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	<title>शिव-शक्ति &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>कैसे हुआ शिव-शक्ति का मिलन? पढ़ें अटूट प्रेम और कठोर तप की कथा</title>
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		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 10:55:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-02-025030.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-02-025030.png 734w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-02-025030-300x166.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) शिव और शक्ति के महामिलन का उत्सव है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव और पार्वती का विवाह हुआ था, जिसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-02-025030.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-02-025030.png 734w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-02-025030-300x166.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) शिव और शक्ति के महामिलन का उत्सव है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव और पार्वती का विवाह हुआ था, जिसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा।</p>



<p>Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के महामिलन का उत्सव है। यह कथा त्याग, अटूट विश्वास और युगों-युगों के इंतजार की है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर देवों के देव महादेव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। आइए जानते हैं, कैसे शिव-शक्ति का विवाह हुआ?</p>



<p><strong>सती का वियोग और शिव का वैराग्य</strong><br>देवी सती अपने पिता दक्ष द्वारा शिव जी का अपमान नहीं सह पाईं थीं, जिसके चलते उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए थे। सती के वियोग में शिव जी ध्यान में चले गए और संसार से दूर होकर हिमालय में समाधिस्थ हो गए थे। शिव के बिना शक्ति अधूरी थी और शक्ति के बिना संसार का संतुलन बिगड़ने लगा था।</p>



<p><strong>देवी पार्वती का जन्म</strong><br>देवी सती ने ही पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। पार्वती बचपन से ही महादेव की परम भक्त थीं। जैसे-जैसे वे बड़ी हुईं, उनका संकल्प दृढ़ होता गया कि वे केवल महादेव से ही विवाह करेंगी। जब नारद मुनि ने उन्हें बताया कि महादेव को पाने का एकमात्र रास्ता कठिन तप है, क्योंकि समाधि में लीन भोलेनाथ को सिर्फ भक्ति से ही जगाया जा सकता है।</p>



<p><strong>अपर्णा नाम का रहस्य</strong><br>माता पार्वती ने सभी सुखों का त्याग कर दिया और हिमालय में तपस्या करने चली गईं। हजारों सालों तक उन्होंने केवल फल-फूल खाकर समय बिताया। फिर कई सालों तक केवल जल का सेवन किया। कुछ समय तक देवी ने सूखे पत्ते भी खाएं थे, लेकिन बाद में उन्होंने पत्तों का सेवन भी छोड़ दिया। इसलिए उन्हें &#8216;अपर्णा&#8217; कहा गया। उनकी तपस्या से महादेव ध्यान से उठ गए, लेकिन उन्होंने पार्वती की परीक्षा लेने का निर्णय लिया।</p>



<p><strong>महामिलन</strong><br>भगवान शिव ने एक ब्राह्मण का रूप लिया और पार्वती के पास जाकर अपनी निंदा करने लगे। उन्होंने कहा, &#8220;वह श्मशान निवासी, गले में सर्प लपेटने वाला औघड़ तुम्हारे योग्य नहीं है।&#8221; यह सुनकर माता पार्वती बहुत क्रोधित हो गईं और उन्होंने यह साफ कर दिया कि उनका प्रेम किसी बाहरी रूप पर नहीं, बल्कि शिव के आत्मस्वरूप पर आधारित है। देवी पार्वती का भाव देखकर महादेव अपने असली स्वरूप में प्रकट हुए और उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली।</p>



<p><strong>महाशिवरात्रि विवाह उत्सव</strong><br>फाल्गुन महीने के कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव एक अनोखी बारात लेकर माता पार्वती के द्वार पहुंचे, जिसमें देवता, गंधर्व, भूत-प्रेत और नंदी आदि शामिल हुए थे। इसी दिन शिव और शक्ति का विवाह संपन्न हुआ।</p>
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		<title>सोमवार के दिन इस नियम से करें पूजा, मिलेगा शिव-शक्ति का आशीर्वाद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Jun 2025 04:28:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[शिव-शक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="516" height="363" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-208-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-208.jpg 516w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-208-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 516px) 100vw, 516px" />सोमवार का दिन (Monday Puja Tips) भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं इस दिन लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ भी परम कल्याणकारी माना गया है तो आइए पढ़ते हैं। सनातन धर्म में सोमवार का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="516" height="363" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-208-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-208.jpg 516w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-208-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 516px) 100vw, 516px" />
<p>सोमवार का दिन (Monday Puja Tips) भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं इस दिन लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ भी परम कल्याणकारी माना गया है तो आइए पढ़ते हैं।</p>



<p>सनातन धर्म में सोमवार का दिन बहुत फलदायी माना जाता है। यह दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से सभी दुखों का अंत होता है। इसके साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन चंद्रदेव की पूजा भी होती है।</p>



<p>अगर आप भगवान शिव (Monday Puja Rule) का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो ”लिंगाष्टकम स्तोत्र” का पाठ करें। इसके साथ ही विधिवत पूजा करें, तो आइए यहां दी गई प्रमुख बातों को जानते हैं।</p>



<p><strong>भगवान शिव की पूजा विधि ( Shiv Puja Vidhi)<br></strong>पूजा शुरू करने से पहले भगवान शिव का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें।<br>शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें।<br>फिर पंचामृत से अभिषेक करें।<br>‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।<br>शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं।<br>बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और फूल अर्पित करें।<br>धूप और दीपक जलाएं।<br>इसके बाद लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें।<br>अंत में आरती करें।<br>ऐसा करने से शिव कृपा के साथ मनचाहा आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p><strong>॥लिंगाष्टकम स्तोत्र (Shiv Lingastakam Stotra)॥<br></strong>ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।<br>जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥<br>देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।<br>रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥<br>सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।<br>सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥<br>कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।<br>दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥<br>कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।<br>सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥<br>देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।<br>दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥<br>अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।<br>अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥<br>सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।<br>परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥८॥<br>लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।<br>शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥</p>



<p><strong>॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥<br></strong>नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,<br>भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।<br>नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,<br>तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥॥<br>मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,<br>नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।<br>मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,<br>तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥॥<br>शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,<br>सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।<br>श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,<br>तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥॥<br>वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,<br>मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।<br>चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,<br>तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥॥<br>यक्षस्वरूपाय जटाधराय,<br>पिनाकहस्ताय सनातनाय ।<br>दिव्याय देवाय दिगम्बराय,<br>तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥॥<br>पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।<br>शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥</p>
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