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	<title>विदेश मंत्री &#8211; Live Halchal</title>
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	<lastBuildDate>Fri, 02 Aug 2024 11:15:10 +0000</lastBuildDate>
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	<title>विदेश मंत्री &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>उत्तराखंड: सीएम धामी ने विदेश मंत्री को भेजा पत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Aug 2024 05:42:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[पत्र]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[सीएम धामी]]></category>
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					<description><![CDATA[म्यांमार के फर्जी नौकरी रैकेट मामले में सीएम धामी ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। उत्तराखंड के 15 से अधिक पुरुष व नौ महिलाएं बंधक बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने म्यांमार के फर्जी नौकरी रैकेट मामले में विदेश मंत्रालय से राजनयिक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. &#8230;]]></description>
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<p>म्यांमार के फर्जी नौकरी रैकेट मामले में सीएम धामी ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। उत्तराखंड के 15 से अधिक पुरुष व नौ महिलाएं बंधक बनाई गई हैं।</p>



<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने म्यांमार के फर्जी नौकरी रैकेट मामले में विदेश मंत्रालय से राजनयिक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को पत्र भेजकर इस संबंध में भारतीय दूतावास की एडवाइजरी का भी हवाला दिया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने खुद विदेश मंत्री से इस बाबत फोन पर बात भी की।</p>



<p>मुख्यमंत्री ने पत्र में मीडिया रिपोर्ट की सूचना का भी जिक्र किया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी आई है कि आकर्षक नौकरी के नाम पर थाईलैंड से करीब कई भारतीय म्यांमार के फर्जी नौकरी रैकेट के हवाले कर दिए गए। इनमें उत्तराखंड राज्य के 15 से अधिक पुरुष और नौ महिलाएं वहां बंधक बनाए गए हैं। विदेश मंत्री को लिखे पत्र में कहा, मैं आपको इस विषय के संदर्भ में आपातकालीन आधार पर लिख रहा हूं।</p>



<p><strong>उत्तराखंड के लोगों में गहरा डर पैदा</strong><br>लिखा, उत्तराखंड के 15 पुरुषों और नौ महिलाओं को म्यांमार में धोखाधड़ी वाले कॉल सेंटरों में काम करने के लिए मजबूर किया गया है। इस स्थिति ने पीड़ितों के परिवारों में काफी परेशानी और मानसिक पीड़ा पैदा की है और उत्तराखंड के लोगों में गहरा डर उत्पन्न हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैं आपके कार्यालय से तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह करने के लिए बाध्य हूं।</p>



<p>ताकि सभी निर्दोष व्यक्तियों को सुरक्षित बचाया जा सके और वापस लाया जा सके। कहा, उत्तराखंड राज्य अपने नागरिकों के कल्याण के बारे में बहुत चिंतित है और उन्हें सुरक्षित रूप से घर वापस लाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए विदेश मंत्रालय से प्राथमिकता और तत्काल सहायता चाहता है।</p>
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		<title>पीएम मोदी-पुतिन की मुलाकात से पहले विदेश मंत्री का आया बड़ा बयान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jul 2024 07:05:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[पीएम मोदी-पुतिन]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के लिए बैठकर संबंधों पर चर्चा करने का एक शानदार अवसर होगा। दोनों देशों में सबसे बड़ा बदलाव यह रहा है कि रूस के साथ हमारे आर्थिक संबंध काफी बढ़ गए हैं। नेतृत्व के स्तर पर यह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति &#8230;]]></description>
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<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के लिए बैठकर संबंधों पर चर्चा करने का एक शानदार अवसर होगा। दोनों देशों में सबसे बड़ा बदलाव यह रहा है कि रूस के साथ हमारे आर्थिक संबंध काफी बढ़ गए हैं। नेतृत्व के स्तर पर यह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक-दूसरे के साथ बैठकर सीधे बात करने का एक बड़ा अवसर होगा।</p>



