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	<title>विधानसभा चुनाव &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>विधानसभा चुनाव &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>UP: भाजपा तैयार करा रही विधायकों-प्रमुख दावेदारों का रिपोर्ट कार्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 May 2026 08:22:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[विधानसभा चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/yukhj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/yukhj.jpg 635w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/yukhj-300x173.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />विधानसभा चुनाव के मजबूत होमवर्क में लगी भाजपा अपने विधायकों और प्रमुख दावेदारों की गहराई नापने के लिए सर्वे एजेंसियों की मदद ले रही है। दिल्ली और लखनऊ से जिले में आई एक-एक एजेंसी नेताओं की कुंडली तैयार करने में लग गई है। एजेंसियों के लोग घूम-घूमकर लोगों से फीडबैक ले रहे हैं। काम पूरा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/yukhj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/yukhj.jpg 635w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/yukhj-300x173.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>विधानसभा चुनाव के मजबूत होमवर्क में लगी भाजपा अपने विधायकों और प्रमुख दावेदारों की गहराई नापने के लिए सर्वे एजेंसियों की मदद ले रही है। दिल्ली और लखनऊ से जिले में आई एक-एक एजेंसी नेताओं की कुंडली तैयार करने में लग गई है। एजेंसियों के लोग घूम-घूमकर लोगों से फीडबैक ले रहे हैं।</p>



<p>काम पूरा होने पर रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपी जाएगी। 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से मुरादाबाद मंडल भाजपा के लिए काफी अहम है। प्रदेश में भले ही दो बार से भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है लेकिन दोनों चुनावाें में मुरादाबाद मंडल में भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था।</p>



<p>2017 में मंडल की 27 में से 14 और 2022 में 10 सीटों पर पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि बाद में हुए उपचुनाव में मंडल की तीन सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। ऐसे में 2027 के चुनाव में मंडल में भी अच्छे प्रदर्शन के लिए पार्टी हर स्तर पर काम कर रही है।</p>



<p><strong>दिल्ली और लखनऊ से आई एक-एक एजेंसी</strong><br>इसके लिए संगठन के स्तर पर काम चल रहा है। मंडल प्रभारी बना दिए गए हैं। विधानसभा क्षेत्र प्रभारी भी तय किए जाएंगे। दूसरी ओर केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व द्वारा क्षेत्रीय विधायकों और दावेदारों के नामों पर जनता का फीडबैक जानने की नई शुरुआत भी हुई है।<br><br>पार्टी सूत्र बताते हैं कि करीब दो दिन से दिल्ली और लखनऊ से आई एक-एक एजेंसी जिले में अलग-अलग स्थानों पर सर्वे कर रही है। एजेंसी के लोग शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जा रहे हैं। अलग-अलग वर्ग के लाेगों से मुलाकात कर संभावित नामों और विधायकों के कामों पर जनता का मन टटोल रहे हैं।<br><br>कुछ निर्धारित सवालों के माध्यम से लोगों की राय जानने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह टीम करीब एक सप्ताह जिले में रहेगी। बाद में पार्टी नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट भेजेगी।</p>



<p><strong>तीन टीमें पहले ही कर चुकी हैं सर्वे</strong><br>भाजपा के लिए तीन अन्य टीमें पहले सर्वे कर चुकी हैं। कुछ समय पहले जिले में टीमें आई थीं। अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर ये टीमें लोगों से मिली थीं और सर्वे करके चली गईं।</p>



<p><strong>दो विधानसभा चुनावों में मंडल&nbsp; में भाजपा और सपा की स्थिति</strong><br>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;2017&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;2022</p>



