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	<title>सूरज की ओर भी बढ़ा खतरा &#8211; 900 क्षुद्र ग्रह टकरा सकते हैं धरती से &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सूरज की ओर भी बढ़ा खतरा &#8211; 900 क्षुद्र ग्रह टकरा सकते हैं धरती से</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Sep 2019 06:36:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/09/download-91.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" />शनिवार को बिना कोई नुकसान पहुंचाए धरती के बेहद पास से 2000 क्यूडब्ल्यू7 और 2010 सी01 नामक दो क्षुद्र ग्रह गुजर गए। नासा के मुताबिक, इनका आकार दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा जितना बड़ा था, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यूरोपीयन स्पेस एजेंसी ने अगले 100 वर्षो में 900 क्षुद्र ग्रहों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/09/download-91.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><strong>शनिवार को बिना कोई नुकसान पहुंचाए धरती के बेहद पास से 2000 क्यूडब्ल्यू7 और 2010 सी01 नामक दो क्षुद्र ग्रह गुजर गए। नासा के मुताबिक, इनका आकार दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा जितना बड़ा था, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यूरोपीयन स्पेस एजेंसी ने अगले 100 वर्षो में 900 क्षुद्र ग्रहों के धरती से टकराने की आशंका जताई है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि इनमें से छोटे से छोटा ग्रह भी धरती पर भारी तबाही मचा सकता है। ऐसे में धरती से टकराव के जोखिमों को कम करने के लिए यूरोपीयन स्पेस एजेंसी और कई अन्य समूह मिलकर इन क्षुद्र ग्रहों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाने में लगे हैं।</strong></p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter size-medium wp-image-272346" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/09/download-91-300x168.jpg" alt="" width="300" height="168" /></p>
<p><strong>धरती को बचाने की योजना</strong><br />
<strong>क्षुद्र ग्रहों से धरती को बचाने की योजनाओं पर काम शुरू हो गया है। इसी को लेकर रोम में दुनियाभर के वैज्ञानिकों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डार्ट अंतरिक्षयान को धरती की ओर बढ़ते क्षुद्र ग्रहसे टकराने पर चर्चा की गई। दरअसल, नासा के योजना फ्रिज के आकार के डार्ट अंतरिक्षयान को गोली से रफ्तार से नौ गुना तेजी से एक अंतरिक्ष चट्टान से टकराने की है, ताकि वह अपने रास्ते से भटक जाए। डार्ट दरअसल ‘डबल एस्ट्रॉयड रिडॉयरेक्शन टेस्ट’ है।</strong></p>
<p><strong>नासा निभाएगी अहम रोल </strong><br />
<strong>फिलहाल यह मिशन सिर्फ एक परीक्षण है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इसका प्रयोग खतरनाक क्षुद्र ग्रहों को पृथ्वी की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए किया जा सकेगा। नासा ने इस मिशन को अनुमोदित कर दिया है। डार्ट का लक्ष्य एक ऐसा क्षुद्र ग्रह है, जो 2022 में पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा और दो वर्ष बाद वापस आएगा। यह दरअसल, डिडिमोस नामक दो क्षुद्र ग्रह हैं। इनमें से डिडिमोस ए बड़ा और डिडिमोस बी छोटा है। नासा डिडिमोस बी को अपनी दिशा से भटकाने की कोशिश करेगा। यह छोटी चट्टान सिर्फ 160 मीटर चौड़ी है।</strong></p>
<p><strong>अभी होनी हैं कई और बैठक</strong><br />
<strong>अगले हफ्ते वैज्ञानिक म्यूनिख में 2006 क्यूवी89 नामक क्षुद्र ग्रह पर चर्चा करने के लिए भी मिलेंगे, जो 9 सितंबर को पृथ्वी के पास से गुजर गया। फिर, 16 और 17 सितंबर को यूरोपीयन एजेंसी द्वारा जर्मनी के डर्मस्टाड में एक आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अमेरिका सहित छह देशों की नागरिक सुरक्षा एजेंसियां मौजूद होंगी।</strong></p>
<p><strong>खतरनाक क्षुद्र ग्रहों का शिकार<br />
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अधिकांश क्षुद्र ग्रहों की खोज की है, जो आकार में लगभग एक किलोमीटर जितने चौड़े हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के निशाने में 140 मीटर चौड़े क्षुद्र ग्रह ही हैं, क्योंकि उनके टकराने पर धरती को भारी नुकसान पहुंच सकता है। </strong></p>
<p><strong>सूर्य की ओर बढ़ रहा है दूसरे सौरमंडल का धूमकेतु</strong><br />
<strong>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक एक धूमकेतु जो सूर्य की ओर बढ़ रहा है। खगोलविदों ने बताया कि यह धूमकेतु 150000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इससे लगता है कि इसकी उत्पत्ति हमारे सौर मंडल से बाहर हुई है। यह सूर्य से 42 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और लगातार इसके करीब आ रहा है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि यह पृथ्वी से बहुत दूर और मंगल ग्रह की कक्षा के पास से होकर गुजरेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह दिसंबर महीने में सूर्य से टकराकर दोबारा इंटरस्टेलर स्पेस में चला जाएगा।  </strong></p>
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