<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर 8-9 जुलाई को मॉस्को की यात्रा पर जा रहे हैं। पीएम की रूस यात्रा से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में जबरदस्त सुधार हुआ है। यह रूस के साथ संबंधों में सबसे बड़ा बदलाव हुआ है।</p>



<p>समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के लिए बैठकर संबंधों पर चर्चा करने का एक शानदार अवसर होगा।</p>



<p><strong>रूस के साथ आर्थिक संबंध काफी बढ़ गए हैं- विदेश मंत्री<br></strong>उन्होंने कहा, &#8220;यह किसी भी देश के साथ बात करने का एक तरीका है। सबसे बड़ा बदलाव यह रहा है कि रूस के साथ हमारे आर्थिक संबंध काफी बढ़ गए हैं। नेतृत्व के स्तर पर, यह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक-दूसरे के साथ बैठकर सीधे बात करने का एक बड़ा अवसर होगा।&#8221;</p>



<p><strong>व्यस्तताओं की वजह से सम्मेलन होने में थोड़ी देरी हुई<br></strong>वहीं, जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलग-अलग व्यस्तताओं की वजह से यह वार्षिक शिखर सम्मेलन होने में थोड़ी देरी हुई है।</p>



<p><strong>भारत-रूस का एक साथ काम करने का मजबूत इतिहास<br></strong>विदेश मंत्री ने आगे कहा, &#8220;शिखर सम्मेलन में थोड़ी जरूर हुई, लेकिन हम दो देश हैं जिनका एक साथ काम करने का मजबूत इतिहास रहा है। हम वार्षिक शिखर सम्मेलन की जरूरत को महत्व देते हैं। पिछले साल जब मैं मॉस्को गया था, तो मैं प्रधानमंत्री का संदेश लेकर गया था कि हम वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम इसे जल्द से जल्द करेंगे। यह एक नियमित प्रक्रिया है। यह किसी भी देश से बात करने का एक तरीका है।&#8221;</p>



<p><strong>इस बैठक का होना तय था<br></strong>उन्होंने कहा कि दोनों देशों का एक साथ काम करने का एक स्थिर इतिहास रहा है। &#8220;हम दुनिया भर में हो रही घटनाओं को देखते हैं और देखते हैं कि क्या हम किसी स्थिति में कोई सुधार करना चाहते हैं, हम मिलते हैं और चर्चा करते हैं। यह बैठक कुछ ऐसी थी जिसका होना तय था।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>विदेश मंत्री बोले- देश के विभाजन ने पूर्वोत्तर की प्राकृतिक कनेक्टिविटी को तोड़ दिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Apr 2024 05:23:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[छात्रों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के विभाजन ने कई मायने में उस प्राकृतिक संपर्क को तोड़ दिया है जो पूर्वोत्तर के पास था। इस कारण से जिस तरह का विकास वहां होना चाहिए था वह धीमा पड़ गया। विभाजन के बाद पहले कुछ सालों में राजनीतिक बाधाओं और प्रशासनिक &#8230;]]></description>
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<p>छात्रों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के विभाजन ने कई मायने में उस प्राकृतिक संपर्क को तोड़ दिया है जो पूर्वोत्तर के पास था। इस कारण से जिस तरह का विकास वहां होना चाहिए था वह धीमा पड़ गया। विभाजन के बाद पहले कुछ सालों में राजनीतिक बाधाओं और प्रशासनिक मुद्दों के कारण पूर्वोत्तर राज्यों को वह लाभ नहीं मिल सका जो देश के अन्य हिस्सों को मिला।</p>



<p>भारत के विभाजन ने कई मायने में पूर्वोत्तर राज्यों की प्राकृतिक कनेक्टिविटी को तोड़ दिया है। राजनीतिक बाधाओं के साथ-साथ प्रशासनिक मुद्दों के कारण क्षेत्र के विकास पर असर पड़ा। विकास का यह स्तर बिल्कुल धीमा हो गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए यह बातें कही। कॉलेज में सोमवार को दक्षिण पूर्व एशिया और जापान के साथ पूर्वोत्तर भारत का एकीकरण-आर्थिक संबंधों और पारिस्थितिक संरक्षण का संतुलन विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>



