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	<title>सनातन धर्म &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>सनातन धर्म &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>पूजा में कौन-से फल-फूल देवी देवताओं को अर्पित नहीं करना चाहिए? </title>
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		<pubDate>Sun, 17 May 2026 06:22:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="497" height="461" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/2-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/2-16.jpg 497w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/2-16-300x278.jpg 300w" sizes="(max-width: 497px) 100vw, 497px" />सनातन धर्म में पूजा में चढ़ाई जाने वाली प्रत्येक वस्तु का अपना धार्मिक महत्व होता है। हिंदू धर्म में जहां कुछ फल और फूल देवी-देवताओं के लिए प्रिय बताए गए हैं, वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिन्हें खासतौर पर देवताओं को अर्पित करने से बचा जाता है। आइए जानते हैं शास्त्रों में बताए गए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="497" height="461" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/2-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/2-16.jpg 497w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/2-16-300x278.jpg 300w" sizes="(max-width: 497px) 100vw, 497px" />
<p>सनातन धर्म में पूजा में चढ़ाई जाने वाली प्रत्येक वस्तु का अपना धार्मिक महत्व होता है। हिंदू धर्म में जहां कुछ फल और फूल देवी-देवताओं के लिए प्रिय बताए गए हैं, वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिन्हें खासतौर पर देवताओं को अर्पित करने से बचा जाता है।</p>



<p>आइए जानते हैं शास्त्रों में बताए गए वो नियम जो आपकी पूजा को अपवित्र होने से बचाएंगे?</p>



<p><strong>भगवान विष्णु को खंडित चावल अर्पित करना<br></strong>धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें भूलकर भी अक्षत (खंडित चावल) अर्पित नहीं करना चाहिए। पूजा के दौरान हमेशा साबुत और ताजे अक्षत का ही इस्तेमाल करना चाहिए।</p>



<p>इसके अलावा विष्णु जी की पूजा के दौरान उन्हें आक और धतूरा चढ़ाना भी वर्जित माना जाता है, क्योंकि ये वस्तुएं धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो भगवान शिव से जुड़ी है। इस बात का उल्लेख आपको पद्म पुराण और स्कंद पुराण में देखने को मिल सकता है।</p>



<p><strong>भगवान शिव को केतकी का फूल अर्पित करना अशुभ<br></strong>भगवान शिव को भूलकर भी केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। दरअसल पौराणिक कथा के मुताबिक, जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद के दौरान केतकी के फूल ने भगवान ब्रह्मा के पक्ष में झूठ गवाही दी थी, तब इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से निषिद्ध कर दिया था। इस बात का उल्लेख शिव पुराण जैसे शास्त्रीय ग्रंथों में देखने को मिलता है।</p>



<p><strong>पूजा में किन चीजों को न चढ़ाएं<br>भगवान गणेश को तुलसी चढ़ाना अशुभ</strong><br>हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्र माना जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना वर्जित माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, तुलसी ने गणेश जी से विवाह का प्रस्ताव रखा था, गणेश जी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।</p>



<p>इस बात से नाराज होकर तुलसी ने उन्हें श्राप दिया है और बाद में गणेश जी ने भी तुलसी को अपनी पूजा से निषिद्ध कर दिया। इसका शास्त्रीय संदर्भ ब्रह्मवैवर्त पुराण में है।</p>



<p><strong>देवी दुर्गा को अपवित्र या सढ़ा-गला फल अर्पित करना अशुभ<br></strong>हिंदू धर्मशास्त्रों में साफ-साफ लिखा है कि, देवी-देवताओं को बासी, पुराना, अपवित्र, कटा या सड़ा हुआ फल अर्पित करना अशुभ माना जाता है।</p>



<p>इस बात का ध्यान रखें कि, पूजा में हमेशा साफ और ताजे फल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसका शास्त्रीय आधार मनुस्मृति और देवी भागवत पुराण में है।</p>



<p><strong>भगवान सूर्य को बिल्व पत्र चढ़ाना वर्जित<br></strong>सूर्य देव को बिल्व पत्र चढ़ाना अशुभ। सूर्य पूजा में इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर करने से बचा जाता है। सूर्य देव को लाल फूल, गुड़, गेहूं और जल अर्पित करना अधिक शुभ माना गया है। भविष्य पुराण ग्रंथ में इसका शास्त्रीय संदर्भ देखने को मिल सकता है।</p>



