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	<title>साइबर ठगी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>साइबर ठगी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>महिला के चक्कर में बुजुर्ग ने लुटाये करोड़ों !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 06:18:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[साइबर ठगी]]></category>
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					<description><![CDATA[कितना भी जागरूकता फैलाई जाये , सरकार हो या पुलिस सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लगातार ये सावधानी की सलाह देती है कि किसी फ़र्ज़ी कॉल या लिंक में फंसकर लालच में अपनी कमाई न लुटाएं लेकिन लोग हैं की मानते ही नहीं और फिर होता है पछतावा और बड़ा नुकसान , चलिए इस &#8230;]]></description>
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<p>कितना भी जागरूकता फैलाई जाये , सरकार हो या पुलिस सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लगातार ये सावधानी की सलाह देती है कि किसी फ़र्ज़ी कॉल या लिंक में फंसकर लालच में अपनी कमाई न लुटाएं लेकिन लोग हैं की मानते ही नहीं और फिर होता है पछतावा और बड़ा नुकसान , चलिए इस घटना से आपको रूबरू कराते हैं। देहरादून में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां निवेश का झांसा देकर जालसाजों ने ओएनजीसी से रिटायर्ड एक बुजुर्ग से करीब 1.87 करोड़ रुपये ठग लिए, मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>



<p><strong>धूर्त महिला ने बनाया बुजुर्ग को बेवकूफ</strong><br>राजेंद्र नगर, कौलागढ़ रोड निवासी 70 वर्षीय दिलीप कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह वर्ष 2016 में ओएनजीसी से सेवानिवृत्त हुए थे, 31 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप मैसेज आया, जिसके बाद खुद को निवेश सलाहकार बताने वाली एक महिला ने उनसे संपर्क किया, महिला ने खुद को आदित्य बिरला सन लाइफ से जुड़ा अधिकारी बताते हुए एक आकर्षक निवेश योजना का प्रस्ताव दिया।</p>



<p>पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा, जहां शेयर ट्रेडिंग से जुड़े फर्जी मुनाफे और स्क्रीनशॉट दिखाकर भरोसा जीत लिया गया। इसके बाद उन्हें एक तथाकथित ‘वीआईपी ग्रुप’ में शामिल कर हाई नेटवर्थ ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के लिए प्रेरित किया गया। विश्वास बढ़ाने के लिए आरोपियों ने एक फर्जी सेबी रजिस्ट्रेशन नंबर भी साझा किया।</p>



<p>शुरुआत में दिलीप श्रीवास्तव ने 49 हजार रुपये निवेश किए। खाते में दिख रहे कथित मुनाफे से प्रभावित होकर उन्होंने धीरे-धीरे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 17 लाख 64 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके अलावा आरोपियों ने ब्रोकरेज शुल्क के नाम पर उनसे करीब 70 लाख रुपये और जमा कराए।जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने पहले एक करोड़ रुपये ब्रोकरेज और फिर एक करोड़ रुपये आयकर के नाम पर जमा करने का दबाव बनाया। इसी दौरान उन्हें ठगी का शक हुआ।</p>



<p>इसके बाद उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर क्राइम थाना देहरादून में तहरीर दी। शिकायत में दीया मेहरा, अनन्या शास्त्री और खुद को प्रोफेसर ए. बालासुब्रमण्यम बताने वाले व्यक्ति समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है। आपसे भी अपील है कि इन घटनाओं से सबक लीजिये और फर्जी कॉल या लिंक की जालसाजी से बचिए।</p>
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		<title>दिल्ली में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी प्रोफाइल से 500 महिलाओं को बनाया शिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 08:39:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[साइबर ठगी]]></category>
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					<description><![CDATA[साउथ-वेस्ट दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को ठगने वाले आनंद कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपी ने 500 से अधिक पीड़ितों से करीब दो करोड़ रुपये ठगे। उसके पास से मोबाइल, सिम, डेबिट कार्ड और सोने के आभूषण बरामद हुए। पीएस साइबर, साउथ-वेस्ट जिला की टीम ने एक कुख्यात साइबर ठग आनंद कुमार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>साउथ-वेस्ट दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को ठगने वाले आनंद कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपी ने 500 से अधिक पीड़ितों से करीब दो करोड़ रुपये ठगे। उसके पास से मोबाइल, सिम, डेबिट कार्ड और सोने के आभूषण बरामद हुए।</p>