<p>छात्रों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के विभाजन ने कई मायने में उस प्राकृतिक संपर्क को तोड़ दिया है जो पूर्वोत्तर के पास था। इस कारण से जिस तरह का विकास वहां होना चाहिए था वह धीमा पड़ गया। विभाजन के बाद पहले कुछ सालों में राजनीतिक बाधाओं और प्रशासनिक मुद्दों के कारण पूर्वोत्तर राज्यों को वह लाभ नहीं मिल सका जो देश के अन्य हिस्सों को मिला। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में अब आर्थिक स्थिरता मजबूत मोर्चे की ओर बढऩे लगी है। वहीं भारत ने कोविड महामारी के दौरान जिस तरह से स्थिति को संभाला उस कारण से विदेश में रहने वाले लोगों की धारणा में बदलाव हुआ है। उन्होंने भारत के भविष्य पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, अंतरिक्ष उद्योग और ड्रोन होंगे। देश का भविष्य विद्युत गतिशीलता होगा, अंतरिक्ष उद्योग होगा, यह ड्रोन होगा, यह स्वच्छ तकनीक होगा।</p>



<p>कार्यक्रम में छात्रों ने सीमा, पुलिसिंग ओर कनेक्टिविटी के बारे में कई सवाल किए। एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि हर देश को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि उसकी सीमाएं सुरक्षित हैं। यह एक राज्य का दायित्व है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत कई वर्षों से इसमें विफल रहा है, लेकिन अब चीज़ें अलग होंगी। विदेशमंत्री ने माना कि पिछला दशक अलग रहा है। उन्होंने वादा किया कि अगला दशक अलग होगा। बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा को सुरक्षित करने का मतलब कनेक्टिविटी को खत्म करना नही है बल्कि इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि कनेक्टिविटी बरकरार रहे।</p>
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		<title>दिल्ली में आज से शुरू हो रहा है रायसीना डायलॉग, फिनलैंड की विदेश मंत्री भी लेंगी हिस्सा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Feb 2024 07:43:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[रायसीना डायलॉग]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[इंडियन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस बार का रायसीना डायलॉग आज से यानि बुधवार से शुरू होगा। इस डायलॉग में शामिल होने के लिए फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए बुधवार को नई दिल्ली पहुंचेंगी और रायसीना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>इंडियन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस बार का रायसीना डायलॉग आज से यानि बुधवार से शुरू होगा। इस डायलॉग में शामिल होने के लिए फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए बुधवार को नई दिल्ली पहुंचेंगी और रायसीना डायलॉग 2024 में भाग लेंगी।</p>



<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल दिल्ली में रायसीना संवाद के 9वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। तीन दिन के संवाद में केंद्रीय मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख, सैन्य कमांडर, उद्योग जगत और प्रौद्योगिकी के प्रमुख, शिक्षाविद, पत्रकार और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।</p>



<p>इस डायलॉग में शामिल होने के लिए फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए बुधवार को नई दिल्ली पहुंचेंगी और रायसीना डायलॉग 2024 में भाग लेंगी। एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई। इसके अलावा, विदेश मंत्री अपनी यात्रा के दौरान नॉर्डिक और बाल्टिक मंत्रियों के साथ वर्किंग लंच में विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात करेंगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">रायसीना डायलॉग में कई मुद्दों पर होगी चर्चा&nbsp;</h2>