<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th class="has-text-align-left" data-align="left">जिला</th><th class="has-text-align-left" data-align="left">भाजपा (वर्तमान)</th><th class="has-text-align-left" data-align="left">सपा (वर्तमान)</th><th class="has-text-align-left" data-align="left">भाजपा (पूर्व)</th><th class="has-text-align-left" data-align="left">सपा (पूर्व)</th></tr></thead><tbody><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left">मुरादाबाद</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">4</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">1</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">5</td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left">संभल</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">1</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">3</td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left">रामपुर</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">3</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">3</td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left">अमरोहा</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">3</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">1</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">2</td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left">बिजनौर</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">5</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">3</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">4</td><td class="has-text-align-left" data-align="left">4</td></tr></tbody></table></figure>



<p><strong>नोट :&nbsp;</strong>2022 के चुनाव के बाद हुए मंडल में हुए उपचुनाव में भाजपा ने तीन सीटें जीत ली हैं।</p>



<p><strong>इन प्रमुख बिंदुओं पर कर रहे लोगों से सवाल</strong></p>



<p>2022 में किसको वोट दिया था<br>2024 में किसको वोट दिया था<br>2027 में किसको वोट देंगे</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>यूपी: विधानसभा चुनावों के पहले भाजपा संगठन को बदलने की तैयारी, डेढ़ दशक के बाद होगा बड़ा बदलाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 05:15:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[विधानसभा चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="245" height="128" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-12-221244.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" />यूपी विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा अपने संगठन को नए तरीके से बदलाव करने की तैयारी में है। कुछ पुराने नेताओं को हटाए जाने की तैयारी है। लगभग डेढ़ दशक बाद भाजपा के प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। 2010 से अब तक संगठन में कई पदाधिकारी महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="245" height="128" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-12-221244.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>यूपी विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा अपने संगठन को नए तरीके से बदलाव करने की तैयारी में है। कुछ पुराने नेताओं को हटाए जाने की तैयारी है।</p>



<p>लगभग डेढ़ दशक बाद भाजपा के प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। 2010 से अब तक संगठन में कई पदाधिकारी महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री और प्रवक्ता जैसे पदों पर लगातार बने हुए हैं। इस दौरान सात प्रदेश अध्यक्ष बदले, लेकिन अधिकांश पदों पर वही चेहरे कायम रहे। इनमें से कई नेता विधायक या विधान परिषद सदस्य भी बन चुके हैं, फिर भी संगठन में उनकी जिम्मेदारियां बनी हुई हैं।</p>



<p>2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन में व्यापक बदलाव की योजना पर काम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार बदलाव केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देगा। संगठन में जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।</p>



<p>दरअसल पिछले वर्षों में प्रदेश अध्यक्ष तो बदलते रहे, लेकिन संगठन के प्रमुख पदों पर पुराने चेहरों की ही पुनरावृत्ति होती रही। इससे क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ। संगठन में कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और संत कबीर नगर जैसे कुछ जिलों को अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व मिला, जबकि कई अन्य क्षेत्रों की अनदेखी होती रही। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के संगठन तथा सरकार में भी इन जिलों को प्राथमिकता मिलने की चर्चा रही है।</p>



<p><strong>इन क्षेत्रों को नहीं मिली थी भागीदारी<br></strong>सूर्य प्रताप शाही के अध्यक्ष बनने के बाद से कुछ जिलों से संगठन में दो से चार तक पदाधिकारी शामिल किए गए। वहीं कानपुर-बुंदेलखंड, ब्रज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ काशी और अवध क्षेत्र के कई जिलों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा है और इसका असर पार्टी के कार्यक्रमों तथा आगामी चुनावी तैयारियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>



<p>नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन के इस असंतुलन को दूर करने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व सभी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई टीम के गठन का खाका तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि इस बार एक-एक जिले से तीन-चार पदाधिकारियों तक को बदला जा सकता है, ताकि संगठन में संतुलन स्थापित हो सके।</p>



