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	<title>शिकार &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>शिकार &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सिर्फ बुजुर्ग नहीं, अब युवाओं को भी शिकार बना रहा है कैंसर</title>
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		<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 04:43:15 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[शिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="247" height="170" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/mkl-3-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/mkl-3.jpg 247w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/mkl-3-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 247px) 100vw, 247px" />कैंसर दुनिया भर में एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। हाल ही में आई एक विस्तृत रिपोर्ट ने इस बीमारी को लेकर चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। 1990 से 2023 के बीच किए गए अध्ययन से पता चला है कि इलाज और तकनीक में सुधार के बावजूद, दुनिया भर में कैंसर के मामले और इससे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="247" height="170" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/mkl-3-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/mkl-3.jpg 247w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/mkl-3-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 247px) 100vw, 247px" />
<p>कैंसर दुनिया भर में एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। हाल ही में आई एक विस्तृत रिपोर्ट ने इस बीमारी को लेकर चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। 1990 से 2023 के बीच किए गए अध्ययन से पता चला है कि इलाज और तकनीक में सुधार के बावजूद, दुनिया भर में कैंसर के मामले और इससे होने वाली मौतें तेजी से बढ़ी हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि संसाधनों की कमी वाले गरीब देशों में यह बीमारी अब सबसे ज्यादा पैर पसार रही है।</p>



<p><strong>सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े<br></strong>इस अध्ययन में दुनिया के 204 देशों और क्षेत्रों को शामिल किया गया, जिसमें 47 प्रकार के कैंसर और 44 जोखिम कारकों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार:</p>



<p>साल 2023 में: दुनिया भर में कैंसर के 1 करोड़ 85 लाख नए मामले सामने आए।<br>मौतें: इसी साल लगभग 1 करोड़ 4 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई।<br>सबसे आम कैंसर: 2023 में &#8216;स्तन कैंसर&#8217; के मामले सबसे ज्यादा देखे गए।<br>सबसे घातक: &#8216;फेफड़ों का कैंसर&#8217; सबसे ज्यादा मौतों का कारण बना।</p>



<p><br><strong>2050 तक विकराल हो सकती है स्थिति<br></strong>अध्ययन में विज्ञानियों ने चेताया कि अगर इसकी रोकथाम की दिशा में जल्द ठोस कदम न उठाए गए तो 2050 तक 3.05 करोड़ लोग कैंसर से जूझ रहे होंगे। वहीं इस बीमारी से 1.86 करोड़ लोग अपनी जान से हाथ धो सकते हैं, जो आज के आंकड़ों के लगभग दोगुना है। हालांकि आर्थिक रूप से समृद्ध देशों में उम्र के हिसाब से कैंसर से होने वाली मृत्यु की दर 24 फीसदी घटी है, लेकिन दूसरी तरफ गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में नए मामलों की दर क्रमशः 24 फीसदी और 29 फीसदी बढ़ी है।</p>



<p>2023 में स्तन कैंसर सबसे आम है, जबकि फेफड़ों का कैंसर सबसे ज्यादा मौतों का कारण बना। अगले 25 वर्षों में 2050 तक कैंसर के नए मामलों में 60.7 फीसदी जबकि मौतों में 74.5 फीसदी की वृद्धि होने का अंदेशा है।</p>



<p><strong>रुक सकती हैं लाखों मौतें<br></strong>लगभग हर छह वैश्विक मौतों में से एक कैंसर के कारण हुई। 2023 में कैंसर से होने वाली 41.7 प्रतिशत मौतें परिवर्तनीय जोखिमों के कारण थीं। तंबाकू, शराब, अस्वस्थ आहार, उच्च शरीर द्रव्यमान सूचकांक, वायु प्रदूषण और हानिकारक कार्यस्थल या पर्यावरणीय संपर्क सभी ने योगदान दिया। यदि सरकारें सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को मजबूत करें और स्वस्थ विकल्पों को आसान बनाएं, तो हर साल लाखों कैंसर को रोका जा सकता है।</p>



<p><strong>कैंसर रुझानों का मॉडल किया तैयार<br></strong>तीन दशकों से अधिक के डाटा का उपयोग करते हुए हमने भविष्य के कैंसर रुझानों का माडल तैयार किया। इसमें जनसंख्या वृद्धि और उम्र बढ़ने की भूमिका है, लेकिन जीवनशैली, शहरीकरण, हवा की गुणवत्ता और आर्थिक विकास में व्यापक बदलाव भी कैंसर के जोखिमों के संपर्क को बढ़ा रहे हैं। बिना बड़े हस्तक्षेप के ये रुझान जारी रहेंगे। प्रारंभिक निदान में निवेश कर सरकारें कैंसर जैसे स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और कोलोरेक्टल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की पेशकश कर सकती हैं, जो जीवन बचाती है लेकिन दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दुर्लभ है।</p>



