे प्लेटफॉर्म प्रतिबंध के दायरे में आए। वहीं, टिकटॉक, वाइबर, विटक, निंबज और पोपो लाइव पहले से पंजीकृत होने के कारण बेरोक-टोक चल रहे थे। फेसबुक ने हाल में मुद्रीकरण कार्यक्रम शुरू किया था, जिससे क्रिएटर्स रील्स, पोस्ट और वीडियो के जरिये सीधे कमाई कर सकते हैं। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों के कारण यह कमाई रुकने से आय और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा।</p>



<p><strong>प्रदर्शन के पीछे कौन?</strong><br>माना जा रहा है कि प्रदर्शनों के पीछे एनजीओ हामी नेपाल की बड़ी भूमिका रही। इसने छात्रों को जुटाने के लिए इंस्टाग्राम व डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। इन पर विरोध कैसे करें जैसे वीडियो डाले गए थे। छात्रों को सलाह दी गई थी कि वे कॉलेज बैग, किताबें लेकर आएं। स्कूल ड्रेस पहनकर ही आएं। छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान यूथ्स अगेंस्ट करप्शन का बैनर भी उठाया, जिसे हामी नेपाल ने ही जारी किया था।</p>
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		<title>सोशल मीडिया पर कम सक्रिय आधे सांसदों को मिला पीला कार्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 05:53:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[संसद भवन]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[संसद भवन में भाजपा सांसदों की कार्यशाला में सोशल मीडिया सक्रियता पर रिपोर्ट पेश की गई। 10% सांसद पूरी तरह निष्क्रिय पाए गए, जबकि 50% को मामूली सक्रियता पर पीला कार्ड मिला। केवल 40% सांसदों को हरे कार्ड से नवाजा गया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया को युवाओं से संवाद का अहम माध्यम बताया और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>संसद भवन में भाजपा सांसदों की कार्यशाला में सोशल मीडिया सक्रियता पर रिपोर्ट पेश की गई। 10% सांसद पूरी तरह निष्क्रिय पाए गए, जबकि 50% को मामूली सक्रियता पर पीला कार्ड मिला। केवल 40% सांसदों को हरे कार्ड से नवाजा गया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया को युवाओं से संवाद का अहम माध्यम बताया और इंस्टाग्राम को प्राथमिकता देने की सलाह दी।</p>



<p>संसद भवन में भाजपा सांसदों की दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान पार्टी के 10% जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया पर निष्क्रिय पाए गए। आधे से अधिक सांसदों को साधारण सक्रियता के कारण पीला कार्ड मिला। हालांकि, 40 फीसदी सांसद सक्रियता के तमगे से नवाजे गए और उन्हें हरा कार्ड मिला। कार्यशाला में पीएम मोदी ने सांसदों का सोशल मीडिया का महत्व समझाया।</p>



<p>कार्यशाला में प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को सोशल मीडिया पर सक्रियता के लाभ गिनाए और खासकर युवा वर्ग से सीधे संवाद और संपर्क स्थापित करने के लिए इस मंच पर सक्रियता बढ़ाने का निर्देश दिया। पीएम ने कहा कि यह माध्यम वर्तमान में संवाद का सबसे विश्वसनीय और श्रेष्ठ माध्यम है। युवा वर्ग इंस्टाग्राम से प्रभावित हैं। ऐसे में युवा सांसद इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करने को अपनी पहली प्राथमिकता दें।</p>



<p>कार्यशाला में युवा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया के महत्व पर प्रस्तुति दी। इसी दौरान पार्टी के आईटी प्रकोष्ठ ने संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के लिए तैयार की गई रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया। रिपोर्ट कार्ड इस साल जनवरी से अगस्त महीने के दौरान सांसदों की सोशल मीडिया से जुड़े चार अहम प्लेटफॉर्म यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स और फेसबुक पर सक्रियता से जुड़ी थी। सक्रियता के मापदंड तय करने के लिए तीन श्रेणियां निष्क्रिय, बमुश्किल सक्रिय और सक्रिय तय की गई थी।</p>



