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	<title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला उन्‍नाव दुष्‍कर्म में &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गैरकानूनी नियुक्तियों पर नहीं मिलेगी पेंशन और वेतन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Oct 2019 10:12:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="284" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5.jpg 980w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-300x138.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-768x353.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि जब ये सिद्ध हो जाए कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियां गैरकानूनी रूप से हुई हैं तो ऐसे लोगों को वेतन, पेंशन और अन्य भत्ते नहीं नहीं दिए जा सकते। जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने यह आदेश देते हुए कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="284" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5.jpg 980w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-300x138.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-768x353.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि जब ये सिद्ध हो जाए कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियां गैरकानूनी रूप से हुई हैं तो ऐसे लोगों को वेतन, पेंशन और अन्य भत्ते नहीं नहीं दिए जा सकते। जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने यह आदेश देते हुए कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी।</strong></p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-281671 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-300x138.jpg" alt="" width="554" height="255" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-300x138.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5-768x353.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/10/38-Scourt_5-49_5.jpg 980w" sizes="(max-width: 554px) 100vw, 554px" /></p>
<p><strong>याचिका से जुड़े कई कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने 25-25 साल तक सेवा की है। कर्मचारियों ने कहा कि मानवीय रुख लेते हुए उनके बारे में पास किए गए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया जाए। यह मामला बिहार के स्वास्थ्य विभाग में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति का है। इन कर्मचरियों की संख्या हजारों में हैं।</strong></p>
<p><strong>पीठ ने पटना हाईकोर्ट की फुल बेंच के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वेतन का अधिकार आवश्यक रूप से एक कानूनी अधिकार है जो वैध नियुक्ति से पैदा होता है। यह पद पर वैध नियुक्ति से मिलता है इसलिए जहां यह जड़ ही अनुपस्थित है वहां वेतन की शाखा नहीं आ सकती।</strong></p>
<p><strong>सार्वजिनक सेवा में वेतन, पेंशन और अन्य लाभ आवश्यक रूप से कानूनी अधिकार हैं। इसलिए ये अधिकार वैध और कानूनी सेवा से ही उत्पन्न होंगे, एक बार जब ये सामने आए कि नियुक्ति अवैध है तथा कानून की निगाह में व्यर्थ है तो ऐसे में वेतन, पेंशन और अन्य कानूनी वित्तीय लाभों का सवाल ही पैदा नहीं होता।</strong></p>
<p><strong>पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में नियुक्तियां बिना स्वीकृत पदों, बिना विज्ञापन निकाले, बिना अन्य योग्य व्यक्तियों को मौका दिए बगैर की गई। ये नियुक्तियां पीछे के दरवाजे से की गई नियुक्तियां हैं जो भाई भतीजावाद और पक्षपात का नतीजा हैं। इन्हें किसी भी न्यायिक मानक से नियमित नियुक्तियां नहीं कहा जा सकता।</strong></p>
<p><strong>ये अवैध गैरकानूनी और पूर्ण रूप से मनमानी है जिन्हें उचित नहीं कहा जा सकता। गौरतलब है कि पिछले दिनों कोर्ट ने बिहार सरकार की अपील पर इन सभी नियुक्तियों को अवैध घोषित कर दिया था। लेकिन कुछ अपीलें वेतन और पेंशन लाभ के लिए लंबित थीं।</strong></p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला उन्&#x200d;नाव दुष्&#x200d;कर्म में, मामले से जुड़े सभी केस यूपी से बाहर होंगे ट्रांसफर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Aug 2019 06:07:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मामले से जुड़े सभी केस यूपी से बाहर होंगे ट्रांसफर]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला उन्‍नाव दुष्‍कर्म में]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="208" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" />उत्&#x200d;तर प्रदेश के उन्&#x200d;नाव दुष्&#x200d;कर्म में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरत महसूस हुई, तो उन्&#x200d;नाव दुष्&#x200d;कर्म से जुड़े सभी केस उत्&#x200d;तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर किए जा सकते हैं। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस केस से जुड़े सीबीआइ अधिकारियों को भी तलब किया। कोर्ट ने दोपहर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="208" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p><strong>उत्&#x200d;तर प्रदेश के उन्&#x200d;नाव दुष्&#x200d;कर्म में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरत महसूस हुई, तो उन्&#x200d;नाव दुष्&#x200d;कर्म से जुड़े सभी केस उत्&#x200d;तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर किए जा सकते हैं। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस केस से जुड़े सीबीआइ अधिकारियों को भी तलब किया।</strong></p>
