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	<title>विनायक चतुर्थी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>विनायक चतुर्थी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>विनायक चतुर्थी पर बन रहे हैं दुर्लभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 05:17:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[पंचांग के अनुसार, आज विनायक चतुर्थी को कई शुभ योग बन रहे हैं। इस तिथि पर भगवान गणेश की पूजा होती है। इस दिन पूजा-पाठ व व्रत करने से साधक के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही जीवन में सुख-शांति आती है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे &#8230;]]></description>
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<p>पंचांग के अनुसार, आज विनायक चतुर्थी को कई शुभ योग बन रहे हैं। इस तिथि पर भगवान गणेश की पूजा होती है। इस दिन पूजा-पाठ व व्रत करने से साधक के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही जीवन में सुख-शांति आती है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल चतुर्थी<br>मास पूर्णिमांत: फाल्गुन<br>दिन: शनिवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल चतुर्थी – दोपहर 01:00 बजे तक<br>योग: शुभ – दोपहर 03:51 बजे तक<br>करण: विष्टि – दोपहर 01:00 बजे तक<br>करण: बव – रात 12:06 बजे तक। (22 फरवरी)</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: सुबह 06:54 बजे<br>सूर्यास्त का समय: शाम 06:15 बजे<br>चंद्रोदय का समय: सुबह 08:56 बजे<br>चंद्रास्त का समय: रात 10:16 बजे।</p>



<p><strong>सूर्य और चंद्रमा की राशियां<br></strong>सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं<br>चन्द्र देव: मीन राशि में स्थित हैं। (शाम 07:07 बजे तक)</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक<br>अमृत काल: शाम 04:49 बजे से शाम 06:21 बजे तक।</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: सुबह 09:45 बजे से सुबह 11:10 बजे तक<br>गुलिकाल: सुबह 06:54 बजे से सुबह 08:19 बजे तक<br>यमगण्ड: दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:25 बजे तक।</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव रेवती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।<br>रेवती नक्षत्र: शाम 07:07 बजे तक<br>नक्षत्र स्वामी: बुधदेव<br>राशि स्वामी: बृहस्पतिदेव<br>देवता: पूषा (पोषण करने वाले देवता)<br>प्रतीक: मछली<br>सामान्य विशेषताएं: अंतर्ज्ञानी, चतुर, ईमानदार, साहसी, आकर्षक, चंचल, कानूनप्रिय, आशावादी, खुशमिजाज, सुंदर, समृद्ध, बुद्धिमान, सदाचारी, शिक्षित।</p>
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		<title>विनायक चतुर्थी पर करें ये भव्य आरती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 05:10:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूजनीय’ और ‘विघ्नहर्ता’ माना गया है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 की फरवरी माह की विनायक चतुर्थी आज के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि विनायक &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूजनीय’ और ‘विघ्नहर्ता’ माना गया है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 की फरवरी माह की विनायक चतुर्थी आज के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की हर बाधा दूर हो जाती है।</p>



<p>लेकिन, गणेश जी की कोई भी पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक उनकी भावपूर्ण आरती न की जाए, तो आइए गणेश जी की भाव के साथ आरती करते हैं –</p>



<p><strong>॥श्री गणेश जी की आरती॥</strong></p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p>एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।</p>



<p>माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥</p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p>पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।</p>



<p>लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥</p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p>अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।</p>



<p>बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥</p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p>‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p>दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।</p>



<p>कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥</p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>आज विनायक चतुर्थी पर करें इस कथा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 May 2025 05:23:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का पर्व बहुत खास माना जाता है। इस दिन साधक कठिन व्रत का पालन करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत 1 मई को 2025 यानी आज रखा जा रहा है। वहीं इस दिन विनायक चतुर्थी कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए जो इस प्रकार है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का पर्व बहुत खास माना जाता है। इस दिन साधक कठिन व्रत का पालन करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत 1 मई को 2025 यानी आज रखा जा रहा है। वहीं इस दिन विनायक चतुर्थी कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए जो इस प्रकार है।</p>