<p><strong>युवाओं में भी बढ़ रहा कैंसर<br></strong>तंबाकू नियंत्रण, वायु गुणवत्ता रेगुलेशन, मोटापे की रोकथाम और कार्यस्थल सुरक्षा के लिए सुबूत हैं और इन्हें मजबूत करने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य प्रणालियों को भी विस्तार की आवश्यकता है। प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षित आंकोलाजी स्टाफ से लेकर सस्ते उपचारों तक सभी लोगों की पहुंच को बढ़ना होगा । उच्च गुणवत्ता वाले डाटा भी आवश्यक है। कैंसर अब केवल वृद्धों को प्रभावित करने वाली स्थिति नहीं है। कई क्षेत्रों में युवाओं को कैंसर का निदान तेजी से किया जा रहा है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से बाद के चरणों में देखा गया था। इसके परिणाम स्वास्थ्य से दूर तक फैले हुए हैं।</p>
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		<title>महिलाओं से ज्यादा पुरुष हो रहे हैं कैंसर का शिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 04:46:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[शिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/vbbb-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/vbbb.jpg 693w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/vbbb-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />देश में कैंसर विशेष रूप से ओरल और ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। यह जीवनशैली में बदलाव, तंबाकू के उपयोग, देर से निदान और पर्यावरणीय कारकों के कारण हो रहा है। यह बात प्रसिद्ध हेमेटोलजिस्ट और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डा. मैमन चांडी ने कही। चांडी ने कहा कि ये &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/vbbb-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/vbbb.jpg 693w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/vbbb-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>देश में कैंसर विशेष रूप से ओरल और ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। यह जीवनशैली में बदलाव, तंबाकू के उपयोग, देर से निदान और पर्यावरणीय कारकों के कारण हो रहा है। यह बात प्रसिद्ध हेमेटोलजिस्ट और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डा. मैमन चांडी ने कही। चांडी ने कहा कि ये प्रवृत्तियां देश के लिए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती प्रस्तुत करती हैं।</p>



<p><strong>ओरल कैंसर के बढ़ रहे मामले<br></strong>उन्होंने कहा कि 1990 से 2021 के बीच भारत में ओरल कैंसर की मृत्यु दर 5.32 से बढ़कर 5.92 प्रति एक लाख हो गई और दिव्यांगता समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाई) दर 152.94 से बढ़कर 163.61 हो गई।</p>



<p><strong>पुरुषों में कैंसर के ज्यादा मामले<br></strong>चांडी ने कहा कि पूर्वानुमान बताते हैं कि 2022 से 2031 के बीच ओरल कैंसर के मेट्रिक्स में वृद्धि की प्रवृत्ति है, जिसमें एएसपीआर ( आयु- मानकीकृत घटना दर ) 2031 तक 10.15 प्रति 100,000 और मृत्यु दर (एएसपीआर) 29. 38 प्रति 100,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। कोलकाता के टाटा मेडिकल सेंटर के पूर्व निदेशक ने कहा कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में लगातार उच्च दरें देखी जाती हैं।</p>



<p><strong>ब्रेस्ट और ओरल कैंसर के मामले बढ़े<br></strong>चांडी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर अब महिलाओं में सबसे सामान्य कैंसर बन गया है, जो फेफड़े कैंसर को पार कर गया है। चांडी ने कहा कि भारत में महिलाओं में एएसपीआर 1990 से 2016 के बीच लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गया है। हर राज्य में ब्रेस्ट कैंसर में वृद्धि रिपोर्ट की गई है। ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य कारणों में जीवनशैली के कारक, मोटापा, शराब का सेवन, देर से गर्भधारण और बेहतर निदान शामिल हैं।</p>



<p><strong>आईआईटी मद्रास में कैंसर जीनोम एटलस को लांच किया<br></strong>उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में दो पूरक माडलों का पालन करता है। एक निजी क्षेत्र, जहां मरीजों को मल्टी स्पेशलिटी या तृतीयक अस्पतालों में भेजा जाता है और दूसरा सार्वजनिक क्षेत्र, जहां मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर देखा जाता है और राज्य कैंसर अस्पतालों में भेजा जाता है। शोध और जीनोमिक्स पर चांडी ने आइआइटी मद्रास द्वारा लांच किए गए भारत कैंसर जीनोम एटलस (बीसीजीए) को उजागर किया। यह अग्रणी पहल भारत में प्रचलित कैंसरों के आनुवंशिक परिदृश्य को मानचित्रित करती है। वर्तमान में यह मुख्य रूप से डाटा संग्रह का काम है।</p>