<p>फिनलैंड के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, वे देशों के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति, भविष्य के सहयोग के अवसरों और सामयिक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगी।&nbsp;रायसीना डायलॉग के दौरान, विदेश मंत्री वाल्टोनन आर्कटिक सहयोग पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा और सुरक्षा नीति पर एक चर्चा में भी भाग लेंगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने फलस्तीनी समकक्ष मलिकी से की मुलाकात</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2024 06:31:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एस जयशंकर]]></category>
		<category><![CDATA[फलस्तीनी समकक्ष मलिकी]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को म्यूनिख में अपने फलस्तीनी समकक्ष रियाद अल-मलिकी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने गाजा की ताजा स्थिति पर चर्चा की। गाजा की मौजूदा स्थिति पर हुई चर्चा&#160; विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर कहा कि फलस्तीनी विदेश मंत्री रियाद अल-मलिकी से मिलकर अच्छा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को म्यूनिख में अपने फलस्तीनी समकक्ष रियाद अल-मलिकी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने गाजा की ताजा स्थिति पर चर्चा की।</p>



<h2 class="wp-block-heading">गाजा की मौजूदा स्थिति पर हुई चर्चा&nbsp;</h2>



<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर कहा कि फलस्तीनी विदेश मंत्री रियाद अल-मलिकी से मिलकर अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि हमनें इस दौरान गाजा की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हमास के हमले को बताया था आतंकवादी हमला</h2>



<p>मालूम हो कि विदेश मंत्री इस समय प्रतिष्ठित सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए जर्मनी के म्यूनिख में हैं। वहीं, इससे पहले इजरायल पर सात अक्टूबर को हमासा के हमले उन्होंने आतंकवाद कृत्य करार दिया था। उन्होंने कहा था कि हमें स्पष्ट होना चाहिए कि 7 अक्टूबर को जो हुआ वह आतंकवाद था।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एस जयशंकर को स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री ने दिया नायाब तोहफा</title>
		<link>https://livehalchal.com/s-25/540972</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 05:28:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एस जयशंकर]]></category>
		<category><![CDATA[नायाब तोहफा]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[स्विट्जरलैंड]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और स्विजटरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के बीच मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। वहीं इग्नाजियो कैसिस ने एस जयशंकर को एक खास घड़ी भी गिफ्ट में दिए। विदेश मंत्री को गिफ्ट में मिली यह एक नायाब घड़ी है। ओमेगा एक्स घड़ी को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और स्विजटरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के बीच मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। वहीं इग्नाजियो कैसिस ने एस जयशंकर को एक खास घड़ी भी गिफ्ट में दिए। विदेश मंत्री को गिफ्ट में मिली यह एक नायाब घड़ी है। ओमेगा एक्स घड़ी को कुछ यूं तैयार किया गया है ताकि इसे चंद्रमा पर भी पहना जा सके।</p>



<p>स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस भारत के दौरे पर हैं। सोमवार (6 फरवरी) को उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। उन्होंने दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मुलाकात की।</p>



<p>दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए चर्चा की। वहीं, &nbsp;इग्नाजियो कैसिस ने एस जयशंकर को एक घड़ी&nbsp;Mission to the Sun&#8217; Swatch (M) उपहार में दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दोनों देशों के नेताओं के बीच कई मुद्दों पर हुई बात</h3>



<p>एस जयशंकर ने इस मुलाकात की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया,&#8221; विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। पिछले साल भारत-स्विट्जरलैंड मैत्री संधि के 75वें वर्ष के जश्न के बाद हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।</p>



<p>यूक्रेन में संघर्ष सहित क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। &#8216;मिशन टू द सन&#8217; घड़ी उपहार देने के लिए उन्हें धन्यवाद। आदित्य एल1 मिशन के माध्यम से भारत इस पर खरा उतर रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एस जयशंकर ने आदित्य एल 1 मिशन का किया जिक्र</h3>



