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	<title>शिववास &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>शिववास &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>फाल्गुन अमावस्या पर ‘शिववास’ समेत बन रहे हैं 5 अद्भुत संयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Feb 2025 05:14:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="604" height="441" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-617-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-617.jpg 604w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-617-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 604px) 100vw, 604px" />गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही गुरुवार का व्रत रखा जाता है। फाल्गुन अमावस्या पर भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा करने से साधक के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाएंगे। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="604" height="441" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-617-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-617.jpg 604w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-617-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 604px) 100vw, 604px" />
<p>गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही गुरुवार का व्रत रखा जाता है। फाल्गुन अमावस्या पर भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा करने से साधक के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाएंगे। आइए आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 2025) जानते हैं।</p>



<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार 27 फरवरी यानी आज फाल्गनु अमावस्या है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। साथ ही देवों के देव महादेव की पूजा कर रहैं। पितृ दोष से छुटकारा पाने और पितरों को प्रसन्न करने के लिए व्यक्ति अपने पूर्वजों का तर्पण एवं पिंडदान कर रहे हैं।</p>



<p>ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन अमावस्या पर दुर्लभ शिव योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही कई अन्य मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में गंगा स्नान करने और भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। आइए, पंडित हर्षित शर्मा जी से जानते हैं आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त (Today Puja Time) के विषय में।</p>



<p><strong>आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 27 February 2025)</strong><br>सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 48 मिनट पर<br>सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 20 मिनट पर<br>ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 08 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक<br>विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक<br>गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 17 मिनट से 06 बजकर 42 मिनट तक<br>निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से रात 12 बजकर 58 मिनट तक<br>राहुकाल – दोपहर 02 बजे से 03 बजकर 27 मिनट तक<br>गुलिक काल – सुबह 09 बजकर 41 मिनट से 11 बजकर 08 मिनट तक<br>दिशा शूल – दक्षिण</p>



<p><strong>फाल्गुन अमावस्या शुभ मुहूर्त (Falgun Amavasya Shubh Muhurat)</strong><br>फाल्गुन अमावस्या 27 फरवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और 28 फरवरी को सुबह 06 बजकर 14 मिनट पर अमावस्या का समापन होगा। साधक अपनी सुविधा अनुसार समय पर गंगा स्नान कर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।</p>



<p><strong>शुभ योग (Falgun Amavasya Shubh Yoga)</strong><br>ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन अमावस्या पर शिव योग और सिद्धि योग (Falgun Amavasya Siddha Yog benefits) का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र का संयोग है। वहीं, फाल्गुन अमावस्या पर शिववास योग का भी संयोग पूर्ण रात्रि तक है। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। भगवान शिव का अभिषेक करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।</p>



<p><strong>ताराबल</strong><br>भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती</p>



<p><strong>चन्द्रबल</strong><br>मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ</p>
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		<item>
		<title>वर्षों बाद गुरु प्रदोष व्रत पर शिववास समेत बन रहे हैं ये 7 संयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jul 2024 09:51:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
		<category><![CDATA[शिववास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="550" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-763.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-763.png 550w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-763-300x184.png 300w" sizes="(max-width: 550px) 100vw, 550px" />धार्मिक मत है कि त्रयोदशी तिथि (Guru Pradosh Vrat 2024) पर भगवान शिव की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। गुरु प्रदोष व्रत करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही शत्रुओं का नाश होता है। इस व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों ही करते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="550" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-763.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-763.png 550w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-763-300x184.png 300w" sizes="auto, (max-width: 550px) 100vw, 550px" />
<p>धार्मिक मत है कि त्रयोदशी तिथि (Guru Pradosh Vrat 2024) पर भगवान शिव की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। गुरु प्रदोष व्रत करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही शत्रुओं का नाश होता है। इस व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों ही करते हैं। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।</p>



<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार 18 जुलाई को प्रदोष व्रत है। गुरुवार के दिन पड़ने के चलते यह गुरु प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat 2024) कहलाएगा। इस दिन भगवान शिव एवं मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त गुरु प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योतिषियों की मानें तो गुरु प्रदोष व्रत पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस योग में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होती है। आइए, योग के बारे में जानते हैं।</p>



<p><strong>गुरु प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त (Guru Pradosh Vrat Shubh Muhurat)</strong><br>वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 जुलाई को संध्याकाल 08 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 19 जुलाई को संध्याकाल 07 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल संध्याकाल 08 बजकर 44 मिनट से लेकर 09 बजकर 22 मिनट तक है।</p>



<p><strong>ब्रह्म योग</strong><br>गुरु प्रदोष व्रत पर दुर्लभ ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण सुबह 06 बजकर 14 मिनट से हो रहा है। वहीं, समापन 19 जुलाई को ब्रह्म बेला में होगा। ब्रह्म योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सभी प्रकार के दुखों का अंत होता है।</p>



