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	<title>संसार की सबसे बड़ी शक्ति कौनसी है ? &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>संसार की सबसे बड़ी शक्ति कौनसी है ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Nandita Pal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Nov 2019 05:04:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791.jpg 630w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />कोई घुमावदार बात किए बिना चलिये, शीर्षक में लिखे प्रश्न के सीधे जवाब से ही बात शुरू करते है फिर जवाब के आधार को समझेंगे । दुनिया में मौजूद जितनी भी शक्तियाँ हैं, उनमें ऐसी सबसे बड़ी शक्ति जिसे सभी जानते और मानते हैं; वह है “मानवीय प्रज्ञा-शक्ति” जिसे अंग्रेज़ी में ‘WISDOM’ कहते हैं और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791.jpg 630w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>कोई घुमावदार बात किए बिना चलिये, शीर्षक में लिखे प्रश्न के सीधे जवाब से ही बात शुरू करते है फिर जवाब के आधार को समझेंगे । दुनिया में मौजूद जितनी भी शक्तियाँ हैं, उनमें ऐसी सबसे बड़ी शक्ति जिसे सभी जानते और मानते हैं; वह है “मानवीय प्रज्ञा-शक्ति” जिसे अंग्रेज़ी में ‘WISDOM’ कहते हैं और साधारण बोलचाल की भाषा में ‘समझ + विवेक’ । अर्थात समझ और विवेक के योग को ही प्रज्ञाशक्ति कहते है । यही सबसे बड़ी क्यों मानी जाए ? इस प्रश्न के जवाब में आसान सा तर्क है कि इसी शक्ति के कारण ही तो मनुष्य इस पूरी दुनिया का सबसे सफल और सब पर शासन करने वाला प्राणी बना है ।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-285656 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791.jpg" alt="" width="630" height="420" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791.jpg 630w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/1541228663-4791-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 630px) 100vw, 630px" /></p>
<p>आइये संबन्धित अन्य तर्कों और अन्य आयामों को भी जाने । और..यही तो वह शक्ति है जिसके द्वारा मनुष्य और अन्य कोई भी प्राणी अपनी सभी तरह की शक्तियों के बारे में हर छोटा-बड़ा निर्णय करता है । जिस किसी प्राणी मे यह शक्ति कम होती है, तो उसकी अन्य शक्तियाँ भले ही कितनी ही बड़ी क्यों नहीं हो, उनका सही और प्रभावी या सफल उपयोग कर ही नहीं पायेगा । इसीलिए तो जमीन पर शेर, समुद्र में शार्क और आकाश में बाज भी मनुष्य से हारते ही है । वैज्ञानिक दृष्टि से देखने समझने वालों को तो इसमें कोई संदेह ही नहीं है ।</p>
<p>हाँ, धार्मिक आस्थाओं के आगे नहीं सोच पाने वालों को जरूर अपनी सोच को थोड़ी गहराई देने की आवश्यकता है । वे इतना ही और सोचें कि वे जिस किसी देवता, भगवान, खुदा, गॉड आदि को सबसे अधिक शक्तिशाली मानते हैं, उनकी (अर्थात उनके आराध्य/ ईश्वर की) विभिन्न शक्तियों में से कौनसी शक्ति सबसे बड़ी है ? तो दुनिया भर के हर व्यक्ति को इस प्रश्न का यही जवाब मिलेगा कि हमारे आराध्य में भी जो उसकी ‘प्रज्ञाशक्ति’ या समझने व निर्णय करने की शक्ति है, वही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है । इसी ‘प्रज्ञाशक्ति’ के चलते उसमें सृजन प्रवृत्ति भी है और सृजन-शक्ति भी, जिससे इस संसार की निर्मिति हुई और ऐसी सयानी, ऐसी कलात्मक और ऐसी शानदार सृष्टि का सृजन हुआ ।</p>
<p>इसी प्रज्ञाशक्ति के माध्यम से इस सृष्टि का सारा क्रियाकलाप चलता है, बनता है और बिगड़ता है, फिर बेहतर बनता है । नित नए रूप लेता है, नित नयी समस्याये (चुनौतियां), नित नये समाधान मिलते हैं । इसलिए जो मनुष्य से बेहतर और अधिक उच्च-स्तर की दैवीय शक्तियों या खुदा या गॉड के अस्तित्व में विश्वास करते हैं, वे प्रज्ञाशक्ति के साथ पहले लिखे गए ‘मानवीय’ विशेषण को हटा सकते हैं और ‘प्रज्ञाशक्ति’ की सर्व-श्रेष्ठता एवं सर्व-व्यापकता को समझ सकते हैं । यही शक्ति तो है, जिससे हम अपनी ज्ञानेन्द्रियों का उपयोग करके स्वयं को और दुनिया को जानते-समझते है । जानकारी और समझ को को ‘याद’ के रूप मे सँजो कर रखते हैं । जो समझ में नहीं आता है उसके बारे में अधिक जानने के लिए प्रश्न करते हैं । और प्रश्नों के जवाबों को जानने की इच्छा याने ‘जिज्ञासा’ के कारण ही विभिन्न खोज और अविष्कार होते है, मानवता ज्ञान-विज्ञान से समृद्ध होती है ।</p>
<p>अधिक ताकतवर, अधिक विकसित और जीवन-मूल्यों से भी पुष्ट होती है । सच पूछे तो इसी प्रज्ञाशक्ति से मानव ने ही विभिन्न धर्मों का और उनमें विभिन्न भगवान, खुदा या गॉड का भी सृजन किया है । मानव सभ्यता के विकास की पूरी कहानी असल में उसके द्वारा अपनी प्रज्ञाशक्ति के अच्छे-बुरे इस्तेमाल की कहानी है । यही हमारी भी और कुदरत की भी सबसे बड़ी शक्ति है, जो कतई पुजा-प्रार्थना की मांग नहीं करती है, बल्कि स्वयं के सबसे अच्छे व अधिक से अधिक सदुपयोग की ही मांग करती है । इसलिये, इस प्रज्ञाशक्ति को जाने, समझे, माने और उसका श्रेष्ठतम उपयोग करें ।</p>
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