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	<title>वैदिक पंचांग &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>वैदिक पंचांग &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>कब और क्यों मनाई मनाई जाती है विजया एकादशी? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 07:42:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक पंचांग]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="295" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-233818.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-233818.png 738w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-233818-300x143.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन साधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कब और क्यों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="295" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-233818.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-233818.png 738w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-233818-300x143.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन साधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कब और क्यों मनाई जाती है विजया एकादशी।</p>



<p>एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की साधना करने का विधान है। साथ ही मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजया एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही हमेशा अन्न के भंडार भरे रहते हैं।</p>



<p><strong>कब मनाई जाती है विजया एकादशी 2026?</strong><br>वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2026)व्रत किया जाता है। इस खास अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां की पूजा कर व्रत कथा का पाठ करते हैं। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>विजया एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Vijaya Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)</strong><br>वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी (Kab Hai Vijaya Ekadashi 2026) को किया जाएगा और व्रत का पारण करने का समय 14 फरवरी को सुबह 07 बजे से 09 बजकर 14 मिनट तक है।<br>फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर<br>फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर</p>



<p><strong>विजया एकादशी का महत्व (Vijaya Ekadashi Significance)</strong><br>धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से कामों में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही जीवन की चुनौतियां दूर होती हैं। शत्रुओं पर विजय मिलती है। भगवान विष्णु साधक की पूजा से प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।</p>



<p>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; सुबह 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 09 मिनट तक<br>विजय मुहूर्त &#8211; दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 12 मिनट तक<br>गोधूलि मुहूर्त &#8211; शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 24 मिनट तक<br>अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक</p>



<p><strong>विष्णु मंत्र</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।</li>
</ol>



<p>यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li>वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |</li>
</ol>



<p>पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी ।।</p>



<p>एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |</p>



<p>य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत।।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li>ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||</li>
</ol>



<p>ॐ तत्पुरुषाय विद्&#x200d;महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>आज पूजा में करें इन मंत्रों का जप, हीरे की तरह चमकेगी आपकी किस्मत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Apr 2025 05:54:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक पंचांग]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-587-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-587.jpg 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-587-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार बुधवार 30 अप्रैल को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इस तिथि पर हर साल अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता के अनुसार पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-587-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-587.jpg 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-587-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार बुधवार 30 अप्रैल को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इस तिथि पर हर साल अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता के अनुसार पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।</p>



<p>सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश (Budhwar Ke Upay) की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणपति बप्पा की पूजा करने से आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही कामों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। अगर आप भी भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो बुधवार के दिन पूजा के दौरान भगवान गणेश के 108 नामों का मंत्र जप करना चाहिए। मान्यता के अनुसार, गणेश जी के मंत्रों (Ganesh Mantra) का जप करने से शुभ काम में सफलता मिलती है।</p>



