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	<title>विजया एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>विजया एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>विजया एकादशी पर करें भगवान राम की भव्य आरती</title>
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		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 05:54:40 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विजया एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="308" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404-300x149.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404-660x330.png 660w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था। इसलिए इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के स्वरूप श्रीराम की पूजा का भी विधान है। वहीं, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="308" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404-300x149.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-12-215404-660x330.png 660w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था। इसलिए इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के स्वरूप श्रीराम की पूजा का भी विधान है। वहीं, पूजा के समापन पर भगवान राम की भव्य आरती का पाठ करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और विजय का आशीर्वाद मिलता है, तो आइए करते हैं –</p>



<p><strong>।।भगवान राम की आरती।।<br></strong>श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।</p>



<p>नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।</p>



<p>कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।</p>



<p>पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।</p>



<p>भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।</p>



<p>रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।</p>



<p>सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।</p>



<p>आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।</p>



<p>इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।</p>



<p>मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।</p>



<p>मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।</p>



<p>करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।</p>



<p>एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।</p>



<p>तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।</p>



<p>दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।</p>



<p>मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।</p>



<p><strong>।।मां सीता आरती।।<br></strong>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>



<p>जगत जननी जग की विस्तारिणी,</p>



<p>नित्य सत्य साकेत विहारिणी,</p>



<p>परम दयामयी दिनोधारिणी,</p>



<p>सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥</p>



<p>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>



<p>सती श्रोमणि पति हित कारिणी,</p>



<p>पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,</p>



<p>पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,</p>



<p>त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥</p>



<p>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>



<p>विमल कीर्ति सब लोकन छाई,</p>



<p>नाम लेत पवन मति आई,</p>



<p>सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,</p>



<p>शरणागत जन भय हरी की ॥</p>



<p>आरती श्री जनक दुलारी की ।</p>



<p>सीता जी रघुवर प्यारी की ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>विजया एकादशी के दिन करें परमेश्वर स्तुति का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 05:46:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विजया एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="333" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-10-214518.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-10-214518.png 766w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-10-214518-300x162.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह में 13 फरवरी को विजया एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रीहरि की साधना करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है और जीवन में आ रहे दुख दूर होते हैं। इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="333" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-10-214518.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-10-214518.png 766w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-10-214518-300x162.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह में 13 फरवरी को विजया एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रीहरि की साधना करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है और जीवन में आ रहे दुख दूर होते हैं।</p>



<p>इस दिन पूजा के दौरान परमेश्वर स्तुति स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है</p>



<p>विजया एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में कपड़े, फल और धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। इससे धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।</p>



