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	<title>सीपीआर से कम हो सकती हैं हृदयघात से होने वाली मौतें &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सीपीआर से कम हो सकती हैं हृदयघात से होने वाली मौतें</title>
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		<pubDate>Mon, 20 Nov 2017 11:00:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="275" height="183" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/सीपीआर-से-कम-हो-सकती-हैं-हृदयघात.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="सीपीआर से कम हो सकती हैं हृदयघात से होने वाली मौतें" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" />दिल की बीमारी (कार्डियोवस्कुलर) रोग के शिकार रहे पुरुषों को सेक्स के दौरान या उसके बाद अचानक कार्डिएक अरेस्ट (हृदयघात) होने का खतरा बढ़ जाता है। भारतीय मूल के शोधकर्ता की अगुवाई वाले दल को एक अध्ययन में पता चला है कि कार्डियोवस्कुलर रोग के शिकार रहे पुरुषों को सेक्स के दौरान या उसके बाद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="275" height="183" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/सीपीआर-से-कम-हो-सकती-हैं-हृदयघात.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="सीपीआर से कम हो सकती हैं हृदयघात से होने वाली मौतें" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><strong>दिल की बीमारी (कार्डियोवस्कुलर) रोग के शिकार रहे पुरुषों को सेक्स के दौरान या उसके बाद अचानक कार्डिएक अरेस्ट (हृदयघात) होने का खतरा बढ़ जाता है। भारतीय मूल के शोधकर्ता की अगुवाई वाले दल को एक अध्ययन में पता चला है कि कार्डियोवस्कुलर रोग के शिकार रहे पुरुषों को सेक्स के दौरान या उसके बाद अचानक कार्डिएक अरेस्ट (हार्ट अटैक) होने का जोखिम हो सकता है। अचानक कार्डिएक अरेस्ट (एससीए) में दिल एकाएक धड़कना बंद कर देता है और ऐसा बिना किसी चेतावनी के होता है। इस शोध के निष्कर्षो से पता चला कि एससीए की घटनाएं काफी दुर्लभ है, लेकिन इसमें पीड़ित के जीवित रहने की संभावनाएं काफी कम होती हैं।<img decoding="async" class="aligncenter  wp-image-93211" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/11/सीपीआर-से-कम-हो-सकती-हैं-हृदयघात.jpg" alt="सीपीआर से कम हो सकती हैं हृदयघात से होने वाली मौतें" width="561" height="373" /></strong></p>
<p><strong>शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति का सहयोगी तुरंत उसे सीपीआर (फुफुसीय पुर्नजीवन) दे पाने में नाकाम रहता है। वहीं सीपीआर देकर ज्यादा से ज्यादा जानें बचाई जा सकती है। </strong></p>
<p><strong>शोधकर्ताओं ने बताया कि एससीए के कुछ मामलों में यौन गतिविधियों के बाद कोई दवाई, उत्तेजक पदार्थ या अल्कोहल के प्रयोग की भी अहम भूमिका हो सकती है। शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि लोगों को एससीए के दौरान सीपीआर देने के लिए शिक्षित करने की जरूरत है।&#8217; इससे बढ़ी तादाद में जान बचायी जा सकती है। जागरुकता की कमी भी इसका एक कारण है। </strong></p>
<p><strong>कोरोनरी धमनी रोग या दिल का दौरा ऐसी ही बीमारी है जिससे हृदय गंभीर रूप से बीमार हो सकता है और मरीज की जान को जोखिम पहुंचा सकता है। कोरोनरी धमनी रोग होने पर हृदय की मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है और धीरे-धीरे रक्त प्रवाह पूरी तरह बंद हो जाता है। </strong></p>
<p><strong>जो मरीज मधुमेह से पीड़ित होते हैं उनमें हृदयघात होने की संभावना बढ़ जाती है। एक आंकड़े के अनुसार सामान्य लोगों की अपेक्षा मधुमेह रोगियों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना 2 से 4 गुना बढ़ जाती है. इसलिए ब्लड शुगर लेवल का पूरा ध्यान रखना चाहिए। </strong></p>
<p><strong>उच्च रक्तचाप भी हृदय रोग होने का एक महत्वपूर्ण कारक है। चिकित्सकीय जगत में इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है. उच्च रक्तचाप में व्यक्ति को सिरदर्द एवं चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीजों को उच्च रक्तचाप से संबंधित किसी लक्षण का पता ही नहीं लग पाता और यह गंभीर हृदय रोगों में बदल जाता है। </strong></p>
<p><strong>जब रक्तचाप का लेवल सामान्य से कम हो जाता है तो उसे निम्न रक्तचाप कहते हैं। लोग खासकर दुबली-पतली महिलाओं को प्राय: यह गलतफहमी होती है कि वे निम्न रक्तचाप से पीड़ित हैं। ऐसी महिलाएं अपने शरीर में होने वाली किसी भी बदलाव को निम्न रक्तचाप से जोड़कर देखती हैं, जबकि यह सही नहीं है। </strong></p>
<p><strong>निम्न रक्तचाप के कुछ प्रमुख कारण हैं- लंबे समय तक बेड पर रहना, गर्भावस्था के शुरू के 6 महीने, अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण और सेप्सिस, हार्ट अटैक, गंभीर एलर्जी, रिएक्शन (एनाफिलेक्सिस) एवं हार्मोन संबंधी समस्याएं। </strong></p>
<p><strong>कोलेस्ट्रॉल लेवल : कोलेस्ट्रॉल वसायुक्त पदार्थ है जो हमारे शरीर में होता है। मस्तिष्क और सेलुलर फंक्शंस को बनाने के लिए कोलेस्ट्रॉल की कुछ मात्रा की आवश्यकता होती है।</strong></p>
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