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	<title>सैन्य सम्मान &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>सैन्य सम्मान &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>उत्तराखंड के इस शहीद को सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Oct 2024 05:19:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम विदाई]]></category>
		<category><![CDATA[सैन्य सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="289" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163.png 767w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />उत्तराखंड के शहीद को 56 साल बाद उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दरअसल, भारतीय वायु सेना के एन 12 विमान दुर्घटना में लापता सैनिक नारायण सिंह का पार्थिव शरीर आखिरकार 56 साल बाद थराली विकासखण्ड स्थित उनके पैतृक गांव कोलपुड़ी पहुंचा जहां सैन्य सम्मान के साथ शहीद को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="289" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163.png 767w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>उत्तराखंड के शहीद को 56 साल बाद उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दरअसल, भारतीय वायु सेना के एन 12 विमान दुर्घटना में लापता सैनिक नारायण सिंह का पार्थिव शरीर आखिरकार 56 साल बाद थराली विकासखण्ड स्थित उनके पैतृक गांव कोलपुड़ी पहुंचा जहां सैन्य सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गई। वहीं, शहीद नारायण सिंह के पैतृक घाट पर बीते गुरूवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।</p>



<p><strong>शहीद नारायण सिंह बिष्ट आर्मी मेडिकल कोर में थे तैनात<br></strong>प्राप्त सूचना के मुताबिक 56 वर्ष पूर्व 7 फरवरी 1968 को भारतीय वायु सेना का एन 12 विमान चंडीगढ़ से उड़ा और छह क्रू सदस्यों के साथ लेह पहुंचा। ताकि भारतीय सेना के जवानों को लेह से चंडीगढ़ वापस लाया जा सके। वहीं विमान ने लेह से उड़ान भरी लेकिन चंडीगढ़ की ओर बढ़ते समय खराब मौसम की वजह से विमान रोहतांग दर्रा में ढाका गलेशियर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।</p>



<p>इस विमान में चालक दल समेत कुल 102 लोग सवार थे। इस विमान दुर्घटना में सवार सैनिकों की खोज के लिए भारतीय सेना,अटल बिहारी पर्वतारोहण संस्थान समेत तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू और डोगरा स्काउट ने कई बार खोज अभियान चलाया। वहीं,इस खोज अभियान के तहत ही विमान में सवार सैनिक नारायण सिंह का शव बरामद हुआ। इस दौरान उनकी नेम प्लेट से उनके नाम और उनके पास से बरामद दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम और उनकी पत्नी बसंती देवी के नाम की पुष्टि हुई। बताया गया कि शहीद नारायण सिंह बिष्ट आर्मी मेडिकल कोर में तैनात थे।</p>



<p><strong>पुत्र सुजान सिंह ने शहीद के पार्थिव शरीर को दी मुखाग्नि</strong><br>वहीं शहीद नारायण सिंह का पार्थिव शरीर 56 वर्षो बाद उनके पैतृक गांव पहुंचने पर पूरा गांव भारत मां की जय के जयकारों से गुंजायमान हो गया। साथ ही शहीद के परिजनों का कहना है कि शहीद नारायण सिंह की शहादत गांव के लिए गौरव की बात है। उनका कहना है कि सेना ने 56 वर्ष बाद भी शहीद की खोजबीन कर उनके पार्थिव शरीर को उचित सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। परिजनों ने बताया कि कि शहीद नारायण सिंह के विमान दुर्घटना में लापता होने के बाद उनकी धर्मपत्नी बसन्ती देवी और शहीद नारायण सिंह के पिता महेंद्र सिंह का जीवन अभावग्रस्त बीता हालांकि बाद में बसंती देवी ने अपने देवर से ब्याह कर लिया और वर्ष 2011 में उनका भी निधन हो गया। बताया गया कि शहीद की पत्नी बसंती देवी के दो पुत्र हैं। जिनमे से पुत्र सुजान सिंह ने शहीद नारायण सिंह के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।</p>
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		<title>सैन्य सम्मान के साथ हुआ बलिदान कुलदीप मलिक का अंतिम संस्कार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Aug 2024 07:22:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[बलिदान कुलदीप मलिक]]></category>
		<category><![CDATA[सैन्य सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-159-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-159.jpg 735w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-159-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बलिदान कुलदीप मालिक के पार्थिव शरीर को गांव निडाणी में पहुंचते ही भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया। गांव के लोग, उनके परिजन और स्थानीय प्रशासन ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर शोक की लहर दौड़ गई और हर किसी की आंखें नम थीं। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर के बसंतगढ़ इलाके में हुए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-159-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-159.jpg 735w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Capture-159-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बलिदान कुलदीप मालिक के पार्थिव शरीर को गांव निडाणी में पहुंचते ही भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया। गांव के लोग, उनके परिजन और स्थानीय प्रशासन ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर शोक की लहर दौड़ गई और हर किसी की आंखें नम थीं।</p>