<p>पिछले महीने (06 जनवरी) आदित्य एल 1 को अपनी कक्षा में स्थापित किया गया। बता दें कि आदित्य-एल-1 सूर्य का अध्ययन करने वाली अंतरिक्ष में स्थापित की जाने वाली पहली भारतीय वेधशाला है। पिछले साल दो सितंबर को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी57) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से &#8216;आदित्य&#8217; के साथ उड़ान भरी थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्यों खास है &#8216;मिशन टू द सन&#8217; घड़ी</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>विदेश मंत्री को गिफ्ट में मिली यह एक नायाब घड़ी है। ओमेगा एक्स घड़ी को कुछ यूं तैयार किया गया है ताकि इसे चंद्रमा पर भी पहना जा सके।</li>



<li>इस कंपनी के घड़ी(ओमेगा स्पीडमास्टर) &nbsp;को नासा के अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन ने &nbsp;20 जुलाई, 1969 को पहनकर चंद्रमा पर कदम रखा था।</li>



<li>ओमेगा स्पीडमास्टर नासा के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए आधिकारिक घड़ी बनी हुई है। इस घड़ी के करीब 11 मॉडल हैं, हर मॉडल को सौर मंडल में एक ग्रह के नाम पर रखा गया है।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सऊदी क्राउन प्रिंस से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Feb 2024 05:28:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
		<category><![CDATA[क्राउन प्रिंस]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[सऊदी]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रियाद में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से मुलाकात की और गाजा में मानवीय जरूरतों को संबोधित करने के महत्व को रेखांकित किया। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने रविवार को कहा कि इजराइल को हमास के भीषण हमलों का जवाब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रियाद में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से मुलाकात की और गाजा में मानवीय जरूरतों को संबोधित करने के महत्व को रेखांकित किया। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने रविवार को कहा कि इजराइल को हमास के भीषण हमलों का जवाब देने का अधिकार है ।</p>



<p>अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के पश्चिम एशिया दौरे से फलस्तीनियों को उम्मीद है कि इससे गाजा में युद्ध विराम के लिए रास्ता साफ होगा। ऐसे में गाजा का रफाह शरणार्थी क्षेत्र इजरायली सेना की कार्रवाई से बच जाएगा।</p>



<p>वहीं, सोमवार (5 फरवरी) को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रियाद में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से मुलाकात की और गाजा में मानवीय जरूरतों को संबोधित करने के महत्व को रेखांकित किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कई खाड़ी देशों का दौरा करेंगे ब्लिंकन</h3>



<p>विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने सोमवार को दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया कि लाल सागर में तनाव को कम करने की तत्काल आवश्यकता पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। ब्लिंकन 4-8 फरवरी तक सऊदी अरब , मिस्र, कतर, इजरायल और वेस्ट बैंक की यात्रा करेंगे। 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले के बाद से यह क्षेत्र की उनकी पांचवीं यात्रा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इजराइल को हमास के भीषण हमलों का जवाब देने का अधिकार: अमेरिका</h3>



<p>बताते चलें कि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने रविवार को कहा कि इजराइल को हमास के भीषण हमलों का जवाब देने का अधिकार है । &nbsp;उन्होंने कहा कि अमेरिका ने गाजा पट्टी को अनलॉक करने और उसमें प्रवेश करने में मदद की है और उन्होंने कहा कि इसमें और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गाजा में पूर्ण विजय से कम के लिए कोई विकल्प नहीं: बेंजामिन नेतन्याहू</h3>



<p>मिस्र की सीमा के नजदीक रफाह वह शहर है जहां गाजा के अन्य शहरों से करीब दस लाख लोगों को शरण लेने के लिए भेजा गया है। अब इजरायली सेना वहां पर हमास लड़ाकों के छिपे होने की बात कहकर जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैनिकों से साफ कर दिया है कि गाजा में पूर्ण विजय से कम के लिए कोई विकल्प नहीं है। इसलिए वे पूर्ण विजय के लक्ष्य पर कार्य करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">युद्ध विराम के लिए इजरायल को तैयार करने पर अमेरिका का जोर</h3>



