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	<title>शनिदेव &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>शनिदेव &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>क्या आप भी शनिदेव से डरते हैं? इस पौराणिक कथा को पढ़कर बदल जाएगा आपका नजरिया</title>
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		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 05:34:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शनिदेव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="301" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418.png 892w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418-300x146.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418-768x375.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में शनि देव को ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। बहुत से लोग उनसे डरते हैं, लेकिन असल में शनि देव बुरे नहीं, बल्कि हमारे कर्मों का हिसाब रखने वाले देवता हैं। उनकी व्रत कथा हमें धैर्य और अहंकार से दूर रहने की सीख देती है। अक्सर हम अपनी सफलता और शक्ति के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="301" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418.png 892w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418-300x146.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-13-223418-768x375.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में शनि देव को ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। बहुत से लोग उनसे डरते हैं, लेकिन असल में शनि देव बुरे नहीं, बल्कि हमारे कर्मों का हिसाब रखने वाले देवता हैं। उनकी व्रत कथा हमें धैर्य और अहंकार से दूर रहने की सीख देती है।</p>



<p>अक्सर हम अपनी सफलता और शक्ति के नशे में यह भूल जाते हैं कि समय कभी भी बदल सकता है। शनि देव की व्रत कथा भी एक ऐसे ही प्रतापी राजा ‘विक्रमादित्य’ की कहानी है, जिनका अहंकार शनि देव के एक फैसले ने चूर-चूर कर दिया था।</p>



<p><strong>शनिवार व्रत कथा<br></strong>एक समय स्वर्गलोक में इस बात पर विवाद छिड़ गया कि नौ ग्रहों में से सबसे बड़ा कौन है। यह विवाद इतना आगे चला गया कि यह एक युद्ध की स्थिति बन गई। इस बात के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंच गए। उन्होंने कहा, ‘हे देवराज! अब आप ही निर्णय करें कि हम सब में से बड़ा कौन है।</p>



<p>देवताओें द्वारा पूछा गए सवाल से देवराज इंद्र उलझन में पड़ गए। इंद्र देव ने कहा कि मैं इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता हूं। मैं असमर्थ हूं। इस सवाल का जवाब पाने के लिए वो सभी पृथ्वीलोक में उज्जयिनी नगरी के राजा विक्रमादित्य के पास गए।</p>



<p>राजा विक्रमादित्य के महल पहुंचकर सभी देवताओं ने प्रश्न किया। इस पर राजा विक्रमादित्य भी असमंजस में पड़ गए। वो सोच रहे थे कि सभी के पास अपनी-अपनी शक्तियां हैं जिसके चलते वो महान हैं। अगर किसी को छोटा या बड़ा कहा गया तो उन्हें क्रोध के कारण काफी हानि हो सकती है। इसी बीच राजा को एक तरीका सूझा।</p>



<p>उन्होंने 9 तरह की धातु बनवाई जिसमें स्वर्ण, रजत (चांदी), कांसा, ताम्र (तांबा), सीसा, रांगा, जस्ता, अभ्रक व लोहे शामिल थे। राज ने सभी धातुओं को एक-एक आसन के पीछे रख दिया। इसके बाद उन्होंने सभी देवताओें को सिंहासन पर बैठने के लिए कहा। धातुओं के गुणों के अनुसार, सभी आसनों को एक-दूसरे के पीछे रखवाकर उन्होंने देवताओं को अपने-अपने सिंहासन पर बैठने को कहा।</p>



<p>जब सभी देवताओं ने अपना-अपना आसन ग्रहण कर लिया तब राजा विक्रमादित्य ने कहा- ‘इस बात का निर्णया हो चुका है। जो सबसे पहले सिंहासन पर बैठा है वही बड़ा है।’ यह देखकर शनि देवता बहुत नाराज हुए उन्होंने कहा, ‘राजा विक्रमादित्य! यह मेरा अपमान है। तुमने मुझे सबसे पीछे बैठाया है। मैं तुम्हारा विनाश कर दूंगा। तुम मेरी शक्तियों को नहीं जानते हो।’</p>