<p><strong>गणपति जी के 108 नाम</strong></p>



<p>ॐ गजाननाय नमः<br>ॐ गणाध्यक्षाय नमः<br>ॐ विघ्नराजाय नमः<br>ॐ विनायकाय नमः<br>ॐ द्वैमातुराय नमः<br>ॐ द्विमुखाय नमः<br>ॐ प्रमुखाय नमः<br>ॐ सुमुखाय नमः<br>ॐ कृतिने नमः<br>ॐ ब्रह्मचारिणे नमः<br>ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः<br>ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः<br>ॐ जिष्णवे नमः<br>ॐ विष्णुप्रियाय नमः<br>ॐ भक्त जीविताय नमः<br>ॐ जितमन्मधाय नमः<br>ॐ सुप्रदीपाय नमः<br>ॐ सुखनिधये नमः<br>ॐ सुराध्यक्षाय नमः<br>ॐ सुरारिघ्नाय नमः<br>ॐ महागणपतये नमः<br>ॐ मान्याय नमः<br>ॐ महाकालाय नमः<br>ॐ महाबलाय नमः<br>ॐ हेरम्बाय नमः<br>ॐ लम्बजठरायै नमः<br>ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः<br>ॐ महोदराय नमः<br>ॐ मदोत्कटाय नमः<br>ॐ महावीराय नमः<br>ॐ मन्त्रिणे नमः<br>ॐ मङ्गल स्वराय नमः<br>ॐ प्रमधाय नमः<br>ॐ प्रथमाय नमः<br>ॐ प्राज्ञाय नमः<br>ॐ विघ्नकर्त्रे नमः<br>ॐ विघ्नहर्त्रे नमः<br>ॐ बल नमः<br>ॐ बलोत्थिताय नमः<br>ॐ भवात्मजाय नमः<br>ॐ पुराण पुरुषाय नमः<br>ॐ पूष्णे नमः<br>ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः<br>ॐ अग्रगण्याय नमः<br>ॐ अग्रपूज्याय नमः<br>ॐ अग्रगामिने नमः<br>ॐ मन्त्रकृते नमः<br>ॐ चामीकरप्रभाय नमः<br>ॐ सर्वाय नमः<br>ॐ सर्वोपास्याय नमः<br>ॐ सर्व कर्त्रे नमः<br>ॐ सर्वनेत्रे नमः<br>ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः<br>ॐ सिद्धये नमः<br>ॐ पञ्चहस्ताय नमः<br>ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः<br>ॐ प्रभवे नमः<br>ॐ कुमारगुरवे नमः<br>ॐ अक्षोभ्याय नमः<br>ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः<br>ॐ प्रमोदाय नमः<br>ॐ मोदकप्रियाय नमः<br>ॐ गम्भीर निनदाय नमः<br>ॐ वटवे नमः<br>ॐ अभीष्टवरदाय नमः<br>ॐ ज्योतिषे नमः<br>ॐ भक्तनिधये नमः<br>ॐ भावगम्याय नमः<br>ॐ मङ्गलप्रदाय नमः<br>ॐ अव्यक्ताय नमः<br>ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः<br>ॐ सत्यधर्मिणे नमः<br>ॐ सखये नमः<br>ॐ सरसाम्बुनिधये नमः<br>ॐ महेशाय नमः<br>ॐ दिव्याङ्गाय नमः<br>ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः<br>ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः<br>ॐ सहिष्णवे नमः<br>ॐ सततोत्थिताय नमः<br>ॐ विघातकारिणे नमः<br>ॐ विश्वग्दृशे नमः<br>ॐ विश्वरक्षाकृते नमः<br>ॐ कल्याणगुरवे नमः<br>ॐ उन्मत्तवेषाय नमः<br>ॐ अपराजिते नमः<br>ॐ समस्त जगदाधाराय नमः<br>ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः<br>ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः<br>ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः<br>ॐ विश्वनेत्रे नमः<br>ॐ विराट्पतये नमः<br>ॐ श्रीपतये नमः<br>ॐ वाक्पतये नमः<br>ॐ शृङ्गारिणे नमः<br>ॐ अश्रितवत्सलाय नमः<br>ॐ शिवप्रियाय नमः<br>ॐ शीघ्रकारिणे नमः<br>ॐ शाश्वताय नमः<br>ॐ कान्तिमते नमः<br>ॐ धृतिमते नमः<br>ॐ कामिने नमः<br>ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः<br>ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः<br>ॐ ज्यायसे नमः<br>ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः<br>ॐ गङ्गा सुताय नमः<br>ॐ गणाधीशाय नमः</p>
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		<title>पैसों की तंगी से छुटकारा पाने के लिए करें ये उपाय, कारोबार में भी मिलेगी सफलता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jan 2025 09:02:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[वैदिक पंचांग]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="295" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/iupo-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/iupo.jpg 683w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/iupo-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, साल के पहले शुक्रवार पर विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वहीं, शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="295" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/iupo-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/iupo.jpg 683w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/iupo-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, साल के पहले शुक्रवार पर विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वहीं, शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, जीवन में व्याप्त दुखों से भी छुटकारा मिलता है। अगर आप भी लक्ष्मी गणेश जी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो शुक्रवार के दिन पूजा के समय ये उपाय जरूर करें।</p>



<p>शुक्रवार के उपाय<br>अगर आप सुखों में वृद्धि पाना चाहते हैं, तो शुक्रवार के दिन धूप, अगरबत्ती, सुगंध, शहद, चावल, आटा, सफेद रंग के वस्त्र आदि चीजों का दान करें। इन चीजों के दान करने से कुंडली में शुक्र मजबूत होता है। शुक्र के मजबूत होने से सुखों में वृद्धि होती है।<br>सनातन धर्म में वर्णित है कि पीपल के पेड़ में लक्ष्मी नारायण जी का वास होता है। अतः मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुक्रवार के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय पीपल पेड़ की परिक्रमा करें। इस समय ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: मंत्र का पाठ करें।<br>अगर आप व्यापार में तरक्की करना चाहते हैं, तो विनायक चतुर्थी तिथि पर विधिवत लक्ष्मी गणेश जी की पूजा करें। इस समय भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अवश्य अर्पित करें। आप विषम संख्या में दूर्वा अर्पित करें। वहीं, मां लक्ष्मी को हल्दी, कुमकुम और चावल की खीर अर्पित करें।<br>धन की देवी मां लक्ष्मी को श्रीफल और कौड़ी प्रिय है। इसके लिए पूजा के समय धन की देवी मां लक्ष्मी को नारियल और सफेद कौड़ी अवश्य ही अर्पित करें।<br>वास्तु दोष से निजात पाना चाहते हैं, तो शुक्रवार के दिन पूजा के समय घर पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इस उपाय को करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।<br>विवाहित महिलाएं सुख और सौभाग्य में वृद्धि पाने के लिए शुक्रवार के दिन वैभव लक्ष्मी व्रत अवश्य रखें। वहीं, पूजा के समय मां लक्ष्मी को सिंदूर अवश्य ही अर्पित करें। इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।</p>
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