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	<title>विद्युतीकरण &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>विद्युतीकरण &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दिल्ली के सभी बस डिपो का होगा विद्युतीकरण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Jun 2024 06:14:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली के सभी बस डिपो का होगा विद्युतीकरण]]></category>
		<category><![CDATA[विद्युतीकरण]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="465" height="308" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15.jpg 465w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15-300x199.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 465px) 100vw, 465px" />यह डिपो पूरी तरह से विद्युतीकृत होंगे। जिससे ई-बसों को चार्ज करने के साथ ही उनका रखरखाव भी किया जा सके। ऐसे में दिल्ली के सभी बस डिपो को विद्युतीकृत किया जा रहा है। राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों को रखने और चार्ज करने के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए डिपो की जरूरत है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="465" height="308" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15.jpg 465w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15-300x199.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/delhi3-15-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 465px) 100vw, 465px" />
<p>यह डिपो पूरी तरह से विद्युतीकृत होंगे। जिससे ई-बसों को चार्ज करने के साथ ही उनका रखरखाव भी किया जा सके। ऐसे में दिल्ली के सभी बस डिपो को विद्युतीकृत किया जा रहा है।</p>



<p>राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों को रखने और चार्ज करने के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए डिपो की जरूरत है। यह डिपो पूरी तरह से विद्युतीकृत होंगे। जिससे ई-बसों को चार्ज करने के साथ ही उनका रखरखाव भी किया जा सके। ऐसे में दिल्ली के सभी बस डिपो को विद्युतीकृत किया जा रहा है। वर्तमान में 62 बस डिपो में से 16 को विद्युतीकृत किया गया है। इन डिपो से ई-बसों को संचालन भी किया जा रहा है। शेष अन्य डिपो को भी विद्युतीकृत करने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।</p>



<p>परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बिना विद्युतीकृत डिपो के ई-बसों का संचालन करना संभव नहीं है। ऐसे में डिपो को विद्युतीकृत करने के बाद ई-बसों को लाया जाता है। वर्तमान में दिल्ली में 1650 ई-बसें हैं। इसमें 300 बसें क्लस्टर योजना के तहत हैं। इन बसों को विभिन्न जगहाें पर बने डिपो में रखा गया है। परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आगामी दिनों में अब अधिकतर ई-बसें ही आएंगी। इस स्थिति में डिपो को विद्युतीकृत करने का काम जोरो से पर है। अभी हाल ही में चार डिपो की 977 क्लस्टर बसों का अनुबंध खत्म हुआ था।</p>



<p>उनकी जगह पर ई-बसों को लाया जाना था, लेकिन विद्युतीकृत डिपो के नहीं होने से और अन्य कारणों से उक्त क्लस्टर बसों का अनुबंध नौ माह के लिए आगे बढ़ाया गया। वहीं बताया यह भी जा रहा है कि बस बनाने की वाली कंपनियां की ओर से भी बसों की आपूर्ति करने में ढिलाई की जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ई-बसों को लाने के लिए तैयारियां चल रही है। जल्द ही बसें दिल्ली की सड़कों पर होंगी। बीते फरवरी के बाद अब तक एक भी ई-बस नहीं लाया गया है।</p>



<p><strong>1500 करोड़ रुपये खर्च कर रही सरकार&#8230;</strong><br>बस डिपो को विद्युतीकृत करने के लिए दिल्ली सकरार 1500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ताकि वर्ष 2025 तक 8,000 से अधिक ई- बसों को लाया जा सके। सरकार ने वर्ष 2025 तक दिल्ली की सड़कों पर 10480 बसें चलाने का लक्ष्य रखा है। इनमें से 8000 हजार ई-बसें और अन्य सीएनजी की बसें होंगी।</p>



<p><strong>2895 पुरानी सीएनजी की बसें हैं डीटीसी के बेड़े में&#8230;</strong><br>दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम के दौरान बड़ी संख्या में बसें सीएनजी बसें आईं थीं। तब भी बसों की कमी थी। वर्तमान स्थिति की बात करें तो अभी डीटीसी के बेड़े में कुल 4195 बसें हैं। इसमें 1650 इलेक्ट्रिक और 2895 बसें पुरानी सीएनजी की हैं। अधिकारियों की मानें तो 2025 के अंत तक के लिए बसों को चलाने की अनुमति मिली हुई थी। इसके बाद सभी सीएनजी बसें स्क्रैप में जाएंगी। पुरानी बसों रोजाना खराब भी हो रही हैं।</p>



