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	<title>वेडिंग डेस्टिनेशन &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>रुद्रप्रयाग : अब त्रियुगीनारायण को बनाया जाएगा वेडिंग डेस्टिनेशन</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Jan 2024 06:36:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15.jpg 833w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15-768x436.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनप्रयाग से 13 किमी की दूरी पर स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव-पार्वती की विवाह स्थली है। शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण को शांतिकुंज हरिद्वार की तरह वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप विकसित किया जाएगा। यहां विवाह आयोजन के लिए अब बीकेटीसी की अनुमति जरूरी होगी। अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15.jpg 833w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-3-15-768x436.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनप्रयाग से 13 किमी की दूरी पर स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव-पार्वती की विवाह स्थली है।</p>



<p>शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण को शांतिकुंज हरिद्वार की तरह वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप विकसित किया जाएगा। यहां विवाह आयोजन के लिए अब बीकेटीसी की अनुमति जरूरी होगी। अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।</p>



<p>इसके लिए श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति नियमावली तैयार करने में जुट गई है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनप्रयाग से 13 किमी की दूरी पर स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव-पार्वती की विवाह स्थली है। देव विवाह के साक्षात प्रमाण यहां मौजूद हैं, जिसमें तीन युगों से अनवरत जल रही अखंड ज्योति और वह पत्थर हैं, जिसमें पर्वतराज हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती का कन्यादान किया था।</p>



<p>साथ ही अन्य कई प्रमाण भी हैं। इस विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई के रूप में अपनी भूमिका निभाई थी। त्रियुगीनारायण मंदिर, श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन है। अब बीकेटीसी इस देव विवाह स्थली को शांतिकुंज हरिद्वार की तरह वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने जा रही है।</p>



<p>यहां, अब विवाह आयोजन के लिए इच्छुक लोगों को श्रीबदीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की अनुमति लेनी होगी। अनुमति के लिए उन्हें आवेदन करना होगा, जिसमें विवाह का कार्ड, आधार कार्ड, फोटो पहचानपत्र सहित अन्य दस्तावेज भी देने होंगे। इसके बाद, समिति आवेदन पत्र के आधार पर सभी दस्तावेजों की जांच कर स्वीकृति प्रदान करेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-1"></h3>



<p><strong>बीकेटीसी ऑनलाइन के लिए बना रहा ईमेल आईडी</strong><br>मंदिर समिति विवाह आयोजन को लेकर नियमावली बनाने में जुट गई है। साथ ही आवेदन प्रक्रिया को भी ऑनलाइन करने के लिए वेबसाइट व ईमेल आईडी तैयार की जा रही हैं। हालांकि, अभी इच्छुक विवाह के लिए यहां ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए समिति ने केदारनाथ मंदिर के कार्याधिकारी को नोडल और त्रियुगीनारायण मंदिर के प्रबंधक को सहायक नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया है।</p>



<p><strong>बीते वर्ष बोर्ड बैठक में रखा गया था प्रस्ताव</strong><br>बीते वर्ष बीकेटीसी की देहरादून में हुई बोर्ड बैठक में केदारनाथ के वरिष्ठ तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती ने त्रियुगीनारायण में विवाह आयोजन के लिए नियमावली बनाने, विवाह करने वालों की संपूर्ण जानकारी रखने सहित अन्य बिंदुओं को लेकर प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए समिति ने हरिद्वार स्थित शांतिकुंज की तर्ज पर त्रियुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने पर सहमति जताई थी।</p>



<p>शांतिकुंज की तर्ज पर ही त्रियुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के साथ नियमावली बनाई जा रही है। जब तक यह औपचारिकताएं पूरी होती हैं, लोग अपने आवेदन ऑफलाइन दे सकते हैं।<br><strong>-अजेंद्र अजय, अध्यक्ष श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति</strong></p>