<p>शनि ने कहा- ‘एक राशि पर सूर्य एक महीने, चंद्रमा सवा दो दिन, मंगल डेढ़ महीने, बुध और शुक्र एक महीने, वृहस्पति तेरह महीने रहते हैं। लेकिन मैं किसी भी राशि पर साढ़े सात वर्ष रहता हूं। मैंने अपने प्रकोप से बड़े-बड़े देवताओं को पीड़ित किया है। वो मेरा ही प्रकोप था कि राम को वन में जाकर रहना पड़ा था क्योंकि उनपर साढ़े साती थी। रावण की मृत्यु भी इसी कारण हुई। अब तू भी मेरे प्रकोप से नहीं बच पाएगा। शनिदेव ने बेहद क्रोध में वहां से विदा ली। वहीं, बाकी के देवता खुशी-खुशी वहां से चले गए।</p>
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		<title>शनिदेव की कृपा के लिए उत्तम है शनिवार, जरूर करें इन मंत्रों का जप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 04:51:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शनिदेव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="368" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942.png 774w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942-300x179.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942-768x457.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं, जो कर्मफल दाता भी कहे जाते हैं। वह व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार, फल प्रदान करते हैं। ऐसे में अगर आप शनिदेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इसके लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। चलिए कृपा प्राप्ति के लिए पढ़ते हैं शनिदेव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="368" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942.png 774w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942-300x179.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-26-204942-768x457.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं, जो कर्मफल दाता भी कहे जाते हैं। वह व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार, फल प्रदान करते हैं। ऐसे में अगर आप शनिदेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इसके लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। चलिए कृपा प्राप्ति के लिए पढ़ते हैं शनिदेव के मंत्र और स्तोत्र।</p>



<p><strong>शनिदेव के मंत्र<br></strong>“ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। सय्योंरभीस्रवन्तुनः।।</p>



<p>शनि एकाक्षरी मंत्र – शं</p>



<p>शनि मूल मंत्र – ॐ शं शनैश्चराय नमः</p>



<p>शनि बीज मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।</p>



<p>शनि गायत्री मंत्र – ॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात्॥</p>



<p>शनि प्रणाम मंत्र – ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌॥</p>



<p>शनि वैदिक मंत्र – ॐ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।</p>



<p><strong>॥ शनैश्चरस्तोत्रम् ॥<br></strong>॥ विनियोग ॥</p>



<p>शनि स्तोत्रम्</p>



<p>अस्य श्रीशनैश्चरस्तोत्रस्य। दशरथ ऋषिः॥</p>



<p>शनैश्चरो देवता। त्रिष्टुप् छन्दः॥</p>



<p>शनैश्चरप्रीत्यर्थ जपे विनियोगः॥</p>



<p>॥ दशरथ उवाच ॥</p>



<p>कोणोऽन्तको रौद्रयमोऽथ बभ्रुः कृष्णः शनिः पिङ्गलमन्दसौरिः।</p>



<p>नित्यं स्मृतो यो हरते च पीडां तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥1॥</p>



<p>सुरासुराः किंपुरुषोरगेन्द्रा गन्धर्वविद्याधरपन्नगाश्च।</p>



<p>पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थितेन तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥2॥</p>



<p>नरा नरेन्द्राः पशवो मृगेन्द्रा वन्याश्च ये कीटपतङ्गभृङ्गाः।</p>



<p>पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थितेन तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥3॥</p>



<p>देशाश्च दुर्गाणि वनानि यत्र सेनानिवेशाः पुरपत्तनानि।</p>



<p>पीड्यन्ति सर्वे विषमस्थितेन तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥4॥</p>



<p>तिलैर्यवैर्माषगुडान्नदानैर्लोहेन नीलाम्बरदानतो वा।</p>



<p>प्रीणाति मन्त्रैर्निजवासरे च तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥5॥</p>



