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	<title>सैटेलाइट &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>सैटेलाइट &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में शुरू होने के बहुत करीब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 10:12:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गैजेट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="582" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/FTGGGG-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/FTGGGG.jpg 582w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/FTGGGG-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 582px) 100vw, 582px" />भारत के उन दूर-दराज के इलाकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, जहां आज भी तेज इंटरनेट एक सपने से कम नहीं है। एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक (Starlink) अब भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के बेहद करीब आ गई है। इसे सरकार से लगभग सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। बीते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="582" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/FTGGGG-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/FTGGGG.jpg 582w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/FTGGGG-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 582px) 100vw, 582px" />
<p>भारत के उन दूर-दराज के इलाकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, जहां आज भी तेज इंटरनेट एक सपने से कम नहीं है। एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक (Starlink) अब भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के बेहद करीब आ गई है। इसे सरकार से लगभग सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। बीते दिनों कंपनी ने महाराष्ट्र सरकार के साथ LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) भी साइन किया है।</p>



<p>हालांकि, सबसे बड़े सवाल ये हैं कि आखिर ये सर्विस कब शुरू होगी, इसके लिए आपको कितने पैसे खर्च करने होंगे और आपको स्पीड कितनी मिलेगी? आपको बता दें कि इसको लेकर कई लीक्स सामने आ चुकी हैं। यहां पर आपको इन सभी सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं।</p>



<p><strong>भारत में कब लॉन्च होगा स्टारलिंक?</strong></p>



<p>स्टारलिंक को भारत में ऑपरेशन शुरू करने के लिए लगभग सभी अप्रूवल मिल चुके हैं। अब सिर्फ कुछ आखिरी मंजूरियां बाकी हैं, जैसे SATCOM गेटवे के लिए अप्रूवल और जरूरी स्पेक्ट्रम का अधिग्रहण। इन प्रोसेस में थोड़ा समय लग सकता है।</p>



<p>जानकारों का मानना है कि स्टारलिंक की सर्विस का फुल-फ्लेज्ड लॉन्च अब से लगभग तीन से चार महीनों में हो सकता है। इसका मतलब है कि हम दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत में स्टारलिंक के शुरू होने की उम्मीद कर सकते हैं। ये उन लोगों के लिए एक बड़ा कदम होगा जो फाइबर ब्रॉडबैंड की पहुंच से बाहर हैं।</p>



<p><strong>कितना महंगा होगा स्टारलिंक का कनेक्शन?</strong></p>



<p>अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर जो है कीमत। सैटेलाइट इंटरनेट एक नई और महंगी टेक्नोलॉजी है इसलिए इसकी कीमत आपके मौजूदा ब्रॉडबैंड से ज्यादा होगी। लीक्स के मुताबिक, स्टारलिंक के कनेक्शन के लिए आपको एक बार में सेटअप कॉस्ट के तौर पर 30,000 रुपये या उससे थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इस कॉस्ट में आपको जरूरी हार्डवेयर जैसे डिश एंटीना और राउटर मिलेगा।</p>



<p>इसके बाद, आपको मंथली प्लान लेना होगा। लीक्स की मानें तो, भारत में स्टारलिंक के मंथली प्लान्स 3,300 रुपये से शुरू हो सकते हैं। ये भी कहा जा रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों के आधार पर कीमतों में थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।</p>



<p><strong>कितनी मिलेगी स्पीड और कौन ले पाएगा कनेक्शन?</strong></p>



<p>स्टारलिंक का मुख्य मकसद उन दूर के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना है, और वहां के लिए इसकी स्पीड किसी सपने से कम नहीं होगी। उम्मीद है कि स्टारलिंक भारत में 25Mbps से लेकर 220Mbps तक की इंटरनेट स्पीड ऑफर करेगा।</p>



<p>इसके बेस प्लान्स में आपको लगभग 25 से 50Mbps की स्पीड मिल सकती है, जो वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन क्लास के लिए काफी है। वहीं, इसके हाई-एंड प्लान्स में स्पीड 220Mbps तक जा सकती है।</p>