<p>सूत्रों के अनुसार संगठन के सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों—काशी, गोरक्ष, अवध, पश्चिम, ब्रज और कानपुर-बुंदेलखंड—को भी बदले जाने की संभावना है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, उनके चयन में जातीय संतुलन का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया और दूसरा, कुछ अध्यक्षों के खिलाफ प्रदेश नेतृत्व को शिकायतें भी मिली हैं। इन शिकायतों में पार्टी की गतिविधियों से अधिक व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देने तथा अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के बीच विवाद सुलझाने में विफल रहने जैसी बातें शामिल हैं।</p>



<p><strong>विधायक बने पदाधिकारी भी बदलेंगे<br></strong>इसके अलावा संगठन में ऐसे कई पदाधिकारी भी हैं जो राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य बन चुके हैं, लेकिन अब भी महामंत्री या उपाध्यक्ष जैसे पदों पर बने हुए हैं। इस बार उन्हें भी बदलने की तैयारी है। इनमें कई नेता सूर्य प्रताप शाही, लक्ष्मीकांत वाजपेई, केशव प्रसाद मौर्य, महेंद्र नाथ पांडेय और स्वतंत्रदेव सिंह के कार्यकाल से ही संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।</p>



<p><strong>कुर्सी बचाने की जुगत में कई पदाधिकारी<br></strong>संगठन में संभावित बदलाव की आहट से कई पदाधिकारी अपनी कुर्सी बचाने की कोशिशों में भी जुट गए हैं। कोई नए प्रदेश नेतृत्व से संपर्क मजबूत करने की कोशिश कर रहा है तो कुछ लोग लगातार उनके करीब रहने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं कुछ नेता संघ से अपने संबंधों को भी सक्रिय कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही घोषित होने वाली नई टीम में कई नए चेहरों को मौका मिल सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तमिलनाडु की सियासत में बड़ा उलटफेर, 3 बार CM रहे पन्नीरसेल्वम DMK में हुए शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 09:20:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[विधानसभा चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42.jpg 796w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42-768x431.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासत में हलचल तेज हो गई है। एआईएडीएमके (AIADMK) के निष्कासित नेता और तीन बार के मुख्यमंत्री रहे ओ पन्नीरसेल्वम आज सत्ताधारी पार्टी डीएमके में शामिल हो गए हैं। पन्नीरसेल्वम ने पार्टी मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण की। दरअसल, विधानसभा चुनाव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42.jpg 796w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/unnamed-file-42-768x431.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासत में हलचल तेज हो गई है। एआईएडीएमके (AIADMK) के निष्कासित नेता और तीन बार के मुख्यमंत्री रहे ओ पन्नीरसेल्वम आज सत्ताधारी पार्टी डीएमके में शामिल हो गए हैं। पन्नीरसेल्वम ने पार्टी मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण की।</p>



<p>दरअसल, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके और एआईएडीएमके से निष्कासित नेता ओ पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को डीएमके ज्वाइन कर लिया है।</p>



<p><strong>बोदिनायक्कनूर से उम्मीदवार बना सकती है डीएमके<br></strong>डीएमके उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने के लिए एक सीट दे सकती है। माना जा रहा है कि डीएमके उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पारंपरिक सीट बोदिनायक्कनूर से उम्मीदवार बना सकती है। जहां से उन्होंने 2021 में जीत दर्ज की।</p>



<p><strong>हाल ही में समर्थक विधायकों ने दिया इस्तीफा<br></strong>पन्नीरसेल्वम के समर्थक आर वैथिलिंगम और पॉल मनोज पांडियन ने हाल ही में अपने विधायक पदों से इस्तीफा दे दिया था और डीएमके में शामिल हो गए थे। पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने को एआईएडीएमके के भीतर अपनी पकड़ खोने के बाद राजनीतिक अस्तित्व बचाने और ईपीएस को कड़ी चुनौती देने के दांव के रूप में देखा जा रहा है।</p>