<p>प्रयागकूले यमुनातटे च सरस्वतीपुण्यजले गुहायाम्।</p>



<p>यो योगिनां ध्यानगतोऽपि सूक्ष्मस्तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥6॥</p>



<p>अन्यप्रदेशात्स्वगृहं प्रविष्टस्तदीयवारे स नरः सुखी स्यात्।</p>



<p>गृहाद् गतो यो न पुनः प्रयाति तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥7॥</p>



<p>स्रष्टा स्वयंभूर्भुवनत्रयस्य त्राता हरीशो हरते पिनाकी।</p>



<p>एकस्त्रिधा ऋग्यजुःसाममूर्तिस्तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥8॥</p>



<p>शन्यष्टकं यः प्रयतः प्रभाते नित्यं सुपुत्रैः पशुबान्धवैश्च।</p>



<p>पठेत्तु सौख्यं भुवि भोगयुक्तः प्राप्नोति निर्वाणपदं तदन्ते॥9॥</p>



<p>कोणस्थः पिङ्गलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः।</p>



<p>सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः॥10॥</p>



<p>एतानि दश नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्।</p>



<p>शनैश्चरकृता पीडा न कदाचिद्भविष्यति॥11॥</p>



<p>॥ इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे श्रीशनैश्चरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>28 नवंबर को मार्गी होंगे शनिदेव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 04:41:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शनिदेव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="277" height="274" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/njkmm-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />शनिदेव अनुशासन, कर्मफल, जिम्मेदारी और जीवन की संरचना के कारक माने जाते हैं। वक्री अवस्था में जहां कई मामले धीमे पड़ जाते हैं, वहीं मार्गी अवस्था नई स्पष्टता और स्थिरता लेकर आती है। मीन राशि का प्रभाव शनिदेव की कठोर ऊर्जा में भावनात्मक समझ और आध्यात्मिक गहराई जोड़ देता है। इस कारण भावनात्मक अनुशासन, समझदारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="277" height="274" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/njkmm-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>शनिदेव अनुशासन, कर्मफल, जिम्मेदारी और जीवन की संरचना के कारक माने जाते हैं। वक्री अवस्था में जहां कई मामले धीमे पड़ जाते हैं, वहीं मार्गी अवस्था नई स्पष्टता और स्थिरता लेकर आती है। मीन राशि का प्रभाव शनिदेव की कठोर ऊर्जा में भावनात्मक समझ और आध्यात्मिक गहराई जोड़ देता है। इस कारण भावनात्मक अनुशासन, समझदारी और कर्म सुधार जैसे विषय प्रमुख हो जाते हैं।</p>



<p><strong>मेष </strong></p>



<p>मेष राशि वालों के लिए मीन राशि में शनिदेव का मार्गी होना बारहवें भाव (व्यय और मोक्ष का क्षेत्र) को सक्रिय करता है। यह स्थिति आत्ममंथन और आध्यात्मिक प्रगति की ओर प्रेरित कर सकती है। बीते समय से जुड़े भावनात्मक बोझ को हल्का करने और पुराने अध्यायों को पूरा करने का भाव मजबूत हो सकता है।</p>



<p>बारहवें भाव से शनिदेव का गोचर षष्ठ भाव (सेवा, स्वास्थ्य और शत्रु) पर दृष्टि डालता है। यह स्वास्थ्य में सुधार, रोजमर्रा की दिनचर्या को मजबूत करने और चुनौतियों पर विजय पाने का संकेत देता है। इस समय धैर्य और अनुशासन ही स्थिरता की कुंजी रहेंगे।</p>



<p><strong>उपाय &#8211;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>प्रतिदिन “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें।</li>