<p>विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चतुर्थी अमावस्या और पूर्णिमा दोनों के बाद चौथे दिन आती है। इसलिए ये हर महीने मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। वहीं, इस व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार यह व्रत (Vinayak Chaturthi 2025) 1 मई को 2025 यानी आज रखा जा रहा है, जो लोग इस पवित्र व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें इसकी पावन कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए। साथ ही चंद्रमा को अर्ध्य देना चाहिए। ऐसा करने से बप्पा की कृपा मिलती है।</p>



<p><strong>चन्द्रोदय समय (Moonrise Time) –</strong>&nbsp;सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर।</p>



<p><strong>विनायक चतुर्थी व्रत की कथा (Vinayak Chaturthi 2025 Katha)</strong><br>हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार एक पावन नदी के किनारे माता पार्वती भगवान शिव के साथ बैठी थीं। तभी उनके मन में चौपड़ खेलने का विचार आया, लेकिन उनके अलावा कोई तीसरा नहीं था, जो चौपड़ के खेल के दौरान हार और जीत का निर्णय कर सके। इस स्थिति में शिव जी ने और देवी पार्वती ने एक मिट्टी का बालक बनाया और उसमें प्राण का संचालन किया, जिससे खेल में हार-जीत का सही फैसला हो सके।</p>



<p>इसके पश्चात पार्वती माता लगातार तीन से चार बार विजयी हुईं, लेकिन उस मिट्टी के बालक ने शिव जी को विजयी घोषित कर दिया। इससे देवी पार्वती को क्रोध आ गया और उन्होंने उस बालक को लंगड़ा बना दिया। तब बालक को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने माफी मांगी, लेकिन मां पार्वती ने कहा कि श्राप अब वापस नहीं लिया जा सकता।इसलिए आप एक उपाय के जरिए इस श्राप से मुक्ति पा सकते हैं।</p>



<p>उन्होंने कहा कि चतुर्थी के दिन कुछ कन्याएं पूजन के लिए आती हैं, उनसे व्रत और पूजा की विधि पूछना। बालक ने ठीक ऐसा ही किया और उसकी पूजा (Vinayak Chaturthi 2025 Methodlogy Story) से शिव पुत्र गणेश खुश हो जाते हैं और उसकी जीवन के सभी दुखों का अंत कर देते हैं। इससे बालक अपना जीवन फिर से खुश होकर व्यतीत करने लगता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>विनायक चतुर्थी पर बप्पा के साथ करें देवी पार्वती की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 May 2025 05:17:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का व्रत बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखने के साथ बप्पा की विधि-विधान से पूजा करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत 1 मई को 2025 यानी आज रखा जा रहा है। वहीं इस दिन पार्वती चालीसा का पाठ भी बहुत फलदायी माना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का व्रत बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखने के साथ बप्पा की विधि-विधान से पूजा करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत 1 मई को 2025 यानी आज रखा जा रहा है। वहीं इस दिन पार्वती चालीसा का पाठ भी बहुत फलदायी माना गया है।</p>



<p>विनायक चतुर्थी का पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व रखता है। यह दिन पूरी तरह से भगवान गणेश को समर्पित है और इस दिन भक्त समर्पण के साथ गणेश जी की पूजा और व्रत करते हैं। इस बार विनायक चतुर्थी हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 मई, 2025 दिन गुरुवार यानी आज मनाई जा रही है। कहते हैं कि इस व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) का पालन करने से जीवन में खुशहाली आती है।</p>



<p>वहीं, इस दिन बप्पा के साथ उनकी मैया देवी पार्वती की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। ऐसे में स्नान के बाद सुबह उठें और स्नान करें। फिर बप्पा का ध्यान करें। घी का दीपक जलाएं और शिव परिवार को पीले या लाल पुष्ण, मोदक दुर्वा, लड्डू, घर पर बनी मिठाई और अन्य उनकी पसंदीदा चीज अर्पित करें।</p>



<p>फिर बप्पा के मंत्रों, स्तुति और पार्वती चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें। ऐसा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होगी। साथ ही घर में रिद्धि-सिद्धि का वास होगा।</p>