<p>हालांकि, शुरुआत में हर कोई इसका कनेक्शन नहीं ले पाएगा। भारत सरकार ने स्टारलिंक के लिए देश में कनेक्शन्स की एक ऊपरी सीमा तय की है। इसके अनुसार, स्टारलिंक फिलहाल भारत में सिर्फ 20 लाख कनेक्शन ही दे सकता है। आने वाले समय में कंपनी इसके बारे में ऑफिशियली जानकारी दे सकती है।</p>
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		<title>उत्तराखंड ने केंद्र से मांगा हिमालयी राज्यों का अलग सैटेलाइट समूह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Oct 2025 05:15:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[सैटेलाइट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="313" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/इ-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/इ.jpg 724w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/इ-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हर साल आपदाओं से जूझने वाला उत्तराखंड अब इससे बचाव के रास्ते तलाश रहा है। इसके लिए प्रदेश ने केंद्र के सामने हिमालयी राज्यों के लिए अलग सैटेलाइट समूह की मांग रखी है। इससे मौसम, जलस्तर, हिमपात की भविष्यवाणी का सटीक मॉडल तैयार हो सकेगा। दिल्ली में हाल में हुई स्पेस मीट में उत्तराखंड से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="313" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/इ-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/इ.jpg 724w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/इ-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हर साल आपदाओं से जूझने वाला उत्तराखंड अब इससे बचाव के रास्ते तलाश रहा है। इसके लिए प्रदेश ने केंद्र के सामने हिमालयी राज्यों के लिए अलग सैटेलाइट समूह की मांग रखी है। इससे मौसम, जलस्तर, हिमपात की भविष्यवाणी का सटीक मॉडल तैयार हो सकेगा। दिल्ली में हाल में हुई स्पेस मीट में उत्तराखंड से सचिव आईटी नितेश झा ने राज्य में आपदाओं के मद्देनजर पूर्व तैयारियों और बाद की कोशिशों को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया।</p>



<p><strong>आपदा से पहले : अलग सैटेलाइट समूह</strong><br>उच्च गुणवत्ता वाले सैटेलाइट चित्र (बहुत उच्च रिजॉल्यूशन वाले) जो 50 सेंटीमीटर से कम की स्पष्टता के हों। इनका उपयोग पहाड़ी इलाकों के नक्शे बनाने और निगरानी के लिए किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि संभावित भूस्खलन, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के खतरे की पहले से चेतावनी देने के लिए उन्नत तकनीकी सिस्टम की आवश्यकता है। हाई रिजॉल्यूशन डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) और लिडार तकनीकी से ऊंचाई और स्थलाकृति की सटीक जानकारी मिलती है।</p>



<p>इससे भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं की संभावना को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। राज्य ने ये भी मांग की है कि मौसम, जलस्तर, हिमपात आदि की भविष्यवाणी करने वाले सटीक सैटेलाइट डाटा आधारित मॉडल हों। सचिव ने कहा है कि हिमालय क्षेत्र की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सैटेलाइट समूह की जरूरत है, जो केवल इस क्षेत्र की निगरानी और डाटा संग्रहण के लिए काम करे। जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों की निरंतर निगरानी करने के लिए उन्होंने एक समर्पित क्लाइमेट ऑब्जर्वेटरी की आवश्यकता बताई है।</p>



<p><strong>आपदा के बाद सैटेलाइट आधारित संचार प्रणाली जरूरी</strong><br>सचिव नितेश झा ने अपने स्तुतिकरण में कहा है कि आपदा के बाद संचार व्यवस्था नष्ट हो जाती है। ऐसे में सैटेलाइट आधारित नेटवर्क से राहत और बचाव कार्यों में आसानी होगी। उन्होंने आपदा के बाद भी रोजाना और हर मौसम में सैटेलाइट से जानकारी की मांग रखी, जिससे नदियों के अवरोध या अस्थायी झीलों की तुरंत पहचान हो सके।</p>