<p>ब्लिंकन की पहली खाड़ी देशों के बीच तनाव कम कर गाजा से इजरायली बंधकों की रिहाई की होगी जिससे वहां पर ज्यादा दिनों के युद्ध विराम के लिए इजरायल को तैयार किया जा सके। हमास गाजा में स्थायी युद्धविराम चाहता है, इसलिए वह 130 इजरायली बंधकों की रिहाई को लटकाए हुए है।</p>
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		<title>भारतीय नौसेना: विदेश मंत्री से मिले देहरादून निवासी सौरभ के पिता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Oct 2023 10:04:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[देहरादून]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय नौसेना]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय नौसेना से रिटायर्ड होने के बाद आठों अफसर दोहा की एक कंपनी में काम कर रहे थे। कंपनी के काम से वह लोग कतर गए थे। इन सभी पर कतर की गुप्त जानकारी इजरायल को देने का आरोप लगाकर मौत की सजा सुनाई गई है।कतर में मौत की सजा पाने वाले भारतीय नौ सेना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारतीय नौसेना से रिटायर्ड होने के बाद आठों अफसर दोहा की एक कंपनी में काम कर रहे थे। कंपनी के काम से वह लोग कतर गए थे। इन सभी पर कतर की गुप्त जानकारी इजरायल को देने का आरोप लगाकर मौत की सजा सुनाई गई है।<br>कतर में मौत की सजा पाने वाले भारतीय नौ सेना के रिटायर्ड आठ अफसरों में एक देहरादून के सौरभ वशिष्ठ भी हैं। सौरभ के पिता आरके वशिष्ठ ने सोमवार सुबह दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। विदेश मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अपने स्तर से हर संभव प्रयास कर रही है। कतर सरकार से वार्ता की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस बातचीत का नतीजा निकलेगा। उधर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि सरकार इस मामले को प्राथमिकता से ले रही है।<br>भारतीय नौसेना से रिटायर्ड होने के बाद आठों अफसर दोहा की एक कंपनी में काम कर रहे थे। कंपनी के काम से वह लोग कतर गए थे। इन सभी पर कतर की गुप्त जानकारी इजरायल को देने का आरोप लगाकर मौत की सजा सुनाई गई है। देहरादून के सौरभ वशिष्ठ भी इसमें शामिल होने के बाद से उनके परिवार के लोग परेशान हैं। सौरभ के पिता आरके वशिष्ठ भी नौसेना में विंग कमांडर रह चुके हैं। उन्होंने 30 अक्टूबर को दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर से सौरभ के पिता ने मुलाकात की। विदेश मंत्री ने कहा कि उनका बेटा जल्द घर वापस लौटे, यह सरकार की कोशिश है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सौरभ वशिष्ठ की रिहाई को लेकर लगातार विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं।<br>सौरभ वशिष्ठ का घर देहरादून में है। सौरभ वशिष्ठ के पिता इस मुद्दे पर मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं। वह कहते हैं कि उन्हें भारत सरकार पर भूरा भरोसा है। यह उम्मीद है कि सरकार उनके बेटे सौरभ को कतर से जरूर लेकर आएगी।</p>



<p>क्लेमेंटटाउन रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी के सचिव महेश पांडे ने कहा कि कुछ समय पहले ही उनकी मुलाकात सौरभ वशिष्ठ से हुई थी। सौरभ सुलझे हुए व्यक्ति हैं। कतर सरकार ने सौरभ वशिष्ठ समेत आठ भारतीयों को मौत की सजा दी है, यह जानकारी मिलने के बाद से सभी लोग चिंतित हैंं।</p>
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		<title>भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर स्वदेश के लिए रवाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jaya Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Aug 2022 05:15:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर स्वदेश के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा एक संक्षिप्त लेकिन बहुत ही उपयोगी यात्रा के बाद कंबोडिया से प्रस्थान। विदेश मंत्री एस जयशंकर शुक्रवार को ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद स्वदेश के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक  में भाग लेने के बाद शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर स्वदेश के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा एक संक्षिप्त लेकिन बहुत ही उपयोगी यात्रा के बाद कंबोडिया से प्रस्थान।</p>