<p><strong>॥ परमेश्वर स्तुति स्तोत्र॥</strong></p>



<p>त्वमेकः शुद्धोऽसि त्वयि निगमबाह्या मलमयं</p>



<p>प्रपञ्चं पश्यन्ति भ्रमपरवशाः पापनिरताः।</p>



<p>बहिस्तेभ्यः कृत्वा स्वपदशरणं मानय विभो</p>



<p>गजेन्द्रे दृष्टं ते शरणद वदान्यं स्वपददम्॥</p>



<p>न सृष्टेस्ते हानिर्यदि हि कृपयातोऽवसि च मां</p>



<p>त्वयानेके गुप्ता व्यसनमिति तेऽस्ति श्रुतिपथे।</p>



<p>अतो मामुद्धर्तुं घटय मयि दृष्टि सुविमलां</p>



<p>न रिक्तां मे याच्ञां स्वजनरत कर्तुं भव हरे॥</p>



<p>कदाहं भो स्वामिन्नियतमनसा त्वां हृदि</p>



<p>भजन्नभद्रे संसारे ह्यनवरतदुःखेऽतिविरसः।</p>



<p>लभेयं तां शान्तिं परममुनिभिर्या ह्यधिगता</p>



<p>दयां कृत्वा मे त्वं वितर परशान्तिं भवहर॥</p>



<p>विधाता चेद्विश्वं सृजति सृजतां मे शुभकृतिं</p>



<p>विधुश्चेत्पाता मावतु जनिमृतेर्दुःखजलधेः।</p>



<p>हरः संहर्ता संहरतु मम शोकं सजनकं</p>



<p>यथाहं मुक्तः स्यां किमपि तु तथा ते विदधताम्॥</p>



<p>अहं ब्रह्मानन्दस्त्वमपि च तदाख्यः सुविदित</p>



<p>स्ततोऽहं भिन्नो नो कथमपि भवत्तः श्रुतिदृशा।</p>



<p>तथा चेदानीं त्वं त्वयि मम विभेदस्य जननीं</p>



<p>स्वमायां संवार्य प्रभव मम भेदं निरसितुम्॥</p>



<p>कदाहं हे स्वामिञ्जनिमृतिमयं दुःखनिबिडं</p>



<p>भवं हित्वा सत्येऽनवरतसुखे स्वात्मवपुषि।</p>



<p>रमे तस्मिन्नित्यं निखिलमुनयो ब्रह्मरसिका</p>



<p>रमन्ते यस्मिंस्ते कृतसकलकृत्या यतिवरा॥</p>



<p>पठन्त्येके शास्त्रं निगममपरे तत्परतया</p>



<p>यजन्त्यन्ये त्वां वै ददति च पदार्थांस्तव हितान्।</p>



<p>अहं तु स्वामिंस्ते शरणमगमं संसृतिभयाद्यथा</p>



<p>ते प्रीतिः स्याद्धितकर तथा त्वं कुरु विभो॥</p>



<p>अहं ज्योतिर्नित्यो गगनमिव तृप्तः सुखमयः</p>



<p>श्रुतौ सिद्धोऽद्वैतः कथमपि न भिन्नोऽस्मि विधुतः।</p>



<p>इति ज्ञाते तत्त्वे भवति च परः संसृतिलया</p>



<p>दतस्तत्त्वज्ञानं मयि सुघटयेस्त्वं हि कृपया॥</p>



<p>अनादौ संसारे जनिमृतिमये दुःखितमना</p>



<p>मुमुक्षुः सन्कश्चिद्भजति हि गुरुं ज्ञानपरमम्।</p>



<p>ततो ज्ञात्वा यं वै तुदति न पुनः क्लेशनिवहै</p>



<p>भजेऽहं तं देवं भवति च परो यस्य भजनात्॥</p>



<p>विवेको वैराग्यो न च शमदमाद्याः षडपरे</p>



<p>मुमुक्षा मे नास्ति प्रभवति कथं ज्ञानममलम्।</p>



<p>अतः संसाराब्धेस्तरणसरणिं मामुपदिशन्</p>



<p>स्वबुद्धिं श्रौतीं मे वितर भगवंस्त्वं हि कृपया॥</p>



<p>कदाहं भो स्वामिन्निगममतिवेद्यं शिवमयं</p>



<p>चिदानन्दं नित्यं श्रुतिहृतपरिच्छेदनिवहम्।</p>



<p>त्वमर्थाभिन्नं त्वामभिरम इहात्मन्यविरतं</p>



<p>मनीषामेवं मे सफलय वदान्य स्वकृपया॥</p>



<p>यदर्थं सर्वं वै प्रियमसुधनादि प्रभवति</p>



<p>स्वयं नान्यार्थो हि प्रिय इति च वेदे प्रविदितम्।</p>



<p>स आत्मा सर्वेषां जनिमृतिमतां वेदगदित</p>



<p>स्ततोऽहं तं वेद्यं सततममलं यामि शरणम्॥</p>



<p>मया त्यक्तं सर्वं कथमपि भवेत्स्वात्मनि मतिस्त्वदीया</p>



<p>माया मां प्रति तु विपरीतं कृतवती।</p>



<p>ततोऽहं किं कुर्यां न हि मम मतिः क्वापि चरति</p>



<p>दयां कृत्वा नाथ स्वपदशरणं देहि शिवदम्॥</p>



<p>नगा दैत्या: कीशा भवजलधिपारं हि गमितास्त्वया</p>



<p>चान्ये स्वामिन्किमिति समयेऽस्मिञ्छयितवान्।</p>



<p>न हेलां त्वं कुर्यास्त्वयि निहितसर्वे मयि विभो</p>



<p>न हि त्वाहं हित्वा कमपि शरणं चान्यमगमम्॥</p>



<p>अनन्ताद्या विज्ञा न गुणजलधेस्तेऽन्तमगमन्नतः</p>



<p>न पारं यायात्तव गुणगणानां कथमयम्।</p>



<p>गुणवद्धि त्वां जनिमृतिहरं याति परमां</p>



<p>गतिं योगिप्राप्यामिति मनसि बुद्ध्वाहमनवम्॥</p>



<p>॥ इति श्रीमन्मौक्तिकरामोदासीनशिष्यब्रह्मानन्दविरचितं<br>परमेश्वरस्तुतिसारस्तोत्रं सम्पूर्णम्। ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कब है विजया एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 06:39:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विजया एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-03-223735.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-03-223735.png 742w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-03-223735-300x175.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात ‘विजया एकादशी’ की आती है, तो इसका नाम ही इसकी महिमा बताता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह एकादशी अपने भक्तों को हर कार्य में ‘विजय’ दिलाने वाली मानी जाती है। चाहे जीवन की कठिनाइयां हों या कोई बड़ा लक्ष्य, इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-03-223735.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-03-223735.png 742w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-03-223735-300x175.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात ‘विजया एकादशी’ की आती है, तो इसका नाम ही इसकी महिमा बताता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह एकादशी अपने भक्तों को हर कार्य में ‘विजय’ दिलाने वाली मानी जाती है। चाहे जीवन की कठिनाइयां हों या कोई बड़ा लक्ष्य, इस व्रत को विधि-विधान से करने पर सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>