<p><strong>।।पार्वती चालीसा।। (Parvati Chalisa)</strong></p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>जय गिरी तनये दक्षजे,शम्भु प्रिये गुणखानि।<br>गणपति जननी पार्वती,अम्बे! शक्ति! भवानि॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong><br>ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे।<br>पंच बदन नित तुमको ध्यावे॥<br>षड्मुख कहि न सकत यश तेरो।<br>सहसबदन श्रम करत घनेरो॥<br>तेऊ पार न पावत माता।<br>स्थित रक्षा लय हित सजाता॥<br>अधर प्रवाल सदृश अरुणारे।<br>अति कमनीय नयन कजरारे॥<br>ललित ललाट विलेपित केशर।<br>कुंकुम अक्षत शोभा मनहर॥<br>कनक बसन कंचुकी सजाए।<br>कटी मेखला दिव्य लहराए॥<br>कण्ठ मदार हार की शोभा।<br>जाहि देखि सहजहि मन लोभा॥<br>बालारुण अनन्त छबि धारी।<br>आभूषण की शोभा प्यारी॥<br>नाना रत्न जटित सिंहासन।<br>तापर राजति हरि चतुरानन॥<br>इन्द्रादिक परिवार पूजित।<br>जग मृग नाग यक्ष रव कूजित॥<br>गिर कैलास निवासिनी जय जय।<br>कोटिक प्रभा विकासिन जय जय॥<br>त्रिभुवन सकल कुटुम्ब तिहारी।<br>अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी॥<br>हैं महेश प्राणेश! तुम्हारे।<br>त्रिभुवन के जो नित रखवारे॥<br>उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब।<br>सुकृत पुरातन उदित भए तब॥<br>बूढ़ा बैल सवारी जिनकी।<br>महिमा का गावे कोउ तिनकी॥<br>सदा श्मशान बिहारी शंकर।<br>आभूषण हैं भुजंग भयंकर॥<br>कण्ठ हलाहल को छबि छायी।<br>नीलकण्ठ की पदवी पायी॥<br>देव मगन के हित अस कीन्हों।<br>विष लै आपु तिनहि अमि दीन्हों॥<br>ताकी तुम पत्नी छवि धारिणि।<br>दूरित विदारिणी मंगल कारिणि॥<br>देखि परम सौन्दर्य तिहारो।<br>त्रिभुवन चकित बनावन हारो॥<br>भय भीता सो माता गंगा।<br>लज्जा मय है सलिल तरंगा॥<br>सौत समान शम्भु पहआयी।<br>विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी॥<br>तेहिकों कमल बदन मुरझायो।<br>लखि सत्वर शिव शीश चढ़ायो॥<br>नित्यानन्द करी बरदायिनी।<br>अभय भक्त कर नित अनपायिनी॥<br>अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनि।<br>माहेश्वरी हिमालय नन्दिनि॥<br>काशी पुरी सदा मन भायी।<br>सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी॥<br>भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री।<br>कृपा प्रमोद सनेह विधात्री॥<br>रिपुक्षय कारिणि जय जय अम्बे।<br>वाचा सिद्ध करि अवलम्बे॥<br>गौरी उमा शंकरी काली।<br>अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली॥<br>सब जन की ईश्वरी भगवती।<br>पतिप्राणा परमेश्वरी सती॥<br>तुमने कठिन तपस्या कीनी।<br>नारद सों जब शिक्षा लीनी॥<br>अन्न न नीर न वायु अहारा।<br>अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा॥<br>पत्र घास को खाद्य न भायउ।<br>उमा नाम तब तुमने पायउ॥<br>तप बिलोकि रिषि सात पधारे।<br>लगे डिगावन डिगी न हारे॥<br>तब तव जय जय जय उच्चारेउ।<br>सप्तरिषि निज गेह सिधारेउ॥<br>सुर विधि विष्णु पास तब आए।<br>वर देने के वचन सुनाए॥<br>मांगे उमा वर पति तुम तिनसों।<br>चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों॥<br>एवमस्तु कहि ते दोऊ गए।<br>सुफल मनोरथ तुमने लए॥<br>करि विवाह शिव सों हे भामा।<br>पुनः कहाई हर की बामा॥<br>जो पढ़िहै जन यह चालीसा।<br>धन जन सुख देइहै तेहि ईसा॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>कूट चन्द्रिका सुभग शिर,जयति जयति सुख खानि।<br>पार्वती निज भक्त हित,रहहु सदा वरदानि॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूरा फल पाने के लिए विनायक चतुर्थी की पूजा में जरूर करें इस आरती का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 May 2025 05:01:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी की तिथि पर मुख्य रूप से भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल विनायक चतुर्थी 1 मई को मनाई जा रही है। इस दिन पर कई जातक व्रत भी करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन सकते हैं। हर महीने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विनायक चतुर्थी की तिथि पर मुख्य रूप से भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल विनायक चतुर्थी 1 मई को मनाई जा रही है। इस दिन पर कई जातक व्रत भी करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन सकते हैं।</p>