<li>शनिवार के दिन काले तिल का दान करें।</li>
</ul>



<p><strong>वृषभ</strong></p>



<p>वृषभ राशि के लिए शनिदेव का यह गोचर ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र मंडल) को सक्रिय करता है। यह समय आपके सोशल सर्कल, नेटवर्किंग और आर्थिक लाभ में स्पष्टता लेकर आ सकता है। रुके हुए लक्ष्य अब गति पकड़ सकते हैं।</p>



<p>दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने और अपने सपनों को आकार देने के लिए यह उत्तम समय कहा जाएगा। ग्यारहवें भाव में स्थित शनिदेव पंचम भाव (बुद्धि, प्रेम और संतान) पर दृष्टि डालते हैं। शिक्षा, प्रेम और रचनात्मक परियोजनाओं में धैर्य से आगे बढ़ना होगा। मेहनत और अनुशासन धीरे-धीरे अच्छे परिणाम देंगे।</p>



<p><strong>उपाय </strong>&#8211;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>शनिवार के दिन काली गाय को भोजन खिलाएं।</li>



<li>शनि मंदिर में सरसों का तेल अर्पित करें।</li>
</ul>



<p><strong>मिथुन</strong> </p>



<p>मिथुन राशि वालों के लिए मीन राशि में शनिदेव का मार्गी होना दशम भाव (कर्म और प्रतिष्ठा) को प्रभावित करता है। यह समय करियर को मजबूत करने, जिम्मेदारियों को समझने और प्रोफेशनल लाइफ में नेतृत्व दिखाने का संकेत देता है। कड़ी मेहनत और अनुशासन से सफलता मिलने के योग बनते हैं।</p>



<p>शनिदेव की दृष्टि चतुर्थ भाव (घर-परिवार और भावनाएं) पर रहने से काम और घर के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बढ़ सकती है। परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे आगे चलकर स्थिरता ही बढ़ेगी।</p>



<p><strong>उपाय </strong>&#8211;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>घर में अनावश्यक विवाद से बचें।</li>



<li>शनिवार के दिन तिल के तेल का दीपक जलाएं।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शनिवार के दिन शनिदेव को इस तरह करें प्रसन्न, जीवन में खूब होगी तरक्की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 05:16:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शनिदेव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="295" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-491-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-491.jpg 725w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-491-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार आज यानी 19 अप्रैल को शनिवार (Shaniwar ke upay) का दिन है। सनातन धर्म में शनिवार के शनिदेव की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक शनिदेव की पूजा करने से नौकरी और व्यापार में बाधा से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे करें न्याय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="295" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-491-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-491.jpg 725w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-491-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार आज यानी 19 अप्रैल को शनिवार (Shaniwar ke upay) का दिन है। सनातन धर्म में शनिवार के शनिदेव की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक शनिदेव की पूजा करने से नौकरी और व्यापार में बाधा से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे करें न्याय के देवता शनिदेव को प्रसन्न?</p>



<p>सनातन धर्म में शनिदेव (Shaniwar ke upay) को न्याय का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिदेव जीवन में बुरे कर्म करने वाले जातक को दंड देते हैं। वहीं, अच्छे कर्म करने वाले जातक को शुभ फल प्रदान करते हैं। शनिदेव की शनिवार के दिन विशेष पूजा-अर्चना करने का महत्व है। अगर आप इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इस दिन पूजा के दौरान शनि चालीसा का पाठ करें।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि चालीसा का पाठ करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा जीवन में तरक्की और सफलता मिलती है। आइए पढ़ते हैं शनि चालीसा।</p>



<p><strong>शनि चालीसा</strong></p>



<p><strong>दोहा<br></strong>श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर।<br>कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥</p>



<p><strong>सोरठा</strong><br>तव स्तुति हे नाथ,जोरि जुगल कर करत हौं।<br>करिये मोहि सनाथ,विघ्नहरन हे रवि सुव्रन।</p>