<p>धार्मिक ग्रंथों में पूजा सामग्री को लेकर साफ-साफ नियम बताए गए हैं। हालांकि अलग-अलग परंपराओं, संप्रदायों और क्षेत्रों में मान्यताओं में थोड़ा-बहुत बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए किसी खास पूजा या व्रत में स्थानीय परंपरा और पंडित की सलाह जरूर लेनी चाहिए।</p>
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		<title>आज इतने बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, नोट करें सूतक टाइम और नियम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 05:27:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[सनातन धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="302" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/uytiuy.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/uytiuy.png 715w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/uytiuy-300x146.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में फाल्गुन माह को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस माह में पूजा और दान जरूर करना चाहिए। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या आज यानी 17 फरवरी को मनाई जा रही है। इसी दिन साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026) लगेगा। सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-अर्चना और खाना खाने की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="302" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/uytiuy.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/uytiuy.png 715w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/uytiuy-300x146.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में फाल्गुन माह को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस माह में पूजा और दान जरूर करना चाहिए। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या आज यानी 17 फरवरी को मनाई जा रही है। इसी दिन साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026) लगेगा। सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-अर्चना और खाना खाने की मनाही है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान क्या नहीं करना चाहिए, भारत में दिखाई देगा या नहीं और इसका सूतक काल का समय क्या रहेगा।</p>



<p><strong>भारत में दिखाई देगा या नहीं सूर्य ग्रहण?<br></strong>इस बार फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण (Surya Grahan Kab Hai) का साया रहेगा। अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनकी कृपा परिवार के सदस्यों पर बनी रहती है। फाल्गुन अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण (Today Grahan Timing) रहेगा, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक भी मान्य नहीं रहने वाला है।</p>



<p><strong>सूर्य ग्रहण 2026 डेट और टाइम<br></strong>सूर्य ग्रहण आज यानी 17 फरवरी को लगने जा रहा है। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 03 बजकर 26 मिनट (17 Feb 2026 Grahan Time in India) से होगी। वहीं, इसका समापन शाम 07 बजकर 57 मिनट (Surya Grahan Kab Lagega) पर होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए सूतक काल (Surya Grahan 2026 Sutak Time) भी मान्य नहीं होगा।</p>



<p><strong>सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें और क्या न करें?<br></strong>सनातन शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव खाने की चीजों पर पड़ता है। इसलिए सूर्य ग्रहण से पहले खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालने की सलाह दी जाती है।<br>इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।<br>साथ ही कैंची, चाकू और सुई का प्रयोग भूलकर नहीं नहीं करना चाहिए।<br>सूर्य ग्रहण में पूजा और मांगलिक काम नहीं करना चाहिए।<br>सूर्य ग्रहण के समापन के बाद स्नान करें। इसके बाद घर और मंदिर की सफाई करें।<br>पूजा-अर्चना करें। साथ ही विशेष चीजों का दान करें।<br>दिर में भी मूर्तियों को स्पर्श करने से बचना चाहिए।<br>मन में मंत्रों का जप करें।<br>सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक शुरू होता है।</p>
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		<title>पूर्णिया में 100 से अधिक परिवारों की घर वापसी, ईसाई धर्म छोड़कर फिर अपनाया सनातन धर्म</title>
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		<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 07:13:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[सनातन धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113.png 885w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113-300x158.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113-768x404.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सीमांचल क्षेत्र में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच पूर्णिया जिले के बनमनखी से बड़ी खबर सामने आई है, जहां क्रिसमस के मौके पर 100 से अधिक परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़कर फिर से सनातन धर्म अपना लिया। सीमांचल क्षेत्र में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच पूर्णिया जिले के बनमनखी से एक बड़ी खबर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113.png 885w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113-300x158.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-231113-768x404.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सीमांचल क्षेत्र में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच पूर्णिया जिले के बनमनखी से बड़ी खबर सामने आई है, जहां क्रिसमस के मौके पर 100 से अधिक परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़कर फिर से सनातन धर्म अपना लिया।</p>



<p>सीमांचल क्षेत्र में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच पूर्णिया जिले के बनमनखी से एक बड़ी खबर सामने आई है। क्रिसमस के अवसर पर यहां 100 से अधिक परिवारों ने ईसाई धर्म का त्याग कर पुनः सनातन धर्म में घर वापसी की। यह सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के बैनर तले आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बायसी प्रखंड के कई गांवों से आए लोगों ने विधि-विधान से यज्ञ-हवन कर सनातन धर्म की दीक्षा ली। घर वापसी करने वाले परिवारों का आरोप है कि उन्हें पहले पादरियों द्वारा तरह-तरह के प्रलोभन और धोखे में रखकर ईसाई धर्म में परिवर्तित कराया गया था। बाद में उन्हें अपनी मूल आस्था और परंपराओं से दूर होने का अहसास हुआ।</p>