<p><strong>ऐसे तय हुई श्रेणी</strong><br>अगर किसी सांसद ने बीते एक महीने में सोशल मीडिया पर एक भी पोस्ट नहीं डाली है तो उसे लाल कार्ड दिया गया। ऐसे सांसदों की संख्या दस फीसदी थी। एक महीने में 60 से कम पोस्ट डालने वाले सांसदों को बमुश्किल सक्रिय श्रेणी में डालते हुए पीला कार्ड दिया गया। ऐसे सांसदों की संख्या 50 फीसदी थी। शेष 40 फीसदी सांसदों ने बीते एक महीने में 60 से अधिक पोस्ट डाले और इन्हें हरा कार्ड दिया गया।</p>



<p><strong>कोई वोट बर्बाद न हो, सही तरह करें मतदान</strong><br>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों से भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी मेला आयोजित करने का आग्रह किया और कहा कि आत्मनिर्भरता ही भारत के उत्थान का मार्ग है। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे जिस कार्यक्रम में शामिल हों, स्वदेशी उसका हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने सांसदों को यह सलाह भी दी कि मंगलवार को उपराष्ट्रपति चुनाव में सही तरीके से मतदान करें, ताकि कोई भी वोट बर्बाद न हो।</p>



<p>सांसदों को संबोधित करते हुए मोदी ने भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और लोगों को जीएसटी दरों में कटौती के व्यापक प्रभाव के बारे में बताने का आग्रह किया। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने सांसदों से खासकर त्योहारी सीजन में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों एवं व्यापारियों के साथ बैठकें करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने किसी देश का जिक्र नहीं किया लेकिन आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक मजबूत राष्ट्र के तौर पर उभर रहा है, ऐसे में कुछ चुनौतियां भी आएंगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>सोशल मीडिया पर आलोचना करने वाले सरकारी कर्मचारियों की अब खैर नहीं</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8/625007</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Jul 2025 11:11:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र सरकार ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। गोपनीय जानकारी लीक होने और झूठी खबरों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। केंद्र या राज्य सरकार द्वारा बैन की गई वेबसाइट्स या &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>महाराष्ट्र सरकार ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। गोपनीय जानकारी लीक होने और झूठी खबरों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। केंद्र या राज्य सरकार द्वारा बैन की गई वेबसाइट्स या ऐप्स का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सरकारी योजनाओं की आलोचना करना भी मना है।</p>



<p>महाराष्ट्र सरकार ने गोपनीय जानकारी के लीक होने और झूठी खबरों को रोकने के लिए एक सख्त कदम उठाया है।</p>



<p>सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों का पालन न करने वालों को सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।</p>



<p>ये गाइडलाइंस महाराष्ट्र सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1979 के तहत लागू होंगी। इनका उल्लंघन करने पर महाराष्ट्र सिविल सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1979 के तहत कार्रवाई होगी।</p>



<p>ये नियम राज्य सरकार, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, बोर्ड, निगम, सार्वजनिक उपक्रमों और डेपुटेशन या कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त कर्मचारियों पर लागू होंगे।</p>



<p><strong>‘सोशल मीडिया का समझदारी से इस्तेमाल जरूरी’<br></strong>सरकार ने साफ किया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करना होगा। निजी और ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स को अलग रखना अनिवार्य है। केंद्र या राज्य सरकार की ओर से बैन की गई वेबसाइट्स या ऐप्स का इस्तेमाल हरगिज नहीं किया जाएगा। सरकारी योजनाओं और पहलों को बढ़ावा देने के लिए केवल आधिकारिक और अधिकृत प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल होगा। व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल ऑफिस के काम को समन्वय करने के लिए किया जा सकता है।</p>



<p>सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सरकारी योजनाओं की सफलता से जुड़े पोस्ट सोशल मीडिया पर डाल सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी तारीफ करने से बचना होगा। सरकार की मौजूदा या हाल की नीतियों की आलोचना करना सख्त मना है।</p>



