<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>शिव और राम के युद्ध का हुआ था प्रलयंकारी परिणाम जाने क्या था कारण &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%86-%e0%a4%a5/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Mon, 03 Feb 2020 10:13:44 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.5</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>शिव और राम के युद्ध का हुआ था प्रलयंकारी परिणाम जाने क्या था कारण &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>शिव और राम के युद्ध का हुआ था प्रलयंकारी परिणाम जाने क्या था कारण</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%86-%e0%a4%a5/316058</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Feb 2020 10:13:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शिव और राम के युद्ध का हुआ था प्रलयंकारी परिणाम जाने क्या था कारण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=316058</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="355" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb-300x172.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भगवान शिव और भगवान राम दोनों ही अपन शक्तियों और पराक्रम के लिए जाने जाते हैं और पूजनीय हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव और भगवान राम के बीच एक बार घमासान युद्ध हुआ था जिसका बहुत प्रलयंकारी परिणाम हुआ था। आज हम आपको पुराणों में वर्णित उस युद्ध के बारे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="355" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb.jpg 740w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb-300x172.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>भगवान शिव और भगवान राम दोनों ही अपन शक्तियों और पराक्रम के लिए जाने जाते हैं और पूजनीय हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव और भगवान राम के बीच एक बार घमासान युद्ध हुआ था जिसका बहुत प्रलयंकारी परिणाम हुआ था। आज हम आपको पुराणों में वर्णित उस युद्ध के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप शायद अभी तक अनजान होंगे। तो आइये जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।</p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-316059 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb-300x172.jpg" alt="" width="774" height="444" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb-300x172.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/02/ram-and-shiva-fight-1580695954-lb.jpg 740w" sizes="(max-width: 774px) 100vw, 774px" /></p>
<p>बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था। श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना सारे प्रदेश को विजित करती जा रही थी जहाँ भी यज्ञ का अश्व जा रहा था। इस क्रम में कई राजाओं के द्वारा यज्ञ का घोड़ा पकड़ा गया लेकिन अयोध्या की सेना के आगे उन्हें झुकना पड़ा। शत्रुघ्न के आलावा सेना में हनुमान, सुग्रीव और भारत पुत्र पुष्कल सहित कई महारथी उपस्थित थे जिन्हें जीतना देवताओं के लिए भी संभव नहीं था। कई जगह भ्रमण करने के बाद यज्ञ का घोडा देवपुर पहुंचा जहाँ राजा वीरमणि का राज्य था। राजा वीरमणि अति धर्मनिष्ठ तथा श्रीराम एवं महादेव के अनन्य भक्त थे। उनके दो पुत्र रुक्मांगद और शुभंगद वीरों में श्रेष्ठ थे। राजा वीरमणि के भाई वीरसिंह भी एक महारथी थे। राजा वीरमणि ने भगवान रूद्र की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था और महादेव ने उन्हें उनकी और उनके पूरे राज्य की रक्षा का वरदान दिया था। महादेव के द्वारा रक्षित होने के कारण कोई भी उनके राज्य पर आक्रमण करने का सहस नहीं करता था।</p>