<p>बायसी थाना क्षेत्र के हरिनतोड गांव के निवासी सुरेंद्र राय, मीना देवी और कालू हरिजन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि धर्मांतरण के बाद उन पर अपनी संस्कृति, देवी-देवताओं की पूजा और परंपराएं छोड़ने का दबाव बनाया जाने लगा। उन्होंने बताया कि उनकी सभ्यता और परंपराओं पर हो रहे हमलों से आहत होकर उन्होंने बायसी थाने में मामला भी दर्ज कराया था।</p>



<p>बनमनखी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शुद्धि यज्ञ और मंत्रोच्चार के बीच सभी परिवारों को विधिवत रूप से पुनः हिंदू धर्म में शामिल किया गया। गरीबी और भोलेपन का फायदा उठाकर कराया जा रहा धर्मांतरण: विहिप विश्व हिंदू परिषद के बिहार-झारखंड धर्म प्रसार प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र में धर्मांतरण का खेल गरीबी और भोलेपन का फायदा उठाकर खेला जा रहा है।</p>



<p>उन्होंने बताया कि जब इन परिवारों को यह एहसास हुआ कि वे अपनी संस्कृति से दूर होकर गलत रास्ते पर चले गए हैं, तब संगठनों के सहयोग से उनकी स्वेच्छा से घर वापसी कराई गई। सीमांचल के जिलों में लोभ या भय दिखाकर धर्म परिवर्तन कराने के मामले अक्सर विवाद का विषय बनते रहे हैं। भारतीय संविधान के अनुसार जबरन या लालच देकर कराया गया धर्मांतरण कानूनी अपराध है। घर वापसी करने वाले लोगों ने अन्य ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे किसी के बहकावे या प्रलोभन में आकर अपनी आस्था का सौदा न करें।</p>
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		<title>केरल के राज्यपाल का सुझाव, कहा- सनातन धर्म की शिक्षा के लिए मंदिरों में हो पाठशाला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 10:57:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[सनातन धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="568" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/h-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/h.jpg 568w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/h-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 568px) 100vw, 568px" />केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने दक्षिणी राज्य के प्रत्येक मंदिर में गोशाला, सनातन धर्म सिखाने और पढ़ाने के लिए पाठशालाएं और अस्पताल स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि देवस्थानम बोर्ड इस कार्य को लागू कर सकता है। अर्लेकर ने शनिवार शाम यहां तालिपरंबा के श्री राजराजेश्वरा मंदिर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="568" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/h-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/h.jpg 568w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/h-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 568px) 100vw, 568px" />
<p>केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने दक्षिणी राज्य के प्रत्येक मंदिर में गोशाला, सनातन धर्म सिखाने और पढ़ाने के लिए पाठशालाएं और अस्पताल स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।</p>



<p>उन्होंने सुझाव दिया कि देवस्थानम बोर्ड इस कार्य को लागू कर सकता है। अर्लेकर ने शनिवार शाम यहां तालिपरंबा के श्री राजराजेश्वरा मंदिर में भगवान शिव की एक कांस्य प्रतिमा का अनावरण करने के बाद कहा कि सभी मंदिरों में चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>राज्यपाल का सुझाव</strong></h4>



<p>उन्होंने कहा, “हमारे सभी मंदिरों में एक ‘गोशाला’ होनी चाहिए, जहां सभी सड़क पर घूमने वाले मवेशियों को लाया जाए। यह हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ‘गोशाला’ के लिए दान देने के लिए कई लोग तैयार होंगे।”</p>



<p>उन्होंने कहा, “हमें एक शैक्षणिक संस्थान भी स्थापित करना होगा। यह अनिवार्य है। अन्यथा, हमारे सनातन धर्म की शिक्षाएं और उपदेश अगली पीढ़ी को कौन देगा?”</p>



<p>राज्यपाल ने कहा कि ‘मानव सेवा’ ही ‘माधव सेवा’ है। इसलिए, हमें अस्पताल की सुविधा भी प्रदान करनी चाहिए। मरीज की सेवा अनिवार्य है। ये तीनों चीजें देवस्थानम बोर्ड द्वारा स्थापित की जा सकती हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>राज्यपाल ने क्या मांग की?</strong></h4>