<p><strong>कोलोरेक्टल कैंसर का इलाज<br></strong>उन्होंने डोस्टारलिमैब &#8211; जीएक्सली (जेम्परली) नामक पीडी &#8211; 1 दवाओं का उल्लेख किया, जिसने निष्क्रिय ट्यूमर वाले कोलोरेक्टल आइआइटी मद्रास में कैंसर जीनोम एटलस कैंसर के मरीजों के एक छोटे समूह में 100 प्रतिशत पूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त की । उन्होंने कहा कि यह अद्भुत है, लेकिन यह केवल चार-पांच प्रतिशत मरीजों पर लागू होता है। बाकी को सर्जरी और कीमोथेरेपी की आवश्यकता है।</p>



<p><strong>इम्यूनोथेरेपी दवा से मिलती है मदद<br></strong>डोस्टारलिमैब &#8211; जीएक्सली (जेम्परली) इम्यूनोथेरेपी दवा है जो टी-कोशिकाओं पर पीडी &#8211; 1 प्रोटीन को अवरुद्ध करती है। ताकि उन्हें कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने में मदद मिल सके। रूस द्वारा एमआरएनए कैंसर वैक्सीन की घोषणा पर उन्होंने कहा, इस बारे में अभी तक कोई प्रकाशित क्लिनिकल डाटा नहीं है। चांडी ने कहा कि हम हर साल 10 लाख से अधिक कैंसर के नए मामलों का सामना कर रहे हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट, गर्भाशय और अंडाशय के कैंसर सबसे सामान्य हैं, पुरुषों में फेफड़ों, ओरल और प्रोस्टेट कैंसर प्रमुख हैं।</p>
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		<title>दुबले-पतले लोग भी हो सकते हैं डायबिटीज के शिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 04:55:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[शिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="362" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ghbnn-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ghbnn.jpg 684w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ghbnn-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />जब भी डायबिटीज की बात होती है तो अक्सर लोग इसे मोटापे से जोड़ देते हैं। आम धारणा यही है कि जिनका वजन ज्यादा है, वही इस बीमारी की चपेट में आते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। जी हां, कई बार देखने में दुबले-पतले लोग भी डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। आखिर ऐसा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="362" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ghbnn-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ghbnn.jpg 684w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/ghbnn-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>जब भी डायबिटीज की बात होती है तो अक्सर लोग इसे मोटापे से जोड़ देते हैं। आम धारणा यही है कि जिनका वजन ज्यादा है, वही इस बीमारी की चपेट में आते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। जी हां, कई बार देखने में दुबले-पतले लोग भी डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है ? आइए डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंके से जानते हैं इसके पांच बड़े कारण।</p>



<p><strong>विसरल फैट</strong></p>



<p>दुबले-पतले दिखने वाले शरीर में भी ऐसी चर्बी जमा हो सकती है, जो आंखों से दिखाई नहीं देती। इसे विसरल फैट कहा जाता है। यह चर्बी हमारे लिवर, पैंक्रियाज और आंतों के आसपास छिपी होती है और धीरे-धीरे इंसुलिन की कार्यक्षमता को कम करती है। नतीजा, डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।</p>



<p><strong>मसल मास की कमी<br></strong>अगर आपके शरीर में मसल मास की कमी है, तो ग्लूकोज को स्टोर करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। ऐसे में, ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है और डायबिटीज होने की संभावना रहती है। यानी दुबले शरीर में भी अगर मसल मास कम है, तो रिस्क बना रहता है।</p>



<p><strong>नींद और तनाव का असर<br></strong>पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना, शरीर के लिए उतना ही नुकसानदायक है जितना कि गलत खानपान। जब हम तनाव में रहते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। यही धीरे-धीरे डायबिटीज का कारण बन सकता है।</p>



<p><strong>‘TOFI’ इफेक्ट<br></strong>वैज्ञानिक भाषा में इसे TOFI कहा जाता है। यानी शरीर बाहर से पतला दिखे, लेकिन अंदर चर्बी की मात्रा ज्यादा हो। MRI स्कैन से यह अक्सर सामने आता है कि कई दुबले-पतले दिखने वाले लोगों के शरीर के अंदर फैट जमा होता है, जो डायबिटीज का कारण बनता है।</p>



<p><strong>आनुवांशिक वजहें<br></strong>दक्षिण एशियाई और भारतीय मूल के लोगों में स्वाभाविक रूप से बीटा-सेल की क्षमता कम होती है। बीटा-सेल ही इंसुलिन बनाने का काम करते हैं। जब यह क्षमता कमजोर होती है, तो शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता और डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।</p>