<p>हर महीने में मनाई जाने वाली विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत और गणपति जी की पूजा-अर्चना से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। ऐसे में इस दिन पर पूजा के दौरान गणेश जी की आरती व मंत्रों का जप जरूर करना चाहिए, ताकि आपको पूजा का पूरा फल मिल सके।</p>



<p><strong>विनायक चतुर्थी मुहूर्त (Vinayak Chaturthi Muhurat)<br></strong>वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर शुरू हो चुकी है। वहीं इस तिथि का समापन 01 मई को सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर हो जाएगा। उदया तिथि के अनुसार वैशाख माह की विनायक चतुर्थी गुरुवार 01 मई को मनाई जा रही है। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने वाला है –</p>



<p><strong>विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त –</strong>&nbsp;सुबह 10 बजकर 59 मिनट से सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक</p>



<p><strong>गणेश जी की आरती<br></strong>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।<br>माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।<br>लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।<br>बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।<br>कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय</p>



<p><strong>गणेश जी के मंत्र<br></strong>कदंताय विद्&#x200d;महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात।।<br>ॐ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ॥<br>ॐ गंग गणपतये नमो नमः<br>वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।<br>निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।<br>एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः।<br>प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।</p>
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		<title>विनायक चतुर्थी पर करें बप्पा के साथ मां पार्वती की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Mar 2025 04:46:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी का दिन बहुत ज्यादा शुभ माना गया है। यह दिन श्री गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन लोग पूजा-अर्चना और उपवास रखते हैं। चतुर्थी का व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) प्रत्येक महीने रखा जाता है। इस माह यह आज यानी 03 मार्च 2025 दिन सोमवार को रखा जा रहा है। &#8230;]]></description>
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<p>विनायक चतुर्थी का दिन बहुत ज्यादा शुभ माना गया है। यह दिन श्री गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन लोग पूजा-अर्चना और उपवास रखते हैं। चतुर्थी का व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) प्रत्येक महीने रखा जाता है। इस माह यह आज यानी 03 मार्च 2025 दिन सोमवार को रखा जा रहा है। वहीं इस दिन मां पार्वती के नामों जाप भी बहुत मंगलकारी माना जाता है।</p>



<p>विनायक चतुर्थी का व्रत बेहद पुण्यदायी माना गया है। इस दिन साधक भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, लोग इस तिथि पर कठिन उपवास का पालन करते हैं। इस माह यह व्रत 03 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। ऐसे में इस दिन (Vinayak Chaturthi 2025 Upay) सुबह स्नान करें, फिर गणेश जी को दुर्वा, पीले फूल और लड्डू का भोग लगाएं। फिर &#8221;माता पार्वती के 108 नाम&#8221; का जाप करें। अंत में कपूर और लौंग से आरती करें।</p>



<p>ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसे में आइए यहां इन मंत्रों का जाप करते हैं, जो इस प्रकार हैं &#8211;</p>