<p><strong>चौपाई</strong><br>शनिदेव मैं सुमिरौं तोही।<br>विद्या बुद्धि ज्ञान दो मोही॥<br>तुम्हरो नाम अनेक बखानौं।<br>क्षुद्रबुद्धि मैं जो कुछ जानौं॥<br>अन्तक, कोण, रौद्रय मनाऊँ।<br>कृष्ण बभ्रु शनि सबहिं सुनाऊँ॥<br>पिंगल मन्दसौरि सुख दाता।<br>हित अनहित सब जग के ज्ञाता॥<br>नित जपै जो नाम तुम्हारा।<br>करहु व्याधि दुःख से निस्तारा॥<br>राशि विषमवस असुरन सुरनर।<br>पन्नग शेष सहित विद्याधर॥<br>राजा रंक रहहिं जो नीको।<br>पशु पक्षी वनचर सबही को॥<br>कानन किला शिविर सेनाकर।<br>नाश करत सब ग्राम्य नगर भर॥<br>डालत विघ्न सबहि के सुख में।<br>व्याकुल होहिं पड़े सब दुःख में॥<br>नाथ विनय तुमसे यह मेरी।<br>करिये मोपर दया घनेरी॥<br>मम हित विषम राशि महँवासा।<br>करिय न नाथ यही मम आसा॥<br>जो गुड़ उड़द दे बार शनीचर।<br>तिल जव लोह अन्न धन बस्तर॥<br>दान दिये से होंय सुखारी।<br>सोइ शनि सुन यह विनय हमारी॥<br>नाथ दया तुम मोपर कीजै।<br>कोटिक विघ्न क्षणिक महँ छीजै॥<br>वंदत नाथ जुगल कर जोरी।<br>सुनहु दया कर विनती मोरी॥<br>कबहुँक तीरथ राज प्रयागा।<br>सरयू तोर सहित अनुरागा॥<br>कबहुँ सरस्वती शुद्ध नार महँ।<br>या कहुँ गिरी खोह कंदर महँ॥<br>ध्यान धरत हैं जो जोगी जनि।<br>ताहि ध्यान महँ सूक्ष्म होहि शनि॥<br>है अगम्य क्या करूँ बड़ाई।<br>करत प्रणाम चरण शिर नाई॥<br>जो विदेश से बार शनीचर।<br>मुड़कर आवेगा निज घर पर॥<br>रहैं सुखी शनि देव दुहाई।<br>रक्षा रवि सुत रखैं बनाई॥<br>जो विदेश जावैं शनिवारा।<br>गृह आवैं नहिं सहै दुखारा॥<br>संकट देय शनीचर ताही।<br>जेते दुखी होई मन माही॥<br>सोई रवि नन्दन कर जोरी।<br>वन्दन करत मूढ़ मति थोरी॥<br>ब्रह्मा जगत बनावन हारा।<br>विष्णु सबहिं नित देत अहारा॥<br>हैं त्रिशूलधारी त्रिपुरारी।<br>विभू देव मूरति एक वारी॥<br>इकहोइ धारण करत शनि नित।<br>वंदत सोई शनि को दमनचित॥<br>जो नर पाठ करै मन चित से।<br>सो नर छूटै व्यथा अमित से॥<br>हौं सुपुत्र धन सन्तति बाढ़े।<br>कलि काल कर जोड़े ठाढ़े॥<br>पशु कुटुम्ब बांधन आदि से।<br>भरो भवन रहिहैं नित सबसे॥<br>नाना भाँति भोग सुख सारा।<br>अन्त समय तजकर संसारा॥<br>पावै मुक्ति अमर पद भाई।<br>जो नित शनि सम ध्यान लगाई॥<br>पढ़ै प्रात जो नाम शनि दस।<br>रहैं शनिश्चर नित उसके बस॥<br>पीड़ा शनि की कबहुँ न होई।<br>नित उठ ध्यान धरै जो कोई॥<br>जो यह पाठ करैं चालीसा।<br>होय सुख साखी जगदीशा॥<br>चालिस दिन नित पढ़ै सबेरे।<br>पातक नाशै शनी घनेरे॥<br>रवि नन्दन की अस प्रभुताई।<br>जगत मोहतम नाशै भाई॥<br>याको पाठ करै जो कोई।<br>सुख सम्पति की कमी न होई॥<br>निशिदिन ध्यान धरै मनमाहीं।<br>आधिव्याधि ढिंग आवै नाहीं॥</p>