<p><strong>गोपनीय दस्तावेज और आपत्तिजनक कंटेट पर पाबंदी<br></strong>सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को सरकारी पद, लोगो, यूनिफॉर्म या सरकारी संपत्ति की तस्वीरें या वीडियो अपने निजी अकाउंट्स पर डालने की इजाजत नहीं होगी। आपत्तिजनक, नफरत फैलाने वाली या भेदभाव वाली सामग्री को पोस्ट या फॉरवर्ड करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।</p>



<p>इसके अलावा, बिना आधिकारिक मंजूरी के गोपनीय दस्तावेज सोशल मीडिया पर शेयर करना मना है। अगर किसी का तबादला होता है, तो ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट को सही तरीके से ट्रांसफर करना होगा।</p>



<p><strong>सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता को बनाए रखने की कोशिश<br></strong>महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए ये गाइडलाइंस बनाई गई हैं। इसका मकसद सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता को बनाए रखना है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।</p>
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		<item>
		<title>अब सेबी करेगा सोशल मीडिया पर शेयर बाजार से जुड़े विज्ञापनों के लिए वेरिफिकेशन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 11:43:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गैजेट]]></category>
		<category><![CDATA[टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;सेबी ने शुक्रवार को रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज से कहा कि अगर वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Google और Meta पर विज्ञापन करना चाहते हैं, तो उन्हें इन प्लेटफॉर्म्स पर वही कॉन्टैक्ट डिटेल्स, जैसे ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर, इस्तेमाल करके रजिस्टर करना होगा, जो उन्होंने मार्केट्स रेगुलेटर को दिए हैं। ये जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई के &#8230;]]></description>
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<p>&nbsp;सेबी ने शुक्रवार को रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज से कहा कि अगर वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Google और Meta पर विज्ञापन करना चाहते हैं, तो उन्हें इन प्लेटफॉर्म्स पर वही कॉन्टैक्ट डिटेल्स, जैसे ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर, इस्तेमाल करके रजिस्टर करना होगा, जो उन्होंने मार्केट्स रेगुलेटर को दिए हैं। ये जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से मिली है।</p>



<p>इस कदम का मकसद सिक्योरिटीज मार्केट में फ्रॉड एक्टिविटीज पर लगाम लगाना है। यह फैसला सेबी ने तब लिया, जब उसने देखा कि YouTube, Facebook, Instagram, WhatsApp, X (पहले Twitter), Telegram और Google Play Store जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े फ्रॉड में तेजी से इजाफा हुआ है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>ऐसे लोगों को लुभा रहे हैं फ्रॉड</strong></h4>



<p>डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ, सेबी ने पाया कि ऐसे फ्रॉड करने वाले लोग ऑनलाइन ट्रेडिंग कोर्स, सेमिनार, भ्रामक या झूठे टेस्टिमोनियल्स, निश्चित या रिस्क-फ्री रिटर्न के वादे आदि के नाम पर लोगों को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (SMPs) के जरिए लुभा रहे हैं।</p>



<p>निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, सेबी ने इन प्लेटफॉर्म्स पर रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज के आचरण को मजबूत करने के कदम उठाए हैं। रेगुलेटर ने एक बयान में कहा, ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स के साथ चर्चा के बाद यह तय किया गया है कि Google/Meta (शुरुआत के लिए) जैसे SMPPs पर विज्ञापन अपलोड/प्रकाशित करने वाले सभी सेबी रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज को इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सेबी SI पोर्टल पर रजिस्टर्ड अपनी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से रजिस्टर करना होगा।’</p>