<p>जम्मू-कश्मीर के उधमपुर के बसंतगढ़ इलाके में हुए आतंकी हमले में बलिदान हुए जींद जिले के गांव निडानी निवासी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कुलदीप मलिक का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह गांव में पहुंचा। कुलदीप मलिक का सैन्य सम्मान के साथ बुधवार को अंतिम संस्कार हुआ। कुलदीप के बेटे नवीन ने मुखाग्नि दी। सेना के अधिकारियों ने बेटे को तिरंगा सौंपा। सेना की टुकड़ी ने बलिदानी को अंतिम सलामी दी और मातमी धुन बजी।</p>



<p>ग्रामीणों के अलावा आसपास के गांवों से भी लोग तथा हजारों युवा उनकी अंतिम यात्रा पहुंचे और नम आंखाें के साथ देशभक्ति नारे लगाए। इस दौरान सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी, जुलाना विधायक अमरजीत ढांडा के अलावा प्रशासन की तरफ से डीसी मोहम्मद इमरान रजा, एसपी सुमित कुमार ने मौके पर पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। वीरांगना के आंसू नही थम रहे थे। दोनों बेटे किसी तरह अपने आंसू रोक पा रहे थे।</p>



<p>कुलदीप की विरांगना पत्नी लक्ष्मी का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद पति के अंतिम दर्शन के समय लक्षमी ने वंदे मातरम का नारा तो जरूर लगाया लेकिन अपने आंसू नहीं रोक पाई। कुलदीप के बेटे नवीन और संजय अपने आंसू रोकने की कोशिश कर रहे थे लेकिन ये थम नहीं पा रहे थे। सेना के जवान और लोग परिवार के लोगों को ढांढस बंधा रहे थे। परिवार की महिलाओं को रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के बुजुर्ग लोग लगातार उनको ढांढस बंधा रहे थे कि कुलदीप मलिक देश के काम आया है और आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान हुआ है, यह हमारे लिए गर्व की बात है।</p>



<p><strong>बेटा बोला : हर रोज कोई न कोई अपना बेटा, अपना पिता खो रहा है</strong><br>पिता कुलदीप मलिक के बलिदान होने का पता चलते ही दिल्ली में सेना में तैनात उसका बेटा नवीन छुट्टी लेकर घर पर आया हुआ है। नवीन ने कहा कि तीन माह से जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों की गतिविधि बढ़ी है। हर रोज कोई न कोई अपना बेटा, अपना पिता व पति को खो रहा है, इसके लिए पाकिस्तान से बदला लेना चाहिए।</p>



<p>बात हुई थी और उसने कहा था कि रक्षाबंधन का त्योहार अच्छे से मनाना और मिलजुलकर रहना। उसने पिता कुलदीप मलिक को कहा था कि आतंकवादी गतिविधियां बढ़ गई हैं, इसलिए ध्यान से रहना, लेकिन उन्होंने कहा था कि बहादुरों वाली जिंदगी जी है, यही जीते रहेंगे। पिता ने वायदा किया था कि अगले माह नवीन के जन्मदिन पर छुट्टी लेकर आएगा, लेकिन दोपहर बाद उनको सूचना मिली कि आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान हो गया।</p>