<p><strong>बेड़े में कब-कितनी ई-बसें शामिल हुईं&#8230;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>17 जनवरी 2022 को दिल्ली में पहली इलेक्ट्रिक बस को शामिल किया गया।</li>



<li>मार्च 2022 में दो और इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया गया।</li>



<li>24 मई 2022 को 150 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया</li>



<li>24 अगस्त 2022 को 97 नई इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया गया।</li>



<li>02 जनवरी 2023 को 50 नई इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया गया।</li>



<li>01 मई 2023 को डीएमआरसी की 100 ई-बसों का अधिग्रहण किया गया।</li>



<li>05 सितंबर 2023 को 400 नई ई-बसों को शामिल किया गया।</li>



<li>14 दिसंबर 2023 को 500 नई ई-बसों को शामिल किया गया।</li>



<li>14 फरवरी 2024 को 300 और डीटीसी बेड़े में 50 अतिरिक्त ई-बसों को जोड़ा गया।</li>
</ul>
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		<title>हर साल होगी 13,500 करोड़ रुपये की बचत, रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[somali sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Oct 2018 06:00:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय रेलवे]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे बोर्ड के सदस्य]]></category>
		<category><![CDATA[विद्युतीकरण]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300-300x167.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />अगर रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण हो जाता है, तो भारतीय रेलवे के 13,500 करोड़ रुपये हर साल बच सकते हैं। रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैक्शन) घनश्याम सिंह ने रविवार को बताया कि रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण होने के बाद अगर ट्रैफिक का स्&#x200d;तर इतना ही रहता है, तो रेलवे के लगभग 13,500 करोड़ रुपये हर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div id="ls-row-2" class="ls-row container">
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<div id="topHeading">
<p><strong>अगर रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण हो जाता है, तो भारतीय रेलवे के 13,500 करोड़ रुपये हर साल बच सकते हैं। रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैक्शन) घनश्याम सिंह ने रविवार को बताया कि रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण होने के बाद अगर ट्रैफिक का स्&#x200d;तर इतना ही रहता है, तो रेलवे के लगभग 13,500 करोड़ रुपये हर साल बचेंगे।<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-177376" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300.jpg" alt="" width="650" height="361" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/10/22_10_2018-rail22_18557300-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></strong></p>
<p><strong>सिंह पामबन रेलवे ब्रिज का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। 100 साल से भी पुराना तमिलनाडु का यह पुल रामेश्वरम से पामबन द्वीप को जोड़ता है। रेलवे इस लाइन पर विद्युतीकरण कर रही है, ताकि ये देश की अन्&#x200d;य रेलवे लाइनों से जुड़ सके। उन्&#x200d;होंने बताया कि रेलवे की कोशिश सिर्फ लाइनों का विद्युतीकरण करना नहीं है, बल्कि ऊर्जा के स्&#x200d;थानीय स्रोतों द्वारा ट्रेनों के प्रचालन की है।</strong></p>
<p><strong>उन्&#x200d;होंने बताया, &#8216;भारत सरकार का मिशन भारतीय रेलवे की सभी ब्रॉड गेज रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण करना है। इस दौरान पामबन द्वीप को तमिलनाडु से जोड़ने वाली लाइन का विद्युतीकरण भी शामिल है। इस अभियान का उद्देश्&#x200d;य लोगों को कम कीमत पर ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्&#x200d;टम उपलब्&#x200d;ध कराना है। इसके तहत स्&#x200d;थानीय ऊर्जा के स्रोतों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों जैसे, पवन सोलर और हाइड्रो पावर को भी बढ़ावा देना है।&#8217;</strong></p>