<p>धराली आपदा में बादलों के कारण सैटेलाइट तस्वीरों की अस्पष्टता की समस्या आई थीं। लिहाजा, राज्य ने मांग की है कि सिंथेटिक अपरचर रडार हों, जिससे बादलों और मानसून में भी स्पष्ट तस्वीरें मिलती हैं। यह तकनीकी बाढ़ या भूस्खलन के बाद इलाके की स्थिति समझने में उपयोगी है।</p>
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		<title>गेहूं पकने को तैयार, सैटेलाइट से की जा रही खेतों की मॉनिटरिंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Feb 2025 09:32:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[सैटेलाइट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-539-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-539.jpg 714w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-539-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति दंड लगाया जाएगा। किसानों को 2 एकड़ तक 2500 रुपये, 2-5 एकड़ पर 5000 रुपये और 5 एकड़ से अधिक खेत में 15,000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। गेहूं पकने को तैयार हो गए है। गेहूं कटाई के बाद बची हुई नरवाई किसानों के गले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-539-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-539.jpg 714w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-539-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति दंड लगाया जाएगा। किसानों को 2 एकड़ तक 2500 रुपये, 2-5 एकड़ पर 5000 रुपये और 5 एकड़ से अधिक खेत में 15,000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा।</p>



<p>गेहूं पकने को तैयार हो गए है। गेहूं कटाई के बाद बची हुई नरवाई किसानों के गले की फांस बन सकती है। न तो इसे रखा जा सकता है और न ही जलाया जा सकता है। जिन खेतों में नरवाई जलाई जाएगी या शार्ट-सर्किट की वजह से जल जाएगी, उन खेत के मालिकों को अब सीधे तौर पर जुर्माने का भागीदार बनना पड़ेगा। असल में सैटेलाइट के माध्यम से हर खेत पर सीहोर से निगरानी की जा रही है। यह पहला अवसर है जब नरवाई जलाने के मामले में प्रशासन सख्त नजर आ रहा है।</p>



<p>गौरतलब है कि नरवाई जलाने को लेकर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद इसके नरवाई बड़े स्तर पर हर साल जला दी जाती है, जिससे प्रदूषण फैलता है और जमीन की उपजाऊ क्षमता भी प्रभावित होती है। पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के अंतर्गत प्रदेश में फसलों विशेषत: धान एवं गेहूं की फसल कटाई उपरांत फसल अवशेषों (नरवाई) को खेतों में जलाये जाने को प्रतिबंधित किया गया है। इस संबंध में जारी निर्देशों के उल्लंघन किये जाने पर संबंधितों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कही कि पर्यावरण विभाग द्वारा नरवाई में आग लगाने के विरूद्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि दण्ड का प्रावधान निर्धारित किया गया है।</p>



<p><strong>ऐसा है जुर्माने का प्रावधान</strong><br>नरवाई जलाने पर किसानों से अलग-अलग तरह से अर्थदंड वसूला जाएगा। इसके तहत दो एकड़ तक खेत में नरवाई जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एक? खेत में नरवाई जलाने पर पांच हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक खेत की नरवाई जलाने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।</p>