<p><strong>।।माता पार्वती के 108 नाम।।</strong><br>ॐ पार्वतीयै नमः<br>ॐ महा देव्यै नमः<br>ॐ जगन्मात्रे नमः<br>ॐ सरस्वत्यै नमः<br>ॐ चण्डिकायै नमः<br>ॐ लोक जनन्यायै नमः<br>ॐ सर्वदेवादि देवतायै नमः<br>ॐ शिवदुत्यै नमः<br>ॐ विशालाक्ष्यै नमः<br>ॐ चामुण्डायै नमः<br>ॐ विष्णु सोदर्यै नमः<br>ॐ चित्कलायै नमः<br>ॐ चिन्मयाकरायै नमः<br>ॐ महिषासुर मर्दन्यायै नमः<br>ॐ कात्यायन्यै नमः<br>ॐ काला रूपायै नमः<br>ॐ गौरीयै नमः<br>ॐ परमायै नमः<br>ॐ ईशायै नमः<br>ॐ नागेन्द्र तनयै नमः<br>ॐ रौद्र्यै नमः<br>ॐ कालरात्र्यै नमः<br>ॐ तपस्विन्यै नमः<br>ॐ गिरिजायै नमः<br>ॐ मेनकथमजयै नमः<br>ॐ भवन्यै नमः<br>ॐ जनस्थानायै नमः<br>ॐ वीर पथ्न्यायै नमः<br>ॐ विरुपाक्ष्यै नमः<br>ॐ वीराराधिथयै नमः<br>ॐ हेमा भासयै नमः<br>ॐ सृष्टि रूपायै नमः<br>ॐ सृष्टि संहार करिण्यै नमः<br>ॐ मातृकायै नमः<br>ॐ महागौर्यै नमः<br>ॐ रामायै नमः<br>ॐ रामायै नमः<br>ॐ शुचि स्मितयै नमः<br>ॐ ब्रह्म स्वरूपिण्यै नमः<br>ॐ राज्य लक्ष्म्यै नमः<br>ॐ शिव प्रियायै नमः<br>ॐ नारायण्यै नमः<br>ॐ महा शक्तियै नमः<br>ॐ नवोदयै नमः<br>ॐ भाग्य दायिन्यै नमः<br>ॐ अन्नपूर्णायै नमः<br>ॐ सदानंदायै नमः<br>ॐ यौवनायै नमः<br>ॐ मोहिन्यै नमः<br>ॐ सथ्यै नमः<br>ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः<br>ॐ शर्वाण्यै नमः<br>ॐ देव मात्रे नमः<br>ॐ त्रिलोचन्यै नमः<br>ॐ ब्रह्मण्यै नमः<br>ॐ वैष्णव्यै नमः<br>ॐ अज्ञान शुद्ध्यै नमः<br>ॐ ज्ञान गमयै नमः<br>ॐ नित्यायै नमः<br>ॐ नित्य स्वरूपिण्यै नमः<br>ॐ कमलयै नमः<br>ॐ कमलाकारायै नमः<br>ॐ रक्तवर्णयै नमः<br>ॐ कलानिधाय नमः<br>ॐ मधु प्रियायै नमः<br>ॐ कल्याण्यै नमः<br>ॐ करुणायै नमः<br>ॐ हरवः समायुक्त मुनि मोक्ष परायणै नमः<br>ॐ धराधारा भवायै नमः<br>ॐ मुक्तायै नमः<br>ॐ वर मंत्रायै नमः<br>ॐ शम्भव्यै नमः<br>ॐ प्रणवथ्मिकायै नमः<br>ॐ श्री महागौर्यै नमः<br>ॐ रामजानयै नमः<br>ॐ यौवनाकारायै नमः<br>ॐ परमेष प्रियायै नमः<br>ॐ परायै नमः<br>ॐ पुष्पिन्यै नमः<br>ॐ पुष्प कारायै नमः<br>ॐ पुरुषार्थ प्रदायिन्यै नमः<br>ॐ महा रूपायै नमः<br>ॐ महा रौद्र्यै नमः<br>ॐ कामाक्ष्यै नमः<br>ॐ वामदेव्यै नमः<br>ॐ वरदायै नमः<br>ॐ वर यंत्रायै नमः<br>ॐ काराप्रदायै नमः<br>ॐ कल्याण्यै नमः<br>ॐ वाग्भव्यै नमः<br>ॐ देव्यै नमः<br>ॐ क्लीं कारिण्यै नमः<br>ॐ संविधेय नमः<br>ॐ ईश्वर्यै नमः<br>ॐ ह्रींकारं बीजायै नमः<br>ॐ भय नाशिन्यै नमः<br>ॐ वाग्देव्यै नमः<br>ॐ वचनायै नमः<br>ॐ वाराह्यै नमः<br>ॐ विश्व तोशिन्यै नमः<br>ॐ वर्धनेयै नमः<br>ॐ विशालाक्ष्यै नमः<br>ॐ कुल संपत् प्रदायिन्यै नमः<br>ॐ अरथ धुकच्छेद्र दक्षायै नमः<br>ॐ अम्बायै नमः<br>ॐ निखिला योगिन्यै नमः<br>ॐ सदापुरा स्थायिन्यै नमः<br>ॐ तरोर्मुला तलंगथयै नमः</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश को राशि अनुसार चढ़ाएं ये चीजें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Feb 2025 05:31:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले करने का विधान है। विनायक चतुर्थी का पर्व गणेश पूजन के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस शुभ अवसर पर उपवास रखने और बप्पा की आराधना करने से घर में खुशहाली आती है। चतुर्थी का व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) प्रत्येक माह रखा जाता है आइए यहां पर &#8230;]]></description>
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<p>भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले करने का विधान है। विनायक चतुर्थी का पर्व गणेश पूजन के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस शुभ अवसर पर उपवास रखने और बप्पा की आराधना करने से घर में खुशहाली आती है। चतुर्थी का व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) प्रत्येक माह रखा जाता है आइए यहां पर जानते हैं कि बप्पा कैसे खुश करना है?</p>