<p><strong>भाई बोला- छुट्टी नहीं मिलने से रक्षाबंधन पर घर नहीं आया कुलदीप</strong><br>छोटे भाई कृष्ण ने बताया कि रक्षाबंधन पर कुलदीप मलिक को छुट्टी आना था, लेकिन दो माह से वहां पर आतंकवादी गतिविधि ज्यादा होने के कारण छुट्टी नहीं मिली। सोमवार को चार बजे के आसपास के सीआरपीएफ कमांडर का फोन आया कि आतंकवादियों से लोहा लेते हुए कुलदीप के गोली लगी हैं और उसका अस्पताल में इलाज करवाया जा रहा है। थोड़ी ही देर के बाद फोन आया कि कुलदीप मलिक बलिदान हो गए। जम्मू कश्मीर में बढ़ रही आतंवादी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को कड़ा फैसला लेना चाहिए। हर दिन कोई न कोई बलिदान हो रहा है। जींद जिले में ही दो माह में दो बलिदान हो चुके हैं। विपक्ष को भी इस मामले को संसद में उठाना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।</p>



<p>गौरतलब है कि जींद जिले के गांव निडानी निवासी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कुलदीप मालिक जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर के बसंतगढ़ इलाके में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में दो दिन पहले सोमवार को शहीद हो गए थे। उनके शहीद होने की सूचना आने के बाद गांव में मातम छा गया। 54 वर्षीय कुलदीप मलिक जल्द ही डीएसपी के पद पर पदोन्नत होने वाले थे। देश के लिए आतंक से लोहा लेते हुए 44 दिन के भीतर हरियाणा और जींद की माटी के दूसरे लाल ने वीरगति पाई है। इससे पहले सात जुलाई को जाजनवाला के लांस नायक पैरा कमांडो प्रदीप नैन शहीद हुए थे। अब ऊधमपुर में सोमवार को निडानी का लाल सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कुलदीप मलिक शहीद हुआ है।</p>



<p>कुश्ती में नेशनल स्तर के खिलाड़ी रहे कुलदीप लगभग 34 साल पहले खेल कोटे से सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबल नियुक्त हुए थे। उनके दो भाई दिलबाग व सतपाल गांव में ही खेती करते हैं। कुलदीप का बड़ा बेटा नवीन सेना में चालक के पद पर दिल्ली में तैनात हैं और दूसरा संजय रेलवे पुलिस में अमृतसर में तैनात हैं। दोनों ही बेटे शादीशुदा हैं। शहीर कुलदीप की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>देहरादून : सैन्य सम्मान के साथ हुआ जम्मू कश्मीर में बलिदान हुए जवान दीपेंद्र का अंतिम संस्कार</title>
		<link>https://livehalchal.com/uk-522/574933</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Aug 2024 08:25:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[जवान दीपेंद्र]]></category>
		<category><![CDATA[सैन्य सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-11-122611-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-11-122611.png 663w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-11-122611-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सेना में तैनात उत्तराखंड के&#160;चमोली जिले के करछूना गांव निवासी हवलदार दीपेंद्र कंडारी जम्मू कश्मीर में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए। जवान के बलिदान होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक छा गया। आज सुबह देहरादून के नया गांव स्थित श्मशान घाट पर&#160;जवान का अंतिम संस्कार किया गया।&#160; चमोली जिले के पोखरी तहसील &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-11-122611-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-11-122611.png 663w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-11-122611-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सेना में तैनात उत्तराखंड के&nbsp;चमोली जिले के करछूना गांव निवासी हवलदार दीपेंद्र कंडारी जम्मू कश्मीर में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए। जवान के बलिदान होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक छा गया। आज सुबह देहरादून के नया गांव स्थित श्मशान घाट पर&nbsp;जवान का अंतिम संस्कार किया गया।&nbsp;</p>



<p>चमोली जिले के पोखरी तहसील के अंतर्गत करछूना गांव निवासी दीपेंद्र कंडारी 17वीं बटालियन गढ़वाल राइफल में तैनात थे। जम्मू कश्मीर के तंगधार क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान वे बलिदान हो गए। हालांकि दीपेंद्र के बलिदान होने का स्पष्ट कारण अभी पता नहीं चल पाया है।</p>



