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	<title>सपा-बसपा &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>सपा-बसपा &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अब भाजपा के चेहरे पर निगाह, सपा-बसपा के प्रत्याशी हो चुके हैं घोषित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Oct 2024 05:15:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[कानपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-463-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-463.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-463-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भाजपा में पैनल में भेजे गए नामों के अलावा एक चर्चा पिछले 24 घंटे में यह भी होने लगी है कि भाजपा सीसामऊ विधानसभा के उप चुनाव में किसी पूर्व सांसद को उतार सकती है। इससे पहले भी भाजपा एक पूर्व सांसद को मेयर के पद पर उतार चुकी है। कानपुर के सीसामऊ उपचुनाव को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-463-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-463.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-463-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भाजपा में पैनल में भेजे गए नामों के अलावा एक चर्चा पिछले 24 घंटे में यह भी होने लगी है कि भाजपा सीसामऊ विधानसभा के उप चुनाव में किसी पूर्व सांसद को उतार सकती है। इससे पहले भी भाजपा एक पूर्व सांसद को मेयर के पद पर उतार चुकी है।</p>



<p>कानपुर के सीसामऊ उपचुनाव को लेकर सपा और बसपा के प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद अब सभी की निगाह भारतीय जनता पार्टी के संभावित चेहरे पर टिकी है। भाजपा की ओर से प्रस्तावित उम्मीदवारों को एक पैनल प्रदेश इकाई के जरिए दिल्ली भेजा जा चुका है। इसमें अभी यह तय नहीं हो पाया है कि पार्टी सीसामऊ में किस बिरादरी को मैदान में उतारेगी।</p>



<p>यही वजह है कि तीन बिरादरी के पांच प्रस्तावित चेहरों को फोकस करते हुए एक पैनल दिल्ली भेजे जाने की चर्चा है। इस पैनल में बिरादरी के हिसाब से जो बताया जा रहा है, उसमें ब्राह्मण, अनुसूचित और वैश्य बिरादरी को रखा गया है। दरअसल सीसामऊ सीट पर उप चुनाव होंगे इसकी चर्चा होने के बाद से 15 दिन पहले तक भाजपा प्रदेश इकाई से इस सीट पर किसी अनुसूचित जाति को इस बार चुनाव में उतारा जाएगा।</p>



<p>लेकिन बीच में वैश्य बिरादरी फिर ब्राह्मण बिरादरी को लेकर भी सक्रियता बढ़ गई। यही वजह है कि तीनों से नाम प्राथमिक सूची में भेजा गया है। फाइनल सूची अभी नहीं बनी है। भेजे के पैनल के मुताबिक ब्राह्मण बिरादरी से प्रस्तावित उम्मीदवारों में पूर्व में सीसामऊ से चुनाव लड़ चुके सुरेश अवस्थी, भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष दीपू पांडे और सांसद सत्यदेव पचौरी के बेटे अनूप पचौरी का नाम है।</p>



<p><strong>सपा की ओर से उतारा गया है महिला प्रत्याशी<br></strong>इसमें सुरेश अवस्थी और अनूप पचौरी खुले तौर पर अपने टिकट को लेकर पार्टी के सामने बात रख रहे हैं लेकिन दीपू पांडेय अभी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। हालांकि पिछले दो दिन से यह भी कहा जाने लगा है कि सपा की ओर से महिला प्रत्याशी उतारे जाने की वजह से भाजपा में यदि समीकरण बना तो नीतू सिंह को भी मैदान में उतार सकती है। नीतू सिंह पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी की बेटी हैं।</p>