<p>विनायक चतुर्थी का दिन भगवान गणेश का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यह दिन गणेश जी को समर्पित है। यह आध्यात्मिकता, भक्ति और त्याग का मिश्रण है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। कहा जाता है कि जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें ज्ञान, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस बार यह व्रत 03 मार्च को रखा जाएगा, अगर आप बप्पा की कृपा पाने की इच्छा रखते हैं,</p>



<p>तो आपको इस कठिन व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। वहीं, इस दिन कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है, जिनमें पूजा करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए यहां जानते हैं कि बप्पा को कैसे प्रसन्न करना है?</p>



<p><strong>विनायक चतुर्थी पर करें ये काम (Ganesh Ji Ko Chadhye Ye Chijen)</strong><br>मेष राशि: मेष राशि के लोगों को विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश को गुड़हल के फूल अर्पित करने चाहिए।<br>वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक को इस शुभ दिन पर बप्पा को पंचामृत चढ़ाना चाहिए।<br>मिथुन राशि: मिथुन राशि के लोगों को इस शुभ दिन पर बप्पा को दुर्वा अर्पित करनी चाहिए।<br>कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों को विनायक चतुर्थी पर गणेश जी को नारियल व कलावा अर्पित करना चाहिए।<br>सिंह राशि: सिंह राशि वालों को इस शुभ तिथि पर बप्पा को बूंदी के लड्डू चढ़ाने चाहिए।<br>कन्या राशि: कन्या राशि के लोगों को इस मौके पर विघ्नहर्ता को केले का भोग लगाना चाहिए।<br>तुला राशि: तुला राशि के लोगों को विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश को लाल वस्त्र अर्पित करने चाहिए।<br>वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों को इस शुभ अवसर पर शिव पुत्र गणेश को हलवे का भोग लगाना चाहिए।<br>धनु राशि: धनु राशि के लोगों को इस शुभ दिन पर केसर मिश्रित खीर का भोग भगवान गणेश को लगाना चाहिए।<br>मकर राशि: मकर राशि के लोगों को विनायक चतुर्थी पर श्री गणेश को शमी के फूल अर्पित करने चाहिए।<br>कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातकों को इस तिथि पर शिव पुत्र को काले तिल के लड्डू चढ़ाने चाहिए।<br>मीन राशि: मीन राशि वालों को इस शुभ अवसर पर बप्पा को पीली मिठाई अर्पित करनी चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>विनायक चतुर्थी आज, नोट करें पूजा विधि और भोग से लेकर सबकुछ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 04:41:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का दिन बेहद मंगलकारी माना जाता है। इस तिथि पर उपवास करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और सभी बाधाओं को दूर करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत आज यानी 01 फरवरी 3 को रखा जा रहा है तो चलिए इस दिन से जुड़ी कुछ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का दिन बेहद मंगलकारी माना जाता है। इस तिथि पर उपवास करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और सभी बाधाओं को दूर करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत आज यानी 01 फरवरी 3 को रखा जा रहा है तो चलिए इस दिन से जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जानते हैं।</p>