<p>डायबिटीज केवल मोटापे की बीमारी नहीं है। यह एक ऐसी समस्या है, जो दुबले-पतले लोगों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। इसलिए चाहे आपका वजन कम हो या ज्यादा, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी, यही बचाव के असली उपाय हैं।</p>



<p> </p>
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		<title>पोषक तत्वों की कमी की वजह से हो सकते हैं कई बीमारियों के शिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Feb 2024 05:41:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[पोषक तत्वों]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारियों]]></category>
		<category><![CDATA[शिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="314" height="312" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11.jpg 314w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11-small.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 314px) 100vw, 314px" />डाइट में पोषक तत्वों की कमी की वजह से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। पोषक तत्वों की मदद से न केवल शरीर बेहतर तरीके से काम कर पाता है बल्कि, कई बीमारियों से बचाव में भी मदद मिलती है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने के लिए कुछ लक्षणों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="314" height="312" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11.jpg 314w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-11-small.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 314px) 100vw, 314px" />
<p>डाइट में पोषक तत्वों की कमी की वजह से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। पोषक तत्वों की मदद से न केवल शरीर बेहतर तरीके से काम कर पाता है बल्कि, कई बीमारियों से बचाव में भी मदद मिलती है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने के लिए कुछ लक्षणों पर ध्यान देकर, आप इनकी कमी को दूर करने के लिए डाइट में सुधार कर सकते हैं। आइए जानते हैं, पोषक तत्वों की कमी की वजह से शरीर में नजर आने वाले लक्षण और कैसे कर सकते हैं इनकी कमी को दूर।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विटामिन-डी</h3>



<p>शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी में विटामिन-डी की कमी सबसे आम है। इसकी कमी की वजह से शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं। धूप में बहुत सीमित समय बिताने की वजह से कई लोगों को इसकी कमी का सामना करना पड़ता है क्योंकि विटामिन-डी का सबसे प्रमुख स्त्रोत सूरज की रोशनी हीं है। इसकी कमी की वजह से थकान, डिप्रेशन, कमजोर इम्युनिटी, कमजोर हड्डियां, मांसपेशियों में दर्द, एंग्जायटी, बच्चों में हड्डियों की बनावट में असामान्यता (रिकेट्स), जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। इसलिए अगर ऐसे कोई लक्षण नजर आएं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करके विटामिन-डी की मात्रा की जांच करवा सकते हैं।</p>



<p>इसकी कमी को दूर करने के लिए धूप में कुछ समय बिताएं और इसके साथ ही, अपनी डाइट में मशरूम, सी फूड्स, अंडे, दूध आदि को शामिल करें। इनकी मदद से काफी विटामिन-डी की कुछ हद तक कमी को पूरा किया जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से यह सूरज की रोशनी से ही मिलेगा।ल आपके डॉक्टर इसकी कमी दूर करने के लिए कुछ सप्लीमेंट्स भी दे सकते हैं। </p>



<h3 class="wp-block-heading">आयरन</h3>



<p>महिलाओं में होने वाले पोषक तत्वों की कमी में आयरन की कमी सबसे आम है। इसकी कमी की वजह से कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आयरन की कमी की वजह से अनीमिया हो सकता है। इसमें रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है, जिस कारण से शरीर महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स पर भी प्रभाव पड़ सकता है। आयरन की कमी की वजह से थकान, स्किन का रंग हल्का होना, चक्कर आना, हाथ-पैर ठंडे होना, नाखुन कमजोर होना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।</p>



<p>इसलिए ऐसे कोई लक्षण नजर आने पर अपने डॉक्टर से संपर्क करें। वे आपको आयरन सप्लीमेंट्स दे सकते हैं, जो इसकी कमी को दूर करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपनी डाइट में सीड्स और नट्स, ऑर्गन मीट, पालक, शकरकंद आदि को शामिल करें। इनमें आयरन की मात्रा अधिक होती है, जो इसकी कमी को दूर करने में मदद कर सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कैल्शियम</h3>



<p>कैल्शियम की कमी की वजह से शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं। इसकी कमी की वजह से हड्डियां और दांत कमजोर हो सकते हैं। शरीर में इसकी कमी की वजह से मांसपेशियों में अकड़न, कमजोर हड्डियां, हाथ-पैरों में झनझनाहट, थकान, कंफ्यूजन, याददाश्त कमजोर होना, कमजोर दांत जैसे कई लक्षण नजर आ सकते हैं। इसलिए ऐसे कोई लक्षण नजर आने पर अपने डॉक्टर से संपर्क करके, इस बारे में बात करें।</p>