<p>दीपेंद्र का परिवार वर्तमान में देहरादून के रतनपुर में रहता है। उनके पिता सुरेंद्र कंडारी सेना से सेवानिवृत्त हैं। बलिदानी दीपेंद्र तीन भाईयों में सबसे छोटे थे। वे अपने पीछे पत्नी व दो बच्चों को छोड़ गए हैं।</p>
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		<item>
		<title>उत्तराखंड में सैन्य सम्मान के साथ हुआ शहीदों का अंतिम संस्कार</title>
		<link>https://livehalchal.com/uk-434/569705</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jul 2024 04:56:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[शहीदों का अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[सैन्य सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="512" height="211" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-509.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-509.png 512w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-509-300x124.png 300w" sizes="auto, (max-width: 512px) 100vw, 512px" />जम्मू कश्मीर के कठुआ में आतंकवादी हमले में शहीद हुए उत्तराखंड के पांच जवानों का बुधवार को उनके पैतृक स्थानों पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों और ग्रामीणों ने अपने दुलारों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इससे पहले जवानों के पार्थिव शरीर राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे ताबूतों में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="512" height="211" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-509.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-509.png 512w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-509-300x124.png 300w" sizes="auto, (max-width: 512px) 100vw, 512px" />
<p>जम्मू कश्मीर के कठुआ में आतंकवादी हमले में शहीद हुए उत्तराखंड के पांच जवानों का बुधवार को उनके पैतृक स्थानों पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों और ग्रामीणों ने अपने दुलारों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इससे पहले जवानों के पार्थिव शरीर राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे ताबूतों में उनके घर पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया। शहीद के गांव के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के सैंकड़ों लोग अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे और परिजनों को द्रवित देखकर हर किसी की आंखें भर आईं।</p>



<p><strong>कमल सिंह का पार्थिव शरीर को देख सिसक उठीं महिलाएं<br></strong>हवलदार कमल सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके गांव नौदानू पहुंचा, उनके घर के बाहर एकत्र महिलाएं सिसक उठीं। हवलदार कमल सिंह परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटी के अलावा दादी (92) और मां (72) हैं। गांव के ही भगत सिंह नेगी ने बताया कि कमल जब चार साल के थे तब उनके पिता की अचानक मौत हो गई।</p>



<p>नेगी ने बताया कि उनकी मां ने गरीबी में भी खूब मेहनत की और उन्हें पढ़ाया। कमल का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ मंडल नदी के तट पर किया गया। उनके चाचा कल्याण सिंह ने मुखाग्नि दी। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट सेंटर लैंसडौन के कमांडेंट विनोद सिंह नेगी ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री की ओर से लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत ने श्रद्धांजलि दी।</p>



<p><strong>शहीद अनुज नेगी को पिता ने दी मुखाग्नि<br></strong>पौड़ी जिले के एक अन्य शहीद अनुज नेगी का भी मंडल नदी के तट पर टांडा महादेव मंदिर के पास अंतिम संस्कार किया गया। उनकी चिता को उनके पिता भरत सिंह नेगी ने मुखाग्नि दी। रुद्रप्रयाग जिले के टांडा में नायब सूबेदार आनंद सिंह के घर पर भी ऐसा द्रवित करने वाला माहौल था। आनंद सिंह का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को अंतिम विदाई देने पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि कठुआ में सेना के काफिले पर हमला करने वाले पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को सबक सिखाया जाना चाहिए।</p>



<p>टिहरी जिले के चौंद-जसपुर गांव निवासी लांस नायक विनोद सिंह का अंतिम संस्कार भी गंगा तट पर स्थित पूर्णानंद घाट पर पूरे सैन्य एवं राजकीय सम्मान के साथ किया गया। कीर्तिनगर ब्लॉक के डागर गांव निवासी शहीद जवान आदर्श नेगी का मलेथा स्थित अलकनंदा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए।</p>