<figure class="wp-block-gallery aligncenter has-nested-images columns-default is-cropped wp-block-gallery-1 is-layout-flex wp-block-gallery-is-layout-flex">
<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="640" height="480" data-id="490844" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/nनंग.webp" alt="" class="wp-image-490844" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/nनंग.webp 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/nनंग-300x225.webp 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>
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<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर शुक्रवार को ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक  में भाग लेने के बाद स्वदेश के लिए रवाना हो गए।जयशंकर ने ट्विटर पर कहा, एक संक्षिप्त, लेकिन बहुत ही उपयोगी यात्रा के बाद कंबोडिया से प्रस्थान।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Departing Cambodia after a brief, but very productive visit. Here are some highlights: <a href="https://t.co/adf6iKrA2g">pic.twitter.com/adf6iKrA2g</a></p>&mdash; Dr. S. Jaishankar (Modi Ka Parivar) (@DrSJaishankar) <a href="https://twitter.com/DrSJaishankar/status/1555375933456273413?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2022</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>बता दें कि जयशंकर ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए बुधवार को कंबोडिया पहुंचे थे। वहीं, गुरुवार को जयशंकर ने कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन के साथ बातचीत की और दोनों ने एक दूसरे के साथ अपने अपने विचारों को साझा किया।</p>



<p>जयशंकर ने ट्वीट किया, मुझे रिसीव करने के लिए कंबोडिया के पीएम हुन सेन का शुक्रिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निजी तौर पर बधाई दी। हमारे कोविड सहयोग पर उनके गर्मजोशी भरे शब्दों की सराहना की। हमारी आर्थिक, विकास, रक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ाने पर चर्चा की। विरासत संरक्षण पर हमारी निरंतर सहायता का आश्वासन दिया। क्षेत्रीय विकास पर उनके विचारों को महत्व दिया।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Thank PM Hun Sen of Cambodia for receiving me. Conveyed personal greetings of PM <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a>.<br><br>Appreciated his warm words on our covid cooperation. Discussed enhancing our economic, development, defence and cultural partnership. <a href="https://t.co/QY73TEav56">pic.twitter.com/QY73TEav56</a></p>&mdash; Dr. S. Jaishankar (Modi Ka Parivar) (@DrSJaishankar) <a href="https://twitter.com/DrSJaishankar/status/1555160792760139776?ref_src=twsrc%5Etfw">August 4, 2022</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>वहीं, ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक के अंतिम दिन, एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">At the ASEAN Foreign Ministerial Meeting in Phnom Penh. <br><br>Another reminder of our deep cultural connect. <a href="https://t.co/epreaAPW6P">pic.twitter.com/epreaAPW6P</a></p>&mdash; Dr. S. Jaishankar (Modi Ka Parivar) (@DrSJaishankar) <a href="https://twitter.com/DrSJaishankar/status/1555234930241576960?ref_src=twsrc%5Etfw">August 4, 2022</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>जयशंकर ने ASEAN कार्यक्रम के अलावा कई द्विपक्षीय बैठकें भी की। उन्होंने श्रीलंका के नव-नियुक्त विदेश मंत्री अली साबरी के साथ अपनी पहली बैठक की और द्वीप राष्ट्र की आर्थिक सुधार के लिए एक भरोसेमंद मित्र और विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।</p>



<p>साथ ही जयशंकर ने इंडोनेशिया, ब्रुनेई और सिंगापुर के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की।</p>



<p>उन्होंने कहा, ASEAN-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक मूल्यवान सहयोगियों और मित्रों से मिलने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने आगे कहा, इंडोनेशिया के एफएम रेटनो मार्सुडी, ब्रुनेई के एफएम दातो हाजी एरीवान और सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन के साथ निरंतर बातचीत जारी रहेगी।</p>