<p><strong>दोहा</strong><br>पाठ शनिश्चर देव को,कीहौं ‘विमल’ तैयार।<br>करत पाठ चालीस दिन,हो भवसागर पार॥<br>जो स्तुति दशरथ जी कियो,सम्मुख शनि निहार।<br>सरस सुभाषा में वही,ललिता लिखें सुधार॥</p>
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		<title>शनिदेव की कृपा पाने के लिए करें इन मंत्रों का जप, हर परेशानी होगी दूर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 04:38:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[शनिदेव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="401" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-209-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-209.jpg 742w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-209-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन शास्त्रों में निहित है कि भगवान शिव की कृपा से शनिदेव (Shani Mantra) को न्याय करने का अधिकार मिला। शनिदेव केवल न्याय ही नहीं करते हैं बल्कि अच्छे कर्म करने वाले लोगों को शुभ फल भी देते हैं। शनिदेव की कृपा से साधक अल्प समय में धनवान बन जाता है। साथ ही सभी प्रकार &#8230;]]></description>
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<p>सनातन शास्त्रों में निहित है कि भगवान शिव की कृपा से शनिदेव (Shani Mantra) को न्याय करने का अधिकार मिला। शनिदेव केवल न्याय ही नहीं करते हैं बल्कि अच्छे कर्म करने वाले लोगों को शुभ फल भी देते हैं। शनिदेव की कृपा से साधक अल्प समय में धनवान बन जाता है। साथ ही सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।</p>



<p>सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। इस दिन शनिदेव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही कारोबार में तरक्की और उन्नति पाने के लिए शनिवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में मंगल का आगमन होता है।</p>



<p>ज्योतिषियों की मानें तो शनि दोष लगने से जातक को जीवन में ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए नियमित रूप से शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। अगर आप भी शनिदेव की कृपा पाना चाहते हैं, तो शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय शनिदेव के नामों का मंत्र जप करें।</p>