<p><strong>राज्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी हुए भावुक<br></strong>इससे पहले गढ़वाल राइफल्स के जवान विनोद सिंह का पार्थिव शरीर भानियावाला स्थित उनके आवास पर लाया गया। राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद को नमन किया और पुष्पांजलि अर्पित की। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भी शहीद को श्रद्धांजलि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। राज्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह सभी प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत दुख की घड़ी है। अग्रवाल ने कहा, &#8220;मां भारती की रक्षा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ हमारे वीर जवानों का यह सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।&#8221;</p>
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		<title>शहीद अनिल का सैन्य सम्मान के साथ कंवारी में अंतिम संस्कार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Jun 2024 04:35:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[शहीद अनिल]]></category>
		<category><![CDATA[सैन्य सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="598" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/haryana2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/haryana2-1.jpg 598w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/haryana2-1-300x170.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 598px) 100vw, 598px" />रविवार सुबह जब अनिल कुमार का पार्थिव शरीर उनके गांव में लाया गया तो हर किसी की आंख नम थी। जिसे भी सूचना मिली, वह वहां पर दौड़ा चला आया।  जोधपुर में तैनात बीएसएफ के जवान शहीद अनिल कुमार का रविवार को उनके पैतृक गांव कंवारी में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="598" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/haryana2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/haryana2-1.jpg 598w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/haryana2-1-300x170.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 598px) 100vw, 598px" />
<p>रविवार सुबह जब अनिल कुमार का पार्थिव शरीर उनके गांव में लाया गया तो हर किसी की आंख नम थी। जिसे भी सूचना मिली, वह वहां पर दौड़ा चला आया। </p>



<p>जोधपुर में तैनात बीएसएफ के जवान शहीद अनिल कुमार का रविवार को उनके पैतृक गांव कंवारी में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जोधपुर से बीएसएफ की ओर से आए सुभाष चंद्र ने बताया कि अनिल कुमार ड्यूटी करने के बाद बाइक से अपने कमरे पर जा रहे थे कि अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया।</p>



<p>शहीद अनिल के भाई देवेंद्र ने बताया कि उनके भाई उनके लिए भगवान के बराबर थे। अनिल की माता कृष्णा देवी बार-बार अपने बेटे को पुकार रही थी। ऐसा ही हाल अनिल की पत्नी कविता देवी का था। शहीद की अंतिम यात्रा में जोधपुर से आई बीएसएफ के जवान और हिसार बीएसएफ कैंप से पहुंचे अधिकारी व जवानों के साथ-साथ हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।</p>



<p>इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम संस्कार किया गया। बीएसएफ की तरफ से पहुंचे अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद तिरंगे झंडे को सम्मान के साथ अनिल कुमार के स्वजनों में उनके बेटे अचल को सौंपा और सलामी दी।</p>



<p><strong>कबड्डी के दम पर ही बीएसएफ में हुआ था चयन</strong><br>वर्ष 2001 में बीएसएफ में स्पोर्ट्स कोटे से ट्रायल देकर भर्ती हुए अनिल कुमार गांव के पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने खेल कोटे से सेना में जाने का अवसर मिला। बीएसएफ की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। 7 साल तक कोचिंग भी की। नेशनल कबड्डी में कई बार बेस्ट रैडर का अवाॅर्ड भी मिला। वर्ष 1998 और 1999 में दो बार हरियाणा की टीम से नेशनल खेलते हुए अपनी टीम को बेहतरीन जीत दिलाई थी। इसी दौरान वह बेस्ट रैडर चुने गए थे। अनिल कुमार अक्सर कहते थे कि रिटायरमेंट के बाद वह नए खिलाड़ियों की पौध तैयार करेंगे और देश को बेस्ट प्लेयर देने का काम करेंगे।</p>



<p><strong>बेटा अचल पिता की तरह बनना चाहता है बेहतर खिलाड़ी</strong><br>अनिल कुमार के इकलौते बेटे अचल ने बताया कि वह अपने पिता की तरह कबड्डी में बेहतरीन खिलाड़ी बनना चाहता है और आर्मी में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते हैं। अचल फिलहाल दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। अचल ने बताया कि उसकी फोन पर पिता से अक्सर बात होती थी, लेकिन फेस टू फेस वह पिता से मार्च में मिला था। अभी 15 जून को ही वह परिवार के साथ जोधपुर में पापा के पास घूमने के लिए जाने का मन बना रहा था। वह अपने मामा के घर गया हुआ था कि इसी दौरान यह हादसा हो गया जिसको वह कभी भूल नहीं सकता।</p>
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