<p><strong>तीन बार रह चुके हैं मुख्यमंत्री<br></strong>पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पन्नीरसेल्वम को जयललिता के सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता रहा है। एआईएडीएमके में उनके और एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच लंबे समय तक नेतृत्व को लेकर विवाद चला, जिसके बाद पार्टी से उन्हें निकाल दिया गया था।</p>



<p>पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। क्योंकि, थेवर समुदाय में पन्नीरसेल्वम का समर्थन मजबूत माना जाता है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पंजाब: पंथक राजनीति से सत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी मजबूत करने की तैयारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 08:47:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[विधानसभा चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78.jpg 793w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78-768x446.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दल अपनी पंथक राजनीति को धार देने में जुट गए हैं। शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने भी इसी लाइन पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। पार्टियों का मानना है कि पंजाब में पंथक एजेंडा मतदाताओं की भावनाओं से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78.jpg 793w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/78-768x446.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दल अपनी पंथक राजनीति को धार देने में जुट गए हैं। शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने भी इसी लाइन पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। पार्टियों का मानना है कि पंजाब में पंथक एजेंडा मतदाताओं की भावनाओं से जुड़ने का एक बड़ा जरिया बन सकता है। लिहाजा विभिन्न सियासी मुद्दाें के साथ-साथ हर पार्टी अपने पंथक एजेंडों को पूरी तरजीह देते हुए रणनीति तैयार करेगी।</p>



<p>फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ चुके हैं। विरोधी दल जहां प्रदेश में कानून-व्यवस्था, नशा तस्करी, अधूरे वादों समेत बुनियादी समस्याओं व अधूरी परियोजनाओं को सरकार के खिलाफ सियासी हथियार बनाकर आप की घेराबंदी की तैयारी कर रहे हैं वहीं आप सरकार बिजली, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सकारात्मक बदलावों और औद्योगिक व अवसंरचनात्मक विकास को अपने प्राइमरी एजेंडों में रखे हुए है।</p>



<p>पक्ष-विपक्ष के इन्हीं मुद्दों में एक एजेंडा कॉमन है और वे है पंथ। सभी दल जानते हैं कि पंजाब में पंथक राजनीति बहुत असरदार रहती है। इस एजेंडे के सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम सूबे में सरकार बना भी सकते हैं और सत्ता से बाहर भी कर सकते हैं। लिहाजा शिअद, आप और अब भाजपा भी गंभीरता के साथ इस एजेंडे पर आगे बढ़ रही है।</p>



<p>सरकार की ओर से पंथक एजेंडों से जुड़ी बड़ी घोषणाओं का एलान भी शुरू हो चुका है क्योंकि समय अब इस एजेंडे को धार देने का है। हलवारा एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी के नाम से रखा गया तो फरीदपुर में 10 करोड़ से गुरु जी की बाणी का अनुसंधान केंद्र बनने की घोषणा हो गई है।</p>



<p>नवंबर में भव्य स्तर पर गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहादत दिवस बनाने के बाद आप सरकार ने अब पूरा साल श्री गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती मनाने का एलान कर दिया है। इसी तर्ज पर भाजपा ने भी पहले गुरु तेग बहादुर जी का हर जिले में शहादत दिवस मनाया और अब पार्टी भी श्री गुरु रविदास जी की भव्य जयंती कार्यक्रम मना रही है। इस उपलक्ष्य में पीएम नरेंद्र मोदी भी जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्ला का दौरा कर चुके हैं।</p>



<p>उधर, क्रिसमस के भव्य आयोजनों के मंचों पर भी आप के मंत्री व अन्य नेता अतिथि बनकर पहुंचे थे जबकि अब पूरे प्रदेश में हमारे राम नाटक के 40 शो करवाने की तैयारी है। उधर शिअद का तो प्रमुख एजेंडा ही पंथ रहा है।</p>