<p><strong>गौरतलब है कि तमिलनाडु का यह पुल रामेश्वरम से पामबन द्वीप को जोड़ता है। मुंबई ब्रांदा कुर्ला पुल से पहले पामबन ब्रिज इंडिया का सबसे लंबा सी ब्रिज हुआ करता था। तमिलनाडु में स्थित यह इंडिया का ऐसा पुल है जो समुद्र के ऊपर बना हुआ है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां से गुजरना कितना एक्साइटिंग और अलग एक्सपीरियंस होता होगा। यह नेचर और तकनीक का बेजोड़ मेल है। जो उच्च तीव्रता वाले भूंकप से भी नहीं हिल सकता। पामबन पुल को ब्रिटिश रेलवे द्वारा 1885 में शुरू किया गया था। ब्रिटिश इंजीनियरों की टीम के निर्देशन में गुजरात के कच्छ से आए कारीगरों की मदद से इसे खड़ा किया गया था और 1914 में ये बनकर पूरा हुआ था। फरवरी 2016 में इसने अफना 102 साल पूरा किया। इतना पुराना होने के बावजूद भी ये आज ज्&#x200d;यों का त्&#x200d;यों बना हुआ है</strong></p>
</div>
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		<title>अभी दूर की कौड़ी है यूपी में चौबीस घंटे बिजली, ये हैं चुनौतियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Mar 2017 09:40:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1.jpg 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में चौबीस घंटे बिजली देने की तैयारी शुरू कर दी है. हर स्तर पर सुधार के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, इसमें केंद्र भी यूपी सरकार की पूरी मदद कर रहा है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि यूपी की जनता के लिए चौबीस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1.jpg 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में चौबीस घंटे बिजली देने की तैयारी शुरू कर दी है. हर स्तर पर सुधार के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, इसमें केंद्र भी यूपी सरकार की पूरी मदद कर रहा है.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-44122" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1.jpg" alt="" width="875" height="583" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1.jpg 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/power-yogi1-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 875px) 100vw, 875px" /></strong></p>
<p><strong>लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि यूपी की जनता के लिए चौबीस घंटे बिजली मिलना अभी किसी सपने से कम नहीं है. जानकारों का मानना है कि जर्जर व्यवस्था इस कवायद की राह में बड़ा रोड़ा है.</strong></p>
<p><strong>योगी सरकार के सामने बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही व्यवस्था में गुणात्मक सुधार करने की चुनौती है. उनका मानना है कि सरकार को चौबीस घंटे बिजली देने की प्राथमिकता की बजाए इस पर ध्यान देना चाहिए कि जिन के पास बिजली नहीं है, पहले उन तक पहले बिजली पहुंचाई जाए.</strong></p>
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" title="Permalink to जाकिर नाइक को ताजा नोटिस, 30 मार्च को पेशी के आदेश" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b8-30-%e0%a4%ae/44068" target="_blank" rel="bookmark">जाकिर नाइक को ताजा नोटिस, 30 मार्च को पेशी के आदेश</a></span></h3>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यूपी में डेढ़ करोड़ घर आज भी हैं अंधेरे में</span></strong></p>
<p><strong>आॅल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे कहते हैं कि लोगों को ग्रामीण विद्युतीकरण और पावर टू आॅल योजनाओं में फर्क समझने की सख्त आवश्यकता है. ग्रामीण विद्युतीकरण की परिभाषा है कि जिस गांव में बिजली के खंभे गड़ गए और तार खिंच गया, वह गांव विद्युतीकरण की श्रेणी में आ गया. लेकिन इसमें ये कहीं नहीं लिखा है कि गांव में ​कितने घरों तक बिजली कनेक्शन पहुंचाया गया.</strong></p>
<p><strong>इसी में सरकारें खेल करती रही हैं. आंकड़े ग्रामीण विद्युतीकरण के बताए जाते हैं और जनता उसे हर घर में बिजली पहुंचना मान लेती है.</strong></p>