<p>इसके बाद, ये प्लेटफॉर्म्स इंटरमीडियरीज की वेरिफिकेशन चेक करेंगे, ताकि विज्ञापन प्रकाशित करने की अनुमति मिलने से पहले उनकी वैधता सुनिश्चित हो सके। इस वेरिफिकेशन प्रोसेस का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध और वेरिफाइड मध्यस्थ ही इन प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन दे सकें।सेबी ने सभी इंटरमीडियरीज से कहा है कि अगर वे SMPs पर विज्ञापन देना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स- खास तौर पर ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर- 30 अप्रैल, 2025 तक सेबी SI पोर्टल पर अपडेट कर लेना होगा।ये कदम सेबी के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य फ्रॉड एक्टिविटीज को रोकना, निवेशकों के हितों की रक्षा करना और सिक्योरिटीज मार्केट को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।</p>
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		<item>
		<title>चीन में युवाओं के इंटरनेट इस्तेमाल पर लगेगी रोक, सरकार तय करेगी सोशल मीडिया पर कितना समय बिताएंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 11:52:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गैजेट]]></category>
		<category><![CDATA[टेक्नोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[चीन में युवाओं के बढ़ते इंटरनेट और सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। चीनी अधिकारियों का मानना है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों की शारीरिक सेहत और पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। चीन की हाल ही में संपन्न हुई वार्षिक राजनीतिक बैठक में पूर्व बास्केटबॉल स्टार &#8230;]]></description>
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<p>चीन में युवाओं के बढ़ते इंटरनेट और सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। चीनी अधिकारियों का मानना है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों की शारीरिक सेहत और पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।</p>



<p>चीन की हाल ही में संपन्न हुई वार्षिक राजनीतिक बैठक में पूर्व बास्केटबॉल स्टार याओ मिंग ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें हर सेमेस्टर में एक दिन के लिए सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बंद करने और बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई थी। इसके अलावा, ऑनलाइन गेमिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाने और हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण बढ़ाने का सुझाव दिया गया था।</p>



<p><strong>पहले भी लग चुके हैं प्रतिबंध<br></strong>चीन में 2020 में “माइनर्स प्रोटेक्शन लॉ” में संशोधन कर सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग सीमित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा 2021 में लागू नियम के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक गेमिंग से प्रतिबंधित किया गया था। उन्हें सप्ताह के दिनों में केवल 1 घंटा और वीकेंड पर 2 घंटे गेमिंग की अनुमति दी गई थी।</p>



<p>2024 के चीनी नव वर्ष के दौरान, Tencent Games ने 32 दिनों में कुल 15 घंटे गेम खेलने की सीमा तय कर दी थी। हालांकि, कई बच्चे इन प्रतिबंधों को वयस्कों के अकाउंट्स का उपयोग करके आसानी से बायपास कर लेते हैं।</p>



<p><strong>समस्या इंटरनेट की नहीं, पढ़ाई के दबाव की?<br></strong>एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मीडिया पेशेवर आ कियांग का मानना है कि सरकार के ये प्रस्ताव व्यवहारिक रूप से प्रभावी नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि समस्या इंटरनेट की लत नहीं, बल्कि बच्चों पर पढ़ाई और माता-पिता की उम्मीदों का भारी दबाव है। कियांग के मुताबिक, जब तक ऑफलाइन जीवन में सुधार नहीं होगा, ऑनलाइन सीमाएं काम नहीं करेंगी।</p>
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		<item>
		<title>ज्यादा फोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल पहुंचा रहा है दिल को नुकसान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Feb 2025 08:10:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[हमारे दिन का ज्यादातर समय फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने बीतता है। इस वजह से काम और सोशल मीडिया का स्ट्रेस हमारी सेहत को काफी प्रभावित करता है। डिजिटल स्ट्रेस की वजह से दिल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जो हार्ट अटैक की वजह भी बन सकता है। आइए जानें कैसे डिजिटल स्ट्रेस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हमारे दिन का ज्यादातर समय फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने बीतता है। इस वजह से काम और सोशल मीडिया का स्ट्रेस हमारी सेहत को काफी प्रभावित करता है। डिजिटल स्ट्रेस की वजह से दिल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जो हार्ट अटैक की वजह भी बन सकता है। आइए जानें कैसे डिजिटल स्ट्रेस से दिल को बचा सकते हैं।</p>



<p>आज के डिजिटल युग में, तकनीक ने हमारे जीवन को आसान और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही यह कई नई चुनौतियां भी लेकर आई है। इनमें से एक सबसे बड़ी समस्या है “डिजिटल स्ट्रेस” (Digital Stress on Heart)।</p>