<p>पीएस साइबर, साउथ-वेस्ट जिला की टीम ने एक कुख्यात साइबर ठग आनंद कुमार को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी डेटिंग और मैट्रिमोनियल एप्लिकेशन पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को निशाना बनाता था। उसने प्रेम, शादी, मेडिकल इमरजेंसी और पेशेवर अवसरों का लालच देकर ठगी की। आरोपी पश्चिम बंगाल के 24 परगना नॉर्थ का निवासी है और उसकी उम्र 35 वर्ष है।</p>



<p>आनंद कुमार बड़े पैमाने पर हनी-ट्रैपिंग, रोमांस स्कैम और महिलाओं को ब्लैकमेल करने में संलिप्त था। उसने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए 500 से अधिक पीड़ितों से लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी की है। ऑपरेशन के दौरान उसके कब्जे से चार स्मार्टफोन, आठ सिम कार्ड, तीन डेबिट कार्ड और नौ सोने के आभूषण बरामद हुए। इन सभी वस्तुओं को ठगी के पैसों से खरीदा गया था। आरोपी के खिलाफ पहले से दो मामले दर्ज हैं। वह डॉक्टर, प्रोड्यूसर, वकील और बिजनेसमैन बनकर महिलाओं से संपर्क करता था। वह पीड़ितों की निजी सामग्री वायरल करने की धमकी देकर उगाही भी करता था। ठगी का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन गेमिंग और निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया।</p>



<p><strong>पीड़िता की शिकायत और जांच प्रक्रिया<br></strong>पीएस साइबर, साउथ-वेस्ट जिला में एक पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि ‘वैभव अरोड़ा’ नाम के फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफाइल के जरिए उससे करीब सात लाख रुपये ठगे गए। पीड़िता की मुलाकात आरोपी से एक डेटिंग एप्लिकेशन पर हुई थी। आरोपी ने विश्वास जीतने के बाद इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर बातचीत जारी रखी। उसने शादी का वादा किया और मेडिकल इमरजेंसी व बिजनेस में नुकसान की झूठी कहानियां बनाकर पैसे मांगे। जब पीड़िता ने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने संपर्क तोड़ दिया और अपनी मौत की झूठी खबर दी।</p>



<p><strong>आरोपी का प्रोफाइल और फर्जी पहचानें<br></strong>आनंद कुमार एक आदतन साइबर अपराधी है जो केवल महिला पीड़ितों को निशाना बनाता था। वह रोमांस स्कैम, हनी-ट्रैपिंग और ऑनलाइन उगाही में शामिल रहा है। उसने वैभव अरोड़ा, डॉ. रोहित बहल, तरुण, आनंद शर्मा और शिखा जैसे कई फर्जी नामों से प्रोफाइल बनाए। वह एक साथ कई वॉट्सऐप और सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करता था। डिजिटल डिवाइस की जांच से पता चला कि वह देशभर के पीड़ितों से संपर्क में था। अपनी पहचान छुपाने के लिए वह कई सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस बदलता रहता था।</p>
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		<item>
		<title>बरेली में 1.28 करोड़ की साइबर ठगी, व्यापारी ने इंटरनेट पर खोजा ईमेल एड्रेस…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 06:01:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[साइबर ठगी]]></category>
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					<description><![CDATA[बहेड़ी के व्यापारी ने नामी कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के लिए इंटरनेट से ईमेल एड्रेस लिया। इस संपर्क करने से एक नंबर मिला। व्यापारी ने नंबर पर संपर्क किया तो एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताया और उनको झांसे में लेकर कई बार में रकम ट्रांसफर करा ली। बरेली में नामी कंपनी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>बहेड़ी के व्यापारी ने नामी कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के लिए इंटरनेट से ईमेल एड्रेस लिया। इस संपर्क करने से एक नंबर मिला। व्यापारी ने नंबर पर संपर्क किया तो एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताया और उनको झांसे में लेकर कई बार में रकम ट्रांसफर करा ली।</p>