<p>सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन के साथ अपनी बैठक में जयशंकर ने इंडो-पैसिफिक, कोविड -19 और म्यांमार जैसे मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने विदेश मंत्री बुई थान सोन के साथ अपनी बैठक के दौरान भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी की गति को बनाए रखने का भी वादा किया।</p>



<p>सिंगापुर के एफएम के साथ बैठक से पहले जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के पेनी वोंग और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ भी बातचीत की। ब्लिंकन के साथ विदेश मंत्री ने भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक स्थिति पर चर्चा की।</p>



<p id="rel5"><a href="https://www.jagran.com/world/other-furious-china-fires-missiles-near-taiwan-in-drills-after-pelosi-visit-22954031.html"></a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ड्रैगन पर हमला, कहा- कुछ ही देशों के फायदे तक सीमित नहीं हो सकती दुनिया</title>
		<link>https://livehalchal.com/foreign-minister-s-jaishankar-attacked-the-dragon-said-the-world-cannot-be-limited-to-the-benefit-of-a-few-countries/395599</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sonelal Verma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Nov 2020 08:54:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एस. जयशंकर का]]></category>
		<category><![CDATA[कुछ देशों के फायदे]]></category>
		<category><![CDATA[ड्रैगन पर निशाना]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश मंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। चीन के दबदबा बढ़ाने की नीतियों के खिलाफ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को उसे कड़ा संदेश दिया। कहा कि हिंद-प्रशांत गठजोड़ की अवधारणा किसी देश के दबदबे को खारिज करने और इस बात पर जोर देने की है कि दुनिया को कुछ देशों के फायदे के लिए फ्रीज नहीं किया जा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> चीन के दबदबा बढ़ाने की नीतियों के खिलाफ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को उसे कड़ा संदेश दिया। कहा कि हिंद-प्रशांत गठजोड़ की अवधारणा किसी देश के दबदबे को खारिज करने और इस बात पर जोर देने की है कि दुनिया को कुछ देशों के फायदे के लिए फ्रीज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ग्लोबल टाउन हॉल के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह भविष्य का एक संकेत है, न कि अतीत में झांकने का।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="https://www.haqeeqattoday.com/wp-content/uploads/2020/11/jaysahankar.jpg" alt="" class="wp-image-150446" width="774" height="601"/></figure>



<p>विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा है और उसका यह रवैया वैश्विक ताकतों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने हिंद-प्रशांत गठजोड़ की अहमियत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी तार्किक मान्यता बढ़ रही है। अब इसे व्यावहारिक स्वरूप देने की जरूरत है और यह काम क्वाड जैसे बहुपक्षीय कूटनीतिक परामर्श या ईस्ट एशिया समिट 2019 में भारत द्वारा पेश भारत-प्रशांत गठजोड़ की पहल से हो सकता है।</p>



<p>हिंद-प्रशांत गठजोड़ और कोरोना संकट विषयक इस सम्मेलन में जयशंकर ने कहा कि लक्षित दृष्टिकोण वाला यह गठजोड़ मौजूदा वास्तविकता का सामयिक वर्णन है। जब चुनौतियां बड़ी हों और क्षमता उसके अनुरूप न हो तो समाधान गहन सहयोग ही हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, परिवहन तथा बाजार आधारित संपर्क या आतंकवाद विरोधी अभियान जैसे मसलों के लिए ऐसे ही समाधान की जरूरत है। हर युग की अपनी रणनीतिक अवधारणा होती है तथा यह समय भी कोई अपवाद नहीं है।</p>



<p>उल्लेखनीय है कि 1 जून, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर में शांग्री ला डायलाग में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के खाका पर भारत का नजरिया पेश किया था। इसकी अवधारणा समावेशी प्रकृति की है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नौवहन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता का समर्थन व सम्मान करता है। अपने संबोधन में जयशंकर ने कोरोना संकट से निपटने में भारत के प्रभावी रेस्पांस और वैश्विक सहयोग पर जोर दिए जाने का भी उल्लेख किया।</p>
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