<p><strong>शिववास योग</strong><br>ज्योतिषियों की मानें तो गुरु प्रदोष व्रत पर दुर्लभ शिववास का निर्माण हो रहा है। इस शुभ अवसर पर देवों के देव महादेव कैलाश पर शाम 08 बजकर 44 मिनट तक जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे। इसके बाद भगवान शिव नंदी पर सवार होंगे। शिव पुराण में निहित है कि भगवान शिव के कैलाश और नंदी पर सवार रहने के दौरान अभिषेक करने से सभी प्रकार के कार्यों में सिद्धि मिलती है।</p>



<p><strong>करण</strong><br>गुरु प्रदोष व्रत पर बव, बालव और कौलव करण का निर्माण हो रहा है। इन योग में भगवान शिव की पूजा-उपासना करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। इस दिन सर्वप्रथम बव करण का निर्माण हो रहा है। इसके बाद बालव करण का निर्माण होगा। कौलव करण का समापन संध्याकाल 08 बजकर 44 मिनट पर होगा। इसके बाद कौलव करण का निर्माण होगा। इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>कालाष्टमी पर &#8216;शिववास&#8217; योग समेत बन रहे हैं ये 3 अद्भुत संयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 May 2024 03:33:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कालाष्टमी]]></category>
		<category><![CDATA[शिववास]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="327" height="263" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2.png 327w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-300x241.png 300w" sizes="auto, (max-width: 327px) 100vw, 327px" />धार्मिक मत है कि कालाष्टमी पर भगवान शिव और काल भैरव देव की पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। साथ ही जीवन में व्याप्त दुख संकट और क्लेश दूर हो जाते हैं। इस दिन साधक विशेष अनुष्ठान कर तंत्र विद्या सीखते हैं। कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर काल भैरव देव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="327" height="263" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2.png 327w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-300x241.png 300w" sizes="auto, (max-width: 327px) 100vw, 327px" />
<p>धार्मिक मत है कि कालाष्टमी पर भगवान शिव और काल भैरव देव की पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। साथ ही जीवन में व्याप्त दुख संकट और क्लेश दूर हो जाते हैं। इस दिन साधक विशेष अनुष्ठान कर तंत्र विद्या सीखते हैं। कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर काल भैरव देव साधक को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।</p>



<p> हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी मनाई जाती है। इस प्रकार ज्येष्ठ माह की कालाष्टमी 30 मई यानी आज है। यह दिन काल भैरव देव को समर्पित होता है। इस दिन देवों के देव महादेव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा-उपासना की जाती है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति हेतु व्रत-उपवास रखा जाता है। साधक कालाष्टमी पर विशेष अनुष्ठान कर तंत्र विद्या सीखते हैं। कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर काल भैरव देव साधक को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। धार्मिक मत है कि कालाष्टमी पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। साथ ही जीवन में व्याप्त दुख, संकट और क्लेश दूर हो जाते हैं। पंडित हर्षित शर्मा जी की मानें तो कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास का योग बन रहा है। साथ ही कई अन्य मंगलकारी शुभ योग बन रहे हैं। आइए , आज का पंचांग एवं राहुकाल जानते हैं-  </p>



<h2 class="wp-block-heading">आज का पंचांग (Panchang 30 May 2024)</h2>



<h3 class="wp-block-heading">शुभ मुहूर्त&nbsp;</h3>



<p>ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 30 मई को है। इस दिन अष्टमी तिथि दोपहर 11 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और 31 मई को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। इसके लिए 30 मई को कालाष्टमी मनाई जा रही है। &nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">योग</h3>



<p>ज्योतिषियों की मानें तो कालाष्टमी पर रवि योग का निर्माण हो रहा है। रवि योग सुबह 05 बजकर 31 मिनट से लेकर 07 बजकर 31 मिनट तक है। साधक प्रात: काल में स्नान-ध्यान के बाद काल भैरव देव की पूजा-उपासना कर सकते हैं। इस दिन बव और बालव करण के योग बन रहे हैं। इसके बाद कौलव करण का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष तीनों करण को शुभ मानते हैं। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक को मनचाहा वर प्राप्त होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शिववास योग</h3>



<p>कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण सुबह 11 बजकर 44 मिनट से हो रहा है। इस समय से ही ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत हो रही है। इस समय से भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ विराजमान रहेंगे। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। &nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</h3>



<p>सूर्योदय &#8211; सुबह 05 बजकर 24 मिनट पर</p>



<p>सूर्यास्त &#8211; शाम 07 बजकर 14 मिनट पर</p>



<p>चन्द्रोदय- देर रात 01 बजकर 03 मिनट पर</p>



<p>चंद्रास्त- दोपहर 11 बजकर 44 मिनट पर</p>



<h2 class="wp-block-heading">पंचांग</h2>



<p>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; सुबह 04 बजकर 03 मिनट से 04 बजकर 43 मिनट तक</p>