<p><strong>कृषि विभाग करेगा दंड वसूलने का काम</strong><br>दंड वसूलने के लिए संबंधित व्यक्ति, निकाय, कृषक जिनके द्वारा नरवाई जलाकर पर्यावरण को क्षति पहुंचाई गई है उनको उप संचालक कृषि सूचना-पत्र जारी करेंगे। सूचना-पत्र को तामिल कराने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी की होगी। संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी इसका पर्यवेक्षण करेंगे एवं तामिल किए गए सूचना पत्रों की सूची अनुविभागीय कृषि अधिकारी उप संचालक कृषि को प्रस्तुत करेंगे। कृषि विस्तार अधिकारी, संबंधित ग्राम के हल्का पटवारी एवं पंचायत सचिव के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेंगे। आवश्यकता पडऩे पर संबंधित थाने से पुलिस बल भी साथ में लिया जा सकता है।</p>
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		<title>अब भारत की सीमाएं होंगी और अधिक सुरक्षित, सैटेलाइट के जरिए मिलेगी हर घुसपैठ&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 04 Sep 2017 10:10:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="278" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="अब भारत की सीमाएं होंगी और अधिक सुरक्षित, सैटेलाइट के जरिए मिलेगी हर घुसपैठ..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />New Delhi: देश की सीमाओं पर हाल के सालों में बढ़ते तनाव के मद्देनजर सरकार अब बॉर्डर सिक्यॉरिटी फोर्स (BSF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) को अलग-अलग पूरी तरह समर्पित Satelite बैंडविथ की व्यवस्था देने पर विचार कर रही है। 2016 में Pakistan से आए आतंकवादियों का उड़ी के आर्मी कैंप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="278" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="अब भारत की सीमाएं होंगी और अधिक सुरक्षित, सैटेलाइट के जरिए मिलेगी हर घुसपैठ..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>New Delhi: देश की सीमाओं पर हाल के सालों में बढ़ते तनाव के मद्देनजर सरकार अब बॉर्डर सिक्यॉरिटी फोर्स (BSF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) को अलग-अलग पूरी तरह समर्पित Satelite बैंडविथ की व्यवस्था देने पर विचार कर रही है। 2016 में Pakistan से आए आतंकवादियों का उड़ी के आर्मी कैंप पर हमला और फिर हाल ही में डोकलाम में चीन के साथ तनातनी के हालात के मद्देनजर निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-76472 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132.jpg" alt="अब भारत की सीमाएं होंगी और अधिक सुरक्षित, सैटेलाइट के जरिए मिलेगी हर घुसपैठ..." width="709" height="319" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/09/img_20170904142132-768x346.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 709px) 100vw, 709px" /></strong><strong><a href="http://www.livehalchal.com/cm-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%98/75293" target="_blank" rel="bookmark noopener">अभी-अभी: CM योगी ने किया ये बड़ा ऐलान, सड़क पर नहीं घूमेगी कोई गाय, अब बनेगे…</a></strong></p>
<p><strong>इसका मकसद सीमा की पहरेदारी करनेवाले बलों को पाकिस्तानी और चीनी सैनिकों की पल-पल की गतिविधियों और आतंकी घुसपैठ पर नजर रखने में सक्षम बनाना है। इससे पूरे इलाके को समझने और दूर-दराज के इलाकों में प्रभावी संचार स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। इतना ही नहीं, अलग से Satelite बैंडविड्थ से संकट के वक्त पड़ोसी देशों की ओर से सीमा पर तैनात किए जा रहे सैनिकों एवं जंग के साजोसामान से जुड़ी क्षमताओं का आकलन भी किया जा सकेगा। </strong></p>
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<p><strong>कुछ सरकारी सूत्रों ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि गृह मंत्रालय के शीर्ष नौकरशाहों ने हाल ही में BSF, ITBP, SSB और इसरो के अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी। मीटिंग में सीमा पर पहली लाइन में तैनात सुरक्षाबलों को आदेश व नियंत्रण, संचार, निगरानी, खुफिया और जासूसी क्षमताओं को अभेद्य बनाने की दरकार महसूस की गई। अभी प्रस्ताव तो प्राथमिक चरण में है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे लेकर काफी गंभीर है। द टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे पर गृह मंत्रालय और सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों से बात करनी चाही, लेकिन सफलता नहीं मिली। </strong></p>
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<p><strong>एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा, &#8216;बॉर्डर मैनेजमेंट में Satelite अहम भूमिका निभा सकते हैं और Asia में भारत के पास कुछ सर्वोत्तम सैटेलाइट्स हैं। डिफेंस फोर्सेज हमेशा Space technology का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बॉर्डर फोर्सेज को IB, RAW और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन जैसी केंद्रीय एजेंसियों की खुफिया सूचनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्हें लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर घाटी जैसे इलाकों में कमजोर कम्युनिकेशन सिस्टम का भी सामना करना पड़ता है। रियल टाइम इन्फर्मेशन वाली Satelite टेक्नॉलजी से भविष्य में होनेवाली घटनाओं से आसानी से निपटा जा सकता है।&#8217;</strong></p>
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