<p><strong>सीसामऊ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं सलिल<br></strong>इसी तरह अनुसूचित बिरादरी से जो नाम पैनल में हैं, उसमें संजय सिंह जाटव, उपेंद्र पासवान। इसमें संजय जाटव संघ के विचार परिवार से जुड़े हैं उनके पिता मोतीराम 1977 में जनता पार्टी से सीसामऊ से विधायक रह चुके हैं। जबकि उपेंद्र पासवान घाटमपुर से विधायक रह चुके हैं, दूसरी बार घाटमपुर सीट अपनादल के खाते में चली जाने से उनको टिकट नहीं मिला था। वैश्य बिरादरी से सिर्फ एक नाम एमएलसी सलिल विश्नोई का बताया जा रहा है। सलिल इससे पहले सीसामऊ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।</p>



<p><strong>पूर्व सांसद को विधानसभा चुनाव लड़ाने की भी चर्चा<br></strong>भाजपा में पैनल में भेजे गए नामों के अलावा एक चर्चा पिछले 24 घंटे में यह भी होने लगी है कि भाजपा सीसामऊ विधानसभा के उप चुनाव में किसी पूर्व सांसद को उतार सकती है। इससे पहले भी भाजपा एक पूर्व सांसद को मेयर के पद पर उतार चुकी है। इससे भी यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्टी में दावेदारों के बीच ज्यादा खींचतान को देखते हुए इस बार नया और चौंकाने वाला फैसला ले सकती है।</p>



<p><strong>सीसामऊ विधानसभा में जातिगत स्थितियां</strong></p>



<p>हिंदू- 61.28 प्रतिशत (जिसमें अनुसूचित जातियां 12.02 प्रतिशत हैं)<br>मुस्लिम-36.67 प्रतिशत<br>ईसाई-0.22 प्रतिशत<br>सिख-0.10 प्रतिशत<br>बौद्ध-0.04 प्रतिशत<br>जैन-0.77 प्रतिशत<br>अन्य-0.92 प्रतिशत</p>



<p><strong>सीसामऊ में अभी तक हुए विधायक</strong></p>



<p>1974-शिवलाल कांग्रेस<br>1977- मोतीराम जनता पार्टी<br>1980-1985 कमला दरियाबादी<br>1989-शिवकुमार बेरिया, जनतादल<br>1991-1996- राकेश सोनकर भाजपा<br>2000-2007- संजीव दरियाबादी कांग्रेस<br>2012-2022 हाजी इरफान सोलंकी सपा</p>



<p><strong>18 दिनों में सीसामऊ क्षेत्र के विकास कार्य कराने के निर्देश<br></strong>कैबिनेट मंत्री के निर्देश पर शुक्रवार से नगर निगम ने सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य तेज कर दिए हैं। यह सभी कार्य इसी महीने की 30 तारीख तक पूरे भी कराए जाने हैं। बता दें कि हाल ही में जीआईसी मैदान में हुई जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण सहित 176 विकास कार्यों का शिलान्यास किया था।</p>