<p>इसकी कमी को दूर करने के लिए अपनी डाइट में दूध, दही, चीज, साल्मन, सीड्स और नट्स शामिल करें। इन फूड्स की मदद से कैल्शियम की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विटामिन-बी12</h3>



<p>विटामिन-बी12 शरीर के कई फंक्शन्स के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह खाने की मदद से शरीर को मिलता है। इसकी कमी की वजह से मुंह में छाले, हाथ पैरों में झनझनाहट, याददाश्त कमजोर होना, भूख न लगना, थकान, मूड स्विंग्स, देखने में तकलीफ, कंफ्यूजन, मितली जैसे लक्षण नजर आते हैं। अगर ये लक्षण दिखने लगें, तो डॉक्टर से संपर्क करें।</p>



<p>इसकी कमी दूर करने के लिए साल्मन, अंडे, दही, कलैम्स, चिकन, दूध आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इनकी मदद से इसकी कमी को दूर किया जा सकता है। साथ ही, डॉक्टर की मदद से इस परेशानी को दूर करने के लिए दवाइयां भी ले सकते हैं।</p>
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		<title>इन संकेतों से पहचाने अगर आप हो रहे हैं डिप्रेशन के शिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Jun 2019 11:21:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[डिप्रेशन]]></category>
		<category><![CDATA[शिकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="301" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1.jpg 301w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 301px) 100vw, 301px" />आज के समय में कई लोग ऐसे हैं जो डिप्रेशन का शिकार है जिससे बाहर निकलना उन्हें बेहद जरुरी है. डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है जो आपके मस्तिष्क के ऊतरों को हानि पहुंचाता है. डिप्रेशन से ग्रसित होने पर यह आपके दिमाग और शरीर को कंट्रोल कर लेता है. ये किसी भी कारण से हो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="301" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1.jpg 301w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 301px) 100vw, 301px" /><p><strong>आज के समय में कई लोग ऐसे हैं जो डिप्रेशन का शिकार है जिससे बाहर निकलना उन्हें बेहद जरुरी है. डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है जो आपके मस्तिष्क के ऊतरों को हानि पहुंचाता है. डिप्रेशन से ग्रसित होने पर यह आपके दिमाग और शरीर को कंट्रोल कर लेता है. ये किसी भी कारण से हो सकता है. डिप्रेशन से बाहर आना आसान नहीं होता है लेकिन अगर आप सही दवाईयों और थेरेपी करते हैं तो डिप्रेशन से बाहर आया जा सकता है. डिप्रेशन से दोबारा ग्रसित होने पर कुछ संकेतों का ध्यान रखना चाहिए. तो आइए आपको उन संकेतों के बारे में बताते हैं. </strong></p>
<p><strong> <img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-248696 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1.jpg" alt="" width="301" height="168" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1.jpg 301w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/images-60-1-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 301px) 100vw, 301px" /></strong></p>
<p><strong>अकेले रहना: दोबारा डिप्रेशन से ग्रसित होने पर यह सबसे पहले आपके निजी जीवन को प्रभावित करता है. जब व्यक्ति दोबारा से डिप्रेशन का शिकार होता है तो उसे बाकि लोगों से बात करने में दिक्कत होती है. वह अकेले रहना पसंद करते हैं.</strong></p>
<p><strong>नींद के तरीके में बदलाव: डिप्रेशन व्यक्ति की नींद को भी प्रभावित करता है. इस दौरान या तो आपको बिल्कुल नींद नहीं आती या आपको पूरे दिन नींद आती रहती है. इन दोनों ही परिस्थिति मे व्यक्ति की ऊर्जा और शक्ति कम होने लगती है.</strong></p>
<p><strong>चिड़चिड़ापन: डिप्रेशन से ग्रसित होने पर उसके संकेतों पर ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है. दोबारा डिप्रेशन से ग्रसित होने पर आप अपने आस-पास की हर चीज से चिड़चिड़े रहते हैं.</strong></p>
<p><strong>आत्म-विश्वास कम होना: डिप्रेशन से ग्रसित होने पर सबसे सामान्य लक्षण आत्म-विश्वास की कमी होना होता है. डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति खुद को बेकार समझने लगता है. साथ ही उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है.</strong></p>
<p><strong>भूख और वजन में बदलाव: दोबारा डिप्रेशन से ग्रसित होने पर इसे आपकी भूख के माध्यम से देखा जा सकता है. जिसके परिणामस्वरुप अचानक से आपका वजन कम होने लगता है या बढ़ जाता है.</strong></p>
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