<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>शीतला अष्टमी &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Mon, 02 Mar 2026 07:55:16 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.7</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>शीतला अष्टमी &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>शीतला अष्टमी पर क्या करें और क्या नहीं? रखें इन बातों का ध्यान</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82/663669</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 07:55:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शीतला अष्टमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=663669</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440.png 878w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440-300x169.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440-768x433.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />शीतला अष्टमी होली के ठीक आठ दिन बाद मनाई जाती है। इसे बासौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही रोग-दोष दूर रहते हैं। लेकिन, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440.png 878w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440-300x169.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-01-235440-768x433.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>शीतला अष्टमी होली के ठीक आठ दिन बाद मनाई जाती है। इसे बासौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही रोग-दोष दूर रहते हैं। लेकिन, इस तिथि को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं। अगर आप पहली बार यह व्रत रख रहे हैं या पूजा कर रहे हैं, तो आपको यह जरूर जान लेने चाहिए कि इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं?</p>



<p><strong>क्या करें? (Sheetala Ashtami 2026 Dos)<br></strong>बासी भोजन का भोग – शीतला अष्टमी को बासी भोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी के दिन सुबह खाना नहीं बनाया जाता। सप्तमी की रात को ही हलवा, पूरी, मीठे चावल और राबड़ी बना ली जाती है। अष्टमी की सुबह इसी बासी भोजन का भोग मां को लगाया जाता है।<br>नीम के पत्ते – मां शीतला को नीम बहुत प्रिय है। इस दिन नहाने के पानी में नीम के पत्ते डालना और पूजा में नीम की टहनी रखना बहुत शुभ माना जाता है।<br>सफाई – पूजा से पहले पूरे घर की सफाई करें। मां शीतला को पवित्रता बहुत प्रिय है, इसलिए घर का कोना-कोना साफ रखें।<br>ठंडे जल – मां को जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि जल बिल्कुल ठंडा हो। पूजा के बाद उस जल की कुछ बूंदें घर के हर कोने में छिड़कें और अपनी आंखों पर लगाएं।<br>दान-पुण्य – इस दिन किसी जरूरतमंद को ठंडा भोजन और जल दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है।</p>



<p><strong>क्या न करें? (Sheetala Ashtami 2026 Don’ts)<br></strong>चूल्हा न जलाएं – शीतला अष्टमी के दिन घर में आग जलाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन घर में अग्नि प्रज्वलित करने से मां नाराज हो सकती हैं।<br>गर्म भोजन न खाएं – इस दिन ताजा खाना नहीं बनाने की परंपरा है। ऐसे में पूरे दिन ठंडा भोजन ही करने की कोशिश करें।<br>सुई-धागे का काम – इस दिन सिलाई-कढ़ाई जैसे सुई वाले काम नहीं करने चाहिए।<br>तामसिक चीजें – किसी भी धार्मिक पर्व की तरह इस दिन तामसिक भोजन और शराब से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।<br>सिर न धोएं – कई क्षेत्रों में इस दिन महिलाओं के लिए सिर व कपड़े धोने की भी मनाही होती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शीतला अष्टमी पर बिहार शरीफ के मघड़ा गांव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80/607084</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 09:28:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[शीतला अष्टमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=607084</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-407-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-407.jpg 669w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-407-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />शुक्रवार से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मां शीतला के दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां भक्तगण घंटों इंतजार करते हुए भी अपनी आस्था में डिगे बिना “जय माता दी” के जयकारे लगाते नजर आ रहे हैं। बिहार शरीफ के मघड़ा गांव स्थित प्राचीन शीतला मंदिर में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-407-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-407.jpg 669w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-407-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>शुक्रवार से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मां शीतला के दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां भक्तगण घंटों इंतजार करते हुए भी अपनी आस्था में डिगे बिना “जय माता दी” के जयकारे लगाते नजर आ रहे हैं।</p>



<p>बिहार शरीफ के मघड़ा गांव स्थित प्राचीन शीतला मंदिर में शीतला अष्टमी के पावन अवसर पर आज श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाए जाने वाले इस महत्वपूर्ण पर्व पर मंदिर परिसर में तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया गया है, जिसमें दूर-दूर से भक्तगण अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंच रहे हैं।</p>



<p><strong>श्रद्धालुओं की अटूट आस्था</strong><br>शुक्रवार से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मां शीतला के दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां भक्तगण घंटों इंतजार करते हुए भी अपनी आस्था में डिगे बिना “जय माता दी” के जयकारे लगाते नजर आ रहे हैं। पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से गुलजार है और मेला स्थल पर अस्थाई दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है।</p>



<p><strong>चिकित्सकीय महत्व की परंपरा</strong><br>शीतला माता को चेचक माता के रूप में भी जाना जाता है। स्थानीय पुजारी प्रभात पांडे के अनुसार, “मंदिर के पास स्थित शीतल कुंड में स्नान करने और हवन कुंड की भभूत को लगाने मात्र से ही चेचक जैसी बीमारियां और विभिन्न प्रकार के चर्म रोग दूर हो जाते हैं।” ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला का पूजन करने से कई प्रकार के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है और विशेष रूप से त्वचा संबंधी रोगों से राहत मिलती है।</p>