<p><strong>सीएम ने किया था शिलान्यास, 50 फीसदी काम अभी शेष<br></strong>गुरुवार को शहर आए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने नगर आयुक्त ने इन विकास कार्यों की प्रगति पूछी। कहा कि सभी कार्यों को 30 अक्तूबर तक हर हाल में पूरा करा लिया जाए। नगर आयुक्त ने बताया कि 50 प्रतिशत से ज्यादा काम हो गया है। मुख्य अभियंता एसएफए रिजवी को शेष कार्य इसी महीने पूरे करने के निर्देश दिए हैं।</p>
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		<title>गेस्टहाउस कांड के 23 साल बाद सपा-बसपा का ऐतिहासिक मिलन, जानिए उस दिन का राज&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Jan 2019 05:16:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गेस्टहाउस कांड]]></category>
		<category><![CDATA[सपा-बसपा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="466" height="306" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl.png 466w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl-300x197.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl-310x205.png 310w" sizes="(max-width: 466px) 100vw, 466px" />इससे पहले साल 1993 में जब एसपी-बीएसपी में गठबंधन हुआ था तब प्रदेश में बाबरी विध्वंस के बाद राष्ट्रपति शासन चल रहा था. मंदिर-मस्जिद विवाद के कारण ध्रुवीकरण अपने चरम पर था. यह बात सभी राजनीतिक दल समझ चुके थे. इसी के मद्देनजर प्रदेश की दो धुरविरोधी पार्टियां सपा और बसपा ने साथ चुनाव लड़ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="466" height="306" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl.png 466w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl-300x197.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl-310x205.png 310w" sizes="auto, (max-width: 466px) 100vw, 466px" /><p><strong>इससे पहले साल 1993 में जब एसपी-बीएसपी में गठबंधन हुआ था तब प्रदेश में बाबरी विध्वंस के बाद राष्ट्रपति शासन चल रहा था. मंदिर-मस्जिद विवाद के कारण ध्रुवीकरण अपने चरम पर था. यह बात सभी राजनीतिक दल समझ चुके थे. इसी के मद्देनजर प्रदेश की दो धुरविरोधी पार्टियां सपा और बसपा ने साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-201823 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl-300x197.png" alt="" width="608" height="399" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl-300x197.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/fghfl.png 466w" sizes="auto, (max-width: 608px) 100vw, 608px" /></p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में मोदी को मात देने के लिए धुरविरोधी पार्टियां एक साथ आ रही हैं. राजनीति अवसरों का खेल है. यहां कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता. जो कल तक एक दूसरे की शक्ल देखना पसंद नहीं करते थे वो आज 23 साल की दुश्मनी भुलाकर एक मंच पर आने को तैयार हैं. शनिवार को लखनऊ में एक ऐसी ऐतिहासिक तस्वीर दिखने को मिलेगी जिसमें सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. लोकसभा चुनाव के लिए दोनों में गठबंधन करीब फाइनल हो चुका है. आज सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर औपचारिक ऐलान हो सकता है. दोनों में यह गठबंधन 23 साल बाद हो रहा है.</strong></p>
<h2 class="post-box-title"><span style="color: #ff00ff;"><a style="color: #ff00ff;" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8/201797" target="_blank" rel="bookmark noopener">‘पेट्टा’ के हिंदी वर्जन का साउथ में जबरदस्त क्रेज….</a></span></h2>
<p><strong>इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इसके बाद गठबंधन ने 4 दिसंबर 1993 को सत्ता की कमान संभाल ली. लेकिन, 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से किनारा कर लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी और दोनों का गठबंधन टूट गया. बसपा के समर्थन वापसी से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई. 3 जून, 1995 को मायावती ने बीजेपी के साथ मिलकर सत्ता की कमान संभाली.</strong></p>
<p><strong>2 जून 1995 को प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कभी हुआ हो. उस दिन एक उन्मादी भीड़ सबक सिखाने के नाम पर बसपा सुप्रीमो की आबरू पर हमला करने पर आमादा थी. उस दिन को लेकर कई बातें होती रहती हैं. यह आज भी एक विषय है कि 2 जून 1995 को लखनऊ के राज्य अतिथि गृह में हुआ क्या था?</strong></p>
<p><strong>क्या हुआ था उस दिन</strong></p>