<p><strong>शनिदेव के 108 नाम</strong></p>



<p>ऊँ शनैश्चराय नमः<br>ऊँ शान्ताय नमः<br>ऊँ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः<br>ऊँ शरण्याय नमः<br>ऊँ वरेण्याय नमः<br>ऊँ सर्वेशाय नमः<br>ऊँ सौम्याय नमः<br>ऊँ सुरवन्द्याय नमः<br>ऊँ सुरलोकविहारिणे नमः<br>ऊँ सुखासनोपविष्टाय नमः<br>ऊँ सुन्दराय नमः<br>ऊँ घनाय नमः<br>ऊँ घनरूपाय नमः<br>ऊँ घनाभरणधारिणे नमः<br>ऊँ घनसारविलेपाय नमः<br>ऊँ खद्योताय नमः<br>ऊँ मन्दाय नमः<br>ऊँ मन्दचेष्टाय नमः<br>ऊँ महनीयगुणात्मने नमः<br>ऊँ मर्त्यपावनपदाय नमः<br>ऊँ महेशाय नमः<br>ऊँ छायापुत्राय नमः<br>ऊँ शर्वाय नमः<br>ऊँ शततूणीरधारिणे नमः<br>ऊँ चरस्थिरस्वभा वाय नमः<br>ऊँ अचञ्चलाय नमः<br>ऊँ नीलवर्णाय नम:<br>ऊँ नित्याय नमः<br>ऊँ नीलाञ्जननिभाय नमः<br>ऊँ नीलाम्बरविभूशणाय नमः<br>ऊँ निश्चलाय नमः<br>ऊँ वेद्याय नमः<br>ऊँ विधिरूपाय नमः<br>ऊँ विरोधाधारभूमये नमः<br>ऊँ भेदास्पदस्वभावाय नमः<br>ऊँ वज्रदेहाय नमः<br>ऊँ वैराग्यदाय नमः<br>ऊँ वीराय नमः<br>ऊँ वीतरोगभयाय नमः<br>ऊँ विपत्परम्परेशाय नमः<br>ऊँ विश्ववन्द्याय नमः<br>ऊँ गृध्नवाहाय नमः<br>ऊँ गूढाय नमः<br>ऊँ कूर्माङ्गाय नमः<br>ऊँ कुरूपिणे नमः<br>ऊँ कुत्सिताय नमः<br>ऊँ गुणाढ्याय नमः<br>ऊँ गोचराय नमः<br>ऊँ अविद्यामूलनाशाय नमः<br>ऊँ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः<br>ऊँ आयुष्यकारणाय नमः<br>ऊँ आपदुद्धर्त्रे नमः<br>ऊँ विष्णुभक्ताय नमः<br>ऊँ वशिने नमः<br>ऊँ विविधागमवेदिने नमः<br>ऊँ विधिस्तुत्याय नमः<br>ऊँ वन्द्याय नमः<br>ऊँ विरूपाक्षाय नमः<br>ऊँ वरिष्ठाय नमः<br>ऊँ गरिष्ठाय नमः<br>ऊँ वज्राङ्कुशधराय नमः<br>ऊँ वरदाभयहस्ताय नमः<br>ऊँ वामनाय नमः<br>ऊँ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः<br>ऊँ श्रेष्ठाय नमः<br>ऊँ मितभाषिणे नमः<br>ऊँ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः<br>ऊँ पुष्टिदाय नमः<br>ऊँ स्तुत्याय नमः<br>ऊँ स्तोत्रगम्याय नमः<br>ऊँ भक्तिवश्याय नमः<br>ऊँ भानवे नमः<br>ऊँ भानुपुत्राय नमः<br>ऊँ भव्याय नमः<br>ऊँ पावनाय नमः<br>ऊँ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः<br>ऊँ धनदाय नमः<br>ऊँ धनुष्मते नमः<br>ऊँ तनुप्रकाशदेहाय नमः<br>ऊँ तामसाय नमः<br>ऊँ अशेषजनवन्द्याय नमः<br>ऊँ विशेशफलदायिने नमः<br>ऊँ वशीकृतजनेशाय नमः<br>ऊँ पशूनां पतये नमः<br>ऊँ खेचराय नमः<br>ऊँ खगेशाय नमः<br>ऊँ घननीलाम्बराय नमः<br>ऊँ काठिन्यमानसाय नमः<br>ऊँ आर्यगणस्तुत्याय नमः<br>ऊँ नीलच्छत्राय नमः<br>ऊँ नित्याय नमः<br>ऊँ निर्गुणाय नमः<br>ऊँ गुणात्मने नमः<br>ऊँ निरामयाय नमः<br>ऊँ निन्द्याय नमः<br>ऊँ वन्दनीयाय नमः<br>ऊँ धीराय नमः<br>ऊँ दिव्यदेहाय नमः<br>ऊँ दीनार्तिहरणाय नमः<br>ऊँ दैन्यनाशकराय नमः<br>ऊँ आर्यजनगण्याय नमः<br>ऊँ क्रूराय नमः<br>ऊँ क्रूरचेष्टाय नमः<br>ऊँ कामक्रोधकराय नमः<br>ऊँ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः<br>ऊँ परिपोषितभक्ताय नमः<br>ऊँ परभीतिहराय नमः<br>ऊँ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः</p>



<p><strong>शनिदेव को कैसे प्रसन्न करें?</strong><br>शनिदेव के आराध्य देवों के देव महादेव हैं। भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही न्याय के देवता शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव की कृपा पाने के लिए रोजाना भगवान शिव की पूजा करें। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें।</p>
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