<p>बरेली में नामी कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के लिए बहेड़ी के व्यापारी को इंटरनेट का सहारा लेना महंगा पड़ गया। साइबर ठगों ने झांसे में लेकर कई बार में एक करोड़ 28 लाख 60 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट करने के साथ ही 10 से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। इनमें कितनी रकम है, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।</p>



<p>बहेड़ी के मोहल्ला गोदाम माथुर रोड निवासी मुशारिक ने साइबर थाना पुलिस को बताया कि उनके मामा आरिफ की फर्म रजवी आर्गेनाइजेशन नाम से कस्बा बहेड़ी में है। आरिफ को एक कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के लिए आवेदन करना था। भाई अजर ने कंपनी के बारे में इंटरनेट पर सर्च किया। यहां मिले ईमेल से एक फोन नंबर दिया गया। नंबर पर संपर्क किया तो आदित्य रंजन नाम के युवक से बात हुई उसने खुद को कंपनी का अधिकारी बताया।</p>



<p>आदित्य ने कंपनी के बारे में जानकारी ईमेल कर दी। आदित्य ने विश्वास में लेकर फ्रेंचाइजी फीस, रजिस्ट्रेशन फीस, लीगल एकाउंटिंग, लाइसेंस फीस, इंटीरियर डिजाइन आदि के बहाने 28,70,500 रुपये और 99,89,500 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। आदित्य का नंबर बंद होने पर ठगी का अहसास हुआ तो साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।</p>



<p><strong>वेलेंटाइन डे पर सर्वे का दिया झांसा, फिर नंबर बंद कर लिया<br></strong>मुशारिक ने बताया कि साइबर ठगों ने जब फ्रेंचाइजी देने के बहाने बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली तो उसने सर्वे करने की बात कही। इसी साल 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे पर आदित्य ने सर्वे करने के लिए आने का भरोसा दिया। जब वेलेंटाइन डे पर वह नहीं पहुंचा तो उन्होंने आदित्य के नंबर पर कॉल की। उसका नंबर बंद था।</p>



<p><strong>इंटरनेट पर मौजूद सभी नंबर और ईमेल सही नहीं<br></strong>साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि इंटरनेट पर जरूरत से ज्यादा भरोसा ठीक नहीं है। गूगल एक सर्च इंजन है, इस पर कोई किसी भी तरह की जानकारी अपलोड कर सकता है। जरूरी नहीं कि आप बैंक या अन्य कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर यहां से लें तो वह सही ही हों। साइबर ठग भी अक्सर ऐसे फर्जी नंबर व ईमेल एड्रेस डाल देते हैं और लोग उन्हें सही समझकर झांसे में आ जाते हैं। ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है। साइबर ठगों की लोकेशन बिहार के नालंदा में मिली है। 10 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज कराए गए हैं।</p>
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		<title>ऋण देने के नाम पर साइबर ठगी: गिरोह के सरगना सहित दो गिरफ्तार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Oct 2024 05:05:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[साइबर ठगी]]></category>
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					<description><![CDATA[हाथरस थाना साइबर पुलिस ने ऋण देने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने मंत्रा फाइनेंस सर्विस के नाम पर वेबसाइट और एप बनाया हुआ है। जॉब एप पर आवेदन करने वाले बेरोजगार युवकों को वेतन के साथ कमीशन देने का लालच देकर फंसाते और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हाथरस थाना साइबर पुलिस ने ऋण देने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने मंत्रा फाइनेंस सर्विस के नाम पर वेबसाइट और एप बनाया हुआ है। जॉब एप पर आवेदन करने वाले बेरोजगार युवकों को वेतन के साथ कमीशन देने का लालच देकर फंसाते और उनके जरिये ऋण लेने के इच्छुक लोगों से फाइल चार्ज के नाम पर रकम खाते में डलवा लेते थे। पुलिस का कहना है कि उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार और असम में भी यह गिरोह ठगी कर चुका है। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।</p>