<p>जब अश्व उनके राज्य में पहुंचा तो राजा वीरमणि के पुत्र रुक्मांगद ने उसे बंदी बना लिया और अयोध्या के साधारण सैनिकों से कहा यज्ञ का घोडा उनके पास है इसलिए वे जाकर शत्रुघ्न से कहें की विधिवत युद्ध कर वो अपना अश्व छुड़ा लें। जब रुक्मांगद ने ये सूचना अपने पिता को दी तो वो बड़े चिंतित हुए और अपने पुत्र से कहा की अनजाने में तुमने श्रीराम के यज्ञ का घोडा पकड़ लिया है। श्रीराम हमारे मित्र हैं और उनसे शत्रुता करने का कोई औचित्य नहीं है इसलिए तुम यज्ञ का घोडा वापस लौटा आओ। इसपर रुक्मांगद ने कहा कि हे पिताश्री, मैंने तो उन्हें युद्ध की चुनौती भी दे दी है अतः अब उन्हें बिना युद्ध के अश्व लौटना हमारा और उनका दोनों का अपमान होगा। अब तो जो हो गया है उसे बदला नहीं जा सकता इसलिए आप मुझे युद्ध कि आज्ञा दें। पुत्र की बात सुनकर वीरमणि ने उसे सेना सुसज्जित करने की आज्ञा दे दी। राजा वीरमणि अपने भाई वीरसिंह और अपने दोनों पुत्र रुक्मांगद और शुभांगद के साथ विशाल सेना ले कर युद्ध क्षेत्र में आ गए।</p>
<p>इधर जब शत्रुघ्न को सूचना मिली की उनके यज्ञ का घोडा बंदी बना लिया गया है तो वो बहुत क्रोधित हुए एवं अपनी पूरी सेना के साथ युद्ध के लिए युध्क्षेत्र में आ गए। उन्होंने पूछा की उनकी सेना से कौन अश्व को छुड़ाएगा तो भारत पुत्र पुष्कल ने कहा कि तातश्री, आप चिंता न करें। आपके आशीर्वाद और श्रीराम के प्रताप से मैं आज ही इन सभी योधाओं को मार कर अश्व को मुक्त करता हूँ। वे दोनों इस प्रकार बात कर रहे थे कि पवनसुत हनुमान ने कहा कि राजा वीरमणि के राज्य पर आक्रमण करना स्वयं परमपिता ब्रम्हा के लिए भी कठिन है क्योंकि ये नगरी महाकाल द्वारा रक्षित है। अतः उचित यही होगा कि पहले हमें बातचीत द्वारा राजा वीरमणि को समझाना चाहिए और अगर हम न समझा पाए तो हमें श्रीराम को सूचित करना चाहिए। राजा वीरमणि श्रीराम का बहुत आदर करते हैं इसलिये वे उनकी बात नहीं टाल पाएंगे। हनुमान की बात सुन कर शत्रुघन बोले की हमारे रहते अगर श्रीराम को युध्भूमि में आना पड़े, ये हमारे लिए अत्यंत लज्जा की बात है। अब जो भी हो हमें युद्ध तो करना ही पड़ेगा। ये कहकर वे सेना सहित युद्धभूमि में पहुच गए।</p>
<p>भयानक युद्ध छिड़ गया। भरत पुत्र पुष्कल सीधा जाकर राजा वीरमणि से भिड गया। दोनों अतुलनीय वीर थे। वे दोनों तरह तरह के शास्त्रार्थों का प्रयोग करते हुए युद्ध करने लगे। हनुमान राजा वीरमणि के भाई महापराक्रमी वीरसिंह से युद्ध करने लगे। रुक्मांगद और शुभांगद ने शत्रुघ्न पर धावा बोल दिया। पुष्कल और वीरमणि में बड़ा घमासान युद्ध हुआ। अंत में पुष्कल ने वीरमणि पर आठ नाराच बाणों से वार किया। इस वार को राजा वीरमणि सह नहीं पाए और मुर्छित होकर अपने रथ पर गिर पड़े। वीरसिंह ने हनुमान पर कई अस्त्रों का प्रयोग किया पर उन्हें कोई हानि न पहुंचा सके। हनुमान ने एक विकट पेड़ से वीरसिंह पर वार किया इससे वीरसिंह रक्तवमन करते हुए मूर्छित हो गए। उधर श्रीशत्रुघ्न और राजा वीरमणि के पुत्रों में असाधारण युद्ध चल रहा था। अंत में कोई चारा न देख कर शत्रुघ्न ने दोनों भाइयों को नागपाश में बाँध लिया। अपनी विजय देख कर शत्रुघ्न की सेना के सभी वीर सिंहनाद करने लगे। उधर राजा वीरमणि की मूर्छा दूर हुई तो उन्होंने देखा की उनकी सेना हार के कगार पर है। ये देख कर उन्होंने भगवान रूद्र का स्मरण किया।</p>
<h2></h2>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