<p>डिजिटल स्ट्रेस का मतलब है तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल और डिजिटल दुनिया की मांगों के कारण होने वाला मानसिक और शारीरिक तनाव। यह तनाव न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि इसका सीधा असर हमारे दिल की सेहत पर भी पड़ता है। आइए जानें कैसे (Digital Stress Impact on Heart)।</p>



<p><strong>डिजिटल स्ट्रेस के कारण</strong><br>सोशल मीडिया का दबाव- लगातार सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने और दूसरों की जिंदगी से तुलना करने से तनाव बढ़ता है।<br>ऑनलाइन काम का बोझ- वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने से लोगों को 24/7 उपलब्ध रहने का दबाव महसूस होता है।<br>सूचनाओं की बढ़ोतरी- इंटरनेट पर मौजूद जानकारी की भरमार से लोगों को ओवर-एक्साइटमेंट और कन्फ्यूजन की स्थिति हो जाती है।<br>साइबर बुलिंग और ऑनलाइन हरासमेंट- ऑनलाइन दुनिया में नेगेटिव कॉमेंट और बुलिंग भी तनाव का कारण बनते हैं।</p>



<p><strong>डिजिटल स्ट्रेस और दिल की सेहत</strong><br>डिजिटल स्ट्रेस का सीधा संबंध हमारे दिल की सेहत से है। तनाव के कारण शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जो दिल के लिए हानिकारक हो सकते हैं।</p>



<p>ब्लड प्रेशर बढ़ना- तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जो दिल के लिए खतरनाक हो सकता है। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।<br>हार्ट रेट में अनियमितता- डिजिटल स्ट्रेस के कारण लोगों की हार्ट रेट अनियमित हो सकती है। यह स्थिति एरिथमिया (अनियमित धड़कन) का कारण बन सकती है, जो दिल के लिए खतरनाक हो सकता है।<br>सूजन और आर्टरीज का सख्त होना- तनाव के कारण शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो आर्टरीज को सख्त कर सकती है। इससे दिल तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।<br>नींद की कमी- डिजिटल डिवाइसेज के ज्यादा इस्तेमाल से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। नींद की कमी दिल की सेहत के लिए हानिकारक है और यह दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है।<br>अनहेल्दी लाइफस्टाइल- डिजिटल स्ट्रेस के कारण लोग अक्सर अनहेल्दी आदतों जैसे धूम्रपान, शराब पीना और अस्वस्थ खानपान की ओर मुड़ जाते हैं। ये आदतें दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक होती हैं।</p>



<p><strong>डिजिटल स्ट्रेस को कैसे कम करें?</strong><br>डिजिटल डिटॉक्स- समय-समय पर डिजिटल डिवाइसेज से दूरी बनाएं और अपने मन को शांत करने के लिए समय निकालें।<br>सोशल मीडिया का लिमिटेड इस्तेमाल- सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करें और पॉजिटिव चीजों पर ध्यान दें।<br>नियमित एक्सरसाइज- फिजिकल एक्टिविटीज तनाव को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।<br>हेल्दी डाइट- स्वस्थ और बैलेंस्ड डाइट लें, जो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो।<br>पूरी नींद- रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लेना जरूरी है।</p>
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		<item>
		<title>सोशल मीडिया पर उड़ी उत्तरकाशी में भूकंप की अफवाह, दहशत में बाहर निकले लोग; पुलिस ने समझाया</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0/601306</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 06:12:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तरकाशी में देर रात सोशल मीडिया पर भूकंप आने की अफवाह उड़ा दी गई। जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय में देर रात्रि सोशल मीडिया पर बड़े भूकंप की अफवाह और फर्जी पोस्ट के चलते भैरव चौक पर लोग भारी संख्या में घरों से बाहर निकलकर परशुराम मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर के बाहर एकत्रित हो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>उत्तरकाशी में देर रात सोशल मीडिया पर भूकंप आने की अफवाह उड़ा दी गई। जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय में देर रात्रि सोशल मीडिया पर बड़े भूकंप की अफवाह और फर्जी पोस्ट के चलते भैरव चौक पर लोग भारी संख्या में घरों से बाहर निकलकर परशुराम मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर के बाहर एकत्रित हो गए है।</p>