<p>अर्लेकर ने कहा कि लोग जब हम उनसे मांगते हैं तो किसी भी चीज के लिए दान देने के लिए तैयार होते हैं। हमें उनके पास जाना होगा। यही आज की आवश्यकता है। जो भी भगवान और मंदिर के चरणों में आता है, उसे फिर से जनता, समाज और लोगों को दिया जाना चाहिए। उन्हें यह सुविधा एक ‘गोशाला’, एक शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल या चिकित्सा सुविधा के रूप में दी जानी चाहिए। ये सभी चीजें हमें करनी हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सोमवार की पूजा में जरूर करें इस चालीसा का पाठ, जीवन के दुख और दर्द होंगे दूर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Apr 2025 04:41:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[सनातन धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="461" height="381" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-152-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-152.jpg 461w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-152-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 461px) 100vw, 461px" />सनातन धर्म में सोमवार (Somwar Ke Upay) का दिन शिव परिवार की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार व्रत को करने से विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही जातक को मनचाहा वर मिलता है। ऐसे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="461" height="381" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-152-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-152.jpg 461w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-152-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 461px) 100vw, 461px" />
<p>सनातन धर्म में सोमवार (Somwar Ke Upay) का दिन शिव परिवार की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार व्रत को करने से विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही जातक को मनचाहा वर मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न?</p>



<p>सनातन धर्म में सोमवार के दिन को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महादेव (Lord Shiv) और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही चावल और चीनी समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। मान्यता है कि इन चीजों का दान करने से चंद्र दोष से छुटकारा मिलता है।</p>



<p>अगर महादेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो सोमवार की पूजा के दौरान सच्चे मन से शिव चालीसा का पाठ करें। मान्यता के अनुसार, शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी डर से छुटकारा मिलता है।</p>



<p><strong>शिव चालीसा के पाठ मिलते हैं ये आध्यात्मिक लाभ<br></strong>भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा बनी रहती है।<br>सभी मुरादें पूरी होती हैं।<br>जीवन के दुख और दर्द से छुटकारा मिलता है।<br>सभी डर दूर होते हैं।<br>महादेव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।<br>रुके हुए काम पूरे होते हैं।</p>



<p><strong>॥ शिव चालीसा ॥</strong></p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>जय गणेश गिरिजा सुवन,<br>मंगल मूल सुजान ।<br>कहत अयोध्यादास तुम,<br>देहु अभय वरदान ॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong><br>जय गिरिजा पति दीन दयाला ।<br>सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥<br>भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।<br>कानन कुण्डल नागफनी के ॥<br>अंग गौर शिर गंग बहाये ।<br>मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥<br>वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।<br>छवि को देखि नाग मन मोहे ॥<br>मैना मातु की हवे दुलारी ।<br>बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥<br>कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।<br>करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥<br>नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।<br>सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥<br>कार्तिक श्याम और गणराऊ ।<br>या छवि को कहि जात न काऊ ॥<br>देवन जबहीं जाय पुकारा ।<br>तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥<br>किया उपद्रव तारक भारी ।<br>देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥<br>तुरत षडानन आप पठायउ ।<br>लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥<br>आप जलंधर असुर संहारा ।<br>सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥<br>त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।<br>सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥<br>किया तपहिं भागीरथ भारी ।<br>पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥<br>दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।<br>सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥<br>वेद नाम महिमा तव गाई।<br>अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥<br>प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।<br>जरत सुरासुर भए विहाला ॥<br>कीन्ही दया तहं करी सहाई ।<br>नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥<br>पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।<br>जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥<br>सहस कमल में हो रहे धारी ।<br>कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥<br>एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।<br>कमल नयन पूजन चहं सोई ॥<br>कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।<br>भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥<br>जय जय जय अनन्त अविनाशी ।<br>करत कृपा सब के घटवासी ॥<br>दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।<br>भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥<br>त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।<br>येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥<br>लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।<br>संकट से मोहि आन उबारो ॥<br>मात-पिता भ्राता सब होई ।<br>संकट में पूछत नहिं कोई ॥<br>स्वामी एक है आस तुम्हारी ।<br>आय हरहु मम संकट भारी ॥<br>धन निर्धन को देत सदा हीं ।<br>जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥<br>अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।<br>क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥<br>शंकर हो संकट के नाशन ।<br>मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥<br>योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।<br>शारद नारद शीश नवावैं ॥<br>नमो नमो जय नमः शिवाय ।<br>सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥<br>जो यह पाठ करे मन लाई ।<br>ता पर होत है शम्भु सहाई ॥<br>ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।<br>पाठ करे सो पावन हारी ॥<br>पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।<br>निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥<br>पण्डित त्रयोदशी को लावे ।<br>ध्यान पूर्वक होम करावे ॥<br>त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।<br>ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥<br>धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।<br>शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥<br>जन्म जन्म के पाप नसावे ।<br>अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥<br>कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।<br>जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>नित्त नेम कर प्रातः ही,<br>पाठ करौं चालीसा ।<br>तुम मेरी मनोकामना,<br>पूर्ण करो जगदीश ॥<br>मगसर छठि हेमन्त ॠतु,<br>संवत चौसठ जान ।<br>अस्तुति चालीसा शिवहि,<br>पूर्ण कीन कल्याण</p>
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