<p>विनायक चतुर्थी का पर्व बहुत कल्याणकारी माना जाता है। यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। साथ ही यह बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक है। इस दिन पूजा-पाठ करने से ज्ञान, समृद्धि की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल विनायक चतुर्थी का पर्व आज यानी 01 फरवरी को मनाया जा रहा है।</p>



<p>जो लोग सच्चे भाव के साथ इस दिन उपवास का पालन करते हैं, उन्हें गौरी नंदन का आशीर्वाद सदैव के लिए प्राप्त होता है, तो आइए इस दिन (Vinayak Chaturthi 2025) से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जिससे पूजा में किसी भी तरह की बाधा न पड़ सके।</p>



<p><strong>(Vinayak Chaturthi 2025 Bhog) गणेश जी भोग –</strong>&nbsp;मोदक, केला और बूंदी के लड्डू।</p>



<p><strong>बप्पा प्रिय फूल –&nbsp;</strong>गुड़हल</p>



<p><strong>विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त (Vinayak Chaturthi 2025 Puja Muhurat)</strong><br>हिंदू पंचांग के अनुसार, गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 58 मिनट से शाम 06 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 02 फरवरी देर रात 01 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।</p>



<p>इसके साथ ही अमृत काल शाम 07 बजकर 06 मिनट से रात 08 बजकर 36 मिनट तक रहेगा और रवि योग सुबह 07 बजकर 09 मिनट से 02 फरवरी रात 02 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप पूजा से लेकर किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य कर सकते हैं।</p>



<p><strong>विनायक चतुर्थी पूजा विधि (Vinayak Chaturthi 2025 Puja Vidhi)<br></strong>भक्त सुबह उठकर स्नान करें। शुभ मुहूर्त के अनुसार, बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश का अभिषेक करें। उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें। सिंदूर और चंदन का तिलक लगाएं। उनके चरणों में पांच प्रकार के फूलों को अर्पित करें। फिर बप्पा को दूर्वा और उससे बनी माला चढ़ाएं। मोदक व लड्डू का भोग लगाएं।</p>



<p>गणेश चालीसा और उनके वैदिक मंत्रों का जाप करें। पूजा का समापन आरती और शंखनाद करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। तामसिक चीजों से दूरी बनाएं रखें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा के समय करें ये आरती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jan 2025 04:44:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का दिन बेहद खास होता है। इस व्रत का अपना धार्मिक महत्व है। कहते हैं कि इस कठिन व्रत को रखने सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसके साथ ही भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत 3 जनवरी यानी आज रखा जा रहा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का दिन बेहद खास होता है। इस व्रत का अपना धार्मिक महत्व है। कहते हैं कि इस कठिन व्रत को रखने सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसके साथ ही भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत 3 जनवरी यानी आज रखा जा रहा है। इस दिन को और भी खास बनाने के लिए बप्पा की भव्य आरती करें।</p>



<p>सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी का पर्व बेहद ही पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा होती है। विनायक चतुर्थी हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस बार यह 3 जनवरी, 2025 यानी आज के दिन मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन (Vinayak Chaturthi 2025) श्रद्धा के साथ व्रत रखने से परिवार में खुशहाली आती है। ऐसे में सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। पीले रंग के कपड़े पहनें और मंदिर को साफ करें। फिर गणेश भगवान का अभिषेक करें।</p>



<p>उन्हें फूल, फल, मोदक धूप, दीप और दुर्वा आदि चढ़ाएं। कपूर और घी के दीपक से गणपति महाराज की भावपूर्ण आरती करें, जो इस प्रकार है।</p>



<p><strong>॥श्री गणेश जी की आरती॥ (Ganesh Ji ki Aarti)</strong></p>



<p>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।<br>माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।<br>लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।<br>बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।<br>कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p><strong>।।मां लक्ष्मी की आरती।। (Lakshmi ji ki Aarti)</strong></p>