<p><strong>ये मुद्दे सुर्खियों में रहेंगे<br></strong>कुछ पंथक मुद्दे ऐसे भी हैं जो इस चुनावी साल में सियासी गलियारों की चर्चा बने रहेंगे। इनमें एसजीपीसी चुनाव, बेअदबियां, बहिबलकलां व कोटकपूरा गोलीकांड, श्री अकाल तख्त के जत्थेदारों की नियुक्ति के नियम, अन्य राज्यों में स्थित गुरुद्वारों के प्रबंधन का विवाद, सिख संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण का आरोप, सिखों के धार्मिक मामलों में सत्ता का हस्तक्षेप, एसजीपीसी सिख संस्थानों को विभाजित करने सरकारी नियंत्रण बढ़ने का आरोप इत्यादि शामिल हैं।</p>
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		<title>यूपी में सपा-भाजपा की जंग के बीच तीसरे मोर्चे की घुसपैठ</title>
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		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 06:01:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[विधानसभा चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="226" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858.png 781w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858-300x109.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858-768x280.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू हो गई है। इस बीच सियासी हवा के झोंके भी आने लगे हैं। सियासतदान गोटियां बिछा रहे हैं। नफा-नुकसान के हिसाब से गोलबंदी हो रही है। इसमें दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का नया मोर्चा तैयार होने लगा है। बसपा से भाजपा होते हुए साइकिल पर सवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="226" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858.png 781w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858-300x109.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-215858-768x280.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू हो गई है। इस बीच सियासी हवा के झोंके भी आने लगे हैं। सियासतदान गोटियां बिछा रहे हैं। नफा-नुकसान के हिसाब से गोलबंदी हो रही है। इसमें दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का नया मोर्चा तैयार होने लगा है।</p>



<p>बसपा से भाजपा होते हुए साइकिल पर सवार रहे पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य अब नई पार्टी बना चुके हैं। वह अपनी जनता पार्टी के झंडे तले पुराने बसपाइयों को इकट्ठा कर रहे हैं। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर खुद को कांशीराम का सियासी वारिस साबित करने में जुटे हैं। वह महारैली के जरिए दलितों को बसपा छोड़ खुद के साथ जुड़ने की अपील कर रहे हैं।</p>



<p>नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़कर नए मोर्चे को ताकत देने के संकेत दिए हैं। कभी सपा के साथ रहे जनवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. संजय चौहान भी बिरादरी के दम पर बांह बटोर रहे हैं। कांग्रेस ने महारैली शुरू कर दी है तो लोकसभा चुनाव परिणाम से उत्साहित सपा पीडीए पंचायत के जरिए जनता के बीच उतरी है।</p>



<p>आगामी चुनाव के मद्देनजर अभी तक भाजपा और सपा के बीच आमने-सामने की टक्कर मानी जा रही है, लेकिन प्रदेश की सियासत में तीसरा मोर्चा तैयार करने की बेताबी भी साफ दिख रही है। इसके पीछे पिछड़ों, दलितों एवं अल्पसंख्यकों का वोटबैंक हैं। तीसरे मोर्चे को भरोसा है कि वह इस वोटबैंक के दम पर सियासी वैतरणी पार कर लेगा। यह भी कहा जा रहा है कि तीसरे मोर्चे की खिचड़ी का स्वाद बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी बेचैन हैं।</p>



<p>सूत्रों का यह भी कहना है कि इस मोर्चे में विभिन्न सियासी दलों के वे कद्दावर नेता भी शामिल हो सकते हैं, जो अपनी पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। अन्य नेता अभी खुले तौर पर नए मोर्चे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ताल ठोंक रहे हैं।</p>



<p>स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश की सियासत में तीसरे मोर्चे का ही भविष्य है। वह समान विचारधारा वाले दलों के नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। अभी तो शुरुआत है जल्द ही इसके परिणाम भी दिखेंगे। वह दावा करते हैं कि खुद को बड़ा दल बताने वाली पार्टियों के दर्जनभर से ज्यादा नेता उनके संपर्क में हैं।</p>
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