<p><strong>विजया एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त<br></strong>एकादशी तिथि का प्रारंभ: 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12:22 बजे से।</p>



<p>एकादशी तिथि का समापन: 13 फरवरी 2026 को दोपहर 02:25 बजे।</p>



<p>व्रत की तारीख: उदया तिथि के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।</p>



<p>व्रत पारण का समय: 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 बजे से सुबह 09:14 बजे के बीच।</p>



<p>विशेष योग व नक्षत्र: इस खास दिन पर मूल नक्षत्र और व्रज योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो पूजा के फल को और अधिक बढ़ा देगा।</p>



<p><strong>भगवान राम से जुड़ा है इसका इतिहास<br></strong>विजया एकादशी का महत्व केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। पौराणिक कथाओं और प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जब भगवान श्री राम लंका पर विजय पाने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे थे, तब उन्होंने अपनी सेना के साथ इसी विजया एकादशी का व्रत किया था। ऋषियों और मुनियों के मार्गदर्शन के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिली थी। तभी से इसे ‘विजया एकादशी’ के रूप में पूजा जाता है।</p>



<p><strong>पूजा की सरल विधि<br></strong>इस व्रत को करने का तरीका बहुत सीधा और सात्विक है:</p>



<p>संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।</p>



<p>कलश स्थापना: शास्त्रों के जानकारों के मुताबिक, इस दिन एक वेदी बनाकर उस पर सप्तधान्य (सात अनाज) रखें और कलश स्थापित करें। कलश के ऊपर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें।</p>



<p>भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें।</p>



<p>धूप-दीप: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।</p>



<p>रात्रि जागरण: इस व्रत में रात के समय जागरण करने का विशेष फल मिलता है।</p>



<p><strong>व्रत के दौरान रखें ये सावधानियां<br></strong>धार्मिक मान्यताओं के आधार पर, एकादशी के दिन चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा, इस दिन सात्विक व्यवहार रखना चाहिए, क्रोध और झूठ से बचना चाहिए। यदि आप पूर्ण उपवास नहीं रख सकते, तो फलाहार का पालन कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>विजया एकादशी आज, इस पूजा मुहूर्त में करें श्री हरि की उपासना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Feb 2025 05:12:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विजया एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="380" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-549-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-549.jpg 692w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-549-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />फाल्गुन महीने में आने वाली विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2025) का खास महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी आज यानी 24 फरवरी 2025 दिन सोमवार को मनाई जा रही है तो आइए यहां एकादशी की पूजा विधि से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="380" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-549-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-549.jpg 692w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-549-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>फाल्गुन महीने में आने वाली विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2025) का खास महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी आज यानी 24 फरवरी 2025 दिन सोमवार को मनाई जा रही है तो आइए यहां एकादशी की पूजा विधि से लेकर सभी प्रमुख बातों को जानते हैं।</p>



<p>एकादशी सबसे शुभ दिनों में से एक है, जो विष्णु भगवान को समर्पित है। हिंदू धर्म में इस दिन को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। भक्त इस व्रत को रखते हैं और श्री हरि विष्णु की पूजा करते हैं। माह में दो बार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में एकादशी आती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यह एकादशी आज यानी 24 फरवरी 2025 दिन सोमवार को मनाई जा रही है।</p>



<p>कहा जाता है कि जो लोग इस दिन (Vijaya Ekadashi 2025) विष्णु जी की श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं, उन्हें सुख-शांति की प्राप्ति होती है, तो आइए यहां पूजा विधि से लेकर सभी प्रमुख बातों को जानते हैं।</p>