<p><strong> कोर्ट ने दोपहर 12 बजे तक केस की स्&#x200d;टेटस रिपोर्ट सीबीआइ से मांगी है। उत्&#x200d;तर प्रदेश के उन्&#x200d;नाव दुष्&#x200d;कर्म का मामला सड़क से संसद तक गूंज रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर काफी गंभीर नजर आ रहा है।</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-260980 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208-300x208.jpg" alt="" width="594" height="412" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/08/Supreme-Court-300x208-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 594px) 100vw, 594px" /></p>
<p><strong>जीवन और मौत से संघर्ष कर रही उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार की ओर से भेजी गई चिट्ठी पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। 17 जुलाई को प्राप्त हुई चिट्ठी को मुख्य न्यायाधीश के सामने पेश करने में हुई देरी पर कोर्ट ने सेक्रेटरी जनरल से कारण बताने को कहा है। सड़क दुर्घटना से पहले उन्नाव दुष्कर्म पीडि़ता और उसके परिवार की ओर से मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट में पत्र भेज कर अभियुक्तों द्वारा धमकी दिये जाने की शिकायत की गई थी। उन्नाव दुष्कर्म कांड में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित कई लोग अभियुक्त हैं।</strong></p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में हुईं ये दलील </strong><br />
<strong>&#8211; सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव केस में सीबीआइ के ज़िम्मेदार अधिकारी डायरेक्टर से आज 12 बजे तक जाँच की प्रगति रिपोर्ट माँगी गई है। कोर्ट ने ये भी कहा कि वह उन्नाव दुष्कर्म और अन्य घटनाओं के केस भी उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफ़र करने के इच्छुक हैं।</strong><br />
<strong>&#8211; सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस बारे मे सीबीआइ डायरेक्टर से बात करें।</strong><br />
<strong>&#8211; सॉलिसिटर जनरल फिर सुप्रीम कोर्ट आए और कोर्ट को बताया कि उनकी अभी-अभी सीबीआइ डायरेक्टर से बात हुई है। डायरेक्टर का कहना है कि केस की जाँच लखनऊ में चल रही है, इसलिए रिकॉर्ड वहीं हैं, जैसे ही पहली फ़्लाइट मिलेगी रिकार्ड दिल्ली लाए जाएंगे।</strong><br />
<strong>-सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से मामला कल(शुक्रवार) सुनने का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट इसके लिए राज़ी नहीं हुआ। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि डायरेक्टर सीबीआइ जाँच अधिकारी से जाँच की प्रगति की रिपोर्ट पता करके कोर्ट को आज ही बताएँ।</strong></p>
<p><strong>बीते रविवार को जब उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता, उसकी चाची व वकील कार से जा रहे थे, तब उनकी कार को एक तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी थी जिसमें पीड़िता के रिश्तेदारों की मौत हो गई जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक, मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश को पत्र की जानकारी दी गई थी और उन्होंने सेक्रेटरी जनरल से उस पर नोट बनाकर उनके सामने पेश करने को कहा था।</strong></p>
<p><strong>गुरुवार को वरिष्ठ वकील वी गिरि ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता व अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष उन्नाव कांड का जिक्र करते हुए सुनवाई का आग्रह किया। गिरि ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बाल यौन उत्पीड़न रोक कानून (पोक्सो) के प्रावधान ठीक से लागू नहीं हो रहे हैं। कोर्ट ने गिरि को बच्चों के यौन उत्पीड़न मामले में न्यायमित्र बनाया है। गिरि की बात पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने अखबारों में पढ़ा है कि पीड़ित परिवार ने उन्हें चिट्ठी लिखी है। उन्हें मंगलवार को पत्र के बारे में पता चला, लेकिन अभी तक उन्होंने पत्र नहीं देखा है। पत्र उनके सामने पेश नहीं किया गया है।</strong></p>
<p><strong>मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। कोर्ट प्रयास करेगा कि इस विनाशकारी माहौल में कुछ सृजनात्मक और बेहतर किया जा सके। कोर्ट ने मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए लगाए जाने का आदेश देते हुए रजिस्ट्री से मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश द्वारा पीड़िता के पत्र के बारे में जारी किए गए प्रशासनिक आदेश की रिपोर्ट भी मांगी है। इसके अलावा कोर्ट ने 17 जुलाई को प्राप्त हो गई चिट्ठी को 30 जुलाई की शाम चार बजे तक मुख्य न्यायाधीश के सामने न पेश किये जाने पर सेक्रेटरी जनरल से कारण पूछा है।</strong></p>
<p><strong>केस को उत्तर प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग</strong><br />
<strong>पीड़िता की मां की स्थानांतरण याचिका पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की गई है। कोर्ट ने गत 16 अप्रैल को याचिका पर सीबीआइ, कुलदीप सिंह सेंगर सहित 15 प्रतिवादियों को नोटिस किया था। कोर्ट को भेजे गए पीड़ित परिवार के पत्र में दो दिन लगातार 7 और 8 जुलाई को अभियुक्तों की ओर से उनके घर आकर धमकी दिये जाने और समझौते के लिए दबाव डालने की बात कही गई है। </strong></p>
<p><strong>दोनों दिन का घटनाक्रम बताते हुए कहा गया है कि अभियुक्तों की ओर से धमकी दी गई कि सुलह कर लो, नहीं तो पूरे परिवार को फर्जी मुकदमे लगा कर जेल में सड़ा कर मार डालेंगे। पत्र में अनुरोध किया गया है कि माखी के प्रभारी निरीक्षक को प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करने का आदेश दिया जाए। पत्र की प्रतिलिपि इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव गृह, डीजीपी, व सीबीआई एसीबी के शाखा प्रमुख आदि को भी भेजी गई है।</strong></p>
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