<p>विजय मुहूर्त &#8211; दोपहर 02 बजकर 37 मिनट से 03 बजकर 32 मिनट तक</p>



<p>गोधूलि मुहूर्त &#8211; शाम 07 बजकर 12 मिनट से 07 बजकर 33 मिनट तक</p>



<p>निशिता मुहूर्त &#8211; रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक</p>



<h3 class="wp-block-heading">अशुभ समय</h3>



<p>राहु काल &#8211; दोपहर 02 बजकर 03 मिनट से 03 बजकर 46 मिनट तक</p>



<p>गुलिक काल &#8211; सुबह 08 बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 35 मिनट तक</p>



<p>दिशा शूल &#8211; दक्षिण</p>



<h2 class="wp-block-heading">ताराबल</h2>



<p>भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती</p>



<h3 class="wp-block-heading">चन्द्रबल</h3>



<p>मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुंभ</p>



<p><a href="https://www.khojle.com/?utm_source=jagranhindi&amp;utm_medium=referral&amp;utm_campaign=midarticle" target="_blank" rel="noreferrer noopener"></a></p>
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		<title>सीता नवमी पर &#8216;शिववास&#8217; योग समेत बन रहे हैं ये 3 अद्भुत संयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 May 2024 04:46:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शिववास]]></category>
		<category><![CDATA[सीता नवमी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="501" height="313" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-3.jpg 501w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-3-300x187.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 501px) 100vw, 501px" />इस दिन जगत जननी मां सीता संग भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से विवाहित स्त्रियों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। इसके अलावा घर में सुख शांति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="501" height="313" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-3.jpg 501w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/dharm2-3-300x187.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 501px) 100vw, 501px" />
<p>इस दिन जगत जननी मां सीता संग भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से विवाहित स्त्रियों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। इसके अलावा घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।</p>



<p>देशभर में सीता नवमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन जगत जननी मां सीता संग भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य प्रताप से विवाहित स्त्रियों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। इसके अलावा, घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर रवि योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही शिववास योग का भी संयोग है। इन योग में भगवान श्रीराम संग मां सीता की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। आइए, पंडित हर्षित शर्मा जी से आज का पंचांग जानते हैं-</p>



<h2 class="wp-block-heading">आज का पंचांग </h2>



<h3 class="wp-block-heading">शुभ मुहूर्त&nbsp;</h3>



<p>ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 16 मई को है। वहीं, नवमी तिथि का समापन 17 मई को सुबह 08 बजकर 48 मिनट पर हो रहा है। आज मां सीता की पूजा हेतु शुभ समय सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 39 मिनट के मध्य है। वहीं, मध्याह्न क्षण दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर है। शास्त्रों में निहित है कि मध्याह्न क्षण में जगत जननी मां सीता का प्राकट्य हुआ है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">योग</h3>



<p>ज्योतिषियों की मानें तो सीता नवमी पर रवि योग का निर्माण हो रहा है, जो</p>



<p>संध्याकाल 06 बजकर 14 मिनट से लेकर 17 मई को सुबह 05 बजकर 29 मिनट तक है। वहीं, ध्रुव योग का निर्माण सुबह 08 बजकर 23 मिनट तक है। जबकि, शिववास योग सुबह 06 बजकर 23 मिनट से हो रहा है, जो दिन भर है। इस समय भगवान श्रीराम और मां सीता की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</h2>



<p>सूर्योदय &#8211; सुबह 05 बजकर 30 मिनट पर</p>



<p>सूर्यास्त &#8211; शाम 07 बजकर 06 मिनट पर</p>



<p>चन्द्रोदय- दोपहर 12 बजकर 46 मिनट पर</p>



<p>चंद्रास्त- देर रात 01 बजकर 59 मिनट पर</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंचांग</h3>



<p>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; सुबह 04 बजकर 06 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक</p>



<p>विजय मुहूर्त &#8211; दोपहर 02 बजकर 34 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक</p>



<p>गोधूलि मुहूर्त &#8211; शाम 07 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक</p>



<p>निशिता मुहूर्त &#8211; रात्रि 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक</p>



<p>अशुभ समय</p>



<p>राहु काल &#8211; दोपहर 02 बजे से 03 बजकर 42 मिनट तक</p>



<p>गुलिक काल &#8211; सुबह 08 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक</p>



<p>दिशा शूल &#8211; दक्षिण</p>



<h2 class="wp-block-heading">ताराबल</h2>



<p>अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती</p>



<h3 class="wp-block-heading">चन्द्रबल</h3>



<p>मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ, मीन</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
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