<p><strong>विजया एकादशी पूजा विधि (Vijaya Ekadashi 2025 Puja Vidhi )</strong><br>सुबह जल्दी उठें और स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।<br>एक चौकी लें, उसपर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।<br>देसी घी का दीपक जलाएं, फूल-माला चढ़ाएं, चंदन का तिलक लगाएं और तुलसी पत्र अर्पित करें।<br>भगवान विष्णु को पंचामृत, फल और मखाने की खीर या घर पर बनी कोई भी मिठाई अर्पित करें।<br>विजया एकादशी कथा का पाठ करें और श्री हरि के मंत्रों का जाप करें।<br>आरती से पूजा को पूरी करें और परिवार के सभी सदस्यों में पंचामृत बांटें।<br>इस दिन जो लोग व्रत नहीं कर रहे हैं, उन्हें भी चावल से परहेज करना चाहिए।<br>अगले दिन प्रसाद से व्रत का पारण करें।<br>शाम के समय भी विधिवत पूजा करें।</p>



<p><strong>विजया एकादशी मंत्र (Vijaya Ekadashi 2025 Mantra )</strong><br>ॐ विष्णवे नमः।।<br>ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।<br>यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्&#x200d;टं च लभ्यते।।<br>ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।</p>



<p><strong>पूजा मुहूर्त (Vijaya Ekadashi 2025 Puja Muhurat )</strong><br>हिंदू पंचांग के अनुसार, विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। फिर गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ से लेकर कोई भी मांगलिक काम कर सकते हैं।</p>
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		<title>विजया एकादशी पर राशि अनुसार करें इन चीजों का दान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Feb 2025 04:56:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[विजया एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="439" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-548-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-548.jpg 699w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-548-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2025) का विशेष महत्व है। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के रूप में मनाई जाती है। साथ ही भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इसके अलावा राशि अनुसार चीजों का दान करना फलदायी साबित होता है। इससे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="439" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-548-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-548.jpg 699w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-548-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2025) का विशेष महत्व है। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के रूप में मनाई जाती है। साथ ही भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इसके अलावा राशि अनुसार चीजों का दान करना फलदायी साबित होता है। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह में विजया एकादशी व्रत आज यानी 24 फरवरी (Vijaya Ekadashi 2025 Date) को किया जा रहा है। इस दिन साधक जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही जीवन में सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।</p>



<p>अगर आप भी भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2025) के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर या फिर गरीब लोगों में राशि अनुसार दान करें। मान्यता है कि एकादशी पर दान करने से जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है। ऐसे में आइए जानते हैं किस राशि के जातक को विजया एकादशी पर किस चीज का दान करना कल्याणकारी माना जाता है।</p>



<p><strong>राशि अनुसार दान</strong></p>



<p>मेष राशि के जातक विजया एकादशी पर लाल रंग की साड़ी महिलाओं को दान में दें। इससे वैवाहिक जीवन खुशहाल होगा।<br>वृषभ राशि के जातक विजया एकादशी पर सफेद चीजों का दान करें। इससे मानसिक तनाव से छुटकारा मिलेगा।<br>मिथुन राशि के जातक विजया एकादशी पर हरे रंग के वस्त्र का दान करें। इससे भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा।<br>कर्क राशि के जातक विजया एकादशी पर दूध और दही का दान करें। इससे जीवन में सभी तरह के सुख मिलेंगे।<br>सिंह राशि के जातक विजया एकादशी पर धन का दान करें। इससे हमेशा धन से तिजोरी भरी रहेगी।<br>कन्या राशि के जातक विजया एकादशी पर हल्दी का दान करें। इससे बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है।<br>तुला राशि के जातक विजया एकादशी पर सफेद वस्त्र का दान करें। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे।<br>वृश्चिक राशि के जातक विजया एकादशी पर लाल रंग के फल का दान करें। इससे पूजा का पूरा फल मिलेगा।<br>धनु राशि के जातक विजया एकादशी पर फल का दान करें। इससे जीवन मनचाहा करियर मिलेगा।<br>मकर राशि के जातक विजया एकादशी पर कपड़े का दान करें। इससे जीवन के दुख दूर होंगे।<br>कुंभ राशि के जातक विजया एकादशी पर जूते और चप्पल का दान करें।<br>मीन राशि के जातक विजया एकादशी पर अन्न का दान करें। इससे हमेशा जीवन में अन्न के भंडार भरे रहेंगे।</p>
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