<p>शुक्रवार शाम से सोशल मीडिया पर एक अफवाह तेजी से फैली कि देर रात्रि बड़ा भूकंप आने वाला है। इस फर्जी खबर से सहमे लोग कुछ स्थानों भैरव चौक, गंगोरी, तिलोथ और मुख्य बाजार में कुछ स्थानों पर रात्रि में घरों से बाहर निकल आए।</p>



<p>हालांकि जिला प्रशासन और पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए सोशल मिडिया पर चल रही पोस्ट को फर्जी बताते हुए संयम बरतने की अपील की है। पुलिस ने फेसबुक के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शुभमन गिल को सोशल मीडिया पर क्यों पड़ रही हैं गालियां?</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa/570263</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jul 2024 08:39:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[शुभमन गिल]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए चौथे टी20 मैच में भारत ने 10 विकेट से जीत हासिल की। इस मैच में यशस्वी जायसवाल ने नाबाद 93 रन बनाए और कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 58 रनों की पारी खेली।लेकिन इस मैच के बाद सोशल मीडिया पर गिल की जमकर आलोचना हो रही है। गिल को मतलबी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए चौथे टी20 मैच में भारत ने 10 विकेट से जीत हासिल की। इस मैच में यशस्वी जायसवाल ने नाबाद 93 रन बनाए और कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 58 रनों की पारी खेली।लेकिन इस मैच के बाद सोशल मीडिया पर गिल की जमकर आलोचना हो रही है। गिल को मतलबी बताया जा रहा है और उनकी कप्तानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।</p>



<p>भारत ने जिम्बाब्वे को चौथे टी20 मैच में 10 विकेट से हरा दिया। इसी के साथ युवा टीम इंडिया ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त ले ली है। टीम इंडिया की जीत के हीरो रहे यशस्वी जायसवाल और कप्तान शुभमन गिल। लेकिन इस जीत के बाद शुभमन गिल सोशल मीडिया पर फैंस के निशाने पर आ गए। सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर लताड़ा जा रहा है।</p>



<p>जिम्बाब्वे ने इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट खोकर 152 रन बनाए थे। टीम इंडिया ने 15.2 ओवरों में जायसवाल और गिल की तूफानी पारियों के दम पर 156 रन बना 10 विकेट से मैच अपने नाम किया। जायसवाल 93 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं गिल 58 रन बनाकर नाबाद रहे।</p>



<p><strong>इसलिए हो रही है आलोचना<br></strong>दरअसल, गिल की आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि कई लोगों का मानना है कि इस मैच में यशस्वी आसानी से अपना शतक पूरा कर लेते अगर गिल अपन फिफ्टी बनाने के लिए बड़े शॉट्स नहीं खेलते और यशस्वी को शतक बनाने का मौका देते तो। 14वें ओवर के बाद गिल 48 रनों पर थे और यशस्वी 83 रनों पर थे। यहां से भारत को जीत के लिए 18 रन चाहिए थे और यशस्वी को शतक के लिए 17 रन चाहिए। वहीं गिल को अपना अर्धशतक पूरा करने के लिए 48 रन चाहिए थे।</p>



<p>15वें ओवर में गिल ने पहली गेंद पर दो रन लेकर अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके बाद दूसरी गेंद पर छक्का मारा। पांचवीं गेंद पर जायसवाल ने छक्का मार दिया। लेकिन जायसवाल का शतक बनाने का मौका खत्म हो गया था। इस ओवर में कुल 16 रन आए। अगले ओवर में गिल ने पहली गेंद पर एक रन लिया और दूसरी गेंद पर जायसवाल ने चौका मार भारत को जीत दिलाई।</p>



<p><strong>गिल हैं मतलबी<br></strong>इसी बात को लेकर गिल की आलोचना हो रही है। लोगों का मानना है कि टीम के पास जीत के लिए पर्याप्त ओवर थे और इसलिए बेहतर होता कि गिल, जायसवाल को अपना शतक पूरा करने का मौका देते। लोगों का मानना है कि गिल ने जानबूझकर जायसवाल का शतक नहीं होने दिया। इसी कारण उन्हें खराब कप्तान कहा जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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