<p><strong>मायावती के समर्थन वापसी के बाद जब मुलायम सरकार पर संकट के बादल आए तो सरकार को बचाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गया. ऐसे में अंत में जब बात नहीं बनी तो सपा के नाराज कार्यकर्ता और विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्टहाउस पहुंच गए, जहां मायावती ठहरी हुईं थीं. बताया जाता है कि उस दिन गेस्ट हाउस के कमरे में बंद बसपा सुप्रीमो के साथ कुछ गुंडों ने बदसलूकी की. बसपा के मुताबिक सपा के लोगों ने तब मायावती को धक्का दिया और मुक़दमा ये लिखाया गया कि वो लोग उन्हें जान से मारना चाहते थे. इसी कांड को गेस्टहाउस कांड कहा जाता है.</strong></p>
<p><strong>अखिलेश और मायावती दोनों ने साथ आने के संकेत काफी पहले से देने शुरू कर दिए थे. इस जोडी का फॉर्मूला गोरखपुर व फूलपुर में हुए उपचुनाव में निकला. जहां बीजेपी लोकसभा चुनाव में डंके बजाने वाली बीजेपी को चारो खाने चित होना पड़ा. अखिलेश यादव खुद मायावती को इसकी बधाई देने उनके घर गए थे.</strong></p>
<p><strong>इसमें कोई दो राय नहीं मायावती के जेहन में आज भी गेस्टहाउस कांड जिंदा है, तभी तो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इस कांड को लेकर अखिलेश यादव का बचाव किया था और कहा था कि उस वक्त अखिलेश राजनीति में आए भी नहीं थे.</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>लोकसभा चुनाव: 37-37 सीटों पर लड़ेगी सपा-बसपा, कांग्रेस को मिला अमेठी और&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jan 2019 05:27:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="318" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd.png 651w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd-300x154.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सीट बंटवारे के साथ ही दोनों पार्टियां इस बात पर भी सहमत हुई हैं कि कांग्रेस को इस गठबंधन से अलग रखा जाएगा. लेकिन दोनों दल कांग्रेस को दो लोकसभा सीटों पर राहत देने को राजी हो गई हैं. यानी कि कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली दो सीटें अमेठी और रायबरेली में सपा-बसपा अपने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="318" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd.png 651w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd-300x154.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>सीट बंटवारे के साथ ही दोनों पार्टियां इस बात पर भी सहमत हुई हैं कि कांग्रेस को इस गठबंधन से अलग रखा जाएगा. लेकिन दोनों दल कांग्रेस को दो लोकसभा सीटों पर राहत देने को राजी हो गई हैं. यानी कि कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली दो सीटें अमेठी और रायबरेली में सपा-बसपा अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. वहीं सपा-बसपा ने रालोद को लगभग 2 सीटें देने का निर्णय लिया है.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-200099 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd-300x154.png" alt="" width="705" height="362" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd-300x154.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/01/lhjkd.png 651w" sizes="auto, (max-width: 705px) 100vw, 705px" /></p>
<p><strong>लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सपा और बसपा के बीच शनिवार को प्रकाश में आया सीट शेयरिंग का फॉर्मूला पहले ही निर्धारित हो गया था. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पहले नहीं की गई थी, वहीं अब भी दोनों पार्टियां इसका ऐलान करने से बच रही हैं. सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को दिल्&#x200d;ली में मायावती और अखिलेश यादव की बैठक में उत्&#x200d;तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को लेकर सीट बंटवारे का नया फॉर्मूला तैयार हो गया है. सूत्रों के मुताबिक सपा और बसपा राज्य की 37-37 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. जबकि अन्&#x200d;य सीटों को कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) और अन्य छोटी पार्टियों के लिए छोड़ दिया जाएगा.</strong></p>
<h2 class="post-box-title"><span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e2%80%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%ac/200095" target="_blank" rel="noopener">शनि अमावस्&#x200d;या: जानिए आज कब होगा शुभ मुहूर्त और…</a></span></h2>
<p><strong>आपको बता दें कि पिछले साल नवंबर में पांच राज्&#x200d;यों विधानसभा चुनाव के दौरान भी सूत्रों के अनुसार ऐसी ही खबरें आई थीं. इन चुनावों के परिणाम आने से पहले ही लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर उत्तर प्रदेश में गठबंधन की तस्वीर स्पष्ट हो चुकी थी. उस समय भी यही कहा जा रहा था कि सपा और बसपा के बीच सबकुछ निर्धारित हो चुका है. सीटों को लेकर बात पक्की हो चुकी है. रिपोर्ट की मानें तो सपा-बसपा ने उस दौरान ही अपने गठबंधन से कांग्रेस को अलग कर दिया था.</strong></p>
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