<p><strong>ग्रामीण विद्युतीकरण की बात करें तो देश में 2014 में 5 लाख 26 गांवों का विद्युतीकरण शेष था, जिसमें से 5 लाख 8 हजार का विद्युतीकरण किया जा चुका है. लेकिन केंद्र की पावर टू आॅल योजना पर नजर डालें तो अभी भी देश में करीब 6 करोड़ घर ऐसे हैं, जहां बिजली नहीं है. यूपी में सबसे ज्यादा करीब सवा करोड़ घरों में बिजली कनेक्शन नहीं है.</strong></p>
<p><strong>वह कहते हैं कि प्रत्येक घर में कम से कम चार सदस्यों का औसत माना जाए तो सीधे-सीधे यूपी में करीब पांच करोड़ लोगों तक अभी भी बिजली नहीं पहुंची है. स्थिति ये है कि यूपी में गांवों में 71 प्रतिशत घरों में बिजली नहीं पहुंची है, वहीं शहरों में ये प्रतिशत करीब 19 है.</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">गांव में ट्यूबवेल और घरों को अलग-अलग बिजली देने की चुनौती</span></strong></p>
<p><strong>शैलेंद्र दुबे कहते हैं कि गांवों की बिजली व्यवस्था कुछ ऐसी है, कि वहां तरह से बिजली की जरूरत रहती है. सबसे अहम ट्यूबवेल के लिए, जिसके लिए तीन फेज में छह से आठ घंटे बिजली की जरूरत है. वहीं दूसरा घरों के लिए.</strong></p>
<p><strong>किसान को चौबीस घंटे बिजली के बल्ब जलने की बजाए छह घंटे ट्यूबवेल के लिए बिजली की ज्यादा जरूरत रहती है. वर्तमान व्यवस्था इस दिक्कत को ठीक करने लायक नहीं है. इस व्यवस्था का लागू करने के लिए प्रदेश भर में तमाम फीडर अलग-अलग करने पड़ेंगे. हालांकि प्रदेश में कई जगह अब काम हो रहा है लेकिन इसमें अभी भी कम से कम दो साल लगने की उम्मीद है.</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">जर्जर तार, कम क्षमता के ट्रांसफॉर्मर बड़ी चुनौती</span></strong></p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश में जितने बिजली कनेक्शन हैं, वहां चौबीस घंटे बिजली पहुंचाना टेढ़ी खीर है. शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि अगर यूपी सरकार चौबीस घंटे की मांग के हिसाब से बिजली केंद्रीय पूल आदि से जुटा भी ले तो भी वह जनता तक इसे पहुंचा नहीं सकेगी. कारण ये है कि प्रदेश में चौबीस घंटे डिस्ट्रीब्यूशन का नेटवर्क सक्षम नहीं है. लगातार बिजली सप्लाई हुई तो ट्रांसफॉर्मर ही उड़ जाएंगे.</strong></p>
<p><strong>सिर्फ राजधानी लखनऊ की ही बात करें तो यहां चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध है लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन में मजबूरी में एक से डेढ़ घंटे कटौती करनी ही पड़ती है. कारण ये है कि प्रति व्यक्ति खपत इतनी है कि अगर चौबीस घंटे सप्लाई दी गई तो इलाके का ट्रांसफॉर्मर ही उड़ जाएगा क्योंकि उसकी उतनी क्षमता ही नहीं है. इसके अलावा तारों की स्थिति भी बेहद खराब है. इसमें सुधार के लिए काफी समय और धन लगेगा.</strong></p>
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" title="Permalink to महापुरुषों पर सवाल क्&#x200d;यों?" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e2%80%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b/44074" target="_blank" rel="bookmark">महापुरुषों पर सवाल क्&#x200d;यों?</a></span></h3>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">इंटरस्टेट और इंट्रास्टेट डिस्ट्रीब्यूशन चुनौती</span></strong></p>
<p><strong>उन्होंने बताया कि इसके अलावा इंटरस्टेट और इंट्रास्टेट यानी दूसरे राज्यों से और प्रदेश के अंदर पावर सप्लाई के लिए ट्रांसमिशन लाइनें अभी उतनी सक्षम नहीं हैं. इनमें सुधार करने के लिए कम से कम दो साल का समय लगेगा. गर्मियों में प्रदेश में करीब 19,000 मेगावाट की मांग पहुंच जाती है.</strong></p>
<p><strong>इसीलिए फेडरेशन लगातार मांग करता रह है कि चौबीस घंटे बिजली देने की बजाए सभी तक बिजली पहुंचाने की जरूरत पर पहले काम किया जाए. क्योंकि हमारा मानना है कि जिसे 20 घंटे बिजली मिल रही है, उसे 24 घंटे मिलने लगेगी तो उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन जिसने बिजली देखी ही नहीं है, उसे बिजली मिलने लगेगी तो सही मायने में विकास होगा.</strong></p>
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