<p>ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।<br>तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।<br>सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।<br>जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>दौरान मुख्य द्वार खुला रखा जाता है।<br>तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।<br>कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।<br>सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।<br>खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।<br>रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥<br>महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।<br>उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥<br>ओम जय लक्ष्मी माता॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>विनायक चतुर्थी पर ऐसे प्राप्त करें मां लक्ष्मी की कृपा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jan 2025 04:40:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मां लक्ष्मी]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक चतुर्थी]]></category>
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					<description><![CDATA[विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने का विधान है। मान्यता है कि इस तिथि पर जो लोग कठिन व्रत के साथ विधिपूर्वक पूजा करते हैं उन्हें भगवान गणपति की कृपा मिलती है। साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस बार यह व्रत 3 &#8230;]]></description>
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<p>विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने का विधान है। मान्यता है कि इस तिथि पर जो लोग कठिन व्रत के साथ विधिपूर्वक पूजा करते हैं उन्हें भगवान गणपति की कृपा मिलती है। साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस बार यह व्रत 3 जनवरी 2025 यानी आज रखा जा रहा है।</p>



<p>हिंदू धर्म में विनायक चतुर्थी का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा होती है। यह हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार यह 3 जनवरी, 2025 यानी आज के दिन मनाई जाएगी। जो लोग इस व्रत (Vinayak Chaturthi 2025) को रखते हैं और भगवान गणेश के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उनके घर में कभी धन का अभाव नहीं रहता है। इसलिए सुबह उठें स्नान करें और मां लक्ष्मी के साथ बप्पा को मोदक, खीर, कमल का फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं।</p>



<p>फिर लक्ष्मी चालीसा का पाठ और गणेश जी के मंत्रों का जाप करें। आरती से पूजा पूरी करें। इससे आपके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव के लिए बनी रहेगी।</p>



<p><strong>।।लक्ष्मी चालीसा।।</strong></p>



<p><strong>।।दोहा।।</strong><br>मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।<br>मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥<br>सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।<br>ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥ टेक॥</p>



<p><strong>।।सोरठा।</strong><br>यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं।<br>सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥</p>



<p><br><strong>॥ चौपाई ॥</strong><br>सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥<br>तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥<br>जै जै जगत जननि जगदम्बा। सबके तुमही हो स्वलम्बा॥<br>तुम ही हो घट घट के वासी। विनती यही हमारी खासी॥<br>जग जननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥<br>विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी।<br>केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥<br>कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी। जगत जननि विनती सुन मोरी॥<br>ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥<br>क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिंधु में पायो॥<br>चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी॥<br>जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥<br>स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥<br>तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥<br>अपनायो तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥<br>तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी। कहं तक महिमा कहौं बखानी॥<br>मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन- इच्छित वांछित फल पाई॥<br>तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मन लाई॥<br>और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करे मन लाई॥<br>ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित फल पावै फल सोई॥<br>त्राहि- त्राहि जय दुःख निवारिणी। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि॥<br>जो यह चालीसा पढ़े और पढ़ावे। इसे ध्यान लगाकर सुने सुनावै॥<br>ताको कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै।<br>पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना। अन्धा बधिर कोढ़ी अति दीना॥<br>विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥<br>पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥<br>सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥<br>बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥<br>प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं। उन सम कोई जग में नाहिं॥<br>बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥<br>करि विश्वास करैं व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥<br>जय जय जय लक्ष्मी महारानी। सब में व्यापित जो गुण खानी॥<br>तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयाल कहूं नाहीं॥<br>मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजे॥<br>भूल चूक करी क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥<br>बिन दरशन व्याकुल अधिकारी। तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी॥<br>नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥<br>रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥<br>कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई॥<br>रामदास अब कहाई पुकारी। करो दूर तुम विपति हमारी॥</p>



<p><strong>।।दोहा।।</strong><br>त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो बेगि सब त्रास।<br>जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रुन का नाश॥<br>रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर।<br>मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर॥<br>।। इति लक्ष्मी चालीसा संपूर्णं।।</p>
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