<p>गिरफ्तार आरोपियों में सुमित पाल पुत्र वेदपाल सिंह निवासी कैडी, थाना बाबरी जिला शामली और महताब अली पुत्र अब्दुल वहीद निवासी महपा चौपला, सिवाल खास थाना जानी मेरठ का रहने वाला है। इनके फरार साथी का नाम जुबेर निवासी गाजियाबाद बताया जा रहा है। सुमित इस गिरोह का मास्टरमाइंड है।</p>



<p>गत 23 अक्तूबर को गांव गढ़ उमराव निवासी दीपक ने साइबर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि जून 2024 में इनडीड जॉब एप पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। एक जुलाई को उसे एक महिला का फोन आया और उसने बताया कि वह मंत्रा फाइनेंस सर्विस कंपनी गुड़गांव के एचआर डिपार्टमेंट से बात कर रही है। उसने दीपक को 25,500+3000(पेट्रोल हेतु) प्रतिमाह का वेतन और ऋण कराने पर एक प्रतिशत कमीशन देने की बात कही थी। बाद में डाक से उसे नियुक्ति का पत्र, आईडी और कार्ड प्राप्त हुए।<br>दीपक ने 11 लोगों को कंपनी से एक से पांच लाख रुपये तक ऋण दिलाने का आश्वासन दिया और उनसे फाइल चार्ज के नाम पर 56,900 रुपये यूपीआई के माध्यम से कंपनी के खाते में डाल दिए। किसी का भी ऋण स्वीकृत नहीं हुआ तो उसे शंका हुई और उसने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।</p>



<p>एसपी हाथरस निपुण अग्रवाल ने बताया कि सर्विलांस और थाना साइबर पुलिस ने 26 अक्तूबर को सुमित और महताब को रुहेरी तिराहे से गिरफ्तार किया है। इन्होंने कितने लोगों से ठगी की, इसकी जांच की जा रही है। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार और असम में भी ठगी करने की बात सामने आ रही है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, दो चार्जर, दो डोंगल, 10 एटीएम कार्ड, 11 सिम, मोहर, आधार कार्ड, मंत्रा फाइनेन्स कम्पनी से सम्बन्धित प्रपत्र, सात आई कार्ड और 40500 रुपये बरामद हुए हैं।</p>



<p>सभी कुछ था फर्जी…एक लैपटॉप से चलाई जा रही थी कंपनी<br>मंत्रा फाइनेंस सर्विस के नाम से फर्जी पते पर कंपनी बनाई गई थी। एक लैपटॉप और फर्जी नाम और पतों पर सिम लेकर लोगों के साथ ठगी की जा रही थी। एक लैपटॉप और मोबाइलों के जरिये साइबर फ्राड का यह धंधा चल रहा था।</p>



<p>पुलिस पूछताछ में अभियुक्त सुमित पाल ने बताया कि मंत्रा फाइनेंस सर्विस नाम से फर्जी कम्पनी बनाकर जॉब साइट पर डाली हुई थी। उसमें फील्ड सेल्स एक्जीक्यूटिव की नौकरी देने का आश्वासन देते थे। साइट पर आवेदन करने वालों को भी नौकरी देने का झांसा देते थे। उसके बाद ऋण लेने का आवेदन कराने पर एक प्रतिशत कमीशन का लालच दे रहे थे। महताब उसे फर्जी नाम पतों पर बैंकों में खाते खुलवाने और सिम दिलाने में मदद करता था। इसमें जुबैर भी मदद करता था।</p>



<p>जिनको नियुक्ति देेने का दावा करते, उन्हें कंपनी नहीं बुलाते और घर पर ही ऑफर लेटर भेज देते थे। सारा कुछ फोन के जरिए हो रहा था। ऋण कराने का आवेदन करने वाले लोगों से कौन महिला फोन पर बात करती थी। पुलिस उसकी भी तलाश कर रही है, साथ ही गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी की जा रही है। मेरठ में भी इनके फ्राड करने की जानकारी मिली रही है।</p>
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