<p>विवाह आयोजन के आवेदन प्राप्त करने के लिए केदारनाथ मंदिर के कार्याधिकारी और त्रियुगीनारायण मंदिर के प्रबंधक को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही नियमावली तैयार हो जाएगी। साथ ही आवेदन प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी, जिसके जरूरी कार्रवाई की जा रही है।<br><strong>-योगेंद्र सिंह, सीईओ, श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति</strong></p>
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		<title>त्रियुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करेगी मंदिर समिति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jan 2024 08:14:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2.jpg 833w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2-768x437.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह करने के लिए लगातार हर साल पहुंचने वाले जोड़ों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिसे देखते हुए मंदिर क्षेत्र को वेडिंग डिस्टनेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शनिवार को बदरी-केदार मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2.jpg 833w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/uk-6-2-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह करने के लिए लगातार हर साल पहुंचने वाले जोड़ों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिसे देखते हुए मंदिर क्षेत्र को वेडिंग डिस्टनेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।</p>



<p>आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शनिवार को बदरी-केदार मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में तैयारियों के मद्देनजर कई प्रस्ताव पारित हुए। मंदिर समिति की बोर्ड बैठक कैनाल रोड स्थित कार्यालय सभागार में अजेंद्र अजय की अध्यक्षता में हुई। बैठक की शुरुआत भगवान बदरीविशाल की आरती पवनमंद सुगंध शीतल हेममंदिर शोभितम् की सांकेतिक स्तुतिगान से हुई।</p>



<p>बैठक में यात्रा वर्ष 2024 के लिए तैयारियों, निर्माण- जीर्णोद्धार कार्यों संबंधित प्रस्ताव सहित, मंदिर समिति कार्यालयों को ई-आफिस के रूप में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर समिति तीर्थयात्रियों की सुविधा हेतु प्रतिबद्ध है। श्री त्रियुगीनारायण मंदिर क्षेत्र को वेडिंग डिस्टनेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।</p>



<p>गोरामाई मंदिर गौरीकुंड परिसर विस्तार, जोशीमठ में श्री वासुदेव मंदिर, दुर्गामंदिर परिसर सौंदर्यीकरण, आधुनिक सूचना तकनीकी का इस्तेमाल कर तीर्थयात्रियों को अधिक से अधिक यात्रा सुविधाएं मुहैया कराये जाने पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ। डालमिया यात्री विश्राम गृह श्रीनगर का पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अंतर्गत बहुमंजिला विश्राम गृह, पार्किंग, डीलक्स रूम बनने प्रस्तावित है। </p>



<p><strong>ये प्रस्ताव हुए पारित</strong></p>



<p>बैठक में मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने पिछली बोर्ड बैठक के प्रस्तावों की अनुपालन आख्या पेश की। मंदिर समिति में विभिन्न संवर्गों के सृजन, अस्थायी कर्मचारियों के विनियमितिकरण, मास्टर प्लान के तहत बदरीनाथ धाम में ध्वस्त भवनों संरचनाओं के स्थान पर पुनर्निर्माण, विनसर मंदिर चौथान पट्टी पौड़ी को बीकेटीसी के अधीनस्थ मंदिरों के अंतर्गत किए जाने पर विचार, रघुनाथ कीर्ति संस्कृत महाविद्यालय संचालन, दानीदाता की ओर से तांबे की चद्दर पर सोने की परत लगी श्रीमद् भगवदगीता को बदरीनाथ मंदिर सभागृह परिसर में स्थापित करने, श्री ओंकारेश्वर मंदिर, श्री गौरामाई मंदिर के विस्तारीकरण, पुराने फार्मेसी भवन के स्थान पर नया प्रशासनिक भवन बनाने, ऊखीमठ जयबीरी तोक भूमि को लीज पर देने, केदारनाथ धाम के प्रवचन हाल में कर्मचारी आवास व्यवस्था बनाने के प्रस्ताव पारित हुए। भगवान केदारनाथ की सूक्ष्म स्तुति के बाद बैठक समाप्ति की घोषणा की गई।</p>
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