<p><strong>अनोखी परंपरा: चूल्हे नहीं जलेंगे आज</strong><br>एक विशेष परंपरा के अनुसार, आज शीतला अष्टमी के दिन मघड़ा गांव सहित आसपास के लगभग एक दर्जन गांवों में चूल्हे नहीं जलाए जाएंगे। इसके लिए ग्रामीणों ने शुक्रवार, सप्तमी तिथि को ही मीठे कुएं के जल से प्रसाद के रूप में भोजन सामग्री तैयार की है, जिसे आज “बसियौड़ा” के रूप में ग्रहण किया जाएगा और परिवार के सदस्यों, सगे-संबंधियों तथा मित्रों के साथ बांटा जाएगा। लोकमान्यता है कि इस दिन चूल्हे जलाने से माता को तकलीफ होती है, जिसका अनिष्ट फल भक्तों को मिल सकता है।</p>



<p><strong>आस्था की अटूट डोर</strong><br>मेले में आई एक महिला श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया की “मैंने यहां आकर बेटी का वरदान मांगा था, जिसे मां ने पूरा किया है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है।”</p>



<p><strong>सुरक्षा व्यवस्था</strong><br>भारी भीड़ को देखते हुए दीपनगर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पूरे परिसर की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधि वार्ड पार्षद के पति जयंत कुमार भी मेले की व्यवस्था की देखरेख में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। इस वर्ष होली के ठीक आठ दिन बाद शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है आन मेले का दूसरा दिन है और कल तक श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शीतला अष्टमी पर करें स्तोत्र का पाठ, सभी रोग से मिलेगा छुटकारा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8b/606345</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 05:17:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शीतला अष्टमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=606345</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="383" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-242-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-242.jpg 751w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-242-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र माह में शीतला अष्टमी का पर्व 22 मार्च (Sheetala Ashtami 2025) को मनाया जाएगा। इस दिन मां शीतला की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही बासी भोजन को भोग लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार मां शीतला की पूजा करने से सभी रोग दूर होते हैं। ऐसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="383" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-242-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-242.jpg 751w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-242-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र माह में शीतला अष्टमी का पर्व 22 मार्च (Sheetala Ashtami 2025) को मनाया जाएगा। इस दिन मां शीतला की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही बासी भोजन को भोग लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार मां शीतला की पूजा करने से सभी रोग दूर होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे करें मां शीतला को प्रसन्न?</p>



<p>सनातन धर्म में शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami 2025) को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। इस दिन मां शीतला की पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसे में इस दिन पूजा के दौरान शीतला अष्टक स्तोत्र का पाठ जरूर करें। मान्यता है कि शीतला अष्टक स्तोत्र का पाठ करने से घर में खुशियों का आगमन होता है और सभी रोग से छुटकारा मिलता है।</p>



<p><strong>शीतला अष्टमी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Shitala Ashtami Date and Puja Muhurat)<br></strong>पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 22 मार्च को को सुबह 04 बजकर 23 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 23 मार्च को सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस प्रकार शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च को किया जाएगा।</p>



<p><strong>शीतलाष्टक पाठ (Sheetala Ashtakam Lyrics)</strong></p>



<p><strong>ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः</strong></p>



<p><strong>॥ ईश्वर उवाच॥</strong><br>वन्दे अहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम् ।<br>मार्जनी कलशोपेतां शूर्पालं कृत मस्तकाम् ॥<br>वन्देअहं शीतलां देवीं सर्व रोग भयापहाम् ।<br>यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत् ॥<br>शीतले शीतले चेति यो ब्रूयाद्दारपीड़ितः ।<br>विस्फोटकभयं घोरं क्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥<br>यस्त्वामुदक मध्ये तु धृत्वा पूजयते नरः ।<br>विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते॥<br>शीतले ज्वर दग्धस्य पूतिगन्धयुतस्य च ।<br>प्रनष्टचक्षुषः पुसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम् ॥<br>शीतले तनुजां रोगानृणां हरसि दुस्त्यजान् ।<br>विस्फोटक विदीर्णानां त्वमेका अमृत वर्षिणी॥<br>गलगंडग्रहा रोगा ये चान्ये दारुणा नृणाम् ।<br>त्वदनु ध्यान मात्रेण शीतले यान्ति संक्षयम् ॥<br>न मन्त्रा नौषधं तस्य पापरोगस्य विद्यते ।<br>त्वामेकां शीतले धात्रीं नान्यां पश्यामि देवताम् ॥</p>



<p><strong>॥ फल-श्रुति ॥</strong><br>मृणालतन्तु सद्दशीं नाभिहृन्मध्य संस्थिताम् ।<br>यस्त्वां संचिन्तये द्देवि तस्य मृत्युर्न जायते ॥<br>अष्टकं शीतला देव्या यो नरः प्रपठेत्सदा ।<br>विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते ॥<br>श्रोतव्यं पठितव्यं च श्रद्धा भक्ति समन्वितैः ।<br>उपसर्ग विनाशाय परं स्वस्त्ययनं महत् ॥<br>शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।<br>शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः ॥<br>रासभो गर्दभश्चैव खरो वैशाख नन्दनः ।<br>शीतला वाहनश्चैव दूर्वाकन्दनिकृन्तनः ॥<br>एतानि खर नामानि शीतलाग्रे तु यः पठेत् ।<br>तस्य गेहे शिशूनां च शीतला रूङ् न जायते ॥<br>शीतला अष्टकमेवेदं न देयं यस्य कस्यचित् ।<br>दातव्यं च सदा तस्मै श्रद